1। ॐ दत्तात्रेयाय नमः
2। ॐ अनघाय नमः
3। ॐ त्रिविधाघविदारिणे नमः
4। ॐ लक्ष्मीरूपानघेशाय नमः
5। ॐ योगाधीशाय नमः
6। ॐ द्रांबीजध्यानगम्याय नमः
7। ॐ विज्ञेयाय नमः
8। ॐ गर्भादितारणाय नमः
9। ॐ दत्तात्रेयाय नमः
10। ॐ बीजस्थवटतुल्याय नमः
11। ॐ एकार्णमनुगामिने नमः
12। ॐ योगसंत्पकराय नमः
13। ॐ षडर्णमनुपालाय नमः
14। ॐ अष्टार्णमनुगम्यान नमः
15। ॐ पूर्णानंदवपुष्मते नमः
16। ॐ द्वादशाक्षरमंत्रस्थाय नमः
17। ॐ आत्मसायुज्यदायिने नमः
18। ॐ षोडशार्णमनुस्थाय नमः
19। ॐ सच्चिदानंदशालिने नमः
20। ॐ दत्तात्रेयाय नमः
21। ॐ हरये नमः
22। ॐ कृष्णाय नमः
23। ॐ उन्मत्ताय नमः
24। ॐ आनंददायकाय नमः
25। ॐ दिगंबराय नमः
26। ॐ मुनये नमः
27। ॐ बालाय नमः
28। ॐ पिशाचाय नमः
29। ॐ ज्ञानसागराय नमः
30। ॐ आब्रह्मजन्मदोषौघप्रणाशाय नमः
31। ॐ सर्वोपकारिणे नमः
32। ॐ मोक्षदायिने नमः
33। ॐ ओंरूपिणे नमः
34। ॐ भगवते नमः
35। ॐ दत्तात्रेयाय नमः
36। ॐ स्मृतिमात्रसुतुष्टाय नमः
37। ॐ महाभयनिवारणाय नमः
38। ॐ महाज्ञानप्रदाय नमः
39। ॐ चिदानंदात्मने नमः
40। ॐ बलोन्मत्तपिशाचादिवेषाय नमः
41। ॐ महायोगिने नमः
42। ॐ अवधूताय नमः
43। ॐ अनुसूयानंदनाय नमः
44। ॐ अत्रिपुत्राय नमः
45। ॐ सर्वकामफलानीकप्रदात्रे नमः
46। ॐ प्रणवाक्षरवेद्याय नमः
47। ॐ भवबंधविमोचिने नमः
48। ॐ ह्रींबीजाक्षरपालाय नमः
49। ॐ सर्वेश्वर्यप्रदायिने नमः
50। ॐ क्रोंबीजजपतुष्टाय नमः
51। ॐ साध्याकर्षणदायिने नमः
52। ॐ सौर्बीजप्रीतमनसे नमः
53। ॐ मनस्संक्षोभहारिणे नमः
54। ॐ ऐंबीजपरितुष्टाय नमः
55। ॐ वाक्प्रदाय नमः
56। ॐ क्लींबीजसमुपास्याय नमः
57। ॐ त्रिजगद्वश्यकारिणे नमः
58। ॐ श्रीमुपासनतुष्टाय नमः
59। ॐ महासंपत्प्रदाय नमः
60। ॐ ग्लौमक्षरसुवेद्याय नमः
61। ॐ भूसाम्राज्यप्रदायिने नमः
62। ॐ द्रांबीजाक्षरवासाय नमः
63। ॐ महते नमः
64। ॐ चिरंजीविने नमः
65। ॐ नानाबीजाक्षरोपास्यनानाशक्तियुजे नमः
66। ॐ समस्तगुणसंपन्नाय नमः
67। ॐ अंतश्शत्रुविदाहिने नमः
68। ॐ भूतग्रहोच्चटनाय नमः
69। ॐ सर्वव्याधिहराय नमः
70। ॐ पराभिचारशमनाय नमः
71। ॐ आधिव्याधिनिवारिणे नमः
72। ॐ दुःखत्रयहराय नमः
73। ॐ दारिद्र्यद्राविणे नमः
74। ॐ देहादार्ढ्यायापोषाय नमः
75। ॐ चित्तसंशोषकारिणे नमः
76। ॐ सर्वमंत्रस्वरूपाय नमः
77। ॐ सर्वयंत्रस्वरूपिणे नमः
78। ॐ सर्वतंत्रात्मकाय नमः
79। ॐ सर्वपल्लवरूपिणे नमः
80। ॐ शिवाय नमः
81। ॐ उपनिषदवेद्याय नमः
82। ॐ दत्ताय नमः
83। ॐ भगवते नमः
84। ॐ दत्तात्रेयाय नमः
85। ॐ महागंभीररूपाय नमः
86। ॐ वैकुंठवासिने नमः
87। ॐ शंखचक्रगदाशूलधारिणे नमः
88। ॐ वेणुनादिने नमः
89। ॐ दुष्टसंहारकाय नमः
90। ॐ शिष्टसंपालकाय नमः
91। ॐ नारायणाय नमः
92। ॐ अस्त्रधराय नमः
93। ॐ चिद्रूपिणे नमः
94। ॐ प्रज्ञारूपाय नमः
95। ॐ आनंदरूपिणे नमः
96। ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः
97। ॐ महावाक्यप्रबोधाय नमः
98। ॐ तत्त्वाय नमः
99। ॐ सकलकर्मौघनिर्मिताय नमः
100। ॐ सच्चिदानंदरूपाय नमः
101। ॐ सकललोकौघसंचाराय नमः
102। ॐ सकलदेवौघवशीकृतिकराय नमः
103। ॐ कुटूंबवृद्धिदाय नमः
104। ॐ गुडपानकतोषिणं नमः
105। ॐ पंचकर्जायसुप्रीताय नमः
106। ॐ कंदफलादिने नमः
107। ॐ सद्गुरवे नमः
108। ॐ श्रीमद्दत्तात्रेयाय नमः ||इति श्री अनघ देवा अष्टोत्तर शतनामावळिः||
अर्थ
श्री अनघ देवा अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान दत्तात्रेय के 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। 'अनघ' शब्द का अर्थ है 'पापरहित' या 'दोषरहित', जो दत्तात्रेय के शुद्ध, निर्मल और सत्य स्वरूप को इंगित करता है। यह नामावलि दत्त भक्तों के लिए भगवान के करीब आने, उनके दिव्य गुणों का स्मरण करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है। प्रत्येक नाम दत्तात्रेय के विभिन्न रूपों, शक्तियों और महिमाओं को प्रकट करता है।
यह नामावलि भगवान दत्तात्रेय के समग्र स्वरूप का वर्णन करती है। उदाहरण के लिए, 'ॐ दत्तात्रेयाय नमः' त्रि-देवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के संयुक्त रूप दत्तात्रेय की स्तुति करता है, जबकि 'ॐ अनघाय नमः' उनके पापरहित और शुद्ध स्वरूप पर जोर देता है। 'ॐ त्रिविधाघविदारिणे नमः' नाम यह दर्शाता है कि दत्तात्रेय तीन प्रकार के पापों (शारीरिक, वाचिक, मानसिक) का नाश करने वाले हैं। इसी तरह, 'ॐ योगाधीशाय नमः' दत्तात्रेय को योग के स्वामी के रूप में प्रस्तुत करता है, जिनकी योग शक्ति भक्तों को आंतरिक शांति और आत्म-साक्षात्कार प्रदान करती है।
इस नामावलि में दत्तात्रेय के ज्ञान स्वरूप, रक्षक स्वरूप और मोक्षदाता के गुणों को देखा जा सकता है। 'ॐ विज्ञेयाय नमः', 'ॐ चिदानंदात्मने नमः', 'ॐ सच्चिदानंदशालिने नमः' जैसे नाम यह बताते हैं कि दत्तात्रेय ज्ञान स्वरूप, चैतन्य स्वरूप और सर्वज्ञ हैं। 'ॐ सर्वव्याधिहराय नमः', 'ॐ आधिव्याधिनिवारिणे नमः', 'ॐ दुःखत्रयहराय नमः' जैसे नाम भक्तों को सभी बीमारियों, मानसिक कष्टों और तीनों प्रकार के दुखों (आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक) से बचाने वाले उनके करुणामयी गुण को उजागर करते हैं। 'ॐ सद्गुरवे नमः' नाम दत्तात्रेय को सभी जीवों के मार्गदर्शक परम गुरु के रूप में सम्मानित करता है।
इस नामावलि का पाठ केवल शब्दों का उच्चारण मात्र नहीं है, बल्कि यह दत्तात्रेय की दिव्य शक्ति से जुड़ने का एक शक्तिशाली आध्यात्मिक अभ्यास है। प्रत्येक नाम एक मंत्र की तरह कार्य करता है, जो मन को शुद्ध करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। गुरुवार, पूर्णिमा या दत्त जयंती जैसे शुभ दिनों में इस नामावलि का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पाठ करते समय 'ॐ' का उच्चारण करके, प्रत्येक नाम के बाद 'नमः' कहकर और अंत में 'ॐ श्री गुरुदेव दत्त' कहकर दत्तात्रेय की पूर्ण कृपा प्राप्त की जा सकती है।
लाभ (Benefits):
- पाप मुक्ति: इस नामावलि के भक्तिपूर्ण पाठ से सभी प्रकार के पाप, दुर्बुद्धि और नकारात्मक कर्म नष्ट होते हैं, जिससे आत्मा शुद्ध होती है।
- स्वास्थ्य और शांति: दत्तात्रेय नामस्मरण शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर कर, आधि-व्याधियों से मुक्ति दिलाकर मन को शांति और सुकून प्रदान करता है।
- ज्ञान और विवेक: यह नामावलि अज्ञानता को दूर कर, आध्यात्मिक ज्ञान, विवेक और सही निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाती है।
- पारिवारिक सुख और समृद्धि: दत्तात्रेय की कृपा से पारिवारिक कलह दूर होते हैं, घर में सामंजस्य, सुख और समृद्धि का वास होता है।
- मोक्ष और आत्म-साक्षात्कार: निरंतर भक्ति और नामस्मरण के माध्यम से भक्त दत्तात्रेय की सद्गुरु कृपा के पात्र बनते हैं, और अंततः आत्म-साक्षात्कार तथा मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री अनघ देवा अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री अनघ देवा अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इस नामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का कितनी बार पाठ करना चाहिए?
श्री अनघ देवा अष्टोत्तर शतनामावलि का उद्गम क्या है?
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