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श्री कमलांबिका स्तोत्रं

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स्तोत्र
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श्री कमलांबिका स्तोत्रं

बंधूकद्युतिमिंदुबिंबवदनां बृंदारकैर्वंदितां
मंदारादि समर्चितां मधुमतीं मंदस्मितां सुंदरीं |
बंधच्छेदनकारिणीं त्रिनयनां भोगापवर्गप्रदां
वंदेऽहं कमलांबिकामनुदिनं वांछानुकूलां शिवां || 1 ||

श्रीकामेश्वरपीठमध्यनिलयां श्रीराजराजेश्वरीं
श्रीवाणीपरिसेवितांघ्रियुगळां श्रीमत्कृपासागरां |
शोकापद्भयमोचिनीं सुकवितानंदैकसंदायिनीं
वंदेऽहं कमलांबिकामनुदिनं वांछानुकूलां शिवां || 2 ||

माया मोहविनाशिनीं मुनिगणैराराधितां तन्मयीं
श्रेयःसंचयदायिनीं गुणमयीं वाय्वादि भूतां सतां |
प्रातःकालसमानशोभमकुटां सामादि वेदैस्तुतां
वंदेऽहं कमलांबिकामनुदिनं वांछानुकूलां शिवां || 3 ||

बालां भक्तजनौघचित्तनिलयां बालेंदुचूडांबरां
सालोक्यादि चतुर्विधार्थफलदां नीलोत्पलाक्षीमजां |
कालारिप्रियनायिकां कलिमलप्रध्वंसिनीं कौलिनीं
वंदेऽहं कमलांबिकामनुदिनं वांछानुकूलां शिवां || 4 ||

आनंदामृतसिंधुमध्यनिलयामज्ञानमूलापहां
ज्ञानानंदविवर्धिनीं विजयदां मीनेक्षणां मोहिनीं |
ज्ञानानंदपरां गणेशजननीं गंधर्वसंपूजितां
वंदेऽहं कमलांबिकामनुदिनं वांछानुकूलां शिवां || 5 ||

षट्चक्रोपरि नादबिंदुनिलयां सर्वेश्वरीं सर्वगां
षट्शास्त्रागमवेदवेदितगुणां षट्कोणसंवासिनीं |
षट्कालेन समर्चितात्मविभवां षड्वर्गसंछेदिनीं
वंदेऽहं कमलांबिकामनुदिनं वांछानुकूलां शिवां || 6 ||

योगानंदकरीं जगत्सुखकरीं योगींद्रचित्तालयां
एकामीशसुखप्रदां द्विजनुतामेकांतसंचारिणीं |
वागीशां विधिविष्णुशंभुवरदां विश्वेश्वरीं वैणिकीं
वंदेऽहं कमलांबिकामनुदिनं वांछानुकूलां शिवां || 7 ||

बोधानंदमयीं बुधैरभिनुतां मोदप्रदामंबिकां
श्रीमद्वेदपुरीशदासविनुतां ह्रींकारसंधालयां |
भेदाभेदविवर्जितां बहुविधां वेदांतचूडामणिं
वंदेऽहं कमलांबिकामनुदिनं वांछानुकूलां शिवां || 8 ||

इत्थं श्रीकमलांबिकाप्रियकरं स्तोत्रं पठेद्यः सदा
पुत्रश्रीप्रदमष्टसिद्धिफलदं चिंताविनाशास्पदं |
एति ब्रह्मपदं निजं निरुपमं निष्कल्मषं निष्कलं
योगींद्रैरपि दुर्लभं पुनरयं चिंताविनाशं परं || 9 ||

इति श्री कमलांबिका स्तोत्रं |

अर्थ

श्री कमलांबिका स्तोत्रं देवी कमलांबिका को सौंदर्य, करुणा, ज्ञान और मोक्ष के साकार रूप में स्तुति करता है। यह स्तोत्र भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करने वाली, बंधनों को तोड़ने वाली और भोग तथा मोक्ष दोनों को प्रदान करने वाली देवी की महिमा का गुणगान करता है। इसमें देवी को बंधूक पुष्प के समान कांतिमान मुख, मंद मुस्कान और देवताओं द्वारा वंदित रूप में चित्रित किया गया है। वह त्रिनयनी हैं, अज्ञान के बंधनों को छिन्न-भिन्न करने वाली शक्ति हैं।

कमलांबिका देवी श्री कामेश्वर पीठ के मध्य में राजराजेश्वरी के रूप में निवास करती हैं। ब्रह्मा, विष्णु, शिव और वाणी देवी सरस्वती भी उनकी सेवा करती हैं। वह करुणा का सागर हैं, जो भक्तों को दुख, भय और विपत्तियों से मुक्त करती हैं। काव्य-प्रतिभा, ज्ञान और वाक् सिद्धि प्रदान करने वाली भी वही हैं। माया और मोह का नाश करने वाली देवी के रूप में, योगी और मुनि उन्हें शुद्ध चेतना के सार के रूप में पूजते हैं। वह सालोक्य, सामीप्य, सारूप्य और सायुज्य - इन चारों प्रकार के मोक्षों को प्रदान करने वाली हैं। कालारिरूप शिव की प्रिय नायिका के रूप में, वह कलियुग के दोषों को नष्ट करती हैं और सूक्ष्म कुंडलिनी शक्ति के रूप में निवास करती हैं।

आनंदामृत सिंधु के मध्य में निवास करने वाली देवी अज्ञान को दूर करती हैं और आध्यात्मिक ज्ञान का विस्तार करती हैं। गणेश की माता और गंधर्वों की प्रिय के रूप में, वह सौंदर्य को विकीर्ण करती हैं। वह षट्चक्रों के ऊपर नादबिंदु के रूप में निवास करती हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य नामक षड्वर्गों को नष्ट करने वाली पराशक्ति वही हैं। वह योगिक आनंद प्रदान करती हैं, सभी प्राणियों को सुख देती हैं और महान योगियों के हृदय में सदैव प्रकाशित रहती हैं। वेद, आगम और शास्त्र उनके ज्ञान के विभिन्न रूप हैं। वह वाग्देवी हैं, जो संगीत के माध्यम से भी भक्तों को आनंद प्रदान करती हैं।

इस स्तोत्र के नियमित पाठ से संतान सौभाग्य, धन, अष्टसिद्धियाँ और चिंताओं का नाश होता है। इसके अलावा, ब्रह्मपद की प्राप्ति, निष्कलुषता और मानसिक निर्मलता भी प्राप्त होती है। यद्यपि योगियों को भी उनका अनुग्रह कठिनता से प्राप्त होता है, यह स्तोत्र भक्ति को शुद्ध करके भगवत्प्राप्ति का मार्ग दिखाता है।

लाभ (Benefits):

  • धन और समृद्धि: कमलांबिका देवी की कृपा से धन, यश और सभी प्रकार की समृद्धि प्राप्त होती है।
  • भय और दुख से मुक्ति: भक्तों को सभी प्रकार के भय, दुख, संकटों और चिंताओं से मुक्त कर मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • ज्ञान और कला शक्ति: वाक् सिद्धि, काव्य रचना की क्षमता, ज्ञान और सभी कलाओं में निपुणता प्रदान करता है।
  • मोक्ष और आध्यात्मिक विकास: अज्ञान का निवारण कर, माया-मोह से मुक्ति दिलाकर चतुर्विध मोक्ष और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है।
  • अष्टसिद्धियाँ और संतान सौभाग्य: अष्टसिद्धियों को प्राप्त करने में सहायता करता है और संतान प्राप्ति के साथ बच्चों का सौभाग्य प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री कमलांबिका स्तोत्रं क्या है?
श्री कमलांबिका स्तोत्रं देवी कमलांबिका के सौंदर्य, करुणा, ज्ञान और मोक्ष के स्वरूप की स्तुति करने वाला एक पवित्र मंत्र है। यह भक्तों की इच्छाओं को पूरा करने और आध्यात्मिक उन्नति में सहायता करने के लिए रचा गया है।
श्री कमलांबिका स्तोत्रं का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन और भक्ति के साथ करना चाहिए। देवी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर और धूप अर्पित करके पाठ करना उत्तम माना जाता है।
इस स्तोत्र का पाठ करने के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से धन, यश, संतान सौभाग्य और अष्टसिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। साथ ही, भय, दुख, विपत्तियों का निवारण होता है और वाक् सिद्धि, ज्ञान तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्री कमलांबिका स्तोत्रं का पाठ किसे करना चाहिए?
धन, ज्ञान, शांति, संतान सौभाग्य और आध्यात्मिक प्रगति की इच्छा रखने वाले किसी भी भक्त को इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। देवी का अनुग्रह प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले सभी के लिए यह उपयोगी है।
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
आमतौर पर, अच्छे परिणामों के लिए प्रतिदिन कम से कम एक बार या 3, 5, 9, 11 या 108 बार पाठ करने की सलाह दी जाती है। निरंतर भक्ति के साथ पाठ करना महत्वपूर्ण है।
श्री कमलांबिका स्तोत्रं का उद्गम या रचनाकार कौन हैं?
श्री कमलांबिका स्तोत्रं प्राचीन हिंदू ग्रंथों से आया है। इसके विशिष्ट रचनाकार स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं हैं, लेकिन यह हिंदू धर्म की शक्ति परंपरा में गहराई से निहित है।

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