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श्री षिरिडीसायि अष्टोत्तर शतनामावळि

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  1. ॐ श्री सायिनाधाय नमः
  2. ॐ लक्ष्मीनारायणाय नमः
  3. ॐ कृष्णरामशिवमारुत्यादिरूपाय नमः
  4. ॐ शेषसायिने नमः
  5. ॐ गोदावरीतटषिर्डिवासिने नमः
  6. ॐ भक्तहृदयाय नमः
  7. ॐ सर्वहृद्वासिने नमः
  8. ॐ भूतवासाय नमः
  9. ॐ भूतभविष्यद्बाववर्जिताय नमः
  10. ॐ कालतीताय नमः
  11. ॐ कालाय नमः
  12. ॐ कालकालाय नमः
  13. ॐ कालदर्पदमनाय नमः
  14. ॐ मृत्युंजयाय नमः
  15. ॐ अमर्त्याय नमः
  16. ॐ मुर्त्याभयप्रदाय नमः
  17. ॐ जीवधाराय नमः
  18. ॐ सर्वाधाराय नमः
  19. ॐ भक्तवनसमर्धाय नमः
  20. ॐ भक्तावनप्रतिज्ञानसमार्थाय नमः
  21. ॐ अन्नवस्त्रदाय नमः
  22. ॐ आरोग्यक्षेमदाय नमः
  23. ॐ धनमांगल्य प्रदाय नमः
  24. ॐ बुद्धिसिद्धिप्रदाय नमः
  25. ॐ पुत्रमित्रकळत्रबंधुदाय नमः
  26. ॐ योगक्षेमवहाय नमः
  27. ॐ आपद्बांधवाय नमः
  28. ॐ मार्गबंधवे नमः
  29. ॐ भक्तिमुक्ति स्वर्गापदाय नमः
  30. ॐ प्रियाय नमः
  31. ॐ प्रीतिवर्धनायनमः
  32. ॐ अंतर्यामिने नमः
  33. ॐ सच्चिदात्मने नमः
  34. ॐ नित्यानंदाय नमः
  35. ॐ परमसुखदाय नमः
  36. ॐ परमेश्वराय नमः
  37. ॐ परब्रह्मणे नमः
  38. ॐ परमात्मने नमः
  39. ॐ ज्ञान स्वरूपिण्यै नमः
  40. ॐ जगत्पित्रे नमः
  41. ॐ भक्तानांमातृ नमः
  42. ॐ पितृपितामहाय नमः
  43. ॐ भक्ताभयप्रदाय नमः
  44. ॐ भक्तवत्सलाय नमः
  45. ॐ भक्तानुग्रहकांतकाय नमः
  46. ॐ शरणागतवत्सलाय नमः
  47. ॐ भक्तिशक्ति प्रदाय नमः
  48. ॐ ज्ञानवैराग्यदाय नमः
  49. ॐ प्रेमप्रदाय नमः
  50. ॐ संसारधौर्भल्यपावकर्मक्षमकारकाय नमः
  51. ॐ हृदयग्रंधिभेदकाय नमः
  52. ॐ कर्मध्वंसिने नमः
  53. ॐ शुद्धसत्य स्थिताय नमः
  54. ॐ गुणातीतगुणात्मने नमः
  55. ॐ अनंतकळ्याणगुणाय नमः
  56. ॐ अमितपराक्रमाय नमः
  57. ॐ जयने नमः
  58. ॐ दुर्धर्षाक्षोभ्याय नमः
  59. ॐ अपराजिताय नमः
  60. ॐ त्रिलोकेषादिपतये नमः
  61. ॐ अशत्यरहिताय नमः
  62. ॐ सर्वशक्तिमूर्तये नमः
  63. ॐ सुलोचनाय नमः
  64. ॐ बहुरूप विश्वमूर्तये नमः
  65. ॐ अरूपव्यक्ताय नमः
  66. ॐ अचिंत्याय नमः
  67. ॐ सूक्ष्माय नमः
  68. ॐ सर्वांतर्यामिने नमः
  69. ॐ मनोवागतीताय नमः
  70. ॐ प्रेममूर्तये नमः
  71. ॐ सुलभदुर्लभाय नमः
  72. ॐ अनहायसहायाय नमः
  73. ॐ अनाधनाधदीनबांधवे नमः
  74. ॐ सर्वभारबृते नमः
  75. ॐ अकर्मानेकर्मसुकर्मिणे नमः
  76. ॐ पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः
  77. ॐ तीर्थाय नमः
  78. ॐ वासुदेवाय नमः
  79. ॐ सतांगतये नमः
  80. ॐ सत्सरायणाय नमः
  81. ॐ लोकनाथाय नमः
  82. ॐ पावनानघाय नमः
  83. ॐ अमृतांशवे नमः
  84. ॐ भास्करप्रभाय नमः
  85. ॐ ब्रह्मचर्यतपश्चर्यानेनुदिसु व्रताय नमः
  86. ॐ सत्यधर्मपरायणाय नमः
  87. ॐ सिद्देश्वराय नमः
  88. ॐ सिद्दसंकल्पाय नमः
  89. ॐ योगीश्वराय नमः
  90. ॐ भगवते नमः
  91. ॐ भक्तवश्याय नमः
  92. ॐ सर्पुरुषाय नमः
  93. ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
  94. ॐ सत्यतत्वबोधकाय नमः
  95. ॐ कामादिसर्वाङ्ङानध्वंसिने नमः
  96. ॐ अभेदानंद शुभप्रदाय नमः
  97. ॐ समसर्वमतसम्मताय नमः
  98. ॐ दक्षिनामूर्तये नमः
  99. ॐ श्री वेंकटेशारमणाय नमः
  100. ॐ अद्भुतानंत चर्याय नमः
  101. ॐ प्रसन्नार्ति हाराय नमः
  102. ॐ संसारसर्वदुखक्षमाय नमः
  103. ॐ सर्ववित्सर्वतोमुखाय नमः
  104. ॐ सर्वांतर्भस्थिताय नमः
  105. ॐ सर्वमंगळकराय नमः
  106. ॐ सर्वाभीष्टप्रदाय नमः
  107. ॐ समरससन्मार्गस्थापनाय नमः
  108. ॐ समर्दसद्गुरु श्रीसायिनाथाय नमः

|| इति श्री षिरिडीसायि अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||

अर्थ

श्री शिरडी साई अष्टोत्तर शतनामावली शिरडी साईबाबा के 108 पवित्र नामों का एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। यह साई भक्तों के लिए अत्यंत प्रिय और शक्तिशाली प्रार्थना है। यह नामावली साईबाबा के दिव्य गुणों, उनकी सर्वव्यापकता, भक्तों के प्रति उनकी अपार करुणा और उनकी चमत्कारी शक्तियों का गुणगान करती है। प्रत्येक नाम बाबा के एक विशिष्ट गुण या रूप का वर्णन करता है, जो भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप को गहराई से समझने में मदद करता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्त साईबाबा के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

यह अष्टोत्तर शतनामावली इस बात पर जोर देती है कि साईबाबा केवल एक संत नहीं, बल्कि साक्षात परब्रह्म स्वरूप हैं। उन्हें लक्ष्मीनारायण, कृष्ण, राम, शिव, मारुति जैसे विभिन्न देवताओं के रूप में वर्णित किया गया है। वे 'कालातीत' (समय से परे) और 'मृत्युंजय' (मृत्यु को जीतने वाले) के रूप में जीवन की भौतिक और आध्यात्मिक सभी सीमाओं से परे परम शक्ति हैं। यद्यपि बाबा शिरडी में निवास करते थे, यह नामावली बताती है कि वे 'सर्व हृदयवासी' और 'अंतर्यामी' के रूप में प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में निवास करते हैं। उनके 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) के संदेश को इन नामों के माध्यम से और मजबूत किया जाता है, जो भक्तों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए साहस और दृढ़ता प्रदान करते हैं।

साईबाबा को इस नामावली में भक्तों के पालक, रक्षक और सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाले दाता के रूप में सराहा गया है। 'अन्नवस्त्रदाय' (अन्न और वस्त्र प्रदान करने वाले), 'आरोग्यक्षेमदाय' (स्वास्थ्य और कल्याण प्रदान करने वाले), 'धनमांगल्यप्रदाय' (धन और शुभता प्रदान करने वाले), 'बुद्धिसिद्धिप्रदाय' (बुद्धि और सिद्धियां प्रदान करने वाले) जैसे नाम उनके भौतिक और आध्यात्मिक अनुग्रहों को दर्शाते हैं। वे 'आपद्बांधव' (संकट में मित्र) और 'मार्गबंधु' (जीवन यात्रा में साथी) के रूप में भक्तों के हर कदम पर उनके साथ खड़े रहते हैं। इस नामावली का पाठ साईबाबा की सर्वशक्तिमानता और अपार करुणा का अनुभव करने का एक दिव्य मार्ग है।

प्रत्येक नाम साईबाबा के प्रेम, करुणा और चमत्कारी शक्ति को दर्शाता है। इस नामावली का पाठ करने से भक्त साईबाबा की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करते हैं और उनकी कृपा के पात्र बनते हैं। यह मन को शांति, हृदय को आनंद और जीवन को मार्गदर्शन प्रदान करता है। साईबाबा के 'सच्चिदात्मने' और 'नित्यानंदाय' जैसे नाम उनके सत्य, चेतना और आनंद स्वरूप की याद दिलाते हैं, जो भक्तों को परम सत्य की ओर ले जाते हैं।

लाभ (Benefits):

  • मानसिक शांति और स्थिरता: इस नामावली का नियमित पाठ करने से मन की चिंताएं दूर होती हैं और आंतरिक शांति व स्थिरता प्राप्त होती है।
  • स्वास्थ्य और समृद्धि: साईबाबा के दिव्य नामों का स्मरण करने से उत्तम स्वास्थ्य, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • संकट निवारण: जीवन में आने वाली कठिनाइयां, बाधाएं और भय दूर होते हैं, और बाबा की सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • ज्ञान और बुद्धि: 'बुद्धि-सिद्धिप्रदाय' नाम के अनुसार, यह स्तोत्र ज्ञान, बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: साईबाबा के सच्चिदानंद स्वरूप का स्मरण करने से आध्यात्मिक प्रगति, भक्ति और मोक्ष का मार्ग सुगम होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री शिरडी साई अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
यह शिरडी साईबाबा के 108 पवित्र नामों का एक भक्ति स्तोत्र है। ये नाम बाबा के दिव्य गुणों, रूपों और शक्तियों का वर्णन करते हैं, जो भक्तों को उनसे जुड़ने में मदद करते हैं।
इस नामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद, शाम को दीपक जलाने के बाद या किसी भी शुभ अवसर पर भक्ति और श्रद्धा के साथ किया जा सकता है। बाबा के चित्र के सामने बैठकर पाठ करना उत्तम माना जाता है।
श्री शिरडी साई अष्टोत्तर शतनामावली पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इस नामावली का पाठ करने से मानसिक शांति, अच्छा स्वास्थ्य, धन, समृद्धि, संकटों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह बाबा के आशीर्वाद को आकर्षित करता है।
कौन इस नामावली का पाठ कर सकता है?
जाति, धर्म या लिंग के भेद के बिना, साईबाबा में विश्वास और श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस नामावली का पाठ कर सकता है। इसके लिए कोई आयु सीमा नहीं है।
इस नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः एक दिन में एक बार पाठ करना उचित है। हालांकि, विशेष अवसरों पर 11, 21, 108 या 1008 बार पाठ करना अधिक फलदायी माना जाता है।
इस नामावली का मूल क्या है?
यह अष्टोत्तर शतनामावली साईबाबा के भक्तों द्वारा रचित है, जिसका उद्देश्य उनके दिव्य गुणों का स्मरण करना और उनके साथ आध्यात्मिक संबंध स्थापित करना है। यह साई सच्चरित्र में उल्लिखित नामों पर आधारित है।

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