- ॐ छिन्नमस्तायै नमः
- ॐ महाविद्यायै नमः
- ॐ महाभीमायै नमः
- ॐ महोदर्यै नमः
- ॐ चंडेश्वर्यै नमः
- ॐ चंडमात्रे नमः
- ॐ चंडमुंड प्रभंजन्यै नमः
- ॐ महाचंडायै नमः
- ॐ चंडरूपायै नमः
- ॐ चंडिकायै नमः
- ॐ चंडखंडिन्यै नमः
- ॐ क्रोधिन्यै नमः
- ॐ क्रोधजनन्यै नमः
- ॐ क्रोधरूपायै
- ॐ कु ह्यै, कळायै नमः
- ॐ कोपातुरायै नमः
- ॐ कोपयुतायै नमः
- ॐ कोप संहारकारिण्यै नमः
- ॐ वज्रवैरोचनै नमः
- ॐ वज्रायै नमः
- ॐ वज्रकल्पायै नमः
- ॐ डाकिन्यै नमः
- ॐ डाकिनी कर्मनिरतायै नमः
- ॐ डाकिनी कर्मपूजितायै नमः
- ॐ डाकिनीसंग निरतायै नमः
- ॐ डाकिनी प्रेतपूरितायै नमः
- ॐ खट्वांगधारिण्यै नमः
- ॐ खर्वायै नमः
- ॐ खड्गखर्परधारिण्यै नमः
- ॐ प्रेतासनायै नमः
- ॐ प्रेतयुतायै नमः
- ॐ प्रेतसंग विहारिण्यै नमः
- ॐ छिन्नमुंड धरायै नमः
- ॐ छिन्नचंड विद्यायै नमः
- ॐ चित्रिण्यै नमः
- ॐ घोररूपायै नमः
- ॐ घोरदृष्टये नमः
- ॐ घोररावायै नमः
- ॐ घनोदर्यै नमः
- ॐ योगिन्यै नमः
- ॐ योगनिरतायै नमः
- ॐ जपयज्ञ परायणायै नमः
- ॐ योनिचक्रमय्यै नमः
- ॐ योनिर्योनिचक्रप्रवरिन्यै नमः
- ॐ योनि मुद्रायै नमः
- ॐ योनिगम्यायै नमः
- ॐ योनियंत्र निवासिन्यै नमः
- ॐ यंत्ररूपायै नमः
- ॐ यंत्रमय्यै नमः
- ॐ यंत्रेश्यै नमः
- ॐ यंत्रपूजितायै नमः
- ॐ कीर्यै: नमः
- ॐ कपर्दिन्यै नमः
- ॐ काळ्यै नमः
- ॐ कंकाळ्यै नमः
- ॐ कलिहारिण्यै नमः
- ॐ आरक्तायै नमः
- ॐ रक्तनयनायै नमः
- ॐ रक्तपान परायणायै नमः
- ॐ भवान्यै नमः
- ॐ भूतिदायै नमः
- ॐ भूत्यै नमः
- ॐ भूतिधात्र्यै नमः
- ॐ भैरवाचार निरतायै नमः
- ॐ भूतभैरव सेवितायै नमः
- ॐ भैरव्यै नमः
- ॐ भीमायै नमः
- ॐ भीमेश्वर्यै नमः
- ॐ देव्यै नमः
- ॐ भीमनाद परायणायै नमः
- ॐ भवाराध्यायै नमः
- ॐ भवनुतायै नमः
- ॐ भवसागरतारिण्यै नमः
- ॐ भद्रकाळ्यै नमः
- ॐ भद्रतनवे नमः
- ॐ भद्ररूपायै नमः
- ॐ भद्रिकायै नमः
- ॐ भद्ररूपायै नमः
- ॐ महाभद्रायै नमः
- ॐ सुभद्रायै नमः
- ॐ भद्रपालिन्यै नमः
- ॐ सुभव्यायै नमः
- ॐ भव्यवदनायै नमः
- ॐ सुमुख्या नमः
- ॐ सिद्धसेवितायै नमः
- ॐ सिद्धिदायै नमः
- ॐ सिद्धनिवहायै नमः
- ॐ सिद्धायै नमः
- ॐ सिद्ध निषेवितायै नमः
- ॐ शुभदायै नमः
- ॐ शुभगायै नमः
- ॐ शुद्दायै नमः
- ॐ शुद्ध सत्त्वा यै नमः
- ॐ शुभावहमै नमः
- ॐ श्रेष्ठायै नमः
- ॐ दृष्टिमय्यै नमः
- ॐ देव्यै नमः
- ॐ दृष्टि संहारिकारिण्यै नमः
- ॐ शर्वाण्यै नमः
- ॐ सर्वगायै नमः
- ॐ सर्वायै नमः
- ॐ सर्वमंगळकारिण्यै नमः
- ॐ शिवायै नमः
- ॐ शांतायै नमः
- ॐ शांतिरूपायै नमः
- ॐ मृडान्यै नमः
- ॐ मदनातुरायै नमः
- ओंछिन्नमस्तायै नमः
|| श्री छिन्नमस्तादेव्यष्टोत्तर शतनामावळि समाप्तं ||
अर्थ
श्री छिन्नमस्ता देवी अष्टोत्तर शतनामावली, दस महाविद्याओं में से एक, उग्र स्वरूपिणी देवी छिन्नमस्ता को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। यह नामावली देवी के विभिन्न गुणों, शक्तियों और दिव्य लीलाओं का गुणगान करती है। तांत्रिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली छिन्नमस्ता देवी, अपने कटे हुए सिर से बहते रक्त को स्वयं पीते हुए और अपनी दो सहचरी, डाकिनी और वर्णिनी को भी प्रदान करते हुए एक भीषण रूप में प्रकट होती हैं। यह आत्म-बलिदान, अहंकार के त्याग और सृष्टि-स्थिति-लय के निरंतर चक्र का प्रतीक है।
इस नामावली का पाठ केवल देवी के गुणों का बखान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागृति का एक मार्ग भी है। छिन्नमस्ता देवी अहंकार को विखंडित करने, इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त करने और प्राणशक्ति को उन्नत करने की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनका स्वयं-बलिदान लौकिक बंधनों से मुक्ति, मृत्यु पर विजय और कुंडलिनी शक्ति के जागरण का सूचक है। नामावली का प्रत्येक नाम देवी की एक विशिष्ट शक्ति या गुण को प्रकट करता है, जो भक्तों को गहन आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। यह भौतिक शरीर और मन की सीमाओं से परे जाने का मार्ग प्रशस्त करता है।
नामावली में आने वाला 'ॐ छिन्नमस्तायै नमः' देवी के मूल स्वरूप की स्तुति करता है – अर्थात्, जिनका सिर कटा हुआ है। 'ॐ महाविद्यायै नमः' उनके परम ज्ञान के स्वरूप को दर्शाता है। 'ॐ महाभीमायै नमः' उनकी भयंकर शक्ति को उजागर करता है, जबकि 'ॐ चण्डेश्वर्यै नमः' और 'ॐ चण्डरूपायै नमः' उनके उग्र और प्रचंड स्वरूप का वर्णन करते हैं, जो दुष्ट शक्तियों का नाश करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। 'ॐ क्रोधिन्यै नमः' और 'ॐ कोपसंहारकारिण्यै नमः' नाम उनके क्रोध और उस क्रोध के माध्यम से दुष्टों का संहार कर शांति स्थापित करने के गुण को व्यक्त करते हैं। 'ॐ वज्रवैरोचनै नमः' उनकी वज्र के समान दृढ़ संकल्प और शक्ति का सूचक है, जो बौद्ध वज्रयान परंपरा से उनके संबंध को भी दर्शाता है। 'ॐ डाकिन्यै नमः' और 'ॐ डाकिनी कर्मनिरतायै नमः' नाम उनकी सहचरी डाकिनी के साथ उनके संबंध और तांत्रिक अनुष्ठानों में उनकी भूमिका को स्पष्ट करते हैं। 'ॐ खट्वांगधारिण्यै नमः' उनके हाथ में खट्वांग (एक प्रकार का दण्ड) को इंगित करता है, जो काल और मृत्यु पर उनके नियंत्रण का प्रतीक है।
लाभ (Benefits):
- **शत्रु भय से मुक्ति:** छिन्नमस्ता देवी का उग्र स्वरूप शत्रुओं, नकारात्मक शक्तियों और आंतरिक भयों से रक्षा करता है, मन में साहस और धैर्य भरता है।
- **ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति:** महाविद्या के रूप में, देवी परम ज्ञान और विवेक प्रदान करती हैं, अज्ञानता को दूर कर सत्य का बोध कराती हैं।
- **बाधाओं का निवारण:** जीवन में आने वाली बाधाओं, संकटों और चुनौतियों को दूर करने के लिए देवी शक्ति प्रदान करती हैं, विघ्नों को हरने में सहायता करती हैं।
- **आध्यात्मिक उन्नति:** अहंकार के त्याग और आत्म-बलिदान की प्रतीक छिन्नमस्ता देवी की आराधना भक्तों को मोक्ष और आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर प्रगति करने में मदद करती है।
- **प्राणशक्ति पर नियंत्रण:** देवी प्राणशक्ति को नियंत्रित करने की क्षमता प्रदान करती हैं, कुंडलिनी जागरण में सहायक होती हैं और आंतरिक ऊर्जा को बढ़ाती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री छिन्नमस्ता देवी अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
छिन्नमस्ता देवी अष्टोत्तर शतनामावली के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
यह स्तोत्र किसे पढ़ना चाहिए?
इस नामावली का कितनी बार पाठ करना चाहिए?
छिन्नमस्ता देवी अष्टोत्तर शतनामावली का उद्गम क्या है?
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