- ॐ महाशास्त्रे नमः
- ॐ महादेवाय नमः
- ॐ महादेवसुताय नमः
- ॐ अव्याय नमः
- ॐ लोककर्त्रे नमः
- ॐ लोकभर्त्रे नमः
- ॐ लोकहर्त्रे नमः
- ॐ परात्पराय नमः
- ॐ त्रिलोकरक्षकाय नमः
- ॐ धन्विने नमः 10
- ॐ तपस्विने नमः
- ॐ भूतसैनिकाय नमः
- ॐ मंत्रवेदिने नमः
- ॐ महावेदिने नमः
- ॐ मारुताय नमः
- ॐ जगदीश्वराय नमः
- ॐ लोकाध्यक्षाय नमः
- ॐ अग्रण्ये नमः
- ॐ श्रीमते नमः
- ॐ अप्रमेयपराक्रमाय नमः 20
- ॐ सिंहारूढाय नमः
- ॐ गजारूढाय नमः
- ॐ हयारूढाय नमः
- ॐ महेश्वराय नमः
- ॐ नानाशस्त्रधराय नमः
- ॐ अनर्घाय नमः
- ॐ नानाविद्याविशारदाय नमः
- ॐ नानारूपधराय नमः
- ॐ वीराय नमः
- ॐ नानाप्राणिनिषेविताय नमः 30
- ॐ भूतेशाय नमः
- ॐ भूतिदाय नमः
- ॐ भृत्याय नमः
- ॐ भुजंगाभरणोज्ज्वलाय नमः
- ॐ इक्षुधन्विने नमः
- ॐ पुष्पबाणाय नमः
- ॐ महारूपाय नमः
- ॐ महाप्रभवे नमः
- ॐ मायादेवीसुताय नमः
- ॐ मान्याय नमः 40
- ॐ महनीयाय नमः
- ॐ महागुणाय नमः
- ॐ महाशैवाय नमः
- ॐ महारुद्राय नमः
- ॐ वैष्णवाय नमः
- ॐ विष्णुपूजकाय नमः
- ॐ विघ्नेशाय नमः
- ॐ वीरभद्रेशाय नमः
- ॐ भैरवाय नमः
- ॐ षण्मुखप्रियाय नमः 50
- ॐ मेरुशृंगसमासीनाय नमः
- ॐ मुनिसंघनिषेविताय नमः
- ॐ देवाय नमः
- ॐ भद्राय नमः
- ॐ जगन्नाथाय नमः
- ॐ गणनाथाय नाम्ः
- ॐ गणेश्वराय नमः
- ॐ महायोगिने नमः
- ॐ महामायिने नमः
- ॐ महाज्ञानिने नमः 60
- ॐ महास्थिराय नमः
- ॐ देवशास्त्रे नमः
- ॐ भूतशास्त्रे नमः
- ॐ भीमहासपराक्रमाय नमः
- ॐ नागहाराय नमः
- ॐ नागकेशाय नमः
- ॐ व्योमकेशाय नमः
- ॐ सनातनाय नमः
- ॐ सगुणाय नमः
- ॐ निर्गुणाय नमः 70
- ॐ नित्याय नमः
- ॐ नित्यतृप्ताय नमः
- ॐ निराश्रयाय नमः
- ॐ लोकाश्रयाय नमः
- ॐ गणाधीशाय नमः
- ॐ चतुःषष्टिकलामयाय नमः
- ॐ ऋग्यजुःसामाथर्वात्मने नमः
- ॐ मल्लकासुरभंजनाय नमः
- ॐ त्रिमूर्तये नमः
- ॐ दैत्यमथनाय नमः 80
- ॐ प्रकृतये नमः
- ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
- ॐ कालज्ञानिने नमः
- ॐ महाज्ञानिने नमः
- ॐ कामदाय नमः
- ॐ कमलेक्षणाय नमः
- ॐ कल्पवृक्षाय नमः
- ॐ महावृक्षाय नमः
- ॐ विद्यावृक्षाय नमः
- ॐ विभूतिदाय नमः 90
- ॐ संसारतापविच्छेत्रे नमः
- ॐ पशुलोकभयंकराय नमः
- ॐ रोगहंत्रे नमः
- ॐ प्राणदात्रे नमः
- ॐ परगर्वविभंजनाय नमः
- ॐ सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञाय नमः
- ॐ नीतिमते नमः
- ॐ पापभंजनाय नमः
- ॐ पुष्कलापूर्णासंयुक्ताय नमः
- ॐ परमात्मने नमः 100
- ॐ सतांगतये नमः
- ॐ अनंतादित्यसंकाशाय नमः
- ॐ सुब्रह्मण्यानुजाय नमः
- ॐ बलिने नमः
- ॐ भक्तानुकंपिने नमः
- ॐ देवेशाय नमः
- ॐ भगवते नमः
- ॐ भक्तवत्सलाय नमः 108
|| इति श्री धर्मशास्त अष्टोत्तर शतनामावळिः संपूर्णं ||
अर्थ
श्री धर्मशास्त अष्टोत्तर शतनामावलिः भगवान श्री धर्मशास्त, जिन्हें भगवान अय्यप्पा के नाम से भी जाना जाता है, को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। यह नामावलि भगवान शिव और मोहिनी रूपी श्री महाविष्णु के दिव्य पुत्र श्री अय्यप्पा स्वामी के विभिन्न गुणों, शक्तियों और रूपों का वर्णन करती है। प्रत्येक नाम भगवान की अनंत महिमा के एक पहलू का प्रतिनिधित्व करता है और भक्तों को गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। यह शतनामावलि अय्यप्पा भक्तों के लिए दैनिक पूजा और ध्यान का एक अत्यंत श्रेष्ठ साधन है।
इस नामावलि का पाठ केवल शब्दों की पुनरावृत्ति नहीं है, बल्कि भगवान की दिव्य उपस्थिति का आह्वान करने का एक शक्तिशाली आध्यात्मिक अभ्यास है। 'ॐ महाशास्त्रे नमः' पहला नाम भगवान के महान शासक और प्रशासक रूप की स्तुति करता है, धर्म की रक्षा और न्याय स्थापित करने में उनकी भूमिका को उजागर करता है। इसके बाद आने वाले 'ॐ महादेवाय नमः' और 'ॐ महादेवसुताय नमः' नाम उनके दिव्य मूल, शिव के अंश और शिवपुत्र के रूप में उनकी पहचान को स्पष्ट करते हैं। 'लोककर्त्रे, लोकभर्त्रे, लोकहर्त्रे' जैसे नाम सृष्टि, पालन और संहार जैसे त्रिदेवों के कार्यों को करने वाले उनके सर्वशक्तिमान स्वरूप को दर्शाते हैं, उन्हें 'परात्पराय' अर्थात् सबसे श्रेष्ठ घोषित करते हैं।
इस शतनामावलि में भगवान धर्मशास्त के विभिन्न दिव्य गुणों का विस्तार से वर्णन किया गया है। 'त्रिलोक रक्षकया' नाम तीनों लोकों के रक्षक के रूप में उनकी भूमिका को इंगित करता है। 'धन्विन, तपस्विन, भूत सैनिकाय' जैसे नाम उन्हें एक महान धनुर्धर, तपस्वी और भूतगणों की सेना के नायक के रूप में चित्रित करते हैं। 'मंत्रवेदिन, महावेदिन' नाम उनके अपार ज्ञान और वेदों के ज्ञान को उजागर करते हैं। 'सिंहारूढ़ाय, गजारूढ़ाय, हयारूढ़ाय' जैसे नाम सिंह, हाथी और घोड़े पर सवार उनके शक्तिशाली और विविध रूपों को दर्शाते हैं, जो उनकी सर्वव्यापकता और किसी भी रूप को धारण करने की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं। 'नाना शस्त्रधराय, नाना विद्याविशारदाय, नानारूपधराय' जैसे नाम उनके बहुमुखी व्यक्तित्व, विभिन्न शस्त्रों को धारण करने, सभी विद्याओं में निपुण होने और अनेक रूप धारण करने की उनकी क्षमता को प्रकट करते हैं।
इस शतनामावलि का भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। प्रत्येक नाम एक मंत्र है, जिसके पाठ से भगवान का आशीर्वाद आसानी से प्राप्त होता है। यह स्तोत्र न केवल अय्यप्पा स्वामी के अनंत गुणों का गुणगान करता है, बल्कि भक्तों को धर्म के मार्ग पर चलने, सत्य और न्याय का पालन करने के लिए भी प्रेरित करता है। यह अय्यप्पा स्वामी की दिव्य शक्ति से जुड़ने का एक अत्यंत प्रभावी तरीका है।
लाभ (Benefits):
- सभी बाधाओं का निवारण: श्री धर्मशास्त अष्टोत्तर शतनामावलिः का पाठ जीवन में आने वाली सभी बाधाओं, कठिनाइयों और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है।
- शांति और समृद्धि: इस नामावलि का निरंतर जप करने से मानसिक शांति और सुकून प्राप्त होता है, तथा घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
- सुरक्षा और निर्भयता: भगवान अय्यप्पा स्वामी अपने भक्तों को सभी आपदाओं से बचाते हैं। इस स्तोत्र का पाठ भक्तों को निर्भयता और एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
- आध्यात्मिक प्रगति: अय्यप्पा स्वामी के 108 नामों का जप करने से भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की भावना में वृद्धि होती है, जिससे मोक्ष के मार्ग पर प्रगति करने में सहायता मिलती है।
- सबरीमाला यात्रा की तैयारी: सबरीमाला यात्रा पर जाने वाले भक्तों के लिए इस नामावलि का पाठ व्रत की अवधि के दौरान मानसिक शुद्धता और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है, जिससे यात्रा सफल होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री धर्मशास्त अष्टोत्तर शतनामावलिः क्या है?
इसका पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री धर्मशास्त अष्टोत्तर शतनामावलिः के पाठ के क्या लाभ हैं?
इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का मूल या उद्गम क्या है?
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