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रकारादि श्री राम अष्टोत्तर शतनामावळि

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अष्टोत्तर108 नाम
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  1. ॐ रामाय नमः
  2. ॐ राजीवपत्राक्षाय नमः
  3. ॐ राकाचंद्रनिभाननाय नमः
  4. ॐ रात्रिंचरार्दितक्षोणि परितापविनाशनाय नमः
  5. ॐ राजीवनाभाय नमः
  6. ॐ राजेंद्राय नमः
  7. ॐ राजीवासनसंस्तुताय नमः
  8. ॐ राजराजादिदिक्पालमौलि माणिक्यदीपिताय नमः
  9. ॐ राघवान्वयपाथोधिचंद्राय नमः
  10. ॐ राकेंदुसद्यशसे नमः
  11. ॐ रामचंद्राय नमः
  12. ॐ राघवेंद्राय नमः
  13. ॐ राजीवरुचिराननाय नमः
  14. ॐ राजानुजामंदिरोरसे नमः
  15. ॐ राजीवविलसत्पदाय नमः
  16. ॐ राजीवहस्ताय नमः
  17. ॐ राजीवप्रियवंशकृतोदयाय नमः
  18. ॐ रात्रिनव्यांबुभृन्मूर्तये नमः
  19. ॐ राजांशुरुचिरस्मिताय नमः
  20. ॐ राजीवकराय नमः
  21. ॐ राजीवधारिणे नमः
  22. ॐ राजीवजाप्रियाय नमः
  23. ॐ राघवोत्संगविद्योताय नमः
  24. ॐ राकेंद्वयुतभास्वराय नमः
  25. ॐ राजिलेखानभांकुराय नमः
  26. ॐ राजीवप्रियभूषणाय नमः
  27. ॐ राजराजन्मणीभूषणाय नमः
  28. ॐ राराजद्भ्रमरालकाय नमः
  29. ॐ राजलेखाभसीमंताय नमः
  30. ॐ राजन्मृगमदांकनाय नमः
  31. ॐ राजहीरलसच्छ्रोत्राय नमः
  32. ॐ राजीवकरगामृताय नमः
  33. ॐ रत्नकांचीधराय नमः
  34. ॐ रम्याय नमः
  35. ॐ रत्नकांचनकंकणाय नमः
  36. ॐ रणत्कांचनमंजीराय नमः
  37. ॐ रंजिताखिलभूतलाय नमः
  38. ॐ राराजत्कुंदरदनाय नमः
  39. ॐ रम्यकंठाय नमः
  40. ॐ रतव्रजाय नमः
  41. ॐ रंजिताद्भुतगाधेयाय नमः
  42. ॐ रात्रिंचरसतीहराय नमः
  43. ॐ रात्रिंचरभयत्त्रातगाधेय सवनोत्तमाय नमः
  44. ॐ राराजच्चरणांभोजरजःपूरमुनिप्रियाय नमः
  45. ॐ राजराजसुहृच्चापभेदनाय नमः
  46. ॐ राजपूजिताय नमः
  47. ॐ रमारामाकरांभोज मालोन्मीलितकंठमाय नमः
  48. ॐ रमाकराब्जमारंदबिंदुमुक्ताफलावृताय नमः
  49. ॐ रत्नकंकणनिध्वानमिषल्लक्ष्मीस्तुतिश्रुतये नमः
  50. ॐ रमावामदृगंतालि व्याप्तदुर्लक्ष्यविग्रहाय नमः
  51. ॐ रामतेजस्समाहर्त्रे नमः
  52. ॐ रामसोपानभंजनाय नमः
  53. ॐ राघवाज्ञाकृतारण्यवासाय नमः
  54. ॐ रामानुजार्चिताय नमः
  55. ॐ रक्तकंजातचरणाय नमः
  56. ॐ रम्यवल्कलवेष्टिताय नमः
  57. ॐ रात्र्यंबुदजटाभाराय नमः
  58. ॐ रम्यांगश्रीविभूषणाय नमः
  59. ॐ रणच्चापगुणाय नमः
  60. ॐ रक्तमुनित्राणपरायणाय नमः
  61. ॐ रात्रिंचरगणप्राणहर्त्रे नमः
  62. ॐ रम्यफलादनाय नमः
  63. ॐ रात्रिंचरेंद्रभगिनीकर्णनासोष्ट्रभेदनाय नमः
  64. ॐ रातमायामृगप्राणाय नमः
  65. ॐ रावणाहृतसत्प्रियाय नमः
  66. ॐ राजीवबंधुपुत्राप्ताय नमः
  67. ॐ राजदेवसुतार्धनाय नमः
  68. ॐ रक्तश्रीहनुमद्वाहाय नमः
  69. ॐ रत्नाकरनिबंधनाय नमः
  70. ॐ रुद्धरात्रिंचरावासाय नमः
  71. ॐ रावणादिविमर्दनाय नमः
  72. ॐ रामासमालिंगितांकाय नमः
  73. ॐ रावणानुजपूजिताय नमः
  74. ॐ रत्नसिंहासनासीनाय नमः
  75. ॐ राज्यपट्टाभिषेचनाय नमः
  76. ॐ राजनक्षत्रवलयवृतराकेंदुसुंदराय नमः
  77. ॐ राकेंदुकुंडलच्चत्राय नमः
  78. ॐ राजांशूत्करचामराय नमः
  79. ॐ राजर्षिगणसंवीताय नमः
  80. ॐ रंजितप्लवगाधिपाय नमः
  81. ॐ रमादृङ्मालिकालीला नीराजित पदांबुजाय नमः
  82. ॐ रामतत्त्वप्रवचनाय नमः
  83. ॐ राजराजसखोदयाय नमः
  84. ॐ राजबिंबाननागाननर्तनामोदितांतराय नमः
  85. ॐ राज्यलक्ष्मीपरीरंभसंभृताद्भुतकंटकाय नमः
  86. ॐ रामायणकथामालानायकाय नमः
  87. ॐ राष्ट्रशोभनाय नमः
  88. ॐ राजमालामौलिमालामकरंदप्लुतांघ्रिकाय नमः
  89. ॐ राजताद्रिमहाधीराय नमः
  90. ॐ राद्धदेवगुरुद्विजाय नमः
  91. ॐ राद्धभक्ताशयारामाय नमः
  92. ॐ रमिताखिलदैवताय नमः
  93. ॐ रागिणे नमः
  94. ॐ रागविहीनात्मभक्तप्राप्याय नमः
  95. ॐ रसात्मकाय नमः
  96. ॐ रसप्रदाय नमः
  97. ॐ रसास्वादाय नमः
  98. ॐ रसाधीशाय नमः
  99. ॐ रसातिगाय नमः
  100. ॐ रसनापावनाभिख्याय नमः
  101. ॐ रामनामामृतोदधये नमः
  102. ॐ राजराजीवमित्राक्षाय नमः
  103. ॐ राजीवभवकारणाय नमः
  104. ॐ रामभद्राय नमः
  105. ॐ राजमानाय नमः
  106. ॐ राजीवप्रियबिंबगाय नमः
  107. ॐ रमारामाभुजलता कंठालिंगनमंगलाय नमः
  108. ॐ रामसूरिहृदंभोधिवृत्तिवीचीविहारवते नमः

|| इति रकारादि श्री राम अष्टोत्तर शतनामावळि समाप्तं ||

अर्थ

रकारादि श्री राम अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान श्री राम के 108 पवित्र नामों का स्तोत्र है। यह नामावलि 'र' अक्षर से शुरू होने वाले श्री राम के गुणों का वर्णन करती है, जो भक्तों के लिए राम के दिव्य रूप, गुणों और लीलाओं का स्मरण करने का एक सुंदर माध्यम है। इन नामों का पाठ करने से भक्त राम की कृपा प्राप्त करते हैं और आध्यात्मिक उन्नति पाते हैं। यह श्री राम की सुंदरता, पराक्रम, देवत्व और भक्तवत्सलता की प्रशंसा करने वाला एक उत्कृष्ट स्तोत्र है।

'र' अक्षर का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। 'राम' नाम में 'र' और 'म' अक्षर शिव और विष्णु के बीजाक्षर माने जाते हैं। रकारादि नामावलि का पाठ करना केवल राम के नामों का उच्चारण करना नहीं है, बल्कि उनके सभी गुणों, पराक्रम, सौंदर्य और उनकी दिव्य शक्ति का ध्यान करना है। यह मन को शुद्ध करता है, शांति प्रदान करता है और भगवान के साथ गहरा संबंध स्थापित करने में मदद करता है। यह नामावलि भक्तों के हृदय में राम भक्ति को मजबूत करती है और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।

इस नामावलि का प्रत्येक नाम श्री राम के एक अद्वितीय गुण या स्वरूप का वर्णन करता है। उदाहरण के लिए, "ॐ राजीवपत्राक्षाय नमः" का अर्थ है कमल के पत्तों जैसी आँखों वाले। "ॐ राकाचंद्रनिभाननाय नमः" का अर्थ है पूर्णिमा के चंद्रमा के समान सुंदर मुख वाले। "ॐ रात्रिंचरार्दितक्षोणि परित्राणविनाशनाय नमः" यह नाम दर्शाता है कि राम ने राक्षसों से पीड़ित पृथ्वी के दुखों को दूर किया। "ॐ राजीवनाभाय नमः" यह याद दिलाता है कि राम विष्णु के अवतार हैं। "ॐ राजेंद्राय नमः" उनकी संप्रभुता को और "ॐ राघवान्वयपाथोधिचंद्राय नमः" रघुवंश रूपी सागर के चंद्रमा को दर्शाता है। ये नाम राम के अनुपम सौंदर्य, शक्ति, न्यायप्रियता, धर्मनिष्ठा और भक्तवत्सलता को उजागर करते हैं। प्रत्येक नाम दिव्य शक्ति से भरा है, जिसका भक्तिपूर्वक पाठ करने से अपार पुण्य प्राप्त होता है।

यह अष्टोत्तर शतनामावलि श्री राम के विभिन्न गुणों और लीलाओं का संक्षिप्त लेकिन गहरा विवरण प्रस्तुत करती है। उनके राजीवपत्राक्ष, राकेशचंद्रमुख, रात्रिंचर विध्वंसक, राजीवनाभ, राजेंद्र, राघवेंद्र जैसे नाम उनके दिव्य व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को प्रकट करते हैं। इन नामों का निरंतर जप करने से भक्त राम की उपस्थिति का अनुभव करते हैं और आंतरिक शुद्धि प्राप्त करते हैं। यह राम भक्तों के लिए अत्यंत प्रिय और फलदायी स्तोत्रों में से एक है।

लाभ (Benefits):

  • मानसिक शांति और स्थिरता: इस नामावलि का पाठ करने से मन की चंचलता कम होती है और गहरी मानसिक शांति व स्थिरता प्राप्त होती है।
  • समस्याओं का निवारण: श्री राम के नाम स्मरण से जीवन में आने वाली कठिनाइयों और बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: राम के दिव्य गुणों का स्मरण करने से भक्त आध्यात्मिक रूप से प्रगति करते हैं और मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।
  • रक्षा और सफलता: भगवान राम अपने भक्तों को सभी प्रकार के खतरों से बचाते हैं और उनके प्रयासों में सफलता प्रदान करते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति: शुद्ध मन से इस नामावलि का पाठ करने से भक्तों की सद्भावनापूर्ण इच्छाएँ पूरी होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रकारादि श्री राम अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
यह भगवान श्री राम के 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है, जिसमें प्रत्येक नाम 'र' अक्षर से शुरू होता है। यह राम के विभिन्न गुणों, रूपों और लीलाओं की स्तुति करता है।
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन से किया जा सकता है। राम नवमी, एकादशी या मंगलवार को पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।
रकारादि श्री राम अष्टोत्तर शतनामावलि के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस नामावलि के पाठ से मानसिक शांति, कष्टों का निवारण, आध्यात्मिक प्रगति, सुरक्षा और मनोकामना पूर्ति जैसे लाभ प्राप्त होते हैं। यह भक्तों को राम की कृपा दिलाता है।
इस नामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
श्री राम में श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस नामावलि का पाठ कर सकता है। इसके लिए कोई लिंग, आयु या जाति का बंधन नहीं है।
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः, एक माला (108 बार) का पाठ करना उचित माना जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार प्रतिदिन कम से कम एक बार इसका पाठ कर सकते हैं।
इस नामावलि का उद्गम या स्रोत क्या है?
यह नामावलि विभिन्न पुराणों, आगमों और भक्ति ग्रंथों से संकलित की गई है। यह श्री राम की स्तुति करने की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है।

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