श्री दत्तात्रेय कवचं
श्रीपादः पातु मे पादावूरू सिद्धासनस्थितः |
पायाद्दिगंबरो गुह्यं नृहरिः पातु मे कटिं ||1||
नाभिं पातु जगत्स्रष्टोदरं पातु दलोदरः |
कृपालुः पातु हृदयं षड्भुजः पातु मे भुजौ ||2||
स्रक्कुंडीशूलडमरुशंखचक्रधरः करान् |
पातु कंठं कंबुकंठः सुमुखः पातु मे मुखं ||3||
जिह्वां मे वेदवाक्पातु नेत्रे मे पातु दिव्यदृक् |
नासिकां पातु गंधात्मा पातु पुण्यश्रवाः श्रुती ||4||
ललाटं पातु हंसात्मा शिरः पातु जटाधरः |
कर्मेंद्रियाणि पात्वीशः पातु ज्ञानेंद्रियाण्यजः ||5||
सर्वांतरोऽन्तकरणं प्राणान्मे पातु योगिराट् |
उपरिष्टादधस्ताच्च पृष्ठतः पार्श्वतोऽग्रजः ||6||
अंतर्बहिश्च मां नित्यं नानारूपधरोऽवतु |
वर्जितं कवचेनाव्यात्स्थानं मे दिव्यदर्शनः ||7||
राजतः शत्रुतो हिंस्राद् दुष्प्रयोगादितोऽघतः |
आधिव्याधिभयार्तिभ्यो दत्तात्रेयः सदावतु ||8||
धनधान्यगृहक्षेत्रस्त्रीपुत्रपशुकिंकरान् |
ज्ञातींश्च पातु नित्यं मेऽनसूयानंदवर्धनः ||9||
बालोन्मत्तपिशाचाभो द्युनिट्संधिषु पातु मां |
भूतभौतिकमृत्युभ्यो हरिः पातु दिगंबरः ||10||
य एतद्दत्तकवचं सन्नह्याद्भक्तिभावितः |
सर्वानर्थविनिर्मुक्तो ग्रहपीडाविवर्जितः ||11||
भूतप्रेतपिशाचाद्यैर्देवैरप्यपराजितः |
भुक्त्वात्र दिव्यभोगान्स देहांते तत्पदं व्रजेत् ||12||
इति श्रीमद् परमपूजनीय श्रीवासुदेवानंदसरस्वतीविरचितं
श्रीदत्तात्रेयकवचं संपूर्णं |
अर्थ
श्री दत्तात्रेय कवच भगवान दत्तात्रेय की दिव्य सुरक्षा प्राप्त करने के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली रक्षा स्तोत्र है। कवच का अर्थ है 'अभेदनीय ढाल' या 'सुरक्षात्मक आवरण'। यह स्तोत्र भक्त को भय, रोग, नकारात्मक शक्तियों और आध्यात्मिक हानि से बचाता है, उसे भगवान दत्तात्रेय की दिव्य ऊर्जा से घेर लेता है। भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और शिव के त्रिगुणात्मक स्वरूप का अवतार माना जाता है, और उनकी कृपा से भक्त को जीवन के हर क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि प्राप्त होती है। इस कवच का प्रत्येक श्लोक शरीर, मन और आत्मा के विभिन्न अंगों और पहलुओं की रक्षा के लिए भगवान दत्तात्रेय के विभिन्न रूपों और शक्तियों का आह्वान करता है।
इस कवच में, भगवान दत्तात्रेय के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण किया जाता है। सर्वप्रथम, श्रीपाद दत्त पैरों की रक्षा करते हैं, जबकि सिद्धासन में स्थित दत्त जांघों को बचाते हैं। दिगंबर स्वरूप गुह्य भाग की, और नृहरि रूप कमर की रक्षा करता है। जगत् के सृष्टा दत्तात्रेय नाभि की, और दलोदर रूप उदर की रक्षा करता है। कृपालु दत्त हृदय की रक्षा करते हैं, और षड्भुज दत्त भुजाओं की रक्षा करते हैं। शंख, चक्र, त्रिशूल और डमरू धारण करने वाले हाथों की रक्षा करते हैं, कंबुकंठ रूप कंठ की, और सुमुख रूप मुख की रक्षा करता है। वेदवाक् रूप जिह्वा की, दिव्यदृष्टि दाता नेत्रों की, गंधात्मा रूप नासिका की, और पुण्यश्रवा रूप कानों की रक्षा करता है, ऐसा स्तोत्र में वर्णित है।
आगे, हंसात्मा दत्त ललाट की, जटाधारी दत्त सिर की, ईश्वर स्वरूप कर्मेंद्रियों की, और अज रूप ज्ञानेंद्रियों की रक्षा करते हैं। योगीराज रूप अंतःकरण और प्राण शक्ति की रक्षा करता है। भगवान दत्तात्रेय ऊपर से, नीचे से, पीछे से, बगल से और सामने से - सभी दिशाओं से भक्त की रक्षा करते हैं। नाना रूप धारण करने वाले दत्त भक्त को आंतरिक और बाहरी रूप से सदैव सुरक्षित रखते हैं। यदि कवच से कोई स्थान अछूता रह जाए, तो दिव्यदर्शन भगवान दत्तात्रेय उसे भी अपनी कृपा से सुरक्षित करते हैं, ऐसी दृढ़ प्रतिज्ञा इसमें है।
यह कवच घोषणा करता है कि भगवान दत्तात्रेय राजा (सत्ता), शत्रुओं, हिंसक प्राणियों, दुष्ट प्रयोगों, पापों, आधि-व्याधि (मानसिक और शारीरिक रोगों) और सभी प्रकार के भय तथा संकटों से सदैव रक्षा करते हैं। इसके अतिरिक्त, धन, धान्य, गृह, क्षेत्र, स्त्री, पुत्र, पशु, किंकर (सेवक) और संबंधियों की भी दत्तात्रेय रक्षा करते हैं। जो भक्त इस दत्तात्रेय कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, वह सभी दुःखों, पापों और ग्रह पीड़ाओं से मुक्त होकर दिव्य भोगों का आनंद लेता है, और अंत में दत्तात्रेय पद (मोक्ष) को प्राप्त करता है। यह भक्त को समग्र सुरक्षा, समृद्धि, शांति और अंततः मुक्ति प्रदान करने वाला एक अद्वितीय साधन है।
लाभ (Benefits):
- पूर्ण सुरक्षा: यह कवच शरीर, मन और आत्मा को सभी बाहरी और आंतरिक खतरों, बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों से बचाता है।
- भय और चिंता का निवारण: भगवान दत्तात्रेय की दिव्य सुरक्षा सभी प्रकार के भय, बुरी शक्तियों के प्रभाव, ग्रह दोषों और चिंताओं को दूर कर शांति प्रदान करती है।
- स्वास्थ्य और समृद्धि: नियमित पाठ से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, तथा धन, धान्य, पारिवारिक सुख और समग्र समृद्धि बढ़ती है।
- ज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति: चूंकि दत्तात्रेय ज्ञान के देवता हैं, यह कवच भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान, विवेक और मोक्ष के मार्ग को सुगम बनाता है।
- ग्रह दोष निवारण: ज्योतिषीय रूप से ग्रहों के अशुभ प्रभावों से होने वाली समस्याओं को इस कवच का पाठ दूर करता है और शुभ फल प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री दत्तात्रेय कवच क्या है?
इस कवच का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री दत्तात्रेय कवच का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
श्री दत्तात्रेय कवच का पाठ कौन कर सकता है?
इस कवच का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री दत्तात्रेय कवच का मूल क्या है?
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