2026

एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026

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मुख्य विवरण

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एकदंत संकष्टी चतुर्थी

एकदंत संकष्टी चतुर्थी क्या है

ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी के एकदंत रूप की पूजा होती है। जेठ की तपती गर्मी में आने वाली इस संकष्टी पर भक्त दिन भर व्रत रखकर रात को चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और संतान, परिवार और काम में आ रही रुकावटें दूर होने की प्रार्थना करते हैं।

एकदंत नाम क्यों

गणेश जी का एक दाँत टूटा हुआ है, इसलिए वे एकदंत कहलाते हैं। इसकी कई कथाएँ प्रचलित हैं। एक कथा में परशुराम जी से युद्ध में उनका दाँत टूटा; दूसरी प्रसिद्ध कथा में जब वेदव्यास महाभारत बोल रहे थे, तो लिखते-लिखते कलम टूट गई और गणेश जी ने बिना रुके अपना दाँत तोड़कर लेखन जारी रखा। मुद्गल पुराण में एकदंत अवतार चूहे पर सवार होकर मदासुर, यानी घमंड, का नाश करते हैं। इसलिए यह रूप अहंकार छोड़ने और काम के प्रति लगन का प्रतीक है। संकटनाशन स्तोत्र में भी "एकदन्तं द्वितीयकम्" आता है।

किस तिथि को

पूर्णिमांत पंचांग में ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी; अमांत पंचांग में इसे वैशाख कृष्ण चतुर्थी कहते हैं। व्रत उस दिन होता है जब चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि हो।

कैसे मनाते हैं

  • भोर में स्नान, गणेश जी के सामने व्रत का संकल्प।
  • गर्मी को देखते हुए फल, दूध, छाछ और पानी वाला फलाहारी व्रत; जो स्वस्थ हों वे निर्जल भी रखते हैं।
  • शाम को दूर्वा की 21 गाँठें, मोदक या लड्डू, गुड़ और लाल फूल चढ़ाकर संकष्टी व्रत कथा और गणेश चालीसा का पाठ।
  • चंद्रोदय पर अर्घ्य, फिर पारण। जेठ में घड़ा, पंखा या शरबत का दान भी इस दिन अच्छा माना जाता है।

अगली संकष्टी की तारीखें और चंद्रोदय समय संकष्टी चतुर्थी कैलेंडर पर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकदंत संकष्टी किस महीने में होती है?
पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी को। अमांत में यही दिन वैशाख कृष्ण चतुर्थी कहलाता है।
गणेश जी को एकदंत क्यों कहते हैं?
उनका एक दाँत टूटा है। प्रचलित कथा के अनुसार महाभारत लिखते समय कलम टूटने पर उन्होंने अपना दाँत तोड़कर लेखन जारी रखा था।
गर्मी में संकष्टी का व्रत कैसे रखें?
निर्जल की जगह फल, दूध, छाछ और पानी लेकर व्रत रखा जा सकता है। बुज़ुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाएँ अपनी सेहत के अनुसार नियम चुनें।
पूजा में क्या चढ़ाएँ?
दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर, मोदक या बेसन-तिल के लड्डू और गुड़। तुलसी गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती।
व्रत कब खोलते हैं?
रात को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर और गणेश जी को भोग लगाकर व्रत खोला जाता है।

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