पद्धॆनिमिदि मॆट्ल पाट (Onnam Thiruppadi)
ॐ स्वामिये शरणमय्यप्पा |
सत्यमाय पदिनॆट्टाम् पडिगळे शरणमय्यप्पा |
ॐ सद्गुरुनाथने शरणमय्यप्पा |
ऒण्णां तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 1
रॆण्डाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 2
मूणाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 3
नान्गाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 4
ऐन्दाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 5
आऱाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 6
एळा*म् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 7
ऎट्टाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 8
ऒन्पदाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 9
पत्ताम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 10
पदिनॊन्नाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 11
पनिरॆण्डाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 12
पदिमून्ऱाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 13
पदिनालाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 14
पदिनञ्जाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 15
पदिनाऱाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 16
पदिनेळा*म् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 17
पदिनॆट्टाम् तिरुप्पडि शरणं पॊन् अय्यप्पा |
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा || 18
अय्यप्पा शरणं शरणं पॊन् अय्याप्पा
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा ||
पडि पदिनॆट्टुम् शरणं पॊन् अय्याप्पा
स्वामि पॊन् अय्यप्पा ऎन् अय्यने पॊन् अय्यप्पा
स्वामियॆल्लादॊरु शरणमिल्लैय्यप्पा ||
ॐ स्वामिये शरणमय्यप्पा ||
अर्थ
भगवान अय्यप्पा के पवित्र धाम सबरीमाला की यात्रा में, अठारह सीढ़ियाँ (पद्धॆनिमिदि मॆट्ल पाट या ओन्नाम तिरुप्पडी) केवल भौतिक सीढ़ियाँ नहीं हैं, बल्कि वे आध्यात्मिक उत्थान की सीढ़ियों का प्रतीक हैं। प्रत्येक सीढ़ी भक्त को भगवान अय्यप्पा के करीब एक कदम ले जाती है। यह पादगीत प्रत्येक सीढ़ी को नमन करके सबरीमाला यात्रा के सार और भगवान के साथ जुड़ने के मार्ग का वर्णन करता है। यह भक्तों के मन को शुद्ध करने और सबरीमाला यात्रा के अंतिम लक्ष्य, अय्यप्पा के दर्शन के लिए तैयार करने वाली एक भक्तिपूर्ण प्रार्थना है।
इन अठारह सीढ़ियों का गहरा दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, ये सीढ़ियाँ पाँच इंद्रियों, आठ रागों, तीन गुणों (सत्व, रजस, तमस), विद्या और अविद्या, तथा पुण्य और पाप का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन्हें पार करना सांसारिक बंधनों से ऊपर उठना, अहंकार का त्याग करना और परमात्मा के साथ एकाकार होने का प्रयास है। प्रत्येक सीढ़ी पार करते समय "शरणं पोन अय्यप्पा" का उद्घोष करना, स्वयं को पूरी तरह से अय्यप्पा को समर्पित करने का प्रतीक है। "स्वामीयेल्लादोरु शरणमिल्लैयाप्पा" पंक्ति यह बताती है कि अय्यप्पा के अलावा कोई अन्य आश्रय नहीं है, और वे ही हमारे एकमात्र रक्षक हैं।
प्रत्येक सीढ़ी पार करते समय इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों के मन में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण की भावना मजबूत होती है। यह केवल सीढ़ियाँ चढ़ना नहीं है, बल्कि आंतरिक शुद्धि की प्रक्रिया है। ये सीढ़ियाँ भक्तों को भौतिक संसार से आध्यात्मिक संसार की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर, दुःख से आनंद की ओर ले जाने वाले पुल के समान हैं। ऐसा माना जाता है कि अठारह सीढ़ियाँ चढ़ते समय भक्त अपने पापों को धोकर एक नए आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत करते हैं। यह शारीरिक परिश्रम के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति भी प्रदान करता है।
यह पवित्र गीत अय्यप्पा भक्तों के लिए केवल एक पाठ नहीं है, बल्कि यह उनकी आस्था और समर्पण का प्रतिबिंब है। इन सीढ़ियों को पार करने के बाद ही भक्त अय्यप्पा स्वामी के दर्शन के लिए योग्य होते हैं। यह प्रत्येक सीढ़ी भक्त को सत्य, धर्म, संयम और भक्ति का पाठ सिखाती है। अय्यप्पा के नाम का स्मरण करते हुए इन सीढ़ियों पर चढ़ना, भगवान की कृपा प्राप्त करने और मोक्ष के मार्ग पर चलने में सहायक है। यह सबरीमाला के दिव्य वातावरण में अनुभव किया जाने वाला एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव है।
लाभ (Benefits):
- आध्यात्मिक शुद्धि: इस स्तोत्र का पाठ मन और शरीर को शुद्ध करता है, भक्तों को आध्यात्मिक रूप से उन्नत करता है।
- अय्यप्पा की कृपा: श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भगवान अय्यप्पा की विशेष कृपा प्राप्त होती है, उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।
- निर्भयता और साहस: "शरणं अय्यप्पा" का उद्घोष भक्तों में साहस और निर्भयता भरता है, किसी भी चुनौती का सामना करने में मदद करता है।
- इच्छाशक्ति में वृद्धि: अठारह सीढ़ियाँ चढ़ने का संकल्प और इस स्तोत्र का पाठ इच्छाशक्ति को मजबूत करता है।
- संकट निवारण: अय्यप्पा की शरण घोषणा जीवन की कठिनाइयों और बाधाओं को दूर करने में सहायता करती है।
- मानसिक शांति: इस भक्ति गीत का नियमित पाठ आंतरिक शांति और संतोष प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पद्धॆनिमिदि मॆट्ल पाट (Onnam Thiruppadi) क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
पद्धॆनिमिदि मॆट्ल पाट के लाभ क्या हैं?
कौन इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है?
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का मूल क्या है?
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