- ॐ त्रिपुरसुंदर्यै नमः
- ॐ हृदयदेव्यै नमः
- ॐ शिरोदेव्यै नमः
- ॐ कवचदेव्यै नमः
- ॐ अस्त्रदेव्यै नमः
- ॐ कामेश्वर्यै नमः
- ॐ भगमालिन्यै नमः
- ॐ भेरुंडायै नमः
- ॐ वह्निवासिन्यै नमः
- ॐ महावजेश्वर्यै नमः
- ॐ शिवदूत्यै नमः
- ॐ कुलसुंदर्यै नमः
- ॐ नित्यायै नमः
- ॐ नीलपताकाय नमः
- ॐ विजयायै नमः
- ॐ सर्वमंगळायै नमः
- ॐ चित्रायै नमः
- ॐ महानित्यायै नमः
- ॐ मित्रेशमय्यै नमः
- ॐ षष्ठीशमयै नमः
- ॐ अगस्त्यमय्यै नमः
- ॐ कालतापनमय्यै नमः
- ॐ धर्माचार्यमय्यै नमः
- ॐ विष्णुदेवमय्यै नमः
- ॐ प्रभाकरदेवमय्यै नमः
- ॐ तेजोदेवमय्यै नमः
- ॐ मनोजदेवमय्यै नमः
- ॐ कळ्याणदेवमयै नमः
- ॐ वासुदेवमयै नमः
- ॐ रत्नदेवमयै नमः
- ॐ अणिमासिद्धयै नमः
- ॐ लघिमासिद्धये नमः
- ॐ गरिमासिद्धये नमः
- ॐ महिमासिद्धये नमः
- ॐ प्राप्तिसिद्धये नमः
- ॐ ईशत्वसिद्धये नमः
- ॐ प्राकाम्यसिद्धये नमः
- ॐ भुक्ति सिद्धये नमः
- ॐ सर्वकामसिद्धये नमः
- ॐ ब्राह्यै नमः
- ॐ महेश्वर्यै नमः
- ॐ क्रैमार्यै नमः
- ॐ वैष्णव्यै नमः
- ॐ वाराह्यै नमः
- ॐ माहेंद्र्यै नमः
- ॐ चामुंडायै नमः
- ॐ सर्वसंक्षोभिण्यै नमः
- ॐ सर्वविद्राविण्यै नमः
- ॐ सर्वाकर्षिण्यै नमः
- ॐ प्रकटयोगिन्यै नमः
- ॐ कामकर्षिण्यॆ नमः
- ॐ बुद्ध्याकर्षिण्यै नमः
- ॐ अहंकाराकर्षिण्यॆ नमः
- ॐ शब्दाकर्षिण्यै नमः
- ॐ स्पर्षाकर्षिण्यै नमः
- ॐ रूपाकर्षिण्यै नमः
- ॐ रसाकर्षिण्यै नमः
- ॐ गंधाकर्षिण्यै नमः
- ॐ चित्ताकर्षिण्यै नमः
- ॐ धैर्याकर्षिण्यै नमः
- ॐ स्कृताकर्षिण्यै नमः
- ॐ बीजाकर्षिण्यै नमः
- ॐ आत्माकर्षिण्यै नमः
- ॐ अमृताकरिण्यै नमः
- ॐ शरीराकर्षिण्यै नमः
- ॐ गुप्तयोगिन्यै नमः
- ॐ अनंगकुसुमायै नमः
- ॐ अनंगमदनायै नमः
- ॐ अनंगरेखायै नमः
- ॐ अनंगमालिन्यै नमः
- ॐ गुप्ततरयोगिन्यै नमः
- ॐ सर्वाह्लादिन्यै नमः
- ॐ सर्वसंपत्तिपूरण्यै नमः
- ॐ सर्वमंत्रमय्यै नमः
- ॐ कुलोत्तीर्णयोगिन्यै नमः
- ॐ सर्वज्ञाय नमः
- ॐ सर्वशक्ति नमः
- ॐ सर्वैश्वरप्रदायिन्यै नमः
- ॐ सर्वज्ञानमयै नमः
- ॐ सर्वव्याधिविनाशिन्यै नमः
- ॐ सर्वाधारस्वरूपायै नमः
- ॐ सर्वपापहरायै नमः
- ॐ सर्वानंदमय्यै नमः
- ॐ सर्वरक्षास्वरूपिण्यै नमः
- ॐ सर्वेप्सित फलप्रदायै नमः
- ॐ सर्वरक्षाकरचक्रस्वामिन्यै नमः
- ॐ निगर्भयोगिन्यै नमः
- ॐ वशिन्यै नमः
- ॐ कामेश्वर्यै नमः
- ॐ मोदिन्यै नमः
- ॐ विमलायै नमः
- ॐ अरुणायै नमः
- ॐ जयिन्यै नमः
- ॐ सर्वेश्वर्यै नमः
- ॐ कौळिण्यै नमः
- ॐ रहस्ययोगिन्यै नमः
- ॐ बाणिन्यै नमः
- ॐ चापिन्यै नमः
- ॐ पाशिन्यै नमः
- ॐ अंकुशिन्यै नमः
- ॐ महाकामेश्वर्यै नमः
- ॐ महावजेश्वर्यै नमः
- ॐ महाभगमालिन्यै नमः
- ॐ सर्वसिद्धि प्रदचक्रस्वामिन्यै नमः
- ॐ अतिरहस्ययोगिन्यै नमः
- ॐ श्री श्री महाभट्टारिकायै नमः
- ॐ महात्रिपुरसुंदर्यै नमः
- ॐ महामहेश्वर्यै नमः
|| इति श्री देवी खड्गमाला अष्टोत्तर शतनामावळिः संपूर्णं ||
अर्थ
श्री देवी खड्गमाला अष्टोत्तरशतनामावलिः महात्रिपुरसुंदरी के दिव्य स्वरूप का वर्णन करने वाले 108 पवित्र नामों का एक अद्वितीय स्तोत्र है। यह देवी के खड्गमाला रूप को प्रस्तुत करता है, जो तीव्र सुरक्षा, सिद्धियों को प्रदान करने वाला और रहस्यमय रूप से आकर्षक है। यह नामावलि महाविद्या परंपरा से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है, जो देवी की असीम शक्ति और कृपा को प्रकट करती है। प्रत्येक नाम देवी के एक विशिष्ट गुण, क्षमता या रहस्यमय योग शक्ति को इंगित करता है, जो साधक को आंतरिक और बाहरी सुरक्षा प्रदान करता है।
इस नामावलि में देवी के विभिन्न पहलू प्रकट होते हैं – सुरक्षा शक्ति (रक्षा), आंतरिक बाधाओं पर विजय, आकर्षण शक्ति (आकर्षण) – ध्वनि, रूप और मन के माध्यम से, मंत्र शक्ति, और अणिमा, लघिमा आदि विभिन्न सिद्धियाँ। देवी के हृदयदेवी, शिरोदेवी, कवचदेवी, अस्त्रदेवी जैसे नाम देवी के शरीर के विभिन्न भागों और उनके माध्यम से प्रकट होने वाली शक्तियों को दर्शाते हैं। कामेश्वरी, भगमालिनी, भेरुंडा, महावजेश्वरी जैसे नाम देवी के उग्र और सौम्य दोनों रूपों को प्रकट करते हैं, जो देवी की सर्वव्यापकता का संदेश देते हैं।
खड्गमाला अष्टोत्तरशतनामावलि का जप केवल स्तुति नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली साधना है। इसका उद्देश्य साधक की आंतरिक शक्ति को जागृत करना, बाधाओं को दूर करना और आध्यात्मिक तथा लौकिक उपलब्धियों को प्राप्त करना है। अणिमा, लघिमा, गरिमा, महिमा, प्राप्ति, ईशत्व, प्राकाम्य आदि सिद्धियों के नामों का उल्लेख यह दर्शाता है कि देवी साधक को इन अलौकिक शक्तियों को प्रदान करने में सक्षम हैं। यह नामावलि परंपरा के गुरुओं जैसे मित्रेशमयी, अगस्त्यमयी आदि का भी स्मरण करती है, जो गुरु परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करता है और साधक को आध्यात्मिक मार्गदर्शन का संकेत देता है।
इस नामावलि का निरंतर पाठ या ध्यान साधक की भक्ति को गहरा करता है, मंत्रों की शक्ति को बढ़ाता है और हानिकारक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह आंतरिक साहस को बढ़ाता है और आध्यात्मिक मार्ग पर स्पष्टता प्रदान करता है। देवी की कृपा से, साधक ज्ञान, धन, विजय और आंतरिक शांति प्राप्त करते हैं। देवी के इन 108 नामों के माध्यम से, साधक उनकी असीम शक्ति और करुणा का अनुभव कर सकते हैं, और जीवन में समृद्धि तथा सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
लाभ (Benefits):
- पूर्ण सुरक्षा: इस नामावलि का नियमित जप साधक को सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, बुरी नज़र और अशुभ प्रभावों से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है।
- अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति: अणिमा, लघिमा आदि आठ सिद्धियों के नामों को समाहित करने के कारण, यह जप योगियों और साधकों को अलौकिक शक्तियों को प्राप्त करने में सहायता करता है।
- आकर्षण शक्ति और विजय: देवी की आकर्षण शक्ति की प्रार्थना से, साधक समाज में सम्मान, प्रभाव और किसी भी कार्य में विजय प्राप्त करते हैं।
- आध्यात्मिक ज्ञान और विवेक: देवी के विभिन्न ज्ञान और विवेक के रूपों की स्तुति करने से, साधकों को आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और स्पष्टता प्राप्त होती है।
- मनोकामनाओं की पूर्ति: देवी की सर्वशक्तिमत्ता की प्रार्थना करने से, साधक की सभी सकारात्मक और धर्मसम्मत इच्छाएँ पूरी होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री देवी खड्गमाला अष्टोत्तरशतनामावलिः क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र के पाठ के क्या लाभ हैं?
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का उद्गम या स्रोत क्या है?
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