- ॐ दिव्यलोकवासिन्यै नमः
- ॐ सर्वलोक संरक्षणायै नमः
- ॐ सर्वमृत्युसर्वापद्विनिवारण्यै नमः
- ॐ ललिताबाला, दुर्गाश्यामलाकृत्यै नमः
- ॐ गंगा,भवानी गायत्री स्वरूपायै नमः
- ॐ लक्ष्मी, पार्वती, सरस्वती, स्वरूप विभवायै नमः
- ॐ राजराजेश्वरी देव्यै नमः
- ॐ भक्ताभीष्टदायिन्यै नमः
- ॐ भक्तिभुक्तिमुक्ति प्रदायिन्यै नमः
- ॐ भक्तसंकल्पसिद्धिदायै नमः
- ॐ पृध्वीश्वरी देव्यै नमः
- ॐ आधिव्याधि निवारिण्यै नमः
- ॐ दौर्भाग्यनाशिन्यै नमः
- ॐ सौभाग्यदायिन्यै नमः
- ॐ सृष्टि स्थितिलयायै नमः
- ॐ अष्टसिद्धि नवनिधि प्रदायिन्यै नमः
- ॐ अष्टदिक्पालक वंदितायै नमः
- ॐ त्रिकाल वेदिन्यै नमः
- ॐ षड्गुण सं सेवितायै नमः
- ॐ षड्रुतु परिवेष्टितायै नमः
- ॐ नवग्रहविधिविधानाधिष्टानायै नमः
- ॐ सत्यधर्म शांति प्रेम प्रसादिन्यै नमः
- ॐ सर्वकाल सर्वावस्था समस्थितायै नमः
- ॐ अनंतसागर, नदीनदा कृत्यै नमः
- ॐ कांस्य (कंचु) लोहमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ पीत (इत्तडि) लोहमयि प्राकारिण्यै नमः
- ॐ ताम्र(रागि) लोहमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ सीसलोहमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ पंचलोहमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ रजितसाल प्राकारिण्यै नमः
- ॐ सुवर्णसाल प्राकारिण्यै नमः
- ॐ पुष्यरागमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ पद्मरागमय प्रकारिण्यै नमः
- ॐ गोमेधिकमणिमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ वज्रनिर्मित प्राकारिण्यै नमः
- ॐ वैडूर्यनिर्मित प्राकारिण्यै नमः
- ॐ इंद्रनीलमणिमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ मरकतसालमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ प्रवाळसालमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ रत्नसालमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ चिंतामणिमय प्राकारिण्यै नमः
- ॐ शृंगारमंडप देवदेवतायै नमः
- ॐ ज्ञानमंडप ज्ञानेश्वरीदेव्यै नमः
- ॐ एकांतमंडप ध्यानेश्वरीदेव्यै
- ॐ मुक्तिमंडप मुक्तेश्वरीदेव्यै नमः
- ॐ काश्मीरवन कामाक्षीदेव्यै नमः
- ॐ मल्लिकावन महाराज्ञै नमः
- ॐ कुंदवन कौमारीदेव्यै नमः
- ॐ कस्तूरीवनकामेश्वरी देव्यै नमः
- ॐ सालोक्यमुक्ति प्रसादिन्यै नमः
- ॐ सारूप्यमुक्ति प्रदायिन्यै नमः
- ॐ सामीप्यमुक्तिदायिन्यै नमः
- ॐ सायुज्यमुक्ति सुप्रसादिन्यै नमः
- ॐ इच्चाज्ञान क्रियाशक्ति रूपिण्यै नमः
- ॐ वरांकुशपाशाभय हस्तायै नमः
- ॐ सहस्रकोटि सहस्रवदनायै नमः
- ॐ मकरं दघृतांबुधये नमः
- ॐ सहस्रकोटि सहस्रचंद्र समसुधानेत्रायै नमः
- ॐ सहस्रकोटि सहस्र सूर्य समाभासायै नमः
- ॐ जरामरण रहितायै नमः
- ॐ नारदतुंबुरु सकल मुनिगणवंदितायै नमः
- ॐ पंचभूतयजमान स्वरूपिण्यै नमः
- ॐ जन्मजन्मांतर दुःखभंजनायै नमः
- ॐ लोकरक्षाकृत्यतत्परायै नमः
- ॐ ब्रह्मविष्णु महेश्वर कोटि वंदितायै नमः
- ॐ चतुषष्टि कळा संपूर्ण स्वरूपिण्यै नमः
- ॐ षोडशकळा शक्ति सेना समन्वितायै नमः
- ॐ सप्तकोटि घनमंत्र विद्यालयायै नमः
- ॐ मदन विघ्नेश्वर कुमार मातृकायै नमः
- ॐ कुंकुम शोभित दिव्य वदनायै नमः
- ॐ अनंतनक्षत्र गणनायिकायै नमः
- ॐ चतुर्दशभुवन कल्पितायै नमः
- ॐ सुराधिनाथ सत्संग समाचार कार्यकलापायै नमः
- ॐ अनंगरूपपरिचारिका सेवतायै नमः
- ॐ गंधर्व यक्षकिन्नर किंपुरुष वंदितायै नमः
- ॐ संतान कल्पवृक्ष समुदाय भासिन्यै नमः
- ॐ अनंतकोटि ब्रह्मांड सैनिकाध्यक्ष सेवितायै नमः
- ॐ पारिजात, कदंबनविहारिण्यै नमः
- ॐ समस्तदेवी कुटुंब वंदितायै नमः
- ॐ चतुर्वेद कळाचातुर्यै नमः
- ॐ ब्राह्मी महेश्वरी वैष्णवी वाराही वंदितायै नमः
- ॐ चामुंडी महालक्ष्मी इंद्राणी परिपूजितायै नमः
- ॐ षट्कोण यंत्र प्रकाशिन्यै नमः
- ॐ सहस्रस्तंभ मंडपविहारिण्यै नमः
- ॐ समस्त पतिव्रतासं सेवितायै नमः
- ॐ नादबिंदु कळातीत श्री चक्रवासिन्यै नमः
- ॐ पापताप दारिद्र्य नाशिन्यै नमः
- ॐ श्रुति, स्मृति, पुराण काव्य संरक्षणायै नमः
- ॐ पंचब्रह्मासन विराजितायै नमः
- ॐ वज्रवैडूर्य मरकत माणिक्य चंद्रकांत रत्नसिंहासन शोभितायै नमः
- ॐ दिव्यांबर प्रभादिव्यतेजो विभासायै नमः
- ॐ पंचमुख सर्वेश्वर हृदयाधिष्टानायै नमः
- ॐ आपाद मस्तक नवरत्न सुवर्णाभरण धारिण्यै नमः
- ॐ विलासिनी अघोरा मंगळासना पीठशक्ति वंदितायै नमः
- ॐ क्षमा, दया, जया, विजया पीठशक्ति परिपालितायै नमः
- ॐ अजिता, अपराजिता, नित्यपीठशक्ति परिपूजितायै नमः
- ॐ सिद्धि, बुद्धि, मेधा, लक्ष्मी, शृति पीठशक्ति सेवितायै नमः
- ॐ लज्जातुष्टिपुष्टि पीठशक्ति प्रभासितायै नमः
- ॐ नवरात्र दीक्षा प्रियायै नमः
- ॐ नाम, गान, ज्ञान यज्ञ प्रियायै नमः
- ॐ जपतपो योगत्याग संतुष्टायै नमः
- ॐ पंचदशी महाविद्यायै नमः
- ॐ सदाषोडश प्रायसर्वेश्वर वल्लभायै नमः
- । ॐ। ओंकाराक्षर स्वरूपिण्यै नमः
- ॐ सकलयंत्र सकल तंत्र समर्चितायै नमः
- ॐ सहस्र योजन प्रमाण, चिंतामणि गृहवासिन्यै नमः
- ॐ महादेवसहित श्री परमेश्वरी देव्यै नमः
- ॐ मणिद्वीप विराजित महा भुवनेश्वरी देव्यै नमः
|| श्री मणिद्वीपेश्वरि अष्टोत्तर शतनामावळि समाप्तं ||
अर्थ
श्री मणिद्वीपेश्वरि अष्टोत्तरशतनामावलिः देवी मणिद्वीपेश्वरी को समर्पित 108 पवित्र नामों की एक माला है। मणिद्वीप को शास्त्रों में आदि पराशक्ति का परम निवास स्थान बताया गया है, जो रत्नों से बना एक ब्रह्मांडीय द्वीप है, जहाँ वह ब्रह्मांड की साम्राज्ञी के रूप में विराजमान हैं। इन नामों का जाप उनकी दिव्य उपस्थिति और आशीर्वाद का आह्वान करता है, जिससे भक्त सभी सृष्टि, स्थिति और संहार के स्रोत से जुड़ पाते हैं।
इस अष्टोत्तरशतनामावलि का प्रत्येक नाम एक गहरा मंत्र है, जो दिव्य माँ की अनंत महिमा, शक्ति और करुणा के एक विशिष्ट पहलू को प्रकट करता है। यह केवल नामों की एक सूची नहीं है बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो भक्त को परम वास्तविकता के विभिन्न अभिव्यक्तियों और गुणों के माध्यम से मार्गदर्शन करती है। इन नामों का जप करके, व्यक्ति देवी की सर्वव्यापकता, ब्रह्मांडीय वास्तुकार के रूप में उनकी भूमिका और अपने बच्चों के प्रति उनके असीम प्रेम को स्वीकार करता है। यह मन को शुद्ध करने और चेतना को ऊपर उठाने में मदद करता है।
यह स्तोत्र मणिद्वीपेश्वरी को 'दिव्यलोकवासिन्यै' (दिव्य लोकों में निवास करने वाली) और 'सर्वलोक संरक्षणायै' (सभी लोकों की रक्षक) के रूप में महिमामंडित करता है। वह 'सर्वमृत्युसर्वापद्विनिवारण्यै' (सभी प्रकार की मृत्यु और आपदाओं को दूर करने वाली) हैं, जो सुरक्षा और कल्याण का आश्वासन देती हैं। नाम उन्हें सभी देवियों के संश्लेषण के रूप में प्रकट करते हैं – 'ललिताबाला, दुर्गाश्यामलाकृत्यै', 'गंगा, भवानी, गायत्री स्वरूपायै', और 'लक्ष्मी, पार्वती, सरस्वती स्वरूप विभवयै'। वह 'राजराजेश्वरी' हैं, सम्राटों की साम्राज्ञी, जो 'भक्तसंकल्पसिद्धि' (भक्तों के संकल्पों की पूर्ति), 'भक्ति, भुक्ति, मुक्ति' (भक्ति, सांसारिक सुख और मुक्ति) प्रदान करती हैं। वह 'पृथ्वीश्वरी' हैं, पृथ्वी की देवी, 'आधिव्याधि' (मानसिक और शारीरिक रोगों) को दूर करने वाली, और 'दौर्भाग्य' (दुर्भाग्य) को नष्ट करके 'सौभाग्य' (सौभाग्य) प्रदान करने वाली हैं।
स्तोत्र आगे उनके ब्रह्मांडीय कार्यों का वर्णन करता है, उन्हें 'सृष्टि स्थिति लययै' (सृष्टि, पालन और संहार) से पहचानता है। वह 'अष्टसिद्धि नव निधि' (आठ अलौकिक शक्तियां और नौ खजाने) प्रदान करती हैं और 'अष्टदिकपालक वंदितायै' (आठ दिशाओं के रक्षकों द्वारा पूजित) हैं। उनका ज्ञान असीम है, क्योंकि वह 'त्रिकाल वेदिन्यै' (भूत, वर्तमान और भविष्य की ज्ञाता) हैं। वह आकाशीय पिंडों को नियंत्रित करती हैं, 'नवग्रहविधिविधानाधिष्ठानायै' (नौ ग्रहों के नियमों और विनियमों की अधिष्ठात्री देवी) हैं। अंततः, वह 'सत्य, धर्म, शांति, प्रेम' (सत्य, धर्म, शांति और प्रेम) का अवतार और प्रदाता हैं, जो 'सर्वकाल सर्वावस्था समस्थितायै' (सभी समय और सभी स्थितियों में) सदैव उपस्थित रहती हैं।
लाभ (Benefits):
- संकट निवारण (Alleviation of Troubles): इस नामावली के पाठ से सभी प्रकार के मृत्यु भय, आपदाएं, मानसिक और शारीरिक रोग दूर होते हैं। दुर्भाग्य दूर होकर सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
- इच्छित फल की प्राप्ति (Fulfillment of Desires): मणिद्वीपेश्वरी भक्तों के सभी संकल्पों को पूरा करने वाली हैं। वह भक्ति, सांसारिक सुख और अंततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं।
- आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Upliftment): देवी सभी देवताओं का स्वरूप होने के कारण, इस नामावली का पाठ आध्यात्मिक जागृति और दिव्य शक्तियों के साथ संबंध स्थापित करने में मदद करता है। यह अष्टसिद्धि और नवनिधियों को प्रदान करता है।
- ग्रह दोष निवारण (Remedy for Planetary Afflictions): नवग्रहों की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण, इस नामावली का पाठ करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता व समृद्धि आती है।
- समग्र सुरक्षा (Overall Protection): मणिद्वीपेश्वरी सभी लोकों की रक्षा में लीन हैं, और इस नामावली का नियमित पाठ भक्तों को दिव्य सुरक्षा और मार्गदर्शन प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री मणिद्वीपेश्वरि अष्टोत्तरशतनामावलिः क्या है?
इस नामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
मणिद्वीपेश्वरी अष्टोत्तरशतनामावलि पाठ के क्या लाभ हैं?
इस नामावली का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस नामावली का मूल या उद्गम क्या है?
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