श्री सायिनाथ करावलंब स्तोत्रं
श्रीसायिनाथ षिरिडीश भवाब्धिचंद्रा
गोदावरीतीर्थपुनीतनिवासयोग्या |
योगींद्र ज्ञानघन दिव्ययतींद्र ईशा
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 1
दत्तावतार त्रिगुणात्म त्रिलोक्यपूज्या
अद्वैतद्वैत सगुणात्मक निर्गुणात्मा |
साकाररूप सकलागमसन्नुतांगा
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 2
नवरत्नमकुटधर श्रीसार्वभौमा
मणिरत्नदिव्यसिंहासनारूढमूर्ते |
दिव्यवस्त्रालंकृत गंधतिलकमूर्ते
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 3
सौगंधपुष्पमालांकृत मोदभरिता
अविरळ पदांजली घटित सुप्रीत ईशा |
निश्चलानंद हृदयांतरनित्यतेजा
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 4
भवनामस्मरणकैंकर्य दीनबंधो
पंचबीजाक्षरी जपमंत्र सकलेशा |
ओंकार श्रीकार मंत्रप्रिय मोक्षदाया
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 5
करुणचरणाश्रितावरदातसांद्रा
गुरुभक्ति गुरुबोध गुरुज्ञानदाता |
गुर्वानुग्रहशक्ति परतत्त्वप्रदीपा
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 6
निंबवृक्षच्छाय नित्ययोगानंदमूर्ते
गुरुपद्यध्यानघन दिव्यज्ञानभाग्या |
गुरुप्रदक्षिण योगफलसिद्धिदाया
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 7
प्रेमगुणसांद्र मृदुभाषणा प्रियदा
सद्भावसद्भक्तिसमतानुरक्ति ईश |
सुज्ञान विज्ञान सद्ग्रंथश्रवणविनोद
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 8
निगमांतनित्य निरवंद्य निर्विकारा
संसेवितानंदसर्वे त्रिलोकनाथा |
संसारसागरसमुद्धर सन्नुतांगा
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 9
साधुस्वरूप संततसदानंदरूपा
शांतगुण सत्त्वगुण सख्यताभाव ईशा |
सहन श्रद्धा भक्ति विश्वास विस्तृतांगा
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 10
नित्याग्निहोत्र निगमांतवेद्य विश्वेशा
मधुकरानंद निरतान्नदानशीला |
पंक्तिभोजनप्रिया पूर्णकुंभान्नदाता
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 11
सलिलदीपज्योतिप्रभवविभ्रमाना
पंचभूतादि भयकंपित स्तंभितात्मा |
कर्कोटकादि सर्पविषज्वालनिर्मुला
श्रीसायिनाथ माम देहि करावलंबं || 12
अज्ञानतिमिरसंहार समुद्धृतांगा
विज्ञानवेद्यविदितात्मक संभवात्मा |
ज्ञानप्रबोध हृदयांतर दिव्यनेत्रा
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 13
प्रत्यक्षदृष्टांत निदर्शनसाक्षिरूपा
एकाग्रचित्त भक्तिसंकल्पभाषितांगा |
शरणागत भक्तजन कारुण्यमूर्ते
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 14
संतापसंशयनिवारण निर्मलात्मा
संतानसौभाग्यसंपदवरप्रदाता |
आरोग्यभाग्यफलदायक विभूतिवैद्या
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 15
धरणीतलदुर्भरसंकटविध्वंसा
ग्रहदोष ऋणग्रस्त शत्रुभयनाशा |
दारिद्र्यपीडितघनजाड्योपशमना
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 16
गतजन्मफलदुर्भरदोषविदूरा
चरितार्थपुण्यफलसिद्धियोग्यदाया |
इहलोकभवभयविनाश भवात्मा
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 17
नास्तिकवाद तर्कवितर्क खंडितांगा
अहमहंकारमभिमान दर्पनाशा |
आस्तिकवाद विबुधजनसंभ्रमाना
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 18
सद्भक्ति ज्ञानवैराग्यमार्गहितबोधा
नादब्रह्मानंद दिव्यनाट्याचार्य ईश |
संकीर्तनानंद स्मरणकैवल्यनाथा
श्रीसायिनाथ मम देहि करावलंबं || 19
इति परमपूज्य अवधूत श्रीश्रीश्री सायिकृपाकरयोगि गोपालकृष्णानंद स्वामीजी विरचित श्री सायिनाथ करावलंब स्तोत्रं |
अर्थ
“श्री सायिनाथ करावलंब स्तोत्रं” सद्गुरु साईबाबा की परम दया, ज्ञान, करुणा और रक्षण शक्ति का स्तुतिगान करने वाला एक अत्यंत भक्तिमय काव्य है। 'करावलंब' का अर्थ है 'सहारे का हाथ' या 'रक्षा करने वाला हाथ'। इस स्तोत्र के माध्यम से भक्त साईबाबा से प्रार्थना करता है कि वे उसे जीवन के कष्टों से उबारने, आध्यात्मिक मार्ग पर मार्गदर्शन करने और अंततः मोक्ष प्रदान करने के लिए अपना सहारा दें। यह केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि भक्त के संपूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक साईबाबा के दिव्य गुणों का वर्णन करता है। बाबा को यहाँ शिरडी के योगीन्द्र, ज्ञानदाता, दत्तावतार, भक्तों के प्रिय, भवसागर पार कराने वाले, मोक्षप्रदाता, नीमवृक्ष निवासी, सत्यज्ञान स्वरूप और अज्ञान का नाश करने वाले के रूप में दर्शाया गया है। उनके नवरत्न मुकुट, मणिरत्न सिंहासन, दिव्य वस्त्र और सुगंधित पुष्पमालाओं का वर्णन उनकी सार्वभौमिकता और दिव्य सौंदर्य को उजागर करता है। भक्त अपने पापों से मुक्ति, अज्ञान के अंधकार से बाहर निकलने और परम सत्य के ज्ञान के लिए बाबा की कृपा की याचना करता है।
इस स्तोत्र का पाठ केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है, बल्कि यह भक्त के अंतर्मन को साई कृपा में डुबो देने वाला एक गहरा ध्यान है। 'श्री सायिनाथ मम देहि करावलंबं' नामक अंतिम पंक्ति, प्रत्येक श्लोक के बाद दोहराई जाती है, जो बाबा के दिव्य हाथ को थामने की तीव्र लालसा को व्यक्त करती है। यह भक्त और भगवान के बीच के अविनाशी संबंध को मजबूत करता है, अज्ञान को दूर कर ज्ञान का मार्ग प्रकाशित करता है और सभी दुःखों से मुक्ति प्रदान करता है। यह स्तोत्र साई भक्तों के लिए एक अनमोल निधि है।
लाभ (Benefits):
- साई कृपा और संरक्षण: इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से साईबाबा की असीम कृपा और संरक्षण प्राप्त होता है, जिससे सभी विपत्तियों से मुक्ति मिलती है।
- भय निवारण और मानसिक शांति: जीवन के सभी भय दूर होते हैं और गहरी मानसिक शांति व स्थिरता प्राप्त होती है।
- स्वास्थ्य और समृद्धि: रोगों, ग्रह दोषों और ऋण संबंधी समस्याओं का निवारण होता है, जिससे उत्तम स्वास्थ्य, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: गुरु कृपा से दिव्य ज्ञान, सद्गुरु भक्ति और आध्यात्मिक बल में वृद्धि होती है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
- पारिवारिक सुख: परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है, संतान सुख और पारिवारिक सौहार्द प्राप्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री सायिनाथ करावलंब स्तोत्रं क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री सायिनाथ करावलंब स्तोत्र के पाठ के क्या लाभ हैं?
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री सायिनाथ करावलंब स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
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