श्री बगळामुखी वर्ण कवचं
अस्य श्रीबगळामुखीवर्णकवचस्य श्रीपरमेश्वरऋषिः अनुष्टुप् छंदः श्रीबगलामुखी देवता ॐ बीजं ह्लीं शक्तिः स्वाहा कीलकं बगळाप्रसाद सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः |
ध्यानं |
जिह्वाग्रमादाय करेण देवीं
वामेन शत्रून् परिपीडयंतीं |
गदाभिघातेन च दक्षिणेन
पीतांबराढ्यां द्विभुजां नमामि ||
कवचं |
प्रणवो मे शिरः पातु ललाटे ह्लीं सदाऽवतु |
बकारो भ्रूयुगं पातु गकारः पातु लोचने || 1 ||
लकारः पातु मे जिह्वां मुकारं पातु मे श्रुतिं |
खिकारं पातु मे तालु सकारं चिबुकं तथा || 2 ||
वकारः पातु मे कंठं स्कंधौ पातु दकारकः |
बाहू ष्टकारकः पातु करौ पातु नकारकः || 3 ||
स्तनौ वकारकः पातु चकारो हृदयं मम |
मकारः पातु मे नाभौ खकारो जठरं मम || 4 ||
कुक्षिं पकारकः पातु दकारः पातु मे कटिं |
स्तकारो जघनं पातु भकारः पातु मे गुदं || 5 ||
गुह्यं यकारकः पातु जकारोऽवतु जानुनी |
ऊरू ह्वकारकः पातु गुल्फौ पातु ककारकः || 6 ||
पादौ लकारकः पातु यकारो स्छिति सर्वदा |
बुकारः पातु रोमाणि धिकारस्तु त्वचं तथा || 7 ||
विकारः पातु सर्वांगे नकारः पातु सर्वदा |
प्राच्यां शकारकः पातु दक्षिणाश्यां यकारकः || 8 ||
वारुणीं ह्लीं सदा पातु कौबेर्यां प्रणवेन तु |
भूमौ स्वकारकः पातु हकारोर्ध्वं सदाऽवतु || 9 ||
ब्रह्मास्त्रदेवता पातु सर्वांगे सर्वसंधिषु |
इति ते कथितं देवि दिव्यमक्षरपंजरं || 10 ||
आयुरारोग्य सिद्ध्यर्थं महदैश्वर्यदायकं |
लिखित्वा ताडपत्रे तु कंठे बाहौ च धारयेत् || 11 ||
देवासुरपिशाचेभ्यो भयं तस्य न हि क्वचित् |
कर्मणेन संदर्शो त्रिषुलोकेषु सिद्ध्यते || 12 ||
महाभये राजे तु शतवारं पठेद्यहं |
गृहे रणे विवादे च सर्वापत्ति विमुच्यते || 13 ||
एतत्कवचमज्ञात्वा यो ब्रह्मास्त्रमुपासते |
न तस्य सिद्ध्यते मंत्रः कल्पकोटिशतैरपि || 14 ||
इति श्री ईश्वरपार्वतिसंवादे बगळावर्णकवचं संपूर्णं |
अर्थ
श्री बगळामुखी वर्ण कवचं भगवती बगळामुखी देवी की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए रचा गया एक अत्यंत पवित्र कवच स्तोत्र है। यह केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि वर्णों (अक्षरों) के आधार पर शरीर के प्रत्येक अंग को दैवी शक्ति से आच्छादित करने वाला एक शक्तिशाली रक्षा कवच है। ये वर्ण देवी के बीजरूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भक्त के भीतर मौजूद दुर्भाग्य, शत्रु संकल्प, दुष्ट प्रेरणा और दुर्बुद्धि जैसी नकारात्मक शक्तियों को दूर करने वाली प्राणशक्ति के रूप में कार्य करते हैं। इस कवच का पाठ भक्त के मन, शरीर और प्राणों को दैवी सुरक्षा के घेरे में रखता है।
इस कवच के ध्यान में, भक्त पीताम्बर धारण किए हुए, शत्रुओं की जिह्वा को अपने बाएं हाथ में पकड़े हुए और दाहिने हाथ में गदा धारण कर उन्हें पीड़ा देती हुई द्विभुजा देवी का ध्यान करता है। यह शत्रु की हानिकारक वाणी और क्रियाओं को स्तम्भित करने की देवी की शक्ति का प्रतीक है। इस भावना के साथ किया गया पाठ भक्त के भीतर देवी की शक्ति को स्थापित करता है। कवच के प्रत्येक श्लोक में शरीर के विशिष्ट अंग की रक्षा के लिए एक विशिष्ट वर्ण को नियुक्त किया गया है। जैसे, 'ॐ' सिर की, 'ह्लीं' ललाट की, 'ग' नेत्रों की, 'ल' जिह्वा की, 'च' हृदय की और 'म' नाभि की रक्षा करता है। इस प्रकार, यह शरीर के संपूर्ण अंगों को देवी की शक्ति से आच्छादित कर एक पूर्ण रक्षा चक्र बनाता है।
यह वर्ण कवच दुष्ट शक्तियों, बुरी सोच, अशुभ दृष्टियों, आकस्मिक विपत्तियों और अघोर शक्तियों से संपूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है। यह सूक्ष्म शरीर के लिए एक आध्यात्मिक कवच का निर्माण करता है, जो बाहरी नकारात्मक प्रभावों को रोकता है। केवल पाठ ही नहीं, बल्कि इस कवच को ताड़पत्र पर लिखकर गले या भुजा में धारण करने से भी दिव्य सुरक्षा बनी रहती है, जैसा कि फलश्रुति में बताया गया है।
फलश्रुति के अनुसार, इस कवच का भक्तिपूर्वक पाठ करने या धारण करने वाले भक्त को कोई दुष्ट शक्ति, पिशाच, असुर या तांत्रिक प्रभाव परेशान नहीं कर सकता। राजदरबार, युद्धभूमि, विवादों, न्यायालयी मामलों, पारिवारिक कलह और गृह-व्यापार संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि बगळामुखी ब्रह्मास्त्र जप करने वालों के लिए इस कवच के ज्ञान के बिना जप का फल मिलना कठिन है। यह बगळामुखी साधना में इस कवच के महत्व को रेखांकित करता है, जो भक्त को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है।
लाभ (Benefits):
- शत्रु स्तम्भन: दुष्ट शक्तियों, शत्रुओं के वचन, बुद्धि और क्रियाओं को स्तम्भित करके उनके नकारात्मक प्रभाव से रक्षा करता है।
- पूर्ण सुरक्षा: अघोर शक्तियों, पिशाच, असुर प्रभावों और तांत्रिक प्रयोगों से पूर्ण निवारण और सुरक्षा प्रदान करता है।
- विजय प्राप्ति: युद्ध, विवाद, न्यायालयी मामलों और अन्य प्रतिस्पर्धाओं में विजय दिलाता है।
- शारीरिक व मानसिक रक्षा: शरीर के प्रत्येक अंग के लिए रक्षा कवच बनाता है, भय, विपत्ति और आकस्मिक परेशानियों से बचाता है।
- समग्र विकास: स्वास्थ्य, दीर्घायु, ऐश्वर्य, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है, जीवन में स्थिरता लाता है।
- दिव्य अनुग्रह: कवच धारण के माध्यम से निरंतर दिव्य सुरक्षा प्राप्त करने और बगळामुखी देवी के अनुग्रह का पात्र बनने में सहायता करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री बगळामुखी वर्ण कवचं क्या है?
इस कवच का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री बगळामुखी वर्ण कवचं का पाठ करने के मुख्य लाभ क्या हैं?
इस कवच का पाठ कौन कर सकता है?
इस कवच का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री बगळामुखी वर्ण कवचं का उद्गम या स्रोत क्या है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
