वा

श्री वाराही द्वादश नाम स्तोत्रं

संपादन: अद्यतन
स्तोत्र
0 व्यूज़

श्री वाराही द्वादश नाम स्तोत्रं 


अस्य श्रीवाराही द्वादश नाम स्तोत्रस्य अश्वानन ऋषिः |
अनुष्टुप्छंदः | श्रीवाराही देवता |
श्रीवाराहि प्रसाद सिद्ध्यर्थं |
सर्व संकट हरण जपे विनियोगः ||

पंचमी दंडनाथा च संकेता समयेश्वरी |
तथा समयसंकेता वाराही पोत्रिणी शिवा ||

वार्ताली च महासेनाऽऽज्ञाचक्रेश्वरी तथा |
अरिघ्नी चेति संप्रोक्तं नाम द्वादशकं मुने ||

नाम द्वादशधाभिज्ञ वज्रपंजरमध्यगः |
सङकटे दुःखमाप्नोति न कदाचन मानवः ||

इति श्री वाराही द्वादशनामस्तोत्रं संपूर्णं

अर्थ

श्री वाराही द्वादश नाम स्तोत्रम्, शक्ति की देवी श्री वाराही के बारह पवित्र नामों का गुणगान करने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। वाराही देवी सप्तमातृकाओं में से एक हैं और भगवान विष्णु के वराह अवतार की शक्ति का स्वरूप मानी जाती हैं। इस स्तोत्र का पाठ भक्तों को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति दिलाता है, उन्हें सुरक्षा और विजय प्रदान करता है। यह स्तोत्र अश्वानन ऋषि द्वारा रचा गया है, अनुष्टुप छंद में है, और श्री वाराही देवी की कृपा प्राप्त करने तथा सभी संकटों को दूर करने के उद्देश्य से समर्पित है।

स्तोत्र के आरंभ में, श्री वाराही देवी के बारह पवित्र नामों का उल्लेख किया गया है। ये नाम देवी के विभिन्न गुणों और शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 'पंचमी दण्डनाथा' का अर्थ है पंचमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी और दंड धारण करने वाली प्रमुख दण्डनायिका। 'संकेता' और 'समयेष्वरी' का अर्थ है दिव्य संकेतों को जानने वाली और समय की स्वामिनी, यानी काल को नियंत्रित करने वाली। 'तथा समयसंकेता' का अर्थ है समय के सूक्ष्म संकेतों को भी जानने वाली। 'वाराही' का अर्थ है वराह रूप धारण करने वाली, 'पोत्रिणी' का अर्थ है सूअर के मुख वाली, जो देवी की शक्ति और भयंकर रूप को दर्शाता है। 'शिवा' का अर्थ है मंगल करने वाली, शुभकारिणी।

'वार्ताली' का अर्थ है उत्तम वाक्पटुता और संचार कौशल वाली, जो भक्तों को वाणी की शक्ति प्रदान करती है। 'महासेना' का अर्थ है महान सेना की नायिका, जो सभी शत्रुओं को पराजित करने की क्षमता को दर्शाती है। 'आज्ञाचक्रेष्वरी' का अर्थ है आज्ञा चक्र की अधिष्ठात्री देवी, जो ज्ञान और विवेक प्रदान करती है। अंत में, 'अरिघ्नी' का अर्थ है शत्रुओं का नाश करने वाली। ये बारह नाम श्री वाराही देवी के सर्वशक्तिमान स्वरूप को प्रकट करते हैं। इन नामों का स्मरण करने से भक्तों को वज्र के पिंजरे जैसी सुरक्षा प्राप्त होती है, ऐसा स्तोत्र में आश्वासन दिया गया है।

इस स्तोत्र की फलश्रुति में कहा गया है, 'नाम द्वादशधाभिज्ञ वज्रपञ्जरमध्यगः | सङ्कटे दुःखमाप्नोति न कदाचन मानवः ||' अर्थात्, जो इन बारह नामों को जानकर निरंतर जप करता है, वह वज्र के पिंजरे के भीतर सुरक्षित रहता है। ऐसा मनुष्य किसी भी संकट में कभी भी दुःख का अनुभव नहीं करता। यह भक्तों को देवी से पूर्ण सुरक्षा और अभय का संकेत देता है। श्री वाराही देवी अपने भक्तों के सभी भयों को दूर करती हैं, बाधाओं को हटाती हैं और जीवन में शांति, समृद्धि तथा विजय प्रदान करती हैं।

लाभ (Benefits):

  • संकट निवारण: देवी के इन द्वादश नामों का जाप करने से जीवन में आने वाले सभी संकट, बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं।
  • शत्रु संहार: 'अरिघ्नी' नाम के अनुसार, इस स्तोत्र का पाठ आंतरिक और बाहरी शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद करता है।
  • सुरक्षा और बचाव: इस स्तोत्र का जाप करने वाले भक्तों को वाराही देवी वज्रपञ्जर जैसी सुरक्षा प्रदान करती हैं, जिससे कोई भी बुरी शक्ति उन तक नहीं पहुंच पाती।
  • वाक्पटुता और ज्ञान वृद्धि: 'वार्ताली' और 'आज्ञाचक्रेष्वरी' नामों के प्रभाव से भक्तों को उत्तम संचार कौशल, ज्ञान और विवेक प्राप्त होता है।
  • समृद्धि और विजय: इस स्तोत्र का निरंतर पाठ जीवन में समृद्धि, सौभाग्य और सभी कार्यों में सफलता लाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री वाराही द्वादश नाम स्तोत्रं क्या है?
यह श्री वाराही देवी के बारह पवित्र नामों की स्तुति करने वाला एक शक्तिशाली स्तोत्र है। ये नाम देवी के विभिन्न गुणों और शक्तियों का वर्णन करते हैं, जो भक्तों को सुरक्षा और विजय प्रदान करते हैं।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद या शाम को देवी की पूजा करते समय किया जा सकता है। इसे शुद्ध मन से और देवी पर पूर्ण श्रद्धा रखते हुए पाठ करना चाहिए।
श्री वाराही द्वादश नाम स्तोत्र पाठ के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से सभी संकट दूर होते हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है, देवी से सुरक्षा प्राप्त होती है, वाणी की शक्ति और ज्ञान में वृद्धि होती है, तथा जीवन में समृद्धि और सफलता आती है।
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
कोई भी भक्त जो अपने जीवन में बाधाओं को दूर करना चाहता है, सुरक्षा प्राप्त करना चाहता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करना चाहता है या आध्यात्मिक उन्नति की इच्छा रखता है, वह इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है।
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
दैनिक पाठ के लिए एक, तीन, पांच या ग्यारह बार पाठ कर सकते हैं। विशेष संकल्पों के लिए 108 बार या अधिक बार पाठ किया जा सकता है। मुख्य बात निरंतरता और भक्ति है।
इस स्तोत्र का मूल या इतिहास क्या है?
यह स्तोत्र अश्वानन ऋषि द्वारा रचा गया है। यह प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित श्री वाराही देवी की स्तुति है, जो अपनी शक्ति और सुरक्षात्मक गुणों के लिए जानी जाती हैं।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...