- ॐ श्री भुवनेश्वर्यै नमः
- ॐ राजेश्वर्यै नमः
- ॐ राजराजेश्वर्यै नमः
- ॐ कामेश्वर्यै नमः
- ॐ बालात्रिपुरसुंदर्यै नमः
- ॐ सर्वैश्वर्यै नमः
- ॐ कळ्याणैश्वर्यै नमः
- ॐ सर्वसंक्षोभिण्यै नमः
- ॐ सर्वलोक शरीरिण्यै नमः
- ॐ सौगंधिकमिळद्वेष्ट्यै नमः
- ॐ मंत्रिण्यै नमः
- ॐ मंत्ररूपिण्यै नमः
- ॐ प्रकृत्यै नमः
- ॐ विकृत्यै नमः
- ॐ आदित्यै नमः
- ॐ सौभाग्यवत्यै नमः
- ॐ पद्मावत्यै नमः
- ॐ भगवत्यै नमः
- ॐ श्रीमत्यै नमः
- ॐ सत्यवत्यै नमः
- ॐ प्रियकृत्यै नमः
- ॐ मायायै नमः
- ॐ सर्वमंगळायै नमः
- ॐ सर्वलोकमॊहनाधीशान्यै नमः
- ॐ किंकरी भूत गीर्वाण्यै नमः
- ॐ परब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः
- ॐ पुराणागम रूपिण्यै नमः
- ॐ पंच प्रणव रूपिण्यै नमः
- ॐ सर्व ग्रह रूपिण्यै नमः
- ॐ रक्त गंध कस्तूरी विले पन्यै नमः
- ॐ नायक्यै नमः
- ॐ शरण्यायै नमः
- ॐ निखिलविद्येश्वर्यै नमः
- ॐ जनेश्वर्यै नमः
- ॐ भुतेश्वर्यै नमः
- ॐ सर्वसाक्षिण्यै नमः
- ॐ क्षेमकारिण्यै नमः
- ॐ पुण्यायै नमः
- ॐ सर्व रक्षण्यै नमः
- ॐ सकल धारिण्यै नमः
- ॐ विश्व कारिण्यै नमः
- ॐ स्वरमुनिदेवनुतायै नमः
- ॐ सर्वलोकाराध्यायै नमः
- ॐ पद्मासनासीनायै नमः
- ॐ योगीश्वरमनोध्येयायै नमः
- ॐ चतुर्भुजायै नमः
- ॐ सर्वार्धसाधनाधीशायै नमः
- ॐ पूर्वायै नमः
- ॐ नित्यायै नमः
- ॐ परमानंदयै नमः
- ॐ कळायै नमः
- ॐ अनाघायै नमः
- ॐ वसुंधरायै नमः
- ॐ शुभप्रदायै नमः
- ॐ त्रिकालज्ञानसंपन्नायै नमः
- ॐ पीतांबरधरायै नमः
- ॐ अनंतायै नमः
- ॐ भक्तवत्सलायै नमः
- ॐ पादपद्मायै नमः
- ॐ जगत्कारिण्यै नमः
- ॐ अव्ययायै नमः
- ॐ लीलामानुष विग्रहायै नमः
- ॐ सर्वमयायै नमः
- ॐ मृत्युंजयायै नमः
- ॐ कोटिसूर्य समप्रबायै नमः
- ॐ पवित्रायै नमः
- ॐ प्राणदायै नमः
- ॐ विमलायै नमः
- ॐ महाभूषायै नमः
- ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः
- ॐ पद्मलयायै नमः
- ॐ सधायै नमः
- ॐ स्वंगायै नमः
- ॐ पद्मराग किरीटिन्यै नमः
- ॐ सर्वपाप विनाशिन्यै नमः
- ॐ सकलसंपत्प्रदायिन्यै नमः
- ॐ पद्मगंधिन्यै नमः
- ॐ सर्वविघ्न केश द्वंसिन्यै नमः
- ॐ हेममालिन्यै नमः
- ॐ विश्वमूर्यै नमः
- ॐ अग्नि कल्पायै नमः
- ॐ पुंडरीकाक्षिण्यै नमः
- ॐ महाशक्यैयै नमः
- ॐ बुद्धायै नमः
- ॐ भूतेश्वर्यै नमः
- ॐ अदृश्यायै नमः
- ॐ शुभेक्षणायै नमः
- ॐ सर्वधर्मिण्यै नमः
- ॐ प्राणायै नमः
- ॐ श्रेष्ठायै नमः
- ॐ शांतायै नमः
- ॐ तत्त्वायै नमः
- ॐ सर्व जनन्यै नमः
- ॐ सर्वलोक वासिन्यै नमः
- ॐ कैवल्यरेखावल्यै नमः
- ॐ भक्त पोषण विनोदिन्यै नमः
- ॐ दारिद्र्य नाशिन्यै नमः
- ॐ सर्वोपद्र वारिण्यै नमः
- ॐ संविधानं द लहर्यै नमः
- ॐ चतुर्दशांतकोणस्थायै नमः
- ॐ सर्वात्मयै नमः
- ॐ सत्यवक्यै नमः
- ॐ न्यायायै नमः
- ॐ धनधान्य निध्यै नमः
- ॐ काय कृत्यै नमः
- ॐ अनंतजित्यै नमः
- ॐ स्थिरायै नमः
- ॐ श्री राजराजेश्वरि देव्यै नमः
|| इति श्री राजराजेश्वरी देवी अष्टोत्तर शतनामावळि समाप्तं ||
अर्थ
श्री राजराजेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावलिः, देवी राजराजेश्वरी के 108 पवित्र नामों का एक दिव्य संग्रह है। यह स्तोत्र आदिशक्ति राजराजेश्वरी देवी की महिमा, शक्ति और अनुपम सौंदर्य का विस्तृत वर्णन करता है। अष्टोत्तर शतनामावलि देवी के विभिन्न गुणों, रूपों और उनकी दिव्य लीलाओं की स्तुति करके भक्तों को उनके पूर्ण स्वरूप को समझने में सहायता करती है। ये नाम केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि देवी की शक्ति के प्रत्येक पहलू का प्रतिनिधित्व करने वाले बीज मंत्र हैं, जिनके श्रद्धापूर्वक जाप से देवी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
राजराजेश्वरी देवी को त्रिपुरासुंदरी या ललिता महात्रिपुरसुंदरी के नाम से भी जाना जाता है, जो सृष्टि, स्थिति और संहार करने वाली परब्रह्म स्वरूपिणी हैं। यह अष्टोत्तर भक्तों को देवी की सर्वव्यापकता, सर्वशक्तिमत्ता और अद्वितीय सौंदर्य का अनुभव कराता है। देवी का प्रत्येक नाम उनके अनंत गुणों, उनकी दिव्य शक्ति और भक्तों के प्रति उनकी अपार करुणा को दर्शाता है। इन नामों का पाठ करने से मन को शांति, आध्यात्मिक उत्थान और देवी की कृपा प्राप्त होती है। यह भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही क्षेत्रों में उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस शतनामावलि का आरंभ "ॐ श्री भुवनेश्वर्यै नमः" से होता है, जिसमें देवी को समस्त लोकों की स्वामिनी के रूप में स्तुति की जाती है। "ॐ राजेश्वर्यै नमः, ॐ राजराजेश्वर्यै नमः" नाम दर्शाते हैं कि वे राजाओं की भी राजेश्वरी, सर्वोच्च शासक हैं। "ॐ कामेश्वर्यै नमः" का अर्थ है सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली। "ॐ बाला त्रिपुरासुंदर्यै नमः" देवी की युवावस्था और सौंदर्य को इंगित करता है। "ॐ सर्वैश्वर्यै नमः" का अर्थ है समस्त ऐश्वर्यों की अधिष्ठात्री देवी। "ॐ परब्रह्म स्वरूपिण्यै नमः" यह स्पष्ट करता है कि देवी परब्रह्म का साकार रूप हैं। इस प्रकार, प्रत्येक नाम देवी की विभिन्न शक्तियों, सौंदर्य और महिमा का वर्णन करता है, जो उनके दिव्य स्वरूप को उजागर करता है।
यह अष्टोत्तर नामावली देवी की शक्ति, सौंदर्य, ज्ञान और करुणा का गुणगान करती है। प्रत्येक नाम में एक मंत्र शक्ति निहित है, और इसे भक्तिपूर्वक जपने से सकारात्मक ऊर्जाएँ आकर्षित होती हैं। यह भक्तों को अज्ञान से ज्ञान की ओर, दुःख से आनंद की ओर, और बंधन से मुक्ति की ओर ले जाने का एक दिव्य मार्ग है। यह स्तोत्र न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, बल्कि लौकिक जीवन में भी सफलता और समृद्धि लाता है। नियमित पाठ से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और शांति व संतोष की प्राप्ति होती है।
लाभ (Benefits):
- मनोकामना पूर्ति: देवी की कृपा से सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और अभीष्ट फल प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सफलता मिलती है।
- स्वास्थ्य और धन: उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है, जिससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
- शत्रु विजय: शत्रुओं द्वारा उत्पन्न बाधाएँ दूर होती हैं और व्यक्ति को सभी प्रकार की समस्याओं से सुरक्षा मिलती है।
- मानसिक शांति: मन की चंचलता समाप्त होती है और आंतरिक शांति तथा संतोष की प्राप्ति होती है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह स्तोत्र आध्यात्मिक प्रगति में सहायक है और मोक्ष मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे भगवत्प्राप्ति की ओर अग्रसर होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री राजराजेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावलिः क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
राजराजेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावलिः के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
यह स्तोत्र किसे पढ़ना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री राजराजेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावलिः का मूल क्या है?
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