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श्री सायि नक्षत्र मालिका

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स्तोत्र
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श्री सायि नक्षत्र मालिका

षिरिडीसदना श्रीसायी
सुंदर वदना शुभधायी
जगत्कारणा जयसायी
नी स्मरणे ऎंतो हायी || 1 ||

शिरमुन वस्त्रमु चुट्टितिवी
चिनिगिन कफिनी तॊडिगितिवी
फकीरुवलॆ कनिपिंचितिवी
परमात्मुडवनिपिंचितिवी || 2 ||

चांदुपाटेलुनि पिलिचितिवी
अश्वमु जाड तॆलिपितिवी
महल्साभक्तिकि मुरिसितितिवी
सायनि पिलिचितॆ पलिकितिवी || 3 ||

गोधुम पिंडिनि विसरितिवी
कलरा व्याधिनि तरिमितिवी
तुफानु ताकिडि नापितिवी
अपायमुनु तप्पिंचितिवी || 4 ||

अयिदिळ्ललो भिक्षडिगितिवी
पापालनु परिमार्चितिवी
बैजासेवनु मॆच्चितिवी
सायुज्यमुनू इच्चितिवी || 5 ||

नीळ्ळनु नूनॆग मार्चितिवी
दीपालनु वॆलिगिंचितिवी
सूकरनैजं तॆलिपितिवी
निंदलु वेयुट मान्पितिवी || 6 ||

ऊदी वैद्यमु चेसितिवी
व्याधुलनॆन्नो बापितिवी
संकीर्तन चेयिंचितिवी
चित्तशांति चेकूर्चितिवी || 7 ||

अल्ला नाममु पलिकितिवी
ऎल्लरि क्षेममु कोरितिवी
चंदनोत्सवमु चेसितिवी
मतद्वेषालनु मापितिवी || 8 ||

कुष्ठुरोगिनी गांचितिवी
आश्रयमिच्ची साकितिवी
मानवधर्मं नॆरिपितिवी
महात्मुनिग विलसिल्लितिवी || 9 ||

धुनिलो चेतिनि पॆट्टितिवी
कम्मरिबिड्डनु काचितिवी
श्यामा मॊर नालिंचितिवी
पामु विषमु तॊलिगिंचितिवी || 10 ||

जानॆडु बल्लनु ऎक्कितिवी
चित्रमुगा शयनिंचितिवी
बल्लि राकनु तॆलिपितिवी
सर्वज्ञुडवनिपिंचितिवी || 11 ||

लॆंडी वनमुनु पॆंचितिवी
आह्लादमुनू पंचितिवी
कर्तव्यमु नॆरिगिंचितिवी
सोमरितनमुनु तरिमितिवी || 12 ||

कुक्कनु कॊडिते नॊच्चितिवी
नीपै दॆब्बलु चूपितिवि
प्रेमतत्वमुनु चाटितिवी
दयामयुडवनिपिंचितिवी || 13 ||

अंदरिलोनू ऒदिगितिवी
आकाशानिकि ऎदिगितिवी
दुष्टजनाळिनि मार्चितिवी
शिष्टकोटिलो चेर्चितिवी || 14 ||

महल्सा ऒडिलो कॊरिगितिवी
प्राणालनु विडनाडितिवी
मूडु दिनमुलकु लेचितिवी
मृत्युंजयुडनिपिंचितिवी || 15 ||

काळ्ळकु गज्जॆलु कट्टितिवी
लय बद्धमुगा आडितिवी
मधुर गळमुतो पाडितिवी
महदानंदमु कूर्चितिवी || 16 ||

अहंकारमुनु तॆगडितिवी
नानावळिनी पॊगडितिवी
मानवसेवा चेसितिवी
महनीयुडवनिपिंचितिवी || 17 ||

दामू भक्तिकि मॆच्चितिवी
संतानमुनू इच्चितिवी
दासगणुनि करुणिंचितिवी
गंगायमुनलु चूपितिवी || 18 ||

परिप्रश्ननु विवरिंचितिवी
नानाहृदि कदिलिंचितिवी
दीक्षितुनि परीक्षिंचितिवी
गुरुभक्तिनि इल चाटितिवी || 19 ||

चेतिनि तॆड्डुग त्रिप्पितिवी
कम्मनि वंटलु चेसितिवी
आर्तजनाळिनि पिलिचितिवी
आकलि बाधनु तीर्चितिवी || 20 ||

मतमुनु मार्चितॆ कसरितिवी
मतमे तंड्रनि तॆलिपितिवी
सकल भूतदय चूपितिवी
सायि मातगा अलरितिवी || 21 ||

हेमादुनु दीविंचितिवी
नीदु चरित व्रायिंचितिवी
पारायण चेयिंचितिवी
परितापमु नॆडबापितिवी || 22 ||

लक्ष्मीबायिनि पिलिचितिवी
तॊम्मिदि नाणॆमुलिच्चितिवी
नवविध भक्तिनि तॆलिपितिवी
मुक्तिकि मार्गमु चूपितिवी || 23 ||

बूटी कललो कॊच्चितिवी
आलयमुनु कट्टिंचितिवी
तात्या प्राणमु निलिपितिवी
महासमाधी चॆंदितिवी || 24 ||

समाधि नुंडे पलिकितिवी
हारतिनिम्मनि अडिगितिवी
मुरळीधरुनिग निलिचितिवी
करुणामृतमुनु चिलिकितिवी || 25 ||

चॆप्पिनदेदो चेसितिवी
चेसिनदेदो चॆप्पितिवी
दासकोटि मदि दोचितिवी
दशदिशला भासिल्लितिवी || 26 ||

सकल देवतलु नेवॆनया
सकल शुभमुलनु कूर्चुमया
सततमुनिनु ध्यानिंतुमया
सद्गुरु मा हृदिनिलुवुम्मया || 27 ||

सायी नक्षत्रमालिका
भवरोगालकु मूलिका
पारायण किदि तेलिका
फलमिच्चुटलो एलिका

अर्थ

"श्री सायि नक्षत्र मालिका" श्री शिरडी साईं बाबा के दिव्य लीलाओं, उनके चमत्कारी कार्यों और उनके उपदेशों को सितारों की माला की तरह पिरोकर उनकी महिमा का गुणगान करने वाला एक भक्तिमय स्तोत्र है। यह स्तोत्र साईं बाबा के जीवन के प्रत्येक पहलू, भक्तों पर उनकी असीम दया, उनके ज्ञान और मानवता के संदेश का सुंदर शब्दों में वर्णन करता है। यह मालिका हमें याद दिलाती है कि बाबा का हर कार्य एक दैवीय रहस्य से भरा है और उनका जीवन स्वयं एक सार्वभौमिक ग्रंथ है।

इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक साईं बाबा की एक विशेष लीला और उनके दिव्य गुणों को उजागर करता है। यह बताता है कि कैसे वे एक साधारण फकीर के रूप में प्रकट हुए, फिर भी भक्तों ने उन्हें परमात्मा के रूप में पहचाना। चाँद पाटिल के घोड़े का पता लगाना, महालसापति की भक्ति से प्रसन्न होकर 'साईं' नाम स्वीकार करना, गेहूं पीसकर हैजा महामारी को रोकना, भयंकर तूफान को शांत करना, पानी को तेल में बदलकर दीपक जलाना - ऐसी कई अद्भुत लीलाओं का स्मरण यह मालिका कराती है। यह केवल बाबा के चमत्कारों को ही नहीं, बल्कि उनके सद्गुरुत्व, धार्मिक समानता और प्रेम के सिद्धांत को भी दर्शाता है।

साईं बाबा का पाँच घरों में भिक्षा मांगना, पापों का निवारण करना, बाईजा माता की सेवा से प्रसन्न होकर मोक्ष प्रदान करना, उदी (भस्म) के माध्यम से कई रोगों को ठीक करना, अल्लाह के नाम का उच्चारण और चंदनोत्सव के माध्यम से धार्मिक द्वेष को समाप्त करना – ये सभी बातें इस स्तोत्र में गहराई से गूंजती हैं। इस स्तोत्र का पाठ हमारे मन को शांत करता है, भक्ति को बढ़ाता है और बाबा की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करने में मदद करता है। साईं बाबा की शिक्षाएं, 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य), इस स्तोत्र के माध्यम से हमारे जीवन में गहराई से समाहित हो जाती हैं।

"श्री सायि नक्षत्र मालिका" केवल एक प्रार्थना नहीं है; यह साईं बाबा के जीवन संदेश का प्रतिबिंब है। सभी मनुष्यों की सेवा करना, सभी में दिव्यता देखना, और विश्वास तथा धैर्य में दृढ़ रहना - यह मालिका इन सिद्धांतों का उपदेश देती है। प्रत्येक श्लोक भक्त को आत्मज्ञान और सद्गुरु के मार्गदर्शन की दिशा में एक कदम आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इस नक्षत्र मालिका का पाठ करने से हमारा जीवन भी साईं बाबा के दिव्य गुणों से प्रकाशित हो, यही इस स्तोत्र में निहित संकल्प है।

लाभ (Benefits):

  • मानसिक शांति और भक्ति स्थिरता: इस स्तोत्र का नियमित पाठ मन को असीम शांति प्रदान करता है और साईं बाबा के प्रति भक्ति को और अधिक दृढ़ बनाता है।
  • साईं कृपा और दैवीय सुरक्षा: साईं बाबा की दिव्य लीलाओं का स्मरण करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली कठिनाइयों से सुरक्षा मिलती है।
  • कर्म शुद्धि और पाप विमोचन: बाबा के पवित्र नाम का स्मरण और उनकी लीलाओं का चिंतन हमारे कर्मों को शुद्ध करता है और हमें पापों से मुक्ति दिलाता है।
  • पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य: साईं बाबा के आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और उत्तम स्वास्थ्य तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • सद्गुरु मार्गदर्शन और आत्मज्ञान: इस स्तोत्र का पाठ सद्गुरु साईं बाबा का मार्गदर्शन प्राप्त करने और आत्मज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ने में सहायता करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री सायि नक्षत्र मालिका क्या है?
यह शिरडी साईं बाबा की दिव्य लीलाओं और उपदेशों को सितारों की तरह पिरोकर बनाई गई एक भक्तिमय स्तोत्र है। यह बाबा के जीवन की प्रमुख घटनाओं और उनके मानवीय संदेश का गुणगान करता है।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
गुरुवारों को या साईं बाबा के विशेष आराधना दिवसों पर इसका पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर, भक्ति और श्रद्धा के साथ इसका पाठ करना चाहिए। पाठ के अंत में "श्री साईंनाथ महाराज की जय" कहकर समाप्त करें।
श्री सायि नक्षत्र मालिका के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इसके पाठ से मानसिक शांति, साईं कृपा, स्वास्थ्य, धन, पारिवारिक सुख, पापों से मुक्ति और सद्गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त होता है। यह भक्ति को बढ़ाता है और आत्मज्ञान की ओर ले जाता है।
इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए?
साईं बाबा में असीम श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति, जाति, धर्म या लिंग के भेद के बिना इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है। यह सभी के लिए शुभ फलदायी है।
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
दिन में एक बार या गुरुवार को कम से कम 3, 5, 7 या 11 बार पाठ करना शुभ होता है। आप अपनी सुविधानुसार भक्तिभाव से इसका पाठ कर सकते हैं।
इस स्तोत्र की उत्पत्ति क्या है?
"श्री सायि नक्षत्र मालिका" एक भक्तिपूर्ण रचना है, जिसे साईं बाबा की लीलाओं का स्मरण करने के लिए भक्तों द्वारा रचा गया है। इसके विशिष्ट प्राचीन स्रोत के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह आधुनिक भक्त समुदाय में लोकप्रिय है।

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