षो

श्री षोडशी देवि अष्टोत्तर शतनामावळिः

संपादन: अद्यतन
अष्टोत्तर108 नाम
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  1. ॐ त्रिपुरायै नमः
  2. ॐ षोडश्यै नमः
  3. ॐ मात्रे नमः
  4. ॐ त्र्यक्षरायै नमः
  5. ॐ त्रितयायै नमः
  6. ॐ त्रय्यै नमः
  7. ॐ सुन्दर्यै नमः
  8. ॐ सुमुख्यै नमः
  9. ॐ सेव्यायै नमः
  10. ॐ सामवेदपरायणायै नमः
  11. ॐ शारदायै नमः
  12. ॐ शब्दनिलयायै नमः
  13. ॐ सागरायै नमः
  14. ॐ सरिदम्बरायै नमः
  15. ॐ शुद्धायै नमः
  16. ॐ शुद्धतनवे नमः
  17. ॐ साध्व्यै नमः
  18. ॐ शिवध्यानपरायणायै नमः
  19. ॐ स्वामिन्यै नमः
  20. ॐ शम्भुवनितायै नमः
  21. ॐ शाम्भव्यै नमः
  22. ॐ सरस्वत्यै नमः
  23. ॐ समुद्रमथिन्यै नमः
  24. ॐ शीघ्रगामिन्यै नमः
  25. ॐ शीघ्रसिद्धिदायै नमः
  26. ॐ साधुसेव्यायै नमः
  27. ॐ साधुगम्यायै नमः
  28. ॐ साधुसन्तुष्टमानसायै नमः
  29. ॐ खट्वाङ्गधारिण्यै नमः
  30. ॐ खर्वायै नमः
  31. ॐ खड्गखर्परधारिण्यै नमः
  32. ॐ षड्वर्गभावरहितायै नमः
  33. ॐ षड्वर्गपरिचारिकायै नमः
  34. ॐ षड्वर्गायै नमः
  35. ॐ षडङ्गायै नमः
  36. ॐ षोढायै नमः
  37. ॐ षोडशवार्षिक्यै नमः
  38. ॐ क्रतुरूपायै नमः
  39. ॐ क्रतुमत्यै नमः
  40. ॐ ऋभुक्षक्रतुमण्डितायै नमः
  41. ॐ कवर्गादिपवर्गान्तायै नमः
  42. ॐ अन्तःस्थायै नमः
  43. ॐ अनन्तरूपिण्यै नमः
  44. ॐ अकाराकाररहितायै नमः
  45. ॐ कालमृत्युजरापहायै नमः
  46. ॐ तन्व्यै नमः
  47. ॐ तत्त्वेश्वर्यै नमः
  48. ॐ तारायै नमः
  49. ॐ त्रिवर्षायै नमः
  50. ॐ ज्ञानरूपिण्यै नमः
  51. ॐ काल्यै नमः
  52. ॐ कराल्यै नमः
  53. ॐ कामेश्यै नमः
  54. ॐ छायायै नमः
  55. ॐ संज्ञायै नमः
  56. ॐ अरुन्धत्यै नमः
  57. ॐ निर्विकल्पायै नमः
  58. ॐ महावेगायै नमः
  59. ॐ महोत्साहायै नमः
  60. ॐ महोदर्यै नमः
  61. ॐ मेघायै नमः
  62. ॐ बलाकायै नमः
  63. ॐ विमलायै नमः
  64. ॐ विमलज्ञानदायिन्यै नमः
  65. ॐ गौर्यै नमः
  66. ॐ वसुन्धरायै नमः
  67. ॐ गोप्त्र्यै नमः
  68. ॐ गवाम्पतिनिषेवितायै नमः
  69. ॐ भगाङ्गायै नमः
  70. ॐ भगरूपायै नमः
  71. ॐ भक्तिपरायणायै नमः
  72. ॐ भावपरायणायै नमः
  73. ॐ छिन्नमस्तायै नमः
  74. ॐ महाधूमायै नमः
  75. ॐ धूम्रविभूषणायै नमः
  76. ॐ धर्मकर्मादिरहितायै नमः
  77. ॐ धर्मकर्मपरायणायै नमः
  78. ॐ सीतायै नमः
  79. ॐ मातङ्गिन्यै नमः
  80. ॐ मेधायै नमः
  81. ॐ मधुदैत्यविनाशिन्यै नमः
  82. ॐ भैरव्यै नमः
  83. ॐ भुवनायै नमः
  84. ॐ मात्रे नमः
  85. ॐ अभयदायै नमः
  86. ॐ भवसुन्दर्यै नमः
  87. ॐ भावुकायै नमः
  88. ॐ बगलायै नमः
  89. ॐ कृत्यायै नमः
  90. ॐ बालायै नमः
  91. ॐ त्रिपुरसुंदर्यै नमः
  92. ॐ रोहिण्यै नमः
  93. ॐ रेवत्यै नमः
  94. ॐ रम्यायै नमः
  95. ॐ रम्भायै नमः
  96. ॐ रावणवन्दितायै नमः
  97. ॐ शतयज्ञमय्यै नमः
  98. ॐ सत्त्वायै नमः
  99. ॐ शतक्रतुवरप्रदायै नमः
  100. ॐ शतचन्द्राननायै नमः
  101. ॐ देव्यै नमः
  102. ॐ सहस्रादित्यसन्निभायै नमः
  103. ॐ सोमसूर्याग्निनयनायै नमः
  104. ॐ व्याघ्रचर्माम्बरावृतायै नमः
  105. ॐ अर्धेन्दुधारिण्यै नमः
  106. ॐ मत्तायै नमः
  107. ॐ मदिरायै नमः
  108. ॐ मदिरेक्षणायै नमः

|| इति श्री षोडशी देवि अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं  ||

अर्थ

श्री षोडशी देवी अष्टोत्तर शतनामावलि दश महाविद्याओं में तीसरी, देवी त्रिपुरा सुंदरी या षोडशी को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। 'षोडशी' का अर्थ सोलह वर्ष की आयु वाली देवी से है, जो उनके शाश्वत यौवन, सौंदर्य और पूर्णता का प्रतीक है। यह नामावलि देवी के विभिन्न गुणों, शक्तियों, रूपों और दिव्य लीलाओं का स्तुतिगान करती है, जिससे भक्तों को आंतरिक शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त होता है।

इस नामावलि का पाठ केवल देवी की स्तुति ही नहीं, बल्कि देवी के दिव्य स्वरूप के साथ गहरा संबंध स्थापित करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। प्रत्येक नाम देवी के एक विशिष्ट पहलू का प्रतिनिधित्व करता है, और जब इस नाम का भक्तिपूर्वक उच्चारण किया जाता है, तो भक्त देवी के उस गुण को अपने भीतर समाहित करते हैं। उदाहरण के लिए, 'ॐ त्रिपुरायै नमः' नाम दर्शाता है कि देवी तीनों लोकों या तीनों अवस्थाओं (जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति) से परे हैं। 'ॐ सुन्दर्यै नमः' और 'ॐ सुमुख्यै नमः' नाम देवी के अनुपम सौंदर्य का वर्णन करते हैं, जबकि 'ॐ शारदायै नमः' नाम ज्ञान और कला की देवी के रूप में उनकी भूमिका को उजागर करता है। इन नामों के माध्यम से देवी की सर्वव्यापकता, सर्वज्ञता और सर्वशक्तिमत्ता का अनुभव किया जा सकता है।

षोडशी देवी परब्रह्म स्वरूपिणी हैं, जो सृष्टि, स्थिति और संहार की मूल कारण हैं। 'ॐ शिवध्यानपरायणायै नमः' नाम दर्शाता है कि देवी भगवान शिव में पूर्णतः लीन हैं और उनकी शक्ति हैं। 'ॐ शीघ्रसिद्धिदायै नमः' नाम भक्तों की मनोकामनाओं को शीघ्र पूर्ण करने की उनकी क्षमता पर जोर देता है। 'ॐ खट्वाङ्गधारिण्यै नमः' और 'ॐ खड्गखर्परधारिण्यै नमः' नाम उनके उग्र रूप और दुष्ट शक्तियों का नाश करने की शक्ति को इंगित करते हैं। यह नामावलि देवी के सौम्य और उग्र दोनों रूपों का समन्वय कर उनके पूर्ण स्वरूप को प्रकट करती है।

इस अष्टोत्तर शतनामावलि का नियमित पाठ भक्तों के मन को शुद्ध करता है, नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाता है। देवी के 108 नामों का जाप करने से भक्त दिव्य कृपा प्राप्त करते हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता, शांति और प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। यह केवल नामों का पाठ नहीं है, बल्कि देवी के साथ एक गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने का एक साधन है।

लाभ (Benefits):

  • आध्यात्मिक उन्नति: इस नामावलि का नियमित पाठ आत्मा की शुद्धि में सहायक होता है और आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि करता है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • मनोकामना पूर्ति: चूंकि षोडशी देवी शीघ्रसिद्धिप्रदायिनी हैं, इसलिए भक्तों की सभी न्यायोचित इच्छाएं और मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
  • सौंदर्य और आकर्षण: त्रिपुरा सुंदरी स्तोत्र का पाठ करने से शारीरिक और मानसिक सौंदर्य बढ़ता है, व्यक्तित्व में आकर्षण उत्पन्न होता है।
  • ज्ञान और बुद्धि: देवी शारदा के रूप में ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री होने के कारण, इस पाठ से विद्यार्थियों को उत्तम ज्ञान और बुद्धि प्राप्त होती है।
  • सुरक्षा और निर्भयता: देवी के उग्र रूपों की स्तुति करने से सभी प्रकार के भय, शत्रु बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री षोडशी अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
श्री षोडशी अष्टोत्तर शतनामावलि दश महाविद्याओं में से एक, श्री षोडशी देवी या त्रिपुरा सुंदरी के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। यह देवी के विभिन्न दिव्य गुणों और शक्तियों का स्तुतिगान करती है।
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ प्रतिदिन, विशेषकर शुक्रवार को या किसी शुभ अवसर पर स्नान के बाद शुद्ध मन से किया जा सकता है। देवी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठकर, धूप-दीप जलाकर, भक्तिपूर्वक पाठ करना उत्तम माना जाता है।
श्री षोडशी अष्टोत्तर शतनामावलि पाठ के क्या लाभ हैं?
इस नामावलि के पाठ से आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि, मनोकामनाओं की पूर्ति, सौंदर्य और आकर्षण की प्राप्ति, ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि तथा सभी प्रकार के भय और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।
इस नामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
षोडशी देवी में श्रद्धा और भक्ति रखने वाला कोई भी व्यक्ति, लिंग भेद के बिना, इस नामावलि का पाठ कर सकता है। विशेष रूप से आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान और सौंदर्य की इच्छा रखने वाले इसका पाठ कर सकते हैं।
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ कम से कम एक बार किया जा सकता है। अधिक फल के लिए, प्रतिदिन 1, 3, 5, 11 या 108 बार पाठ करना श्रेष्ठ माना गया है। यह भक्त की श्रद्धा और समय पर निर्भर करता है।
श्री षोडशी देवी का उद्गम और महत्व क्या है?
श्री षोडशी देवी दश महाविद्याओं में तीसरी हैं और त्रिपुरा सुंदरी के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। वह परब्रह्म स्वरूपिणी हैं, जो सृष्टि, स्थिति और संहार की मूल कारण हैं। उन्हें शाश्वत यौवन, सौंदर्य और पूर्णता का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।

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