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श्री इंद्राणि अष्टोत्तर शतनामावळिः

संपादन: अद्यतन
अष्टोत्तर109 नाम
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  1. ॐ इंद्राक्षी नाम्न्यै देव्यै नमः
  2. ॐ दैवतैः समुदाहृतायै नमः
  3. ॐ गौर्यै नमः
  4. ॐ शाकंभर्यै नमः
  5. ॐ देव्यै नमः
  6. ॐ दुर्गानाम्नीति विश्रुतायै नमः
  7. ॐ कात्यायन्यै नमः
  8. ॐ महादेव्यै नमः
  9. ॐ चंद्रघंटायै नमः 
  10. ॐ महातपसे नमः 
  11. ॐ गायत्र्यै नमः
  12. ॐ सावित्र्यै नमः
  13. ॐ ब्रह्माण्यै नमः
  14. ॐ ब्रह्मवादिन्यै नमः
  15. ॐ नारायण्यै नमः
  16. ॐ भद्रकाल्यै नमः
  17. ॐ रुद्राण्यै नमः
  18. ॐ कृष्णायै नमः
  19. ॐ पिंगलायै नमः
  20. ॐ अग्निज्वालायै नमः 
  21. ॐ रौद्रमुख्यै नमः
  22. ॐ कालरात्र्यै नमः
  23. ॐ तपस्विन्यै नमः
  24. ॐ मेघश्यामायै नमः
  25. ॐ सहस्राक्ष्यै नमः
  26. ॐ विष्णुमायायै नमः
  27. ॐ जलोदर्यै नमः
  28. ॐ महोदर्यै नमः
  29. ॐ मुक्तकेश्यै नमः
  30. ॐ घोररूपायै नमः 
  31. ॐ महाबलायै नमः
  32. ॐ आनंदायै नमः
  33. ॐ भद्रदायै अनंतायै नमः 
  34. ॐ रोगहर्त्र्यै नमः
  35. ॐ शिवप्रियायै नमः
  36. ॐ शिवदूत्यै नमः
  37. ॐ कराल्यै नमः
  38. ॐ शक्त्यै परमेश्वर्यै नमः
  39. ॐ इंद्राण्यै नमः
  40. ॐ इंद्ररूपायै नमः 
  41. ॐ इंद्रशक्तिपरायणायै नमः
  42. ॐ महिषासुरसंहर्त्र्यै नमः
  43. ॐ चामुंडायै नमः
  44. ॐ सप्तमातृकायै नमः 
  45. ॐ वाराह्यै नमः
  46. ॐ नारसिंह्यै नमः
  47. ॐ भीमायै नमः
  48. ॐ भैरवनादिन्यै नमः
  49. ॐ श्रुत्यैः नमः
  50. ॐ स्मृत्यैः नमः
  51. ॐ धृत्यैः नमः
  52. ॐ मेधायै नमः
  53. ॐ विद्यायै नमः
  54. ॐ लक्षम्यै नमः
  55. ॐ सरस्वत्यै नमः
  56. ॐ अनंतायै नमः
  57. ॐ विजयायै नमः
  58. ॐ पूर्णायै नमः
  59. ॐ मानस्तोकायै नमः 
  60. ॐ अपराजितायै नमः 
  61. ॐ भवान्यै नमः
  62. ॐ पार्वत्यै नमः
  63. ॐ दुर्गायै नमः
  64. ॐ हैमवत्यै नमः
  65. ॐ अंबिकायै नमः
  66. ॐ शिवायै नमः
  67. ॐ शिवाभवान्यै नमः
  68. ॐ रुद्राण्यै नमः
  69. ॐ शंकरार्धशरीरिण्यै नमः
  70. ॐ सदा सम्मोहिन्यै देव्यै नमः
  71. ॐ सुंदर्यै नमः
  72. ॐ भुवनेश्वर्यै नमः
  73. ॐ त्रिनेत्रायै नमः
  74. ॐ त्रिपुरायै नमः
  75. ॐ आराध्यायै नमः
  76. ॐ सर्वात्मने नमः
  77. ॐ कमलात्मिकायै नमः
  78. ॐ चंडयै नमः
  79. ॐ भगवत्यै नमः
  80. ॐ भद्रायै नमः
  81. ॐ सिद्ध्यै नमः
  82. ॐ बुद्ध्यै नमः
  83. ॐ समन्वितायै नमः
  84. ॐ एकाक्षर्यै नमः
  85. ॐ पराब्रह्माण्यै नमः
  86. ॐ स्थूलसूक्ष्मप्रवर्तिन्यै नमः
  87. ॐ नित्यायै नमः
  88. ॐ सकलकल्याण्यै नमः
  89. ॐ भोगमोक्षप्रदायिन्यै नमः
  90. ॐ ऐरावतगजारूढायै नमः
  91. ॐ वज्रहस्तायै नमः
  92. ॐ वरप्रदायै नमः
  93. ॐ भ्रामर्यै नमः
  94. ॐ कांचिकामाक्ष्यै नमः
  95. ॐ क्वणन्माणिक्यनूपुरायै नमः
  96. ॐ त्रिपाद्भस्मप्रहरणायै नमः
  97. ॐ त्रिशिरारक्तलोचनायै नमः
  98. ॐ शिवायै नमः
  99. ॐ शिवरूपायै नमः
  100. ॐ शिवभक्तपरायणायै नमः 
  101. ॐ परायणायै नमः
  102. ॐ मृत्युंजयायै नमः
  103. ॐ महामायायै नमः
  104. ॐ सर्वरोगनिवारिण्यै नमः
  105. ॐ ऐंद्र्यै नमः
  106. ॐ देव्यै नमः
  107. ॐ सदायै नमः
  108. ॐ शांतिमाशुकर्त्र्यै नमः
  109. || इति श्री  इंद्राणि शतनामावळि संपूर्णं ||

 

अर्थ

श्री इंद्राणि अष्टोत्तर शतनामावळिः, देवताओं के राजा इंद्र की पत्नी देवी इंद्राणि के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। यह नामावली देवी के विभिन्न रूपों, शक्तियों और गुणों का स्तुतिगान करती है। पुराणों के अनुसार, इंद्राणि (जिन्हें शची देवी भी कहा जाता है) केवल इंद्र की पत्नी ही नहीं, बल्कि स्वयं एक अत्यंत शक्तिशाली और तेजस्वी देवी हैं। यह अष्टोत्तर भक्तों के लिए उनकी दिव्य उपस्थिति और आशीर्वाद का आह्वान करने का एक श्रेष्ठ माध्यम है।

इंद्राणि देवी शक्ति स्वरूपिणी हैं, जो साहस, संरक्षण, समृद्धि और विजय का प्रतीक हैं। उनके नामों का जाप करने से भक्तों को आंतरिक शक्ति मिलती है, वे बाधाओं को दूर करने की क्षमता प्राप्त करते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तनों का अनुभव करते हैं। वे केवल इंद्र की शक्ति ही नहीं, बल्कि सभी देवताओं की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसा माना जाता है कि उनकी आराधना असुर शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करती है।

इस नामावली में "ॐ इंद्राक्षी नाम्न्यै देव्यै नमः" नाम हजार आँखों वाली देवी को इंगित करता है, जो उनकी सर्वव्यापकता और सतर्कता को दर्शाता है। "गौर्यै नमः", "शाकंभर्यै नमः", "दुर्गानाम्नीति विश्रुतायै नमः" जैसे नाम उन्हें पार्वती, शाकंभरी और दुर्गा के रूपों से जोड़ते हैं, जो उनके बहुआयामी स्वरूप को उजागर करते हैं। "कालरात्र्यै नमः", "रौद्रमुख्यै नमः" जैसे नाम उनके भयानक रूप को दर्शाते हैं, जबकि "आनंदायै नमः", "भद्रदायै नमः" नाम उनके करुणामयी और शुभ स्वरूप को प्रकट करते हैं। "गायतर्यै नमः", "सावित्र्यै नमः", "ब्रह्माण्यै नमः" नाम उन्हें ज्ञान और सृजन की देवियों के साथ समान करते हैं, जो उनके सर्वव्यापी ज्ञान को सूचित करता है। "विष्णुमायायै नमः" उनकी माया शक्ति का सूचक है।

यह नामावली "महाबलायै नमः" (महान शक्ति), "अनंतायै नमः" (अनंत), "रोगहर्त्र्यै नमः" (रोगों का नाश करने वाली), "शिवप्रियायै नमः" (शिव को प्रिय) जैसे अनेक विशेषणों को समाहित करती है। प्रत्येक नाम देवी के एक अद्वितीय पहलू को दर्शाता है, यह बताता है कि वे सृष्टि, स्थिति और लय का कारण बनी परम शक्ति हैं। इस नामावली का भक्तिपूर्वक पाठ करने से भक्त देवी की पूर्ण कृपा के पात्र बनते हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता, सुरक्षा और आनंद प्राप्त करते हैं।

लाभ (Benefits):

  • शत्रुओं से सुरक्षा और विजय: इंद्राणि देवी शक्ति और साहस की प्रतीक हैं, इसलिए इस नामावली का पाठ भक्तों को शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने में विजय दिलाता है।
  • स्वास्थ्य और रोग निवारण: "रोगहर्त्र्यै नमः" नाम से संकेतित होता है कि यह नामावली शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर करने में सहायता करती है, उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती है।
  • समृद्धि और ऐश्वर्य की वृद्धि: इंद्राणि देवी धन और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं, उनके नामों का जाप करने से भक्तों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है।
  • आत्मविश्वास और साहस: देवी के शक्ति स्वरूप का स्मरण करने से भक्तों में आत्मविश्वास, साहस और निर्भयता बढ़ती है, जिससे वे किसी भी परिस्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति: इन पवित्र नामों का भक्तिपूर्वक पाठ करने से मन को शांति, सुकून मिलता है और आध्यात्मिक मार्ग पर प्रगति करने में सहायता मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री इंद्राणि अष्टोत्तर शतनामावळिः क्या है?
श्री इंद्राणि अष्टोत्तर शतनामावळिः देवताओं के राजा इंद्र की पत्नी देवी इंद्राणि के 108 पवित्र नामों का स्तुतिगान है। यह देवी के विभिन्न रूपों, गुणों और शक्तियों का वर्णन करता है।
इस नामावली का पाठ कब करना चाहिए?
इस नामावली का पाठ किसी भी शुभ दिन या देवी को समर्पित मंगलवार, शुक्रवार को किया जा सकता है। प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन से पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्री इंद्राणि अष्टोत्तर शतनामावळिः के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इसके पाठ से शत्रुओं से सुरक्षा, स्वास्थ्य में वृद्धि, धन और समृद्धि की प्राप्ति, आत्मविश्वास में वृद्धि तथा मानसिक शांति मिलती है। देवी की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
इस नामावली का पाठ कौन कर सकता है?
दिव्य संरक्षण, शक्ति, समृद्धि और सफलता की इच्छा रखने वाला कोई भी भक्त इस नामावली का पाठ कर सकता है। विशेष रूप से महिलाएं अपने परिवार के कल्याण के लिए इसका पाठ कर सकती हैं।
इस नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस नामावली का प्रतिदिन कम से कम एक बार (108 नाम) पूर्ण भक्ति के साथ पाठ करना चाहिए। अधिक फल के लिए 11, 21 या 108 बार पाठ किया जा सकता है।
श्री इंद्राणि अष्टोत्तर शतनामावळिः की उत्पत्ति क्या है?
श्री इंद्राणि अष्टोत्तर शतनामावळिः का मूल प्राचीन पुराणों और आगम ग्रंथों में पाया जाता है। इसे देवी की महिमा का गुणगान करने के लिए संकलित किया गया है।

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