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श्री सीता राम स्तोत्रं

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स्तोत्र
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श्री सीता राम स्तोत्रं

अयोध्या पुर नेतारं मिथिला पुर नायिकां
राघवाणां अलंकारं वैदेहीनां अलंक्रियां ||

रघूणं कुल दीपं च निमीनं कुल दीपिकं
सूर्य वंश समुद्भूतम् सोम वंश समुद्भवां ||

पुत्रं दशरथस्याद्यम् पुत्रीं जनक भूपते
वसिष्टानु मताचारं शतानंद मतानुगं ||

कौसल्या गर्भ संभूतं वेडि गर्भोदितं स्वयं
पुंडरीक विशालाक्षं स्फुरदिंदी वरेक्षणां ||

चंद्रकांताननांभोजं चंद्र बिंबोपमाननं
मत्त मातंग गमनं मत्त हंस वधू गतां ||

चंदनार्द्र भुजा मध्यं कुंकुमार्द्र कुचस्थलीं
चापालंकृत हस्ताब्जं पद्मालंकृत पाणिकां ||

शरणागत गोप्तारं प्रणिपात प्रसादिकां
कालमेघ निभं रामं कार्त स्वर सम प्रभां ||

दिव्य सिंहासनासीनं दिव्यस्रग्वस्त्र भूषणां
अनुक्षणं कटाक्षाभ्यां अन्योन्य क्षण कांक्षिणू ||

अन्योन्य सदृशाकारौ त्रिलोक्य ग्रह दंपति
इमौ युवां प्रणम्याहं भजाम्यद्य कृतार्थतां ||

अनेन स्तोति यः स्तुत्यं रामं सीतांच भक्तितः
तस्य तौ तनुतां पुण्यास्संपदः सकलार्थदाः ||

एवं श्रीराम चंद्रस्य जानक्याश्च विशेषतः
कृतं हनुमता पुण्यं स्तोत्रं सद्यो विमुक्तिदं
यः पठेत् प्रातरुत्थाय सर्वान् कामनवाप्नुयात् ||

अर्थ

श्री सीता राम स्तोत्रम भगवान श्री राम और माता सीता की स्तुति में गाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है। यह दिव्य युगल के रूप, गुणों, वंश, पराक्रम और उनके परस्पर प्रेम का विस्तृत वर्णन करता है। इस स्तोत्र का पाठ भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उत्थान और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति प्रदान करता है। यह स्तोत्र भगवान के दिव्य गुणों का स्मरण कराकर भक्त को भक्ति मार्ग पर अग्रसर करता है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और संतोष का संचार होता है।

यह स्तोत्र केवल भगवान के गुणों का गान नहीं, बल्कि सीता-राम के दिव्य तत्व को समझने का एक माध्यम है। राम परमात्मा के प्रतीक हैं, और सीता प्रकृति के स्वरूप या माया शक्ति हैं। उनका मिलन सृष्टि, स्थिति और लय के कारणभूत परब्रह्म तत्व को दर्शाता है। राम धर्म के साक्षात स्वरूप हैं, तो सीता धैर्य, त्याग और पवित्रता की प्रतिमूर्ति हैं। इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक उनकी दिव्य लीलाओं और कल्याणकारी गुणों का स्मरण कराता है, जिससे भक्त के हृदय में अचल श्रद्धा और भक्ति का संचार होता है और उसे जीवन के परम सत्य का बोध होता है।

स्तोत्र का आरंभ अयोध्यापुरी के नायक श्री राम और मिथिलापुरी की नायिका सीता के वर्णन से होता है। रघुवंशियों के आभूषण श्री राम और विदेहवंशियों की शोभा सीता हैं। रघुवंश के कुलदीपक श्री राम और निमि वंश की कुलदीपिका सीता हैं। सूर्यवंश में उत्पन्न श्री राम और जनक की पुत्री, पृथ्वी से उत्पन्न हुई सीता हैं। दशरथ के पुत्र श्री राम और जनक नरेश की पुत्री सीता हैं। वसिष्ठ के मतानुसार आचरण करने वाले श्री राम और शतानंद के मत का अनुसरण करने वाली सीता हैं। कौसल्या के गर्भ से उत्पन्न श्री राम और स्वयं वेदगर्भ (पृथ्वी) से प्रकट हुई सीता हैं। कमल के समान विशाल नेत्रों वाले श्री राम और खिले हुए नीले कमल के समान आँखों वाली सीता हैं। चंद्रकांत मणि के समान मुखमंडल वाले श्री राम और चंद्रबिंब के समान सुंदर मुख वाली सीता हैं। मत्त हाथी के समान गंभीर चाल वाले श्री राम और मत्त हंसिनी के समान graceful चाल वाली सीता हैं।

दिव्य दंपति के सौंदर्य का वर्णन जारी रखते हुए, स्तोत्र कहता है कि चंदन से सिक्त भुजाओं वाले श्री राम और कुमकुम से लिप्त वक्षस्थल वाली सीता हैं। धनुष से अलंकृत कर-कमलों वाले श्री राम और कमल से सुशोभित हाथों वाली सीता हैं। शरण आए हुए की रक्षा करने वाले श्री राम और प्रणाम करने पर प्रसन्न होने वाली सीता हैं। काले बादल के समान श्याम वर्ण वाले श्री राम और सोने के समान चमक वाली सीता हैं। दिव्य सिंहासन पर आसीन, दिव्य माला, वस्त्र और आभूषणों से सुशोभित, क्षण-क्षण एक-दूसरे को कटाक्ष से देखने वाले, तीनों लोकों के दंपति, आप दोनों को मैं प्रणाम कर आज कृतार्थ होता हूँ। जो कोई भी इस स्तोत्र से भक्तिपूर्वक सीता और राम की स्तुति करता है, वह निश्चित रूप से सभी सिद्धियों को प्राप्त कर कृतार्थ होता है, ऐसा फलश्रुति में कहा गया है।

लाभ (Benefits):

  • मानसिक शांति और संतोष: श्री सीता-राम के दिव्य गुणों और उनके आदर्श दांपत्य का स्मरण करने से मन को असीम शांति और संतोष मिलता है, जिससे मानसिक तनाव और चिंताएँ कम होती हैं।
  • मनोकामना पूर्ति: इस स्तोत्र का भक्तिपूर्वक और नियमित पाठ करने से भक्तों की सभी शुभ इच्छाएँ पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सफलता और आनंद की प्राप्ति होती है।
  • समस्त संकटों से रक्षा: भगवान राम शरणागत रक्षक हैं। इस स्तोत्र के पाठ से भक्त सभी प्रकार के भय, बाधाओं, नकारात्मक शक्तियों और जीवन के संकटों से सुरक्षित रहते हैं।
  • सुखी दांपत्य जीवन: सीता-राम का दिव्य दांपत्य प्रेम, त्याग और सद्भाव का प्रतीक है। इस स्तोत्र का पाठ करने से पति-पत्नी के संबंधों में प्रेम, सद्भाव और परस्पर समझ बढ़ती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: इस स्तोत्र का निरंतर पाठ आत्मा को शुद्ध करता है, आध्यात्मिक ज्ञान और वैराग्य प्रदान करता है, और भक्तों को मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री सीता राम स्तोत्रं क्या है?
श्री सीता राम स्तोत्रं भगवान श्री राम और माता सीता के दिव्य गुणों, रूप, वंश तथा उनके आदर्श दांपत्य प्रेम का वर्णन करने वाली एक पवित्र स्तुति है। यह उनके कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाता है।
श्री सीता राम स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ मन से करना चाहिए। राम नवमी, विवाह पंचमी जैसे शुभ अवसरों पर इसका पाठ विशेष फलदायी होता है। प्रतिदिन नियमित पाठ भी अत्यंत लाभकारी है।
इस स्तोत्र के पाठ से क्या प्रमुख लाभ प्राप्त होते हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से मानसिक शांति, सभी मनोकामनाओं की पूर्ति, दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि, संकटों से रक्षा और आध्यात्मिक उन्नति जैसे अनेक लाभ प्राप्त होते हैं।
श्री सीता राम स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
यह स्तोत्र किसी भी लिंग, आयु या जाति के व्यक्ति द्वारा पढ़ा जा सकता है। विशेष रूप से जो लोग दांपत्य जीवन में सद्भाव चाहते हैं, मानसिक शांति की तलाश में हैं और भगवान की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, वे इसका पाठ कर सकते हैं।
इस स्तोत्र का कितनी बार पाठ करना चाहिए?
इस स्तोत्र का प्रतिदिन कम से कम एक बार या 3, 5, 9, 11, या 108 बार पाठ किया जा सकता है। संख्या से अधिक महत्वपूर्ण भक्ति और श्रद्धा के साथ किया गया पाठ होता है।
श्री सीता राम स्तोत्र का उद्गम या स्रोत क्या है?
यह स्तोत्र प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों से लिया गया है और सीता-राम के दिव्य गुणों का वर्णन करने के लिए ऋषियों द्वारा रचा गया है। इसका सटीक मूल ग्रंथ समय के साथ स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

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