नाग पंचमी व्रत कथा: किसान, नागिन और बेटी की भक्ति
संक्षेप में:नाग पंचमी सावन शुक्ल पंचमी को नाग देवता की पूजा का पर्व है। इसकी प्रचलित कथा में एक किसान के हल से नाग के बच्चे मर जाते हैं, क्रोधित नागिन उसके परिवार को डस लेती है, पर किसान की बेटी की सच्ची नाग पूजा से प्रसन्न होकर वह सबको फिर जीवित कर देती है।
नाग पंचमी सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है, जब बरसात में साँप बिलों से बाहर निकलते हैं। इस दिन घर की दीवार पर गोबर या गेरू से नाग का चित्र बनाकर, या मंदिर और बाँबी पर जाकर, नाग देवता को दूध, धान का लावा, दूब और फूल चढ़ाए जाते हैं। ज़्यादातर महिलाएँ परिवार की रक्षा, ख़ासकर बच्चों और भाइयों की सलामती के लिए यह व्रत रखती हैं। भविष्य पुराण में नाग पूजा के लिए पंचमी तिथि का विशेष उल्लेख मिलता है।
नाग पंचमी व्रत कथा
बहुत समय पहले एक गाँव में एक किसान अपनी पत्नी, दो बेटों और एक बेटी के साथ रहता था। बेटी का ब्याह दूसरे गाँव में हो चुका था। किसान मेहनती था और सावन आते ही खेत जोतने में लग जाता था।
एक दिन वह हल चला रहा था। खेत के एक कोने में मिट्टी के नीचे एक नागिन ने अपना बिल बना रखा था, जिसमें उसके छोटे-छोटे बच्चे थे। किसान को इसका पता नहीं था। हल का फाल बिल पर से गुज़रा और नाग के सारे बच्चे मर गए। किसान ने ध्यान नहीं दिया और शाम को घर लौट आया।
नागिन जब लौटी और अपने बच्चों को मरा पाया तो उसका कलेजा फट गया। दुख धीरे-धीरे क्रोध में बदल गया। उसने हल पर लगी मिट्टी के निशानों से किसान का घर ढूँढ़ लिया। उसी रात उसने चुपके से घर में घुसकर किसान, उसकी पत्नी और दोनों बेटों को डस लिया। सुबह तक पूरा घर सूना हो गया।
नागिन का क्रोध अब भी शांत नहीं हुआ था। उसे पता चला कि किसान की एक बेटी भी है, जो ससुराल में रहती है। अगले दिन वह उसे भी डसने के इरादे से बेटी के गाँव जा पहुँची।
वह दिन सावन शुक्ल पंचमी का था। किसान की बेटी सुबह से नाग पंचमी का व्रत रखे थी। उसने आँगन की दीवार पर गोबर से नाग देवता का चित्र बनाया था, सामने एक कटोरी में दूध, धान का लावा, दूब और फूल रखे थे और दीपक जलाकर हाथ जोड़े बैठी थी। वह मन ही मन कह रही थी, "हे नाग देवता, मेरे मायके और ससुराल, दोनों परिवारों की रक्षा करना। जाने-अनजाने में हमसे कोई भूल हुई हो तो क्षमा करना।"
नागिन चुपचाप उसके पास पहुँची, पर उसकी सच्ची भक्ति देखकर ठिठक गई। जिस घर से उसे दुख मिला था, उसी घर की बेटी उसकी जाति की पूजा कर रही थी, उसके लिए दूध रखे बैठी थी। नागिन ने दूध पिया और उसका क्रोध पिघल गया। वह अपने असली रूप में प्रकट हुई और बोली, "बेटी, मैं तुझसे बहुत प्रसन्न हूँ। जो चाहे वर माँग ले।"
लड़की ने हाथ जोड़कर कहा, "माँ, बस इतना वर दो कि मेरे परिवार पर कभी कोई संकट न आए।" यह सुनकर नागिन की आँखें भर आईं। उसने सारी बात सच-सच बता दी कि अनजाने में उसके पिता के हल से उसके बच्चे मर गए थे और बदले में उसने पूरे परिवार को डस लिया है।
बेटी फूट-फूटकर रोने लगी और नागिन के पैरों में गिर पड़ी, "मेरे पिता ने जान-बूझकर कुछ नहीं किया। उनकी ओर से मैं क्षमा माँगती हूँ। मेरे माता-पिता और भाइयों को जीवन दे दो।" नागिन का मन पूरी तरह बदल चुका था। वह लड़की को साथ लेकर उसके मायके पहुँची और अपनी शक्ति (कई कथाओं में अमृत या मणि) से सबका विष खींच लिया। किसान, उसकी पत्नी और दोनों बेटे ऐसे उठ बैठे जैसे गहरी नींद से जागे हों।
जाते-जाते नागिन ने कहा, "जो भी सावन शुक्ल पंचमी को श्रद्धा से नाग देवता की पूजा करेगा और इस दिन धरती को नहीं खोदेगा, उसके परिवार को नागों से कभी कष्ट नहीं होगा।" उस दिन से किसान का परिवार हर साल नाग पंचमी का व्रत रखने लगा और इस दिन हल चलाना बंद कर दिया। गाँव वालों ने भी यह परंपरा अपना ली।
दूसरी प्रचलित कथा: नाग भाई
कई घरों में एक और कहानी सुनाई जाती है। एक सेठ की छोटी बहू, जिसका कोई भाई नहीं था, मिट्टी खोदते समय एक साँप को बचा लेती है और उसे भाई कहकर पुकारती है। वह नाग सचमुच भाई बनकर उसे मायके ले जाता है, उपहार देता है और हर संकट में उसकी रक्षा करता है। इसी वजह से कई जगह बहनें नाग पंचमी को नाग देवता को भाई मानकर पूजती हैं।
अलग-अलग जगह की परंपरा
उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में यह ज़्यादातर सावन शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है; गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में कृष्ण पक्ष की पंचमी (नाग पांचम) को भी इसका चलन है। महाराष्ट्र में नाग पंचमी पर झूले और लोकगीतों की रौनक रहती है। कर्नाटक में एक दिन पहले नागर चौथी और फिर नागर पंचमी पर बाँबी में दूध डालने की परंपरा है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सबसे बड़ा नाग पर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी का नागुल चविती है।
नाग पंचमी पूजा विधि
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। बहुत-सी महिलाएँ इस दिन एक समय भोजन करती हैं।
- घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर या पूजा की दीवार पर गोबर, गेरू या हल्दी से नाग का चित्र बनाएँ। चाहें तो मिट्टी या चाँदी की नाग प्रतिमा रखें।
- नाग देवता को कच्चा दूध, धान का लावा, भीगे चने, दूब, अक्षत, हल्दी, रोली और फूल चढ़ाएँ। धूप-दीप जलाएँ।
- पूजा के बाद परिवार के साथ बैठकर यह कथा सुनें और अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कंबल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिय, तक्षक और पिंगल, इन बारह नागों का नाम लें।
- भगवान शिव का जलाभिषेक करें, क्योंकि नाग शिव के गले का आभूषण हैं।
- शाम को खीर, सेवइयाँ या घर में बना सादा भोजन प्रसाद के रूप में लें और व्रत खोलें।
नियम और सावधानियाँ
- इस दिन खेत जोतना, ज़मीन खोदना और पेड़ काटना टाला जाता है।
- कई परिवार इस दिन लोहे की कड़ाही या तवे पर तलना-सेंकना नहीं करते; अपने घर की परंपरा मानें।
- सपेरों के पकड़े हुए ज़िंदा साँपों को ज़बरदस्ती दूध पिलाना उनके लिए नुकसानदेह है। दूध प्रतिमा, चित्र या बाँबी पर ही चढ़ाएँ।
- किसी भी जीव को चोट न पहुँचाएँ; यही इस व्रत का असली भाव है।
इस साल पंचमी तिथि और पूजा मुहूर्त नाग पंचमी पृष्ठ पर देखें। सावन में शिव पूजा के लिए सोमवार व्रत कथा पढ़ें और पूजा के बाद ॐ जय शिव ओंकारा आरती गाएँ। सावन पूर्णिमा पर आने वाले भाई-बहन के त्योहार की रक्षाबंधन की कथा भी देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाग पंचमी कब मनाई जाती है?
ज़्यादातर उत्तर भारत में सावन शुक्ल पंचमी को। गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में कृष्ण पक्ष की पंचमी को भी नाग पूजा होती है।
नाग पंचमी की कथा में क्या होता है?
किसान के हल से नाग के बच्चे मर जाते हैं और नागिन परिवार को डस लेती है। किसान की बेटी की सच्ची नाग पूजा से प्रसन्न होकर नागिन सबको जीवित कर देती है।
नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?
परंपरा में इस दिन खेत जोतना, ज़मीन खोदना और किसी जीव को चोट पहुँचाना वर्जित है। कई घरों में लोहे के तवे पर खाना नहीं बनाते।
क्या ज़िंदा साँप को दूध पिलाना चाहिए?
नहीं। साँप का प्राकृतिक भोजन दूध नहीं है और ज़बरदस्ती पिलाने से उसे नुकसान होता है। दूध नाग प्रतिमा, चित्र या बाँबी पर चढ़ाएँ।
नाग पंचमी पर किन नागों की पूजा होती है?
अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कंबल, कर्कोटक, तक्षक, कालिय सहित बारह नागों का नाम लेकर पूजा की जाती है।
