- ॐ महामायायै नमः
- ॐ महालक्ष्म्यै नमः
- ॐ महावाण्यै नमः
- ॐ महेश्वर्यै नमः
- ॐ महादेव्यै नमः
- ॐ महारात्र्यै नमः
- ॐ महिषासुरमर्दिन्यै नमः
- ॐ कालरात्र्यै नमः
- ॐ कुह्वे नमः
- ॐ पूर्णायै नमः
- ॐ आनंदायै नमः
- ॐ आद्यायै नमः
- ॐ भद्रिकायै नमः
- ॐ निशायै नमः
- ॐ जयायै नमः
- ॐ रिक्तायै नमः
- ॐ महाशक्त्यै नमः
- ॐ देवमात्रे नमः
- ॐ कृशोदर्यै नमः
- ॐ शच्यै नमः
- ॐ इंद्राण्यै नमः
- ॐ शक्रनुतायै नमः
- ॐ शंकरप्रियवल्लभायै नमः
- ॐ महावराहजनन्यै नमः
- ॐ मदनोन्मथिन्यै नमः
- ॐ मह्यै नमः
- ॐ वैकुंठनाथरमण्यै नमः
- ॐ विष्णुवक्षस्थलस्थितायै नमः
- ॐ विश्वेश्वर्यै नमः
- ॐ विश्वमात्रे नमः
- ॐ वरदायै नमः
- ॐ अभयदायै नमः
- ॐ शिवायै नमः
- ॐ शूलिन्यै नमः
- ॐ चक्रिण्यै नमः
- ॐ मायै नमः
- ॐ पाशिन्यै नमः
- ॐ शंखधारिण्यै नमः
- ॐ गदिन्यै नमः
- ॐ मुंडमालायै नमः
- ॐ कमलायै नमः
- ॐ करुणालयायै नमः
- ॐ पद्माक्षधारिण्यै नमः
- ॐ अंबायै नमः
- ॐ महाविष्णुप्रियंकर्यै नमः
- ॐ गोलोकनाथरमण्यै नमः
- ॐ गोलोकेश्वरपूजितायै नमः
- ॐ गयायै नमः
- ॐ गंगायै नमः
- ॐ यमुनायै नमः
- ॐ गोमत्यै नमः
- ॐ गरुडासनायै नमः
- ॐ गंडक्यै नमः
- ॐ सरय्वै नमः
- ॐ ताप्यै नमः
- ॐ रेवायै नमः
- ॐ पयस्विन्यै नमः
- ॐ नर्मदायै नमः
- ॐ कावेर्यै नमः
- ॐ केदारस्थलवासिन्यै नमः
- ॐ किशोर्यै नमः
- ॐ केशवनुतायै नमः
- ॐ महेंद्रपरिवंदितायै नमः
- ॐ ब्रह्मादिदेवनिर्माणकारिण्यै नमः
- ॐ वेदपूजितायै नमः
- ॐ कोटिब्रह्मांडमध्यस्थायै नमः
- ॐ कोटिब्रह्मांडकारिण्यै नमः
- ॐ श्रुतिरूपायै नमः
- ॐ श्रुतिकर्यै नमः
- ॐ श्रुतिस्मृतिपरायणायै नमः
- ॐ इंदिरायै नमः
- ॐ सिंधुतनयायै नमः
- ॐ मातंग्यै नमः
- ॐ लोकमातृकायै नमः
- ॐ त्रिलोकजनन्यै नमः
- ॐ तंत्रायै नमः
- ॐ तंत्रमंत्रस्वरूपिण्यै नमः
- ॐ तरुण्यै नमः
- ॐ तमोहंत्र्यै नमः
- ॐ मंगळायै नमः
- ॐ मंगळायनायै नमः
- ॐ मधुकैटभमथन्यै नमः
- ॐ शुंभासुरविनाशिन्यै नमः
- ॐ निशुंभादिहरायै नमः
- ॐ मात्रे नमः
- ॐ हरिशंकरपूजितायै नमः
- ॐ सर्वदेवमय्यै नमः
- ॐ सर्वायै नमः
- ॐ शरणागतपालिन्यै नमः
- ॐ शरण्यायै नमः
- ॐ शंभुवनितायै नमः
- ॐ सिंधुतीरनिवासिन्यै नमः
- ॐ गंधार्वगानरसिकायै नमः
- ॐ गीतायै नमः
- ॐ गोविंदवल्लभायै नमः
- ॐ त्रैलोक्यपालिन्यै नमः
- ॐ तत्त्वरूपायै नमः
- ॐ तारुण्यपूरितायै नमः
- ॐ चंद्रावल्यै नमः
- ॐ चंद्रमुख्यै नमः
- ॐ चंद्रिकायै नमः
- ॐ चंद्रपूजितायै नमः
- ॐ चंद्रायै नमः
- ॐ शशांकभगिन्यै नमः
- ॐ गीतवाद्यपरायणायै नमः
- ॐ सृष्टिरूपायै नमः
- ॐ सृष्टिकर्यै नमः
- ॐ सृष्टिसंहारकारिण्यै नमः
|| इति श्री कमल अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री कमला अष्टोत्तरशतनामावलि श्री महालक्ष्मी के दिव्य स्वरूप, देवी कमला को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक स्तोत्र है। दशमहाविद्याओं में दसवीं महाविद्या के रूप में पूजी जाने वाली देवी कमला समृद्धि, धन, सौंदर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं। यह नामावलि भक्तों के लिए देवी के विभिन्न गुणों, शक्तियों और रूपों का स्मरण करने का एक श्रेष्ठ माध्यम है। प्रत्येक नाम देवी की अनंत महिमा को उजागर करता है और भक्तों को आंतरिक शांति, समृद्धि तथा मोक्ष प्रदान करता है। यह केवल भौतिक संपदा की कामना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान का भी मार्ग प्रशस्त करता है।
देवी कमला केवल भौतिक धन की देवी नहीं हैं, बल्कि आध्यात्मिक समृद्धि, ज्ञान और सौंदर्य की भी प्रतीक हैं। यह अष्टोत्तर देवी की परम शक्ति, उनकी सृष्टि, स्थिति और लय के कारणभूत सामर्थ्य की प्रशंसा करता है। देवी समस्त जीव-जगत की पोषक हैं, जो भक्तों के अज्ञान को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करती हैं। उन्हें 'महामाया', 'महालक्ष्मी', 'महावाणी', 'महेश्वरी' कहकर संबोधित करने से यह ज्ञात होता है कि देवी त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) की शक्ति स्वरूप हैं और समस्त देवताओं की मूल शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी व्यापकता और सर्वव्यापकता इन नामों के माध्यम से स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
इस नामावलि में, देवी को 'ॐ महामायायै नमः' कहकर माया शक्ति के मूल और सृष्टि के परम कारण के रूप में स्तुति किया गया है। 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' के रूप में समस्त ऐश्वर्यों की अधिष्ठात्री देवी और 'ॐ महावाण्यै नमः' के रूप में ज्ञान तथा वाणी की देवी के रूप में पूजा जाता है। 'ॐ वैकुंठनाथरमण्यै नमः' और 'ॐ विष्णुवक्षस्थलस्थितायै नमः' जैसे नाम यह उद्घोष करते हैं कि देवी भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी हैं और उनके वक्षस्थल में निरंतर निवास करती हैं, जो सौभाग्य, सुरक्षा और स्थिरता का प्रतीक है। 'ॐ वरदायै नमः' और 'ॐ अभयदायै नमः' जैसे नाम यह स्पष्ट करते हैं कि देवी भक्तों को वरदान देने वाली और सभी भयों से मुक्ति प्रदान करने वाली हैं, उनकी करुणा और रक्षात्मक गुण को उजागर करते हैं।
इसके अतिरिक्त, देवी को 'शूलिन्यै, चक्रिण्यै, पाशिन्यै, शंखधारिण्यै, गदिन्यै' के रूप में विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाली के रूप में वर्णित किया गया है। यह उनकी रक्षात्मक और दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली शक्ति का संकेत देता है। वे केवल सौम्य रूपी नहीं हैं, बल्कि दुष्ट शक्तियों का संहार करने और धर्म की रक्षा करने की क्षमता भी रखती हैं। इस नामावलि के पाठ से भक्त देवी के समस्त गुणों का स्मरण करते हैं और उनके अनुग्रह के पात्र बनते हैं। यह केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति से जुड़ने, मन को शुद्ध करने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक शक्तिशाली आध्यात्मिक साधन है।
लाभ (Benefits):
- धन और समृद्धि: देवी कमला ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी हैं, इस नामावलि के नियमित पाठ से भक्तों को भौतिक और आध्यात्मिक धन प्राप्त होता है, और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
- सौभाग्य और संतोष: देवी की कृपा से घर में शांति, संतोष और सौभाग्य का वास होता है, पारिवारिक संबंध सुधरते हैं और सामंजस्य बढ़ता है।
- भय निवारण और सुरक्षा: शत्रु भय, बुरी शक्तियों का भय दूर होता है, और देवी भक्तों को सभी विपत्तियों से सुरक्षा प्रदान करती हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
- ज्ञान और बुद्धि: देवी महासरस्वती का भी स्वरूप हैं, इसलिए इस नामावलि का पाठ ज्ञान, बुद्धि, स्पष्ट वाणी और कलात्मक क्षमताओं को बढ़ाता है।
- आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष: सभी पापों का नाश होता है, भक्त आध्यात्मिक रूप से उन्नत होते हैं और मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने में देवी सहायता करती हैं, आंतरिक शुद्धता प्रदान करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री कमला अष्टोत्तरशतनामावलि क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री कमला अष्टोत्तरशतनामावलि के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का कितनी बार पाठ करना चाहिए?
श्री कमला अष्टोत्तरशतनामावलि का मूल स्रोत क्या है?
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