- ॐ अनाध्यायै नमः
- ॐ अक्षुभ्जायै नमः
- ॐ अयोनिजायै नमः
- ॐ अनलप्रभावायै नमः
- ॐ अद्या यै नमः
- ॐ अपद्दारिण्यै नमः
- ॐ आदित्यमंडलगतायैनमः
- ॐ आकाशरूपिण्यै नमः
- ॐ इंद्राण्यै नमः
- ॐ इंद्रार्चितायै नमः
- ॐ इंदुचूडायै नमः
- ॐ ई शित्रै नमः
- ॐ ईशमायायै नमः
- ॐ उग्रचंडायै नमः
- ॐ उग्रवेगायै नमः
- ॐ उग्रप्रभावत्यै नमः
- ॐ उन्मत्तकेशिन्यै नमः
- ॐ उन्मत्तभैरवन्यै नमः
- ॐ ऋजुमार्गस्तायै नमः
- ॐ ऋषिदेवरनमस्कृतायै नमः
- ॐ एकाक्षरायै नमः
- ॐ एकमात्रायै नमः
- ॐ अंडमध्यस्थितायै नमः
- ॐ करुणाकरायै नमः
- ॐ कमन्यै नमः
- ॐ कमलस्तायै नमः
- ॐ कल्पवृक्षस्वरूपिण्यै नमः
- ॐ कालजिह्वायै नमः
- ॐ कैटभासुरमर्दिन्यै नमः
- ॐ गीतनृतपरायणायै नमः
- ॐ गुह्यकाळिकायै नमः
- ॐ गुणैकनिलयायै नमः
- ॐ गुप्तस्थाननिवासिन्यै नमः
- ॐ गोपकुलोद्भवायै नमः
- ॐ चतुव्रक्र्तयै नमः
- ॐ चतुर्वेदात्मिकायै नमः
- ॐ चंद्रशेखरवक्षस्तायै नमः
- ॐ चंद्रशेखरवल्लभायै नमः
- ॐ चेतनात्मिकायै नमः
- ॐ जगद्रूपायै नमः
- ॐ जन्ममृत्युजरातीतायै नमः
- ॐ जातवेदस्वरूण्यै नमः
- ॐ जीवात्मिकायै नमः
- ॐ ज्वरातीतायै नमः
- ॐ तप्तकांचनसंकाशायै नमः
- ॐ तप्तकांचनभूषणायै नमः
- ॐ तिलहोमप्रियायै नमः
- ॐ त्रिपुरघ्ने नमः
- ॐ त्रिशूलवरधारिण्यै नमः
- ॐ त्रैलोक्यजनन्यै नमः
- ॐ त्रैलोक्यमोहिन्यै नमः
- ॐ दारिद्र्यभेदिन्यै नमः
- ॐ दिव्यनेत्रायै नमः
- ॐ दीननाधायै नमः
- ॐ देवेंद्रवंद्य पादाब्जायै नमः
- ॐ नवनीतप्रियाय नमः
- ॐ नारायणपदोद्भवायै नमः
- ॐ निराकारायै नमः
- ॐ निसुंभहंत्यै नमः
- ॐ नीलकंठमनोरमायै नमः
- ॐ नैमिशारण्यवासिन्यै नमः
- ॐ पराशक्तॆ नमः
- ॐ पर्वतनंदिन्यै नमः
- ॐ पंचपातकनाशिन्यै नमः
- ॐ परमाह्लादकारिण्यै नमः
- ॐ पद्ममालविभूषितायै नमः
- ॐ पूर्णब्रह्म स्वरूपिण्यै नमः
- ॐ प्रणतैश्वरदायै नमः
- ॐ प्रधानपुरुषाराध्यायै नमः
- ॐ प्रद्युम्नजनन्यै नमः
- ॐ प्रत्यक्षब्रह्मरूपायै नमः
- ॐ प्राणशक्त्ये नमः
- ॐ प्रेत संस्थायै नमः
- ॐ फणींद्रभूषणायै नमः
- ॐ बगळायै नमः
- ॐ बदर्या श्रमवासिन्यै नमः
- ॐ बंधूककुसुमाभायै नमः
- ॐ बिंदुनाधस्वरूपिण्यै नमः
- ॐ ब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः
- ॐ ब्रह्मविष्णुशिवाराध्यायै नमः
- ॐ भूतांतरस्तायै नमः
- ॐ भूनाधप्रियांगनायै नमः
- ॐ मंत्रात्मिकायै नमः
- ॐ महायोगीश्वरेश्वर्यै नमः
- ॐ महाचिंतानाशिन्यै नमः
- ॐ मधुकैटभसंहात्रै नमः
- ॐ मंजुभाषिण्यै नमः
- ॐ मरतकश्यामायै नमः
- ॐ मंदार कुसुमार्चितायै नमः
- ॐ मूलाधारनिवासिन्यै नमः
- ॐ योगनिद्रायै नमः
- ॐ योगिवंद्यायै नमः
- ॐ रावणचेदकारिण्यै नमः
- ॐ वायुमंडलमध्यस्थायै नमः
- ॐ वाज पेयफलप्रदायै नमः
- ॐ विश्वांबिकायै नमः
- ॐ विश्वं भराय नमः
- ॐ विश्वरूपिणै नमः
- ॐ विश्व विनाशिन्यै नमः
- ॐ विश्व प्राणात्मिकायै नमः
- ॐ विरूपाक्षमनोरमायै नमः
- ॐ वेदविद्यायै नमः
- ॐ वेदाक्षरपरीत्वांग्यै नमः
- ॐ संक्षोभनाशिन्यै नमः
- ॐ संसारार्णवतारिण्यै नमः
- ॐ क्षेमदायिन्यै नमः
- ॐ संसारबंधकर्तॆ नमः
- ॐ संसारपर्जितायै नमः
- ॐ श्री देवि लोकमातायै नमः
||इति श्री देवीओं अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं||
अर्थ
श्री देवी अष्टोत्तर शतनामावलिः आदिशक्ति भगवती दुर्गा के 108 पावन नामों का संग्रह है, जो उनके विभिन्न स्वरूपों, गुणों और लीलाओं का गुणगान करता है। यह नामावलि देवी की अनंत शक्ति, करुणा और सुंदरता का अद्वितीय वर्णन करती है। प्रत्येक नाम देवी के एक विशिष्ट गुण या उनके कार्य को दर्शाता है, जिससे भक्तगण गहन भक्ति और श्रद्धा के साथ इन दिव्य नामों का जप करके उनकी उपस्थिति का अनुभव कर पाते हैं। यह केवल नामों का संकलन नहीं, बल्कि देवी के दिव्य स्वरूप का संपूर्ण दर्शन कराने वाला एक आध्यात्मिक मार्ग है।
यह अष्टोत्तर देवी की सृष्टि, स्थिति और संहारक शक्ति को उजागर करता है। उदाहरण के लिए, 'ॐ अनाध्यायै नमः' का अर्थ है कि वह आदि और अनादि हैं, जिनका कोई आरंभ नहीं; 'ॐ अक्षुभ्जयै नमः' का अर्थ है कि वह कभी विचलित न होने वाली, अचल शक्ति हैं; 'ॐ अयोनिजायै नमः' का अर्थ है कि वह स्वयंभू हैं, किसी से उत्पन्न नहीं हुई हैं; 'ॐ अनलप्रभावायै नमः' का अर्थ है कि वह अग्नि के समान तेजस्वी, असाधारण प्रभाव वाली हैं; 'ॐ आद्यै नमः' का अर्थ है कि वह आदि शक्ति हैं, सभी की मूल स्रोत हैं; 'ॐ आपद्धारिण्यै नमः' का अर्थ है कि वह सभी आपदाओं को दूर करने वाली हैं। ये नाम स्पष्ट करते हैं कि देवी सभी प्राणियों के कल्याण के लिए हैं और समस्त सृष्टि के पीछे की परम शक्ति हैं। वह इंद्रायणी, इंद्रार्चिता, ईशित्री, ईशमाया, उग्रचण्डा, उग्रवेगा, उग्रप्रभावती, उन्मत्तकेशिनी, उन्मत्तभैरवनी जैसे विभिन्न रूपों में प्रकट होकर दुष्ट शक्तियों का नाश करती हैं और धर्म की रक्षा करती हैं।
इस शतनामावलि में देवी के सौम्य और उग्र दोनों रूप समाहित हैं। वह करुणाकरायै (करुणा से भरी हुई), कमन्यै (सुंदरी), कमलस्थायै (कमल पर विराजमान) हैं, तो वहीं कालजिह्वायै (काल की जिह्वा के समान भयंकर) और कैटभासुरमर्दिण्यै (कैटभासुर का वध करने वाली) भी हैं। देवी के ये विविध नाम भक्तों को उनकी सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमत्ता को समझने में सहायता करते हैं। प्रत्येक नाम एक मंत्र के समान है, जिसका पाठ करने से मन को शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त होता है। यह नामावलि देवी के प्रति समर्पण को गहरा करती है और जीवन में सकारात्मकता लाती है।
लाभ (Benefits):
- समस्त इच्छाओं की पूर्ति: इस नामावलि का निरंतर जप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें देवी की कृपा प्राप्त होती है।
- संकटों का निवारण: देवी के इन 108 नामों का स्मरण करने से जीवन में आने वाली बाधाएँ, कठिनाइयाँ और भय दूर होते हैं।
- आध्यात्मिक प्रगति: देवी के नामों का ध्यान मन को शुद्ध करता है, शांति प्रदान करता है और आध्यात्मिक ज्ञानोदय का मार्ग प्रशस्त करता है।
- सुरक्षा और साहस: देवी के नामों का जप भक्तों को दैवीय सुरक्षा प्रदान करता है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए साहस भरता है।
- सकारात्मक ऊर्जा: इस शतनामावलि के पाठ से आसपास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे मन को शांति और आनंद मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री देवि अष्टोत्तर शतनामावलिः क्या है?
देवि अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस शतनामावलि का पाठ करने के प्रमुख लाभ क्या हैं?
देवि अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
देवि अष्टोत्तर शतनामावलि का मूल स्रोत क्या है?
नवदुर्गा की कथाएँ
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
