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- ॐ अनसूयासुताय नमः
- ॐ दत्ताय नमः
- ॐ अत्रिपुत्राय नमः
- ॐ महामुनये नमः
- ॐ योगींद्राय नमः
- ॐ पुण्यपुरुषाय नमः
- ॐ देवेशाय नमः
- ॐ जगदीश्वराय नमः
- ॐ परमात्मने नमः
- ॐ परस्मै ब्रह्मणे नमः
- ॐ सदानंदाय नमः
- ॐ जगद्गुरवे नमः
- ॐ नित्यतृप्ताय नमः
- ॐ निर्विकाराय नमः
- ॐ निर्विकल्पाय नमः
- ॐ निरंजनाय नमः
- ॐ गुणात्मकाय नमः
- ॐ गुणातीताय नमः
- ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मकाय नमः
- ॐ नानारूपधराय नमः
- ॐ नित्याय नमः
- ॐ शांताय नमः
- ॐ दांताय नमः
- ॐ कृपानिधये नमः
- ॐ भक्तिप्रियाय नमः
- ॐ भवहराय नमः
- ॐ भगवते नमः
- ॐ भवनाशनाय नमः
- ॐ आदिदेवाय नमः
- ॐ महादेवाय नमः
- ॐ सर्वेशाय नमः
- ॐ भुवनेश्वराय नमः
- ॐ वेदांतवेद्याय नमः
- ॐ वरदाय नमः
- ॐ विश्वरूपाय नमः
- ॐ अव्ययाय नमः
- ॐ हरये नमः
- ॐ सच्चिदानंदाय नमः
- ॐ सर्वेशाय नमः
- ॐ योगीशाय नमः
- ॐ भक्तवत्सलाय नमः
- ॐ दिगंबराय नमः
- ॐ दिव्यमूर्तये नमः
- ॐ दिव्यविभूतिविभूषणाय नमः
- ॐ अनादिसिद्धाय नमः
- ॐ सुलभाय नमः
- ॐ भक्तवांछितदायकाय नमः
- ॐ एकस्मै नमः
- ॐ अनेकाय नमः
- ॐ अद्वितीयाय नमः
- ॐ निगमागमवंदिताय नमः
- ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे नमः
- ॐ कार्तवीर्यवरप्रदाय नमः
- ॐ शाश्वतांगाय नमः
- ॐ विशुद्धात्मने नमः
- ॐ विश्वात्मने नमः
- ॐ विश्वतोमुखाय नमः
- ॐ कृपाकराय नमः
- ॐ सर्वेश्वराय नमः
- ॐ सदातुष्टाय नमः
- ॐ सर्वमंगळदायकाय नमः
- ॐ निष्कळंकाय नमः
- ॐ निराभासाय नमः
- ॐ निर्विकल्पाय नमः
- ॐ निराश्रयाय नमः
- ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
- ॐ लोकनाथाय नमः
- ॐ पुराणपुरुषाय नमः
- ॐ अनघाय नमः
- ॐ अपारमहिम्ने नमः
- ॐ अनंताय नमः
- ॐ आद्यंतरहिताकृतये नमः
- ॐ संसारवनदानाग्नये नमः
- ॐ भवसागरतारकाय नमः
- ॐ श्रीनिवासाय नमः
- ॐ विशालाक्षाय नमः
- ॐ क्षीराब्धिशयनाय नमः
- ॐ अच्युताय नमः
- ॐ सर्वपापक्षयकराय नमः
- ॐ तापत्रयनिवारणाय नमः
- ॐ लोकेशाय नमः
- ॐ सर्वभूतेशाय नमः
- ॐ व्यापकाय नमः
- ॐ करुणामयाय नमः
- ॐ ब्रह्मादिवंदितपदाय नमः
- ॐ मुनिवंद्याय नमः
- ॐ स्तुतिप्रियाय नमः
- ॐ नामरूपक्रियातीताय नमः
- ॐ निःस्पृहाय नमः
- ॐ निर्मलात्मकाय नमः
- ॐ मायाधीशाय नमः
- ॐ महात्मने नमः
- ॐ महादेवाय नमः
- ॐ महेश्वराय नमः
- ॐ व्याघ्रचर्मांबरधराय नमः
- ॐ नागकुंडलभूषणाय नमः
- ॐ सर्वसिद्दिप्रदायकाय नमः
- ॐ सर्वज्ञाय नमः
- ॐ करुणासिंधवे नमः
- ॐ सर्पहाराय नमः
- ॐ सदाशिवाय नमः
- ॐ सह्याद्रिवासाय नमः
- ॐ सर्वात्मने नमः
- ॐ भवबंधविमोचनाय नमः
- ॐ विश्वंभराय नमः
- ॐ विश्वनाथाय नमः
- ॐ जगन्नाथाय नमः
- ॐ जगत्प्रभवे नमः
|| इति श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनामावलिः भगवान दत्तात्रेय को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। अष्टोत्तरशतनामावलियाँ देवताओं के विभिन्न गुणों, लीलाओं और महिमाओं का गुणगान करने का एक श्रेष्ठ भक्ति मार्ग है। त्रिदेव स्वरूप, माता अनसूया और महर्षि अत्रि के पुत्र श्री दत्तात्रेय योग, ज्ञान और भक्ति के परम गुरु हैं। उनके इन एक सौ आठ नामों का जप करने से भक्त असीम आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं। यह नामावलि दत्तात्रेय के परम तत्व का सार प्रस्तुत करती है।
दत्तात्रेय भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव इन तीनों देवताओं के एकीकृत स्वरूप हैं। इस नामावलि का प्रत्येक नाम उनके इस अद्वितीय गुण को दर्शाता है। उन्हें 'ब्रह्मविष्णुशिवात्मकय नमः' कहकर पुकारा जाता है, जो उनकी सर्वव्यापकता और परम चेतना को इंगित करता है। उन्हें 'योगींद्राय नमः' (योगियों के अधिपति), 'महामुनये नमः' (महान ऋषि) और 'जगद्गुरवे नमः' (विश्वगुरु) के रूप में स्तुति की जाती है, जो उनके ज्ञान, तपस्या और शिक्षण क्षमता का प्रमाण है। ये नाम भक्तों को मार्गदर्शन देने, ज्ञान का प्रसार करने और मोक्ष का मार्ग दिखाने में उनकी भूमिका पर जोर देते हैं।
नामावलि में दत्तात्रेय को 'अनसूया सुताय नमः' और 'अत्रि पुत्राय नमः' कहकर संबोधित किया जाता है, जो उनके पवित्र वंश की याद दिलाता है। उन्हें 'देवेशाय नमः', 'जगदीश्वराय नमः', 'परमात्मने नमः', 'परस्मै ब्रह्मणे नमः' जैसे सभी नामों से सर्वोच्च देवत्व धारण करने वाला घोषित किया गया है। उन्हें 'सदानंदाय नमः' (निरंतर आनंदमय), 'नित्यतृप्ताय नमः' (सदा संतुष्ट), 'निर्विकाराय नमः' (विकार रहित), 'निरंजनाय नमः' (निर्मल) जैसे निर्गुण और सगुण दोनों रूपों में वर्णित किया गया है। उनके 'कृपानिधये नमः' (करुणा के सागर) और 'भक्तिप्रियाय नमः' (भक्तों को प्रिय) नाम उनकी अपार करुणा और भक्तों के प्रति प्रेम को उजागर करते हैं।
दत्तात्रेय केवल सृष्टि, स्थिति और लय के कारण ही नहीं हैं, बल्कि उन्हें 'भवहराय नमः' (संसार के बंधनों को दूर करने वाले) और 'भवनाशनाय नमः' (जन्म-मृत्यु के चक्र को नष्ट करने वाले) के रूप में भी जाना जाता है। यह उनकी मोक्षदायक शक्ति को दर्शाता है। 'नानारूपधराय नमः' नाम बताता है कि वे भक्तों के कल्याण के लिए विभिन्न रूप धारण करने में सक्षम हैं। 'शान्ताय नमः' और 'दान्ताय नमः' गुण उनकी आंतरिक शांति और इंद्रिय निग्रह को दर्शाते हैं। यह नामावलि भक्तों के मन में दत्तात्रेय की सर्वव्यापी, सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान क्षमताओं को स्थिर करती है।
लाभ (Benefits):
- आध्यात्मिक उत्थान: इस नामावलि का निरंतर जप करने से मन को शांति मिलती है, आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ता है और दत्तात्रेय के तत्व को समझने में मदद मिलती है।
- समस्याओं का निवारण: दत्तात्रेय करुणामयी हैं। उनके एक सौ आठ नामों का भक्तिपूर्वक पाठ करने से जीवन की कठिनाइयाँ, बाधाएँ और नकारात्मक ऊर्जाएँ दूर होती हैं, जिससे सकारात्मक वातावरण बनता है।
- ज्ञान और विवेक की प्राप्ति: दत्तात्रेय 'जगद्गुरु' हैं, इसलिए इस नामावलि के पाठ से अध्ययन में अच्छे परिणाम, ज्ञान में वृद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता प्राप्त होती है।
- रोगों से मुक्ति और उत्तम स्वास्थ्य: दत्तात्रेय की कृपा से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। रोग-दोष दूर होते हैं और दीर्घायु तथा शांतिपूर्ण जीवन प्राप्त होता है।
- मोक्ष की प्राप्ति: दत्तात्रेय मुक्तिदाता हैं, इसलिए इस नामावलि का निरंतर पाठ भक्तों को अंततः मोक्ष के मार्ग पर सुगम बनाता है और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनामावलिः क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनामावलि का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इस नामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनामावलि का स्रोत क्या है?
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