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श्री बगळामुखि अष्टोत्तरशतनामावळिः

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अष्टोत्तर108 नाम
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  1. ॐ बगळायै नमः
  2. ॐ विष्णुवनितायै नमः
  3. ॐ विष्णुशंकरभामिन्यै नमः
  4. ॐ बहुळायै नमः
  5. ॐ देवमातायै नमः
  6. ॐ महाविष्णु पसुरवे नमः
  7. ॐ महामत्स्यायै नमः
  8. ॐ महाकूर्मायै नमः
  9. ॐ महावारूपिण्यै नमः
  10. ॐ नरसिंहप्रियायै नमः
  11. ॐ रम्यायै नमः
  12. ॐ वामनायै नमः
  13. ॐ वटुरूपिण्यै नमः
  14. ॐ जामदग्न्यस्वरूपायै नमः
  15. ॐ रामायै नमः
  16. ॐ रामप्रपूजितायै नमः
  17. ॐ कृष्णायै नमः
  18. ॐ कपर्दिन्यै नमः
  19. ॐ कृत्यायै नमः
  20. ॐ कलहायै नमः
  21. ॐ विकारिण्यै नमः
  22. ॐ बुद्धिरूपायै नमः
  23. ॐ बुद्धभार्यायै नमः
  24. ॐ बौद्धपाषंडखंडिन्यै नमः
  25. ॐ कल्किरूपायै नमः
  26. ॐ कलिहरायै नमः
  27. ॐ कलिदुर्गति नाशिन्यै नमः
  28. ॐ कोटि सूर्यप्रतीकाशायै नमः
  29. ॐ कोटि कंदर्पमोहिन्यै नमः
  30. ॐ केवलायै नमः
  31. ॐ कठिनायै नमः
  32. ॐ काळ्यै नमः
  33. ॐ कलायै नमः
  34. ॐ कैवल्यदायिन्यै नमः
  35. ॐ केशव्यै नमः
  36. ॐ केशवाराध्यायै नमः
  37. ॐ किशोर्यै नमः
  38. ॐ केशवस्तुतायै नमः
  39. ॐ रुद्ररूपायै नमः
  40. ॐ रुद्रमूर्त्यै नमः
  41. ॐ रुद्राण्यै नमः
  42. ॐ रुद्रदेवतायै नमः
  43. ॐ नक्षत्ररूपायै नमः
  44. ॐ नक्षत्रायै नमः
  45. ॐ नक्षत्रेशप्रपूजितायै नमः
  46. ॐ नक्षत्रेशप्रियायै नमः
  47. ॐ सीतायै नमः
  48. ॐ नक्षत्रपति वंदितायै नमः
  49. ॐ नादिन्यै नमः
  50. ॐ नागजनन्यै नमः
  51. ॐ नागराज प्रवंदितायै नमः
  52. ॐ नागेश्वर्यै नमः
  53. ॐ नागकन्यायै नमः
  54. ॐ नागर्यै नमः
  55. ॐ नगात्मजायै नमः
  56. ॐ नगाधिराज तनयायै नमः
  57. ॐ नगराज प्रपूजितायै नमः
  58. ॐ नवीनायै नमः
  59. ॐ नीरदायै नमः
  60. ॐ पीतायै नमः
  61. ॐ श्यामायै नमः
  62. ॐ सौंदर्यकारिण्यै नमः
  63. ॐ रक्तायै नमः
  64. ॐ नीलायै नमः
  65. ॐ घनायै नमः
  66. ॐ शुभ्रायै नमः
  67. ॐ श्वेतायै नमः
  68. ॐ सौभाग्यदायिन्यै नमः
  69. ॐ सुंदर्यै नमः
  70. ॐ सौखिगायै नमः
  71. ॐ सौम्यायै नमः
  72. ॐ स्वर्णाभायै नमः
  73. ॐ स्वर्गति प्रदायै नमः
  74. ॐ रिपुत्रासकर्यै नमः
  75. ॐ रेखायै नमः
  76. ॐ शत्रुसंहारकारिण्यै नमः
  77. ॐ भामिन्यै नमः
  78. ॐ मायास्तंभिन्यै नमः
  79. ॐ मोहिन्यै, शुभायै नमः
  80. ॐ रागद्वेषकर्यै, रात्र्यै नमः
  81. ॐ रौरवध्वंसकारिण्यै नमः
  82. ॐ यक्षिणीसिद्धनिवहायै नमः
  83. ॐ सिद्धेशायै नमः
  84. ॐ सिद्धिरूपिण्यै नमः
  85. ॐ लंकापतिध्वंसकर्यै नमः
  86. ॐ लंकेशरिपुवंदितायै नमः
  87. ॐ लंकानाथकुलहरायै नमः
  88. ॐ महारावण हारिण्यै नमः
  89. ॐ देवदानवसिद्धौघपूजितायै नमः
  90. ॐ परमेश्वर्यै नमः
  91. ॐ पराणुरूपायै नमः
  92. ॐ परमायै नमः
  93. ॐ परतंत्र विनाशिन्यै नमः
  94. ॐ वरदायै नमः
  95. ॐ वरदाराध्यायै नमः
  96. ॐ वरदानपरायणायै नमः
  97. ॐ वरदेश प्रियायै नमः
  98. ॐ वीरायै नमः
  99. ॐ वीरभूषण भूषितायै नमः
  100. ॐ वसुदायै, बहुदायै नमः
  101. ॐ वाण्यै, ब्रह्मरूपायै नमः
  102. ॐ वराननायै नमः
  103. ॐ बलदायै नमः
  104. ॐ पीतवसनायै नमः
  105. ॐ पीतभूषण भूषितायै नमः
  106. ॐ पीतपुष्पप्रियायै नमः
  107. ॐ पीतहारायै नमः
  108. ॐ पीतस्वरूपिण्यै नमः

|| इति श्री बगळामुखि अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं  ||

अर्थ

श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलि दस महाविद्याओं में आठवीं, श्री बगलामुखी देवी की स्तुति करने वाले 108 पवित्र नामों का संग्रह है। तंत्र शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण देवियों में से एक, बगलामुखी देवी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री हैं, जो भक्तों के शत्रुओं, दुष्ट शक्तियों, वाद-विवादों और नकारात्मक प्रभावों को स्तंभित कर उन्हें विजय और सुरक्षा प्रदान करती हैं। यह नामावलि देवी के विभिन्न दिव्य रूपों, शक्तियों, गुणों और लीलाओं का संक्षेप में किंतु गहनता से वर्णन करती है, जिससे भक्तों को उनकी सर्वव्यापकता को समझने में सहायता मिलती है।

इस नामावलि का पाठ केवल देवी के नामों का उच्चारण करना ही नहीं, बल्कि उनकी दिव्य शक्ति के साथ संबंध स्थापित करने का एक शक्तिशाली आध्यात्मिक मार्ग है। प्रत्येक नाम देवी के एक अद्वितीय गुण का प्रतिनिधित्व करता है और भक्तों को उस नाम के माध्यम से देवी की कृपा प्राप्त करने में सहायता करता है। इस नामावलि के नियमित पाठ से मन को शांति, समृद्धि, साहस और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह भक्तों के जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर सुख-समृद्धि लाती है, ऐसी मान्यता है।

नामावलि की शुरुआत 'ॐ बगळायै नमः' मूल नाम से होती है, जिसके बाद देवी को 'विष्णुवनिता' (विष्णु की प्रिय), 'विष्णुशंकरभामिनी' (विष्णु और शंकर की पत्नी) के रूप में वर्णित किया गया है, जो यह दर्शाता है कि संपूर्ण सृष्टि के पालन और संहार की मूल शक्ति वही हैं। देवी महाविष्णु के विभिन्न अवतारों जैसे मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम (जामदग्न्यस्वरूपा), राम और कृष्ण की प्रिय रही हैं, उनकी शक्ति के रूप में उनके कार्यों को पूरा करने वाली रही हैं। यह स्पष्ट करता है कि देवी केवल स्तंभनकारिणी ही नहीं, बल्कि धर्म संस्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सभी देवताओं की शक्ति स्वरूपिणी हैं।

'बुद्धिरूपा', 'बुद्धभार्या' जैसे नाम यह दर्शाते हैं कि वे ज्ञान और विवेक की देवी हैं, जबकि 'बौद्धपाषण्डखण्डिनी' उनकी अधर्म और गलत तर्कों को नष्ट करने की अपार शक्ति को उजागर करता है। 'कल्किरूपा', 'कलिहरा', 'कलिदुर्गति नाशिनी' जैसे नाम कलियुग की दुष्ट शक्तियों और दुर्गतियों से भक्तों की रक्षा करने की उनकी क्षमता का वर्णन करते हैं। 'कोटि सूर्यप्रतीकाशा' और 'कोटि कंदर्पमोहिनी' जैसे नाम उनके अपार तेज और सौंदर्य का वर्णन करते हैं। अंततः 'कैवल्यदायिनी' नाम मोक्ष प्रदान करने वाली उनकी परम शक्ति का उद्घोष करता है, जो यह स्पष्ट करता है कि देवी भौतिक और आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करने वाली हैं।

लाभ (Benefits):

  • शत्रु भय निवारण: श्री बगलामुखी देवी की नामावलि के पाठ से शत्रुओं से होने वाली परेशानियों, दुष्ट शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों से पूर्ण सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • वाद-विवादों में विजय: कानूनी मामलों, वाद-विवादों, प्रतियोगी परीक्षाओं या किसी भी प्रतिस्पर्धी स्थिति में दैवीय सहायता से विजय प्राप्त होती है।
  • स्तंभन शक्ति: देवी की कृपा से नकारात्मक शक्तियों, दुष्ट वाणी और विरोधियों के षड्यंत्रों को निष्क्रिय करने, उनकी गतिविधियों को रोकने की शक्ति प्राप्त होती है।
  • ज्ञान और बुद्धि वृद्धि: चूंकि देवी बुद्धि की स्वरूपिणी हैं, इस नामावलि का पाठ ज्ञान, विवेक और सही निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष: इस नामावलि का निरंतर और श्रद्धापूर्वक पाठ आध्यात्मिक प्रगति में सहायता करता है, मानसिक शांति लाता है और अंततः मोक्ष प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलि क्या है?
यह दस महाविद्याओं में से एक, श्री बगलामुखी देवी की स्तुति करने वाले 108 पवित्र नामों का संग्रह है। यह नामावलि देवी के विभिन्न रूपों, शक्तियों और गुणों का वर्णन करती है।
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ प्रतिदिन शुद्ध मन से, स्नान के बाद, देवी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाकर किया जा सकता है। विशेष रूप से मंगलवार और गुरुवार को पाठ करना अधिक शुभ होता है।
श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलि पाठ के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इस नामावलि के पाठ से शत्रु भय निवारण, वाद-विवादों में विजय, नकारात्मक शक्तियों का स्तंभन, ज्ञान में वृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह सभी बाधाओं को दूर करती है।
कौन इस नामावलि का पाठ कर सकता है?
जो लोग शत्रुओं से पीड़ित हैं, कानूनी लड़ाई में विजय चाहते हैं, या आध्यात्मिक रूप से प्रगति करना चाहते हैं, ऐसे भक्त श्रद्धापूर्वक इसका पाठ कर सकते हैं।
इस नामावलि का कितनी बार पाठ करना चाहिए?
सामान्यतः प्रतिदिन एक बार या 11, 21, 51, 108 बार पाठ करना शुभ माना जाता है। इसे अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार पढ़ा जा सकता है।
श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावलि का उद्गम क्या है?
यह नामावलि तंत्रशास्त्र और प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों में उल्लिखित है। दस महाविद्याओं के भाग के रूप में, यह बगलामुखी देवी की आराधना का एक महत्वपूर्ण अंग है।

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