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श्री सायि ( सकार ) अष्टोत्तरशतनामावळिः

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अष्टोत्तर108 नाम
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  1. ॐ श्रीसायि सद्गुरुवे नमः
  2. ॐ श्रीसायि साकोरिवासिने नमः
  3. ॐ श्रीसायि साधननिष्ठाय नमः
  4. ॐ श्रीसायि सन्मार्गदर्शिने नमः
  5. ॐ श्रीसायि सकलदेवता स्वरूपाय नमः
  6. ॐ श्रीसायि सुवर्णाय नमः
  7. ॐ श्रीसायि सम्मोहनाय नमः
  8. ॐ श्रीसायि समाश्रित निंबवृक्षाय नमः
  9. ॐ श्रीसायि समुद्धार्त्रे नमः
  10. ॐ श्रीसायि सत्पुरुषाय नमः
  11. ॐ श्रीसायि सत्परायणाय नमः
  12. ॐ श्रीसायि संस्थानाधीशाय नमः
  13. ॐ श्रीसायि साक्षात् दक्षिणामूर्तये नमः
  14. ॐ श्रीसायि साकारोपासना प्रियाय नमः
  15. ॐ श्रीसायि स्वात्मारामाय नमः
  16. ॐ श्रीसायि स्वात्मानंदाय नमः
  17. ॐ श्रीसायि सनातनाय नमः
  18. ॐ श्रीसायि सूक्ष्माय नमः
  19. ॐ श्रीसायि सकलदोषहराय नमः
  20. ॐ श्रीसायि सुगुणाय नमः
  21. ॐ श्रीसायि सुलोचनाय नमः
  22. ॐ श्रीसायि सनातन धर्मसंस्थापनाय नमः
  23. ॐ श्रीसायि साधुसेविताय नमः
  24. ॐ श्रीसायि साधुपुंगवाय नमः
  25. ॐ श्रीसायि सत्संतान वरप्रदाय नमः
  26. ॐ श्रीसायि सत्संकल्पाय नमः
  27. ॐ श्रीसायि सत्कर्म निरताय नमः
  28. ॐ श्रीसायि सुरसेविताय नमः
  29. ॐ श्रीसायि सुब्रह्मण्याय नमः
  30. ॐ श्रीसायि सूर्यचंद्राग्निरूपाय नमः 
  31. ॐ श्रीसायि स्वयंमहालक्ष्मी रूपदर्शिते नमः
  32. ॐ श्रीसायि सहस्रादित्य संकाशाय नमः
  33. ॐ श्रीसायि सांबसदाशिवाय नमः
  34. ॐ श्रीसायि सदार्द्र चिंतायनमः
  35. ॐ श्रीसायि समाधि समाधानप्रदाय नमः
  36. ॐ श्रीसायि सशरीरदर्शिने नमः
  37. ॐ श्रीसायि सदाश्रयाय नमः
  38. ॐ श्रीसायि सदानंदरूपाय नमः
  39. ॐ श्रीसायि सदात्मने नमः
  40. ॐ श्रीसायि सदा रामनामजपासक्ताय नमः
  41. ॐ श्रीसायि सदाशांताय नमः
  42. ॐ श्रीसायि सदा हनुमद्रूपदर्शनाय नमः
  43. ॐ श्रीसायि सदा मानसिक नामस्मरण तत्पराय नमः
  44. ॐ श्रीसायि सदा विष्णु सहस्रनाम श्रवणसंतुष्टाय नमः
  45. ॐ श्रीसायि समाराधन तत्पराय नमः
  46. ॐ श्रीसायि समरस भाव प्रवर्तकाय नमः
  47. ॐ श्रीसायि समयाचार तत्पराय नमः
  48. ॐ श्रीसायि समदर्शिताय नमः
  49. ॐ श्रीसायि सर्वपूज्याय नमः
  50. ॐ श्रीसायि सर्वलोक शरण्याय नमः 
  51. ॐ श्रीसायि सर्वलोक महेश्वराय नमः
  52. ॐ श्रीसायि सर्वांतर्यामिने नमः
  53. ॐ श्रीसायि सर्वशक्तिमूर्तये नमः
  54. ॐ श्रीसायि सकल आत्मरूपाय नमः
  55. ॐ श्रीसायि सर्वरूपिणे नमः
  56. ॐ श्रीसायि सर्वाधाराय नमः
  57. ॐ श्रीसायि सर्ववेदाय नमः
  58. ॐ श्रीसायि सर्वसिद्धिकराय नमः
  59. ॐ श्रीसायि सर्वकर्मविवर्जिताय नमः
  60. ॐ श्रीसायि सर्व काम्यार्थदात्रे नमः
  61. ॐ श्रीसायि सर्वमंगळकराय नमः
  62. ॐ श्रीसायि सर्वमंत्रफलप्रदाय नमः
  63. ॐ श्रीसायि सर्वलोकशरण्याय नमः
  64. ॐ श्रीसायि सर्वरक्षास्वरूपाय नमः
  65. ॐ श्रीसायि सर्व अज्ञानहराय नमः
  66. ॐ श्रीसायि सकल जीवस्वरूपाय नमः
  67. ॐ श्रीसायि सर्वभूतात्मने नमः
  68. ॐ श्रीसायि सर्वग्रहदोषहराय नमः
  69. ॐ श्रीसायि सर्ववस्तु स्वरूपाय नमः
  70. ॐ श्रीसायि सर्वविद्या विशारदाय नमः 
  71. ॐ श्रीसायि सर्वमातृ स्वरूपाय नमः
  72. ॐ श्रीसायि सकल योगिस्वरूपाय नमः
  73. ॐ श्रीसायि सर्वसाक्षीभूताय नमः
  74. ॐ श्रीसायि सर्वश्रेयस्कराय नमः
  75. ॐ श्रीसायि सर्व ऋण विमुक्ताय नमः
  76. ॐ श्रीसायि सर्वतो भद्रवासिने नमः
  77. ॐ श्रीसायि सर्वदा मृत्युंजयाय नमः
  78. ॐ श्रीसायि सकल धर्मप्रबोधकाय नमः
  79. ॐ श्रीसायि सकलाश्रयाय नमः
  80. ॐ श्रीसायि सकलदेवता स्वरूपाय नमः
  81. ॐ श्रीसायि सकल पापहराय नमः
  82. ॐ श्रीसायि सकल साधु स्वरूपाय नमः
  83. ॐ श्रीसायि सकल मानव हृदयांतर्वासिने नमः
  84. ॐ श्रीसायि सकल व्याधि निवारणाय नमः
  85. ॐ श्रीसायि सर्वदा विभूधि प्रदात्रे नमः
  86. ॐ श्रीसायि सहस्र शीर्ष मूर्तये नमः
  87. ॐ श्रीसायि सहस्र बाहवे नमः
  88. ॐ श्रीसायि समस्त जगदाधाराय नमः
  89. ॐ श्रीसायि समस्त कळ्याण कर्त्रे नमः
  90. ॐ श्रीसायि सन्मार्ग स्थापन व्रताय नमः
  91. ॐ श्रीसायि सन्यास योग युक्तात्मने नमः
  92. ॐ श्रीसायि समस्त भक्त सुखदाय नमः
  93. ॐ श्रीसायि संसार सर्वदुःख क्षयकराय नमः
  94. ॐ श्रीसायि संसार भयनाशनाय नमः
  95. ॐ श्रीसायि सप्त व्यसन दूराय नमः
  96. ॐ श्रीसायि सत्य पराक्रमाय नमः
  97. ॐ श्रीसायि सत्यवाचे नमः
  98. ॐ श्रीसायि सत्यप्रदाय नमः
  99. ॐ श्रीसायि सत्संकल्पाय नमः
  100. ॐ श्रीसायि सत्यधर्म परायणाय नमः
  101. ॐ श्रीसायि सत्यनारायणाय नमः
  102. ॐ श्रीसायि सत्य तत्त्व प्रबोधकाय नमः
  103. ॐ श्रीसायि सत्य दृष्टे नमः
  104. ॐ श्रीसायि सत्यानंद स्वरूपिणे नमः
  105. ॐ श्रीसायि सत्यान्वेषण तत्पराय नमः
  106. ॐ श्रीसायि सत्यव्रताय नमः
  107. ॐ श्रीसायि स्वामि अय्यप्प रूपदर्शिते नमः
  108. ॐ श्रीसायि सर्वाभरणालंकृताय नमः

|| इति श्री सायि अष्टोत्तर शतनामावळि

अर्थ

श्री सायि (सकार) अष्टोत्तरशतनामावळिः परम पूज्य श्री साईबाबा के 108 पवित्र नामों का स्तोत्र है। 'सकार' शब्द साईबाबा के सगुण, साकार रूप को संदर्भित करता है, अर्थात् उनका दिव्य स्वरूप जो भक्तों के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होता है और अनुभव किया जा सकता है। यह नामावली साईबाबा के दिव्य गुणों, लीलाओं और उनके द्वारा भक्तों को दिए जाने वाले अनुग्रहों की स्तुति करती है। यह भक्तों के लिए अपने प्यारे सद्गुरु के साथ गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने का एक शक्तिशाली साधन है।

इस अष्टोत्तरशतनामावली का पाठ केवल नामों का उच्चारण नहीं है, बल्कि यह साईबाबा की दिव्य चेतना को अपने भीतर आमंत्रित करने का एक कार्य है। प्रत्येक नाम बाबा के एक अद्वितीय गुण, उनकी सर्वव्यापकता, करुणा और शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। 'साकारोपासना प्रियाय' नाम यह दर्शाता है कि बाबा साकार रूप में की जाने वाली भक्ति को कितना पसंद करते हैं। इन नामों का जाप करने से मन शुद्ध होता है, नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं और सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। यह भक्तों को शांति, संतोष और आध्यात्मिक प्रगति प्रदान करता है।

इस नामावली में, साईबाबा की विभिन्न भूमिकाओं और गुणों की प्रशंसा की गई है। 'ॐ श्रीसायि सद्गुरुवे नमः' बाबा को सर्वोच्च गुरु के रूप में, अज्ञान को दूर करने वाले ज्ञान के स्रोत के रूप में स्तुति करता है। 'ॐ श्रीसायि सकलदेवता स्वरूपाय नमः' यह दर्शाता है कि वे समस्त देवताओं का स्वरूप हैं, सर्वधर्म समभाव के प्रतीक हैं। 'ॐ श्रीसायि साक्षात् दक्षिणामूर्तये नमः' उन्हें ज्ञान और सद्गुरु के देवता दक्षिणामूर्ति के अवतार के रूप में संबोधित करता है। 'ॐ श्रीसायि समुद्धार्त्रे नमः' यह बताता है कि वे भक्तों को संकटों से बचाने वाले रक्षक हैं। 'ॐ श्रीसायि साकोरिवासिने नमः' बाबा के साकोरी (या उनके भक्तों को प्रिय किसी भी स्थान) निवास का स्मरण कराता है, जो उनकी भौतिक उपस्थिति के महत्व को दर्शाता है।

साईबाबा की अष्टोत्तरशतनामावली का भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करने से भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं। यह भगवान के साथ अटूट संबंध बनाने, आध्यात्मिक जागृति प्राप्त करने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करता है। साईबाबा के नाम का स्मरण कलियुग का महायोग है, जो आसानी से मोक्ष और शांति प्रदान करता है। इस नामावली का प्रत्येक नाम बाबा की अनंत करुणा और महान शक्ति का प्रतिबिंब है।

लाभ (Benefits):

  • मानसिक शांति और संतोष: नामावली का पाठ मन को एकाग्र करता है और आंतरिक शांति व स्थिरता प्रदान करता है, जिससे चिंता और तनाव कम होते हैं।
  • इच्छित फलों की प्राप्ति: साईबाबा के 108 नामों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से भक्तों की सकारात्मक मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके संकल्प साकार होते हैं।
  • नकारात्मक शक्तियों का निवारण: इन पवित्र नामों का पाठ आसपास की नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है, सकारात्मक कंपन को बढ़ाता है और सुरक्षा प्रदान करता है।
  • आध्यात्मिक प्रगति और सद्गुरु कृपा: साईबाबा के नामों का स्मरण करने से आध्यात्मिक जागृति बढ़ती है और भक्त सद्गुरु की असीम कृपा के पात्र बनते हैं।
  • स्वास्थ्य और समृद्धि: नियमित पाठ से उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और जीवन में सभी शुभ फल प्राप्त होते हैं, ऐसी मान्यता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री सायि (सकार) अष्टोत्तरशतनामावली क्या है?
यह परम पूज्य श्री साईबाबा के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। 'सकार' का अर्थ साईबाबा के प्रत्यक्ष, सगुण रूप की स्तुति करना है, जो भक्तों को दिव्य अनुभव प्रदान करता है।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह या शाम, स्नान के बाद शुद्ध मन से किया जा सकता है। साईबाबा की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठकर, धूप-दीप जलाकर, पूर्ण भक्ति और श्रद्धा से नामों का उच्चारण करना चाहिए।
इस स्तोत्र का पाठ करने के मुख्य लाभ क्या हैं?
इस नामावली का पाठ करने से मानसिक शांति, मनोकामनाओं की पूर्ति, नकारात्मक शक्तियों का निवारण, आध्यात्मिक प्रगति और सद्गुरु साईबाबा की कृपा प्राप्त होती है।
इस अष्टोत्तरशतनामावली का पाठ कौन कर सकता है?
साईबाबा में अपार भक्ति और श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति, लिंग, आयु या जाति के भेद के बिना इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है। शुद्ध मन और सद्भावना महत्वपूर्ण है।
इस नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः, इसका पाठ दिन में एक बार या तीन बार किया जाता है। यदि संभव हो, तो प्रत्येक गुरुवार, जो साईबाबा को समर्पित दिन है, पर पाठ करना अधिक फलदायी होता है।
इस स्तोत्र की उत्पत्ति या स्रोत क्या है?
यह अष्टोत्तरशतनामावली साईबाबा के भक्तों द्वारा उनके गुणों और लीलाओं की स्तुति करने के लिए रचित एक आध्यात्मिक संकलन है। यह साई भक्ति परंपरा का एक अभिन्न अंग है।

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