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भूपाळी आरती

संपादन: अद्यतन
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भूपाळी आरती

– 1। उठा उठा –

उठा उठा सकळ जन वाचे स्मरावा गजानन
गौरीहराचा नंदन गजवदन गणपती || उठा उठा ||

ध्यानि आणुनी सुखमूर्ती, स्तवन करा एके चित्ती
तो देईल ज्ञानमूर्ती मोक्ष सुख सोज्वळ || उठा उठा ||

जो निजभक्तांचा दाता, वंद्य सुरवरां समस्ता
त्यासी गाता भवभय चिंता, विघ्नवार्ता निवारी || उठा उठा ||

तो हा सुखाचा सागर, श्री गणराज मोरेश्वर
भावे विनवितो गिरिधर, भक्त त्याचा होउनी || उठा उठा ||

– 2। घनश्याम सुंदरा –

घनश्याम सुंदरा श्रीधरा अरुणोदय झाला
उठिँ लवकरी वनमाली उदयाचळीँ मित्र आला || घनश्याम ||

आनंदकंदा प्रभात झाली उठि सरली राती
काढिँ धार क्षीरपात्र घेउनि धेनू हंबरती
लक्षिताति वाँसुरेँ हरी धेनुस्तनपानाला
उठिँ लवकरी वनमाली उदयाचळीँ मित्र आला || घनश्याम ||

सायंकाळीँ एकेमेळीँ द्विजगण अवघे वृक्षीँ
अरुणोदय होतांच उडाले चरावया पक्षी
प्रभातकाळीँ उठुनि कावडी तीर्थपथ लक्षी
करुनि सडासंमार्जन गोपी कुंभ घेउनि कुक्षीँ
यमुनाजळासि जाति मुकुंदा दध्योदन भक्षीँ || घनश्याम ||

– 3। ॐ जय जगदीश हरे –

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामि जय जगदीश हरे
भक्त जनोँ के संकट
दास जनोँ के संकट
क्षण मे दूर् करे
ॐ जय जगदीश हरे ||

जो ध्यावे फल् पावे
दुख् बिनसे मन् का
स्वामि दुख् बिनसे मन् का
सुख संपति घर् आवे
सुख संपति घर् आवे
कष्ट मिटे तन् का
ॐ जय जगदीश हरे ||

मात पिता तुं मेरे
शरण पडूँ मैँ किस् की
स्वामि शरण कहूँ मैँ किस् की
तुं बिन और् न दूजा
प्रभु बिन और् न दूजा
आस् करूँ मेँ किस् की
ॐ जय जगदीश हरे ||

तुं पूरण् परमात्मा
तुं अंतरयामि
स्वामि तुं अंतरयामि
परब्रह्म परमेश्वर
परब्रह्म परमेश्वर
तुं सब् के स्वामी
ॐ जय जगदीश हरे ||

तुं करुणा के सागर्
तुं पालन् कर्ता
स्वामि तुं पालन् कर्ता
मैँ मूरख् खल् कामी
मैँ सेवक् तुं स्वामी
कृपा करो भर्ता
ॐ जय जगदीश हरे ||

विषय विकार् मिटावो
पाप् हरो देवा
स्वामि पाप् हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढावो
श्रद्धा भक्ति बढावो
संतन् की सेवा
ॐ जय जगदीश हरे ||

तन् मन् धन् सब् (है) तेरा
स्वामि सब् कुच् है तेरा
स्वामि सब् कुच् है तेरा
तेरा तुज् को अर्पण्
तेरा तुज् को अर्पण्
क्या लागे मेरा
ॐ जय जगदीश हरे ||ॐ श्रीसच्चिदानंद सद्गुरु सायिनाथ महाराज् की जै||

अर्थ

शिरडी साईं भूपाली आरती शिरडी साईं बाबा के भक्तों द्वारा प्रतिदिन सुबह गाई जाने वाली एक अत्यंत पवित्र और भावपूर्ण प्रार्थना है। 'भूपाली' हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक राग है, जिसे विशेष रूप से भोर के समय गाया जाता है ताकि मन को शांति और सकारात्मकता से भरा जा सके। यह आरती केवल एक गीत नहीं, बल्कि भगवान के साथ गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने का एक माध्यम है, जो भक्तों को दिन की शुरुआत ईश्वर के स्मरण और आशीर्वाद के साथ करने के लिए प्रेरित करती है। साईं बाबा की दिव्य उपस्थिति का स्मरण करते हुए, यह आरती मन को असीम शांति प्रदान करती है।

यह आरती 'उठा उठा' नामक गणेश वंदना के साथ आरंभ होती है। यह भक्तों को जागृत होने, अपने मन को शुद्ध करने और गजानन (गणेश) का स्मरण करने का आह्वान करती है। गणेश को ज्ञान और मोक्ष प्रदान करने वाला, तथा भक्तों के सभी विघ्नों और चिंताओं को दूर करने वाला बताया गया है। इसके पश्चात, 'घनश्याम सुंदरा' नामक खंड में भगवान श्रीकृष्ण (घनश्याम) की महिमा का गुणगान किया गया है। भोर का उदय, प्रकृति की सुंदरता, गायों का रंभाना, पक्षियों का कलरव—ये सभी भगवान की सर्वव्यापी उपस्थिति का संकेत देते हैं। यह भाग प्रकृति में ईश्वर का दर्शन करने की गहरी भक्ति भावना को व्यक्त करता है।

अंत में, 'ॐ जय जगदीश हरे' एक सार्वभौमिक प्रार्थना है जो भक्तों के दुखों को दूर करने वाले, घरों में समृद्धि लाने वाले और शरण देने वाले जगदीश्वर की जय-जयकार करती है। ये सभी खंड मिलकर भक्तों को दैनिक जीवन में आध्यात्मिक रूप से जागृत करने, बाधाओं को दूर करने, शांति प्राप्त करने और अंततः भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह भक्ति, विश्वास और समर्पण पर जोर देती है, जो शिरडी साईं बाबा की शिक्षाओं का सार है।

इस भूपाली आरती का प्रतिदिन सुबह पाठ करने से मन को असीम शांति और स्थिरता मिलती है। यह नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर कर सकारात्मक स्पंदनों को बढ़ाती है। साईं बाबा की दिव्य शक्ति भक्तों को घेरे रहती है और उनके दिन को शुभ बनाती है। यह आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देती है और भक्तों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती है। सामूहिक रूप से इस आरती का गान करने से भक्ति और भाईचारे की भावना सुदृढ़ होती है।

लाभ (Benefits):

  • मानसिक शांति और संतोष: इस आरती का पाठ करने से मन शांत होता है और पूरे दिन सकारात्मक विचार बने रहते हैं।
  • आध्यात्मिक जागृति: भगवान के स्मरण से आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ता है और आत्म-चिंतन की प्रेरणा मिलती है।
  • बाधाओं का निवारण: गणेश स्तुति जीवन की बाधाओं को दूर कर कार्यों में सफलता प्राप्त करने में सहायता करती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: सुबह के शुभ समय में इस आरती का गान करने से आसपास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर जाती है।
  • साईं बाबा का आशीर्वाद: शिरडी साईं भूपाली आरती बाबा के प्रेम और आशीर्वाद को आकर्षित करती है, जिससे भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिरडी साईं भूपाली आरती क्या है?
शिरडी साईं भूपाली आरती शिरडी साईं बाबा को समर्पित एक सुबह की भक्तिपूर्ण प्रार्थना है। यह भक्तों को आध्यात्मिक रूप से जागृत करने और दिन की शुरुआत भगवान के स्मरण के साथ करने के लिए प्रेरित करती है। इसमें गणेश और श्रीकृष्ण की स्तुतियाँ भी शामिल हैं।
इस आरती का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस आरती का पाठ प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनकर, साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर और धूप करके भक्तिपूर्वक इसका गान करना चाहिए।
शिरडी साईं भूपाली आरती के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस आरती का पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक जागृति, बाधाओं का निवारण और सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि होती है। साईं बाबा के आशीर्वाद से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
शिरडी साईं भूपाली आरती का पाठ कौन कर सकता है?
साईं बाबा में विश्वास और श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति, बिना किसी लिंग भेद के, इस आरती का पाठ कर सकता है। भक्ति और श्रद्धा ही सबसे महत्वपूर्ण है।
इस आरती का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः, प्रतिदिन सुबह एक बार पाठ करना पर्याप्त होता है। हालांकि, व्यक्तिगत भक्ति और समय की उपलब्धता के अनुसार अधिक बार भी पाठ किया जा सकता है। मुख्य बात मन में भक्ति भाव होना है।
शिरडी साईं भूपाली आरती का उद्भव कहाँ से हुआ?
भूपाली आरती हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के भूपाली राग पर आधारित है। शिरडी साईं बाबा के भक्तों ने इसे बाबा की दैनिक पूजा विधियों में शामिल किया है, विशेष रूप से सुबह की काकड़ आरती के एक भाग के रूप में इसका पाठ किया जाता है।

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