श्री गोविंद नामालु
गोविंदा हरि गोविंदा |
गोकुलनंदन गोविंदा |
श्री श्रीनिवासा गोविंदा |
श्री वेंकटेशा गोविंदा |
भक्तवत्सला गोविंदा |
भागवतप्रिय गोविंदा || 1
नित्यनिर्मला गोविंदा |
नीलमेघश्याम गोविंदा |
पुराणपुरुषा गोविंदा |
पुंडरीकाक्ष गोविंदा || 2
नंदनंदना गोविंदा |
नवनीतचोर गोविंदा |
पशुपालक श्री गोविंदा |
पापविमोचन गोविंदा || 3
दुष्टसंहार गोविंदा |
दुरितनिवारण गोविंदा |
शिष्टपरिपालक गोविंदा |
कष्टनिवारण गोविंदा || 4
वज्रमकुटधर गोविंदा |
वराहमूर्ति गोविंदा |
गोपीजनलोल गोविंदा |
गोवर्धनोद्धार गोविंदा || 5
दशरथनंदन गोविंदा |
दशमुखमर्दन गोविंदा |
पक्षिवाहन गोविंदा |
पांडवप्रिय गोविंदा || 6
मत्स्य कूर्म गोविंदा |
मधुसूदन हरि गोविंदा |
वराह नरसिंह गोविंदा |
वामन भृगुराम गोविंदा || 7
बलरामानुज गोविंदा |
बौद्धकल्किधर गोविंदा |
वेणुगानप्रिय गोविंदा |
वेंकटरमणा गोविंदा || 8
सीतानायक गोविंदा |
श्रितपरिपालक गोविंदा |
दरिद्रजनपोषक गोविंदा |
धर्मसंस्थापक गोविंदा || 9
अनाथरक्षक गोविंदा |
आपद्बांधव गोविंदा |
शरणागतवत्सल गोविंदा |
करुणासागर गोविंदा || 10
कमलदळाक्ष गोविंदा |
कामितफलदा गोविंदा |
पापविनाशक गोविंदा |
पाहि मुरारे गोविंदा || 11
श्रीमुद्रांकित गोविंदा |
श्रीवत्सांकित गोविंदा |
धरणीनायक गोविंदा |
दिनकरतेजा गोविंदा || 12
पद्मावतिप्रिय गोविंदा |
प्रसन्नमूर्ती गोविंदा |
अभयहस्त गोविंदा |
अक्षयवरद गोविंदा || 13 [मत्स्यावतारा]
शंखचक्रधर गोविंदा |
शार्ङ्गगदाधर गोविंदा |
विरजातीर्थस्थ गोविंदा |
विरोधिमर्दन गोविंदा || 14
सालग्रामधर गोविंदा |
सहस्रनामा गोविंदा |
लक्ष्मीवल्लभ गोविंदा |
लक्ष्मणाग्रज गोविंदा || 15
कस्तूरितिलक गोविंदा |
कांचनांबरधर गोविंदा |
गरुडवाहन गोविंदा |
गजराजरक्षक गोविंदा || 16
वानरसेवित गोविंदा |
वारधिबंधन गोविंदा |
सप्तगिरीशा गोविंदा | [एडुकॊंडलवाड]
एकस्वरूपा गोविंदा || 17
श्रीरामकृष्णा गोविंदा |
रघुकुलनंदन गोविंदा |
प्रत्यक्षदेवा गोविंदा |
परमदयाकर गोविंदा || 18
वज्रकवचधर गोविंदा |
वैजयंतिमाल गोविंदा |
वड्डिकासुलवाड गोविंदा |
वसुदेवतनया गोविंदा || 19
बिल्वपत्रार्चित गोविंदा |
भिक्षुकसंस्तुत गोविंदा |
स्त्रीपुंरूपा गोविंदा |
शिवकेशवमूर्ति गोविंदा || 20
ब्रह्मांडरूपा गोविंदा |
भक्तरक्षक गोविंदा |
नित्यकळ्याण गोविंदा |
नीरजनाभ गोविंदा || 21
हथीरामप्रिय गोविंदा |
हरिसर्वोत्तम गोविंदा |
जनार्दनमूर्ति गोविंदा |
जगत्साक्षिरूप गोविंदा || 22
अभिषेकप्रिय गोविंदा |
आपन्निवारण गोविंदा |
रत्नकिरीटा गोविंदा |
रामानुजनुत गोविंदा || 23
स्वयंप्रकाशा गोविंदा |
आश्रितपक्ष गोविंदा |
नित्यशुभप्रद गोविंदा |
निखिललोकेश गोविंदा || 24
आनंदरूपा गोविंदा |
आद्यंतरहिता गोविंदा |
इहपरदायक गोविंदा |
इभराजरक्षक गोविंदा || 25
परमदयाळो गोविंदा |
पद्मनाभहरि गोविंदा |
तिरुमलवासा गोविंदा |
तुलसीवनमाल गोविंदा || 26
शेषसायिने गोविंदा |
शेषाद्रिनिलया गोविंदा |
श्रीनिवास श्री गोविंदा |
श्री वेंकटेशा गोविंदा || 27
गोविंदा हरि गोविंदा |
गोकुलनंदन गोविंदा |
अर्थ
श्री गोविंद नामावली भगवान श्रीनिवास (विष्णु या कृष्ण) के दिव्य नामों का एक पवित्र पाठ है। यह नामावली भक्ति से परिपूर्ण एक सरल लेकिन अत्यंत शक्तिशाली प्रार्थना है, जो भगवान के विभिन्न रूपों, लीलाओं, गुणों और अवतारों का स्मरण कराती है। प्रत्येक नाम भगवान की अनंत करुणा, संरक्षण और दिव्य शक्ति की याद दिलाता है। दक्षिण भारत में, विशेष रूप से तिरुमाला में, यह नामावली भक्तों के हृदय में एक गहरा स्थान रखती है और दैनिक पूजा का एक अभिन्न अंग है।
इस गोविंद नामावली का पाठ केवल शब्दों की पुनरावृत्ति नहीं है, बल्कि भगवान के साथ गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने का एक माध्यम है। 'गोविंदा हरि गोविंदा' समस्त लोकों का पोषण करने वाले और उनकी रक्षा करने वाले हरि का नाम है। 'श्रीनिवासा, वेंकटेशा, भक्तवत्सला' नाम भक्तों पर अगाध प्रेम और करुणा बरसाने वाले तिरुमाला के स्वामी की स्तुति करते हैं। 'नंदनंदना, नवनीतचोरा' नाम श्री कृष्ण की बाल लीलाओं, उनके आनंदमय स्वरूप और सांसारिक मोह-माया को नष्ट करने की उनकी क्षमता की याद दिलाते हैं।
यह नामावली भगवान के सुरक्षात्मक गुणों को भी उजागर करती है। 'दुष्टसंहार, दुरितनिवारण' नाम भय और संकटों को दूर करने, दुष्ट शक्तियों का नाश करने की भगवान की शक्ति का वर्णन करते हैं। 'गोवर्धनोद्धार, गोपीजनलोल' नाम गोकुल की रक्षा करने वाले और गोपियों के प्रिय श्री कृष्ण की लीलाओं का स्मरण कराते हैं। 'दशमुखमर्दन, पांडवप्रिय' नाम श्री राम के रूप में रावण का संहार करने वाले और पांडवों के घनिष्ठ मित्र के रूप में उनकी रक्षा करने वाले भगवान की महिमा का बखान करते हैं। मत्स्य, कूर्म, नरसिंह, वामन जैसे दशावतारों का स्मरण भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए भगवान द्वारा लिए गए विभिन्न रूपों को दर्शाता है।
वेणुगानप्रिय, वेंकटरमणा, सीतानायक, धर्मसंस्थापक, आपद्बांधव, करुणासागर, कमलदलाक्ष, पापविनाशक, पद्मावतीप्रिय, अक्षयवरद, शंखचक्रधर, विरोधीमर्दन, सहस्रनाम, लक्ष्मीवल्लभ, गरुड़वाहन, गजराजरक्षक, सप्तगिरीश, श्रीरामकृष्णा, परमदयाकर जैसे प्रत्येक नाम भगवान के एक विशिष्ट गुण, लीला या संबंध का वर्णन करते हैं। इन नामों का पाठ करने से भक्त भगवान के अनंत स्वरूपों का ध्यान करते हैं और अपने हृदय के अंधकार को दूर करते हैं। यह नामावली भक्ति, आनंद और कृतज्ञता से भरी एक पूर्ण आराधना है, जो पापों के क्षय, मन की शांति और मोक्ष का मार्ग दिखाती है।
लाभ (Benefits):
- पाप क्षय और शुद्धि: गोविंद नामों का निरंतर जप करने से पापों का नाश होता है और मन तथा आत्मा शुद्ध होती है। यह आंतरिक शांति प्रदान करता है।
- संकट निवारण: भगवान के विभिन्न रक्षात्मक नामों का स्मरण करने से जीवन में आने वाले कष्ट, बाधाएं और भय दूर होते हैं। भक्तों को भगवान का संरक्षण प्राप्त होता है।
- मानसिक शांति और संतोष: इस नामावली का पाठ मन को एकाग्र करता है और आध्यात्मिक आनंद तथा आंतरिक शांति प्रदान करता है। तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है।
- भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति: भगवान के गुणों का स्मरण करने से भक्ति बढ़ती है और भगवान के सान्निध्य को प्राप्त करने का मार्ग सुगम होता है। यह अंततः मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है।
- दिव्य कृपा और आशीर्वाद: श्री गोविंद नामों का भक्तिपूर्वक पाठ करने वालों पर श्रीनिवास की दिव्य कृपा और आशीर्वाद सदैव बने रहते हैं, जिससे जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री गोविंद नामावली क्या है?
श्री गोविंद नामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री गोविंद नामावली के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
श्री गोविंद नामावली का पाठ कौन कर सकता है?
श्री गोविंद नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री गोविंद नामावली का उद्भव कहाँ से हुआ है?
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