बुधवार व्रत कथा: बुधवार को पत्नी की विदाई और हमशक्ल बुध देव
संक्षेप में:बुधवार का व्रत बुध ग्रह और भगवान गणेश के लिए रखा जाता है, जिसमें हरे वस्त्र, हरी मूंग और दूर्वा की पूजा होती है। इसकी कथा उस पति की है जो मना करने पर भी बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले गया और रास्ते में उसका हमशक्ल बनकर बुध देव प्रकट हुए।
बुधवार का व्रत बुध ग्रह और विघ्नहर्ता गणेश जी को समर्पित है। इसे शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से, खासकर विशाखा नक्षत्र वाले बुधवार से, शुरू करना अच्छा माना जाता है और 7, 21 या 45 बुधवार तक रखा जाता है। विद्यार्थी पढ़ाई और बुद्धि के लिए, व्यापारी कारोबार के लिए, और जिनकी कुंडली में बुध कमज़ोर हो वे इसे रखते हैं। हरा रंग, हरी मूंग और दूर्वा इस दिन की पहचान हैं।
बुधवार व्रत कथा
एक नगर में मधुसूदन नाम का एक धनी साहूकार रहता था। उसका विवाह पास के बलरामपुर नगर की एक सुंदर और सुशील कन्या संगीता से हुआ था। विवाह के बाद पत्नी कुछ समय के लिए मायके में ही रुकी हुई थी, जैसा कई घरों में रिवाज़ होता है।
एक दिन मधुसूदन पत्नी को लाने ससुराल पहुँचा। संयोग से वह दिन बुधवार था। उसने सास-ससुर से कहा कि वह आज ही पत्नी को विदा कराकर ले जाना चाहता है। ससुराल वालों ने समझाया, “बेटा, बुधवार को बेटी की विदाई और इस दिशा में यात्रा अच्छी नहीं मानी जाती। एक दिन रुक जाओ, कल ख़ुशी से ले जाना।”
पर मधुसूदन ने एक न सुनी। उसने कहा, “ये सब पुरानी बातें हैं, मैं शुभ-अशुभ नहीं मानता।” आख़िरकार मन मारकर ससुराल वालों ने बेटी को विदा कर दिया। दोनों बैलगाड़ी में बैठकर अपने नगर की ओर चल पड़े।
नगर से कुछ दूर निकलते ही गाड़ी का एक पहिया टूट गया। दोनों पैदल चलने लगे। रास्ते में पत्नी को बहुत प्यास लगी। मधुसूदन उसे एक पेड़ की छाँव में बिठाकर पानी लेने चला गया।
थोड़ी देर बाद जब वह लोटे में पानी लेकर लौटा तो उसके होश उड़ गए। उसकी पत्नी के पास बिल्कुल उसी जैसा एक आदमी बैठा था, वही चेहरा, वही कपड़े, वही बोली। वह आदमी पत्नी को पानी पिला रहा था और हँस-हँसकर बातें कर रहा था।
मधुसूदन गुस्से से चिल्लाया, “तू कौन है जो मेरी पत्नी के पास बैठा है?” वह आदमी शांति से बोला, “भाई, यह मेरी पत्नी है। मैं अभी-अभी इसे ससुराल से विदा कराकर ला रहा हूँ। तुम कौन हो?” दोनों में झगड़ा बढ़ गया। पत्नी बेचारी दोनों को देखकर हैरान थी, उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि उसका असली पति कौन है।
शोर सुनकर आसपास के लोग और राज्य के सिपाही इकट्ठा हो गए। सिपाहियों ने स्त्री से पूछा, “इनमें तुम्हारा पति कौन है?” वह कुछ नहीं बता पाई, क्योंकि दोनों में रत्ती भर अंतर नहीं था। सिपाही दोनों को पकड़कर राजा के पास ले चले, और राजा ने आदेश दिया कि जो झूठा साबित हो उसे कारागार में डाला जाए।
तब मधुसूदन घबरा गया। उसे ससुराल वालों की बात याद आई। उसने मन ही मन हाथ जोड़कर प्रार्थना की, “हे भगवान, मुझसे भूल हुई। मैंने बड़ों की बात नहीं मानी और बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले आया। मुझे क्षमा करें, मेरी लाज बचाएँ।”
प्रार्थना पूरी होते ही आकाशवाणी हुई, “मधुसूदन, तूने बुधवार के दिन को तुच्छ समझा और बड़ों की सीख ठुकराई। यह तुम्हारे सामने स्वयं बुध देव हैं, जो तुम्हें सबक सिखाने आए थे।” इतना सुनते ही वह हमशक्ल आदमी अंतर्धान हो गया। सबने बुध देव को प्रणाम किया।
राजा ने आदर के साथ पति-पत्नी को विदा किया। घर पहुँचकर मधुसूदन और संगीता ने बुधवार का व्रत शुरू किया, गणेश जी और बुध देव की पूजा की और हर बुधवार कथा सुनने लगे। उनके घर में सुख-समृद्धि आई। तभी से उत्तर भारत में बुधवार को बेटी की विदाई न करने की रीति भी बनी रही।
बुधवार व्रत की पूजा विधि
- सुबह नहाकर हरे रंग के कपड़े पहनें। हाथ में जल, अक्षत और दूर्वा लेकर व्रत का संकल्प लें।
- चौकी पर हरा कपड़ा बिछाकर गणेश जी और बुध देव का चित्र रखें। गणेश जी को दूर्वा, सिंदूर और मोदक या लड्डू अर्पित करें।
- बुध देव को हरी मूंग, हरे फल, हरी पत्ती वाली सब्ज़ी, हरी इलायची और हरे फूल चढ़ाएँ। धूप-दीप जलाएँ।
- बुधवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें। चाहें तो “ॐ बुं बुधाय नमः” का 108 बार जाप करें और गणेश चालीसा पढ़ें।
- इसके बाद जय गणेश जय गणेश देवा आरती करें और प्रसाद बाँटें।
- दिन में एक बार भोजन करें, जिसमें मूंग की दाल, मूंग का हलवा या हरी चीज़ें हों। शाम को पूजा के बाद ही भोजन करना कई घरों का नियम है।
नियम और उद्यापन
- बुधवार को बेटी की विदाई या उत्तर-पश्चिम दिशा की लंबी यात्रा टालने की परंपरा है।
- व्रत के दिन किसी से झूठ न बोलें और किसी का पैसा उधार न लें-दें, ऐसा बुध के व्रत में माना जाता है।
- हरी मूंग, हरा कपड़ा, हरी चूड़ियाँ और कॉपी-किताबें दान करना शुभ है; गाय को हरा चारा खिलाएँ।
- संकल्प पूरा होने पर उद्यापन करें: हवन, ब्राह्मण भोजन और हरी वस्तुओं का दान।
गणेश जी से जुड़ा मासिक व्रत संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा में पढ़ें और उसकी तिथियाँ संकष्टी चतुर्थी कैलेंडर में देखें। बुधवार व्रत शुरू करने का शुभ दिन आज के पंचांग में देख लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुधवार का व्रत कितने बुधवार रखना चाहिए?
प्रायः 7, 21 या 45 बुधवार का संकल्प लिया जाता है। विद्यार्थी परीक्षा के समय तक भी यह व्रत रखते हैं।
बुधवार को बेटी की विदाई क्यों नहीं करते?
बुधवार व्रत कथा में मधुसूदन ने मना करने पर भी बुधवार को पत्नी को विदा कराया और बुध देव ने उसका हमशक्ल बनकर उसे सबक दिया। इसी से यह लोक-मान्यता चली।
बुधवार व्रत में क्या खाना चाहिए?
दिन में एक बार मूंग की दाल, मूंग का हलवा या हरी सब्ज़ियों से बना सादा भोजन किया जाता है।
बुधवार को किसकी पूजा होती है?
बुधवार को बुध ग्रह और भगवान गणेश की पूजा होती है। गणेश जी को दूर्वा और मोदक, और बुध देव को हरी मूंग चढ़ाई जाती है।
बुधवार व्रत कब शुरू करें?
किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से। विशाखा नक्षत्र वाला बुधवार विशेष शुभ माना जाता है।
