श्री राम द्वादशनाम स्तोत्रं
प्रथमं श्रीधरं विद्याद्द्वितीयं रघुनायकं |
तृतीयं रामचंद्रं च चतुर्थं रावणांतकं || 1 ||
पंचमं लोकपूज्यं च षष्ठमं जानकीपतिं |
सप्तमं वासुदेवं च श्रीरामं चाऽष्टमं तथा || 2 ||
नवमं जलदश्यामं दशमं लक्ष्मणाग्रजं |
एकादशं च गोविंदं द्वादशं सेतुबंधनं || 3 ||
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छ्रद्धयान्वितः |
अर्धरात्रे तु द्वादश्यां कुष्ठदारिद्र्यनाशनं || 4 ||
अरण्ये चैव संग्रामे अग्नौ भयनिवारणं |
ब्रह्महत्या सुरापानं गोहत्यादि निवारणं || 5 ||
सप्तवारं पठेन्नित्यं सर्वारिष्टनिवारणं |
ग्रहणे च जले स्थित्वा नदीतीरे विशेषतः |
अश्वमेधशतं पुण्यं ब्रह्मलोकं गमिष्यति || 6 ||
इति श्री स्कांदपुराणे उत्तरखंडे श्री उमामहेश्वरसंवादे श्री राम द्वादशनामस्तोत्रं |
अर्थ
श्री राम द्वादशनाम स्तोत्रं भगवान श्री राम के बारह दिव्य नामों की स्तुति करने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली और संक्षिप्त स्तोत्र है। स्कंद पुराण के उत्तरखंड में, श्री उमा-महेश्वर संवाद के एक भाग के रूप में इस स्तोत्र का उल्लेख मिलता है। यह भक्तों के लिए भगवान राम के विभिन्न स्वरूपों, गुणों और पराक्रमों का स्मरण करने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है। यह नाम भगवान राम की करुणा, शौर्य, धर्मनिष्ठा और लोकपालना सामर्थ्य को उजागर करते हैं, जो भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं।
यह स्तोत्र भगवान राम के बारह नामों का एक-एक करके वर्णन करता है। पहला नाम 'श्रीधर' है, जिसका अर्थ है श्री महालक्ष्मी को धारण करने वाले, समृद्धि के अधिपति और सभी संपत्तियों को प्रदान करने वाले। दूसरा नाम 'रघुनायक' है – रघुकुल के श्रेष्ठ नायक, आदर्श राजा, धर्म के प्रतिपालक और सत्यनिष्ठ। तीसरा नाम 'रामचंद्र' है, जिसका अर्थ है चंद्रमा के समान सुंदर, शीतल और मन को शांति प्रदान करने वाले, भक्तों के हृदय में आनंद भरने वाले। चौथा नाम 'रावणांतक' – दुष्ट रावण का संहार कर धर्म की रक्षा करने वाले महावीर, अधर्म के नाशक। पाँचवाँ नाम 'लोकपूज्य' – समस्त लोकों द्वारा, देवताओं और मनुष्यों द्वारा पूजे जाने वाले परमदेव, सभी सृष्टि के आराध्य। छठा नाम 'जानकीपति' – सीता माता के प्रिय पति, आदर्श दांपत्य के प्रतीक और पवित्रता की मूर्ति।
सातवाँ नाम 'वासुदेव' – सर्वव्यापी, सभी जीवों में अंतर्निहित परमात्मा, जगत की सृष्टि, स्थिति और लय के कारणभूत। आठवाँ नाम 'श्रीराम' – करुणामयी, सत्यनिष्ठ और आदर्श पुरुषोत्तम, भक्तों की पुकार पर सदैव उपस्थित रहने वाले। नौवाँ नाम 'जलदश्याम' – वर्षाकालीन मेघ के समान श्यामवर्ण वाले, मनमोहक काया वाले, देखने में सुंदर और मन को प्रसन्न करने वाले। दसवाँ नाम 'लक्ष्मणाग्रज' – अपने भाई लक्ष्मण के बड़े भाई, भ्रातृ प्रेम के उदाहरण, पारिवारिक संबंधों के महत्व को दर्शाने वाले। ग्यारहवाँ नाम 'गोविंद' – गायों और समस्त जीवों का पालन करने वाले, पृथ्वी के रक्षक और सभी जीवधारियों के आधार। बारहवाँ नाम 'सेतुबंधना' – लंका तक सेतु का निर्माण कर असंभव को संभव बनाने वाले महापुरुष, संकल्प शक्ति और परिश्रम के आदर्श। ये प्रत्येक नाम भगवान श्री राम के अद्भुत गुणों और कार्यों को प्रकट करते हैं और उनके दिव्य स्वरूप का दर्शन कराते हैं।
यह स्तोत्र बताता है कि इन द्वादश नामों का श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से, अर्धरात्रि में या द्वादशी तिथि पर इन नामों का जप करने वाले कुष्ठ रोग, दरिद्रता जैसी समस्याओं से मुक्त हो जाते हैं। यह स्तोत्र वन में, युद्ध में, या अग्नि से उत्पन्न होने वाले भय से भी रक्षा प्रदान करता है। ब्रह्महत्या, सुरापान (मद्यपान), गोहत्या जैसे महापापों से भी मुक्ति मिलती है, आत्मा को शुद्ध करता है। प्रतिदिन सात बार इस स्तोत्र का पाठ करने से सभी अरिष्ट (बाधाएँ) दूर होती हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं। नदी के किनारे या ग्रहण काल में इसका जप करने से सौ अश्वमेध यज्ञों का पुण्य प्राप्त होता है और ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
लाभ (Benefits):
- रोग निवारण: कुष्ठ रोग जैसे दीर्घकालिक रोगों और अन्य शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है, स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- दरिद्रता नाश: आर्थिक संकट दूर होते हैं और जीवन में समृद्धि, धन तथा सुख की प्राप्ति होती है।
- भय निवारण: वन, युद्ध, अग्नि, चोरों आदि जैसी खतरनाक परिस्थितियों में सुरक्षा और साहस प्रदान करता है।
- पाप विमोचन: ब्रह्महत्या, गोहत्या और मद्यपान जैसे महापापों से भी मुक्ति प्रदान कर आत्मा को शुद्ध करता है।
- सभी अरिष्टों का निवारण: दैनिक जीवन में आने वाली छोटी-बड़ी बाधाएँ, अशुभ प्रभाव और रुकावटें दूर होती हैं।
- अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति: नदी के तट पर या ग्रहण काल में पाठ करने से सौ अश्वमेध यज्ञों का फल और ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री राम द्वादशनाम स्तोत्रं क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री राम द्वादशनाम स्तोत्रं का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
किसे इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का उद्गम या स्रोत क्या है?
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