- ॐ आदिशक्यै नमः
- ॐ अमेयात्मने नमः
- ॐ ललितांबायै नमः
- ॐ कृपावरायै नमः
- ॐ अमृतार्णव मध्यस्थायै नमः
- ॐ सच्चिदानंदरूपिण्यै नमः
- ॐ रावणस्तुतिसंप्रीतायै नमः
- ॐ सीताचारित्रतोषिण्यै नमः
- ॐ रावणाधर्म कुपितायै नमः
- ॐ त्यक्तलंका निवासिन्यै नमः
- ॐ धार्मिकस्तुति संप्रीतायै नमः
- ॐ लोकपालकशांकर्यै नमः
- ॐ शिवदृक्विधान संव्यग्रायै नमः
- ॐ कांचीपुर निवासिन्यै नमः
- ॐ एकाम्रेश समासक्तायै नमः
- ॐ गंगाप्लव निरोधिन्यै नमः
- ॐ संक्लिष्टसिकतालिंगायै नमः
- ॐ कामाक्ष्यै नमः
- ॐ भक्तवत्सलायै नमः
- ॐ ऋष्यशृंगतपः प्रीतायै नमः
- ॐ प्रद्युम्ने शृंखलाभदायै नमः
- ॐ भक्तबंधमोक्र्यै नमः
- ॐ भक्ति बंधविधायिन्यै नमः
- ॐ शृंगशैलसमाक्रांत निजशक्ति परंपरायै नमः
- ॐ क्रौंचपर्वतसंस्थानायै नमः
- ॐ चामुंडायै नमः
- ॐ चंद्रशेखरायै नमः
- ॐ महिषादिकसंहर्यै नमः
- ॐ महिषस्थानवासिन्यै नमः
- ॐ हलंपुरे जोगुलांबायै नमः
- ॐ बालब्रह्मेश्वरप्रियायै नमः
- ॐ कुमारादिनव ब्रह्म मूर्तिबिः परिसेवितायै नमः
- ॐ रेणुकादि समाराध्यायै नमः
- ॐ जमदग्नि निषेवितायै नमः
- ॐ रामार्चनेनसंप्रीतायै नमः
- ॐ चंडीमुंडी समन्वितायै नमः
- ॐ श्री भ्रमरांबायै नमः
- ॐ महादेव्यै नमः
- ॐ श्रीशैलेशकुटुंबिन्यै नमः
- ॐ भ्रामरीनाद संधानायै नमः
- ॐ भक्तिमुक्ति प्रदायिन्यै नमः
- ॐ शूलाद्यायुध संपन्नायै नमः
- ॐ महालक्ष्यै नमः
- ॐ महाद्युतये नमः
- ॐ पद्मावतीपुरावासाय नमः
- ॐ कॊल्हापुर निवासिन्यै नमः
- ॐ नागलिंगेयोनिमुद्रांबि भ्रत्यै शिरसामुदा नमः
- ॐ मातुलुंगगदाखेटपान पात्रविलासिन्यै नमः
- ॐ एकवीरायै नमः
- ॐ महादेव्यै नमः
- ॐ महूरक्षेत्रवासिन्यै नमः
- ॐ भीकरास्या यै नमः
- ॐ महोदारायै नमः
- ॐ मायासंहरणाकृतये नमः
- ॐ शिरोमात्रधरायै नमः
- ॐ देव्यै नमः
- ॐ रेणुका प्रतिरूपिण्यै नमः
- ॐ महाकाळ्यै: उज्जयिन्यै नमः
- ॐ महाकालमनोहर्यै नमः
- ॐ दूषणासुरसंहर्यै नमः
- ॐ श्रीचक्रपरिशोभिन्यै नमः
- ॐ पीठिकापुरसंस्थानायै नमः
- ॐ पुरहूत समर्चितायै नमः
- ॐ पुरहूती समाख्यायै नमः
- ॐ भक्तरक्षणतत्परायै नमः
- ॐ ओड्याण पीठनिलयायै नमः
- ॐ वैतरिणी तटवासिन्यै नमः
- ॐ गिरिजेतिमहाभिख्यायै नमः
- ॐ भिजाधानामधुरिण्यै नमः
- ॐ सरस्वती महालक्ष्मी महाकाळी स्वरूपिणी नमः
- ॐ माणिक्यांबा महशक्यै नमः
- ॐ दक्षारामविराजितायै नमः
- ॐ सप्तर्षि पूजान प्रीतायै नमः
- ॐ सप्त गोदावरार्चितायै नमः
- ॐ कारुण्य परिपूर्णायै नमः
- ॐ भीमेश्वर महेश्वर्यै नमः
- ॐ हरिक्षेत्र निवासायै नमः
- ॐ कामरूपायै नमः
- ॐ महेश्वर्यै नमः
- ॐ असमांबकपत्यै नमः
- ॐ विषमप्रांतपालिन्यै नमः
- ॐ कामख्य क्षेत्र संस्थानायै नमः
- ॐ सायंनृत्य विनोदिन्यै नमः
- ॐ प्रयागक्षेत्र संस्थानायै नमः
- ॐ त्रिवेणीसंगमपूजितायै नमः
- ॐ अलोपीनामधेयायै नमः
- ॐ तस्यै नमः
- ॐ माधवेश्वर्यै नमः
- ॐ प्रयागक्षेत्रभूषायै नमः
- ॐ ज्वालामुखीश्वरीदेव्यै नमः
- ॐ वैष्णव्यैनमः
- ॐ सर्वपालिन्यै नमः
- ॐ राधेश्यामोच्चारण प्रीतायै नमः
- ॐ स्त्रीपुंद्योतकाभिधायै नमः
- ॐ गयामांगळ्यगौर्यै नमः
- ॐ गदाधरसहोदर्यै नमः
- ॐ पितृतर्पणसंप्रीतायै नमः
- ॐ कर्तृ, पितृवरप्रदायै नमः
- ॐ सर्वमंगळदायिन्यै नमः
- ॐ वारणास्यां विशालक्ष्यै नमः
- ॐ विश्वेशानंद विस्मितायै नमः
- ॐ नित्यान्नदान निरतायै नमः
- ॐ शंकरप्राणवल्लभायै नमः
- ॐ अन्नपूर्णामहादेव्यै नमः
- ॐ व्याससत्त्व विशोधिन्यै नमः
- ॐ पार्वतीकोपहारिड्यै नमः
- ॐ सल्लापचतुरायै नमः
- ॐ मनश्शांति प्रदायिन्यै नमः
||इति श्री अष्टादश शक्तिपीठ अष्टोत्तर शत नामावळि समाप्तं||
अर्थ
श्री अष्टादश शक्तिपीठ अष्टोत्तर शतनामावलिः आदिशक्ति माँ दुर्गा के 108 पवित्र नामों का एक दिव्य संग्रह है, जो भक्तों को देवी के विभिन्न स्वरूपों और उनके पवित्र शक्तिपीठों से जोड़ता है। इस स्तोत्र का पौराणिक आधार सती देवी के शरीर के अंगों के पृथ्वी पर गिरने से बने 18 प्रमुख शक्तिपीठों की महिमा से जुड़ा है। प्रत्येक नाम देवी के एक अनूठे गुण, उनकी शक्ति या उनके निवास स्थान को वर्णित करता है। यह नामावलि केवल नामों का संग्रह नहीं है, बल्कि देवी के अनंत रूपों और उनकी दिव्य लीलाओं का एक संक्षिप्त विवरण है, जो भक्तों को उनकी असीम शक्ति का अनुभव कराता है।
इस अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ करने से भक्त देवी के सच्चिदानंद स्वरूप का ध्यान कर पाते हैं। 'ॐ आदिशक्त्यै नमः' समस्त सृष्टि की मूलभूत शक्ति की स्तुति करता है, जबकि 'ॐ ललिताम्बायै नमः' सौंदर्य और करुणा की साकार रूप ललितांबिका को महिमामंडित करता है। 'ॐ अमृतार्णव मध्यस्थायै नमः' नाम यह दर्शाता है कि देवी अमृत के सागर के मध्य में निवास करती हैं, जो शाश्वत आनंद और अमरता का प्रतीक है। 'ॐ सच्चिदानंदरूपिण्यै नमः' यह उद्घोष करता है कि देवी सत्य, चेतना और आनंद का प्रत्यक्ष स्वरूप हैं। यह नामावलि कामाक्षी, चामुंडा जैसे देवी के प्रमुख रूपों को भी समाहित करती है, जिससे प्रत्येक नाम भक्तों को देवी की महिमा का अनुभव करने में सहायता करता है।
यह स्तोत्र देवी की विभिन्न लीलाओं का भी स्मरण कराता है। उदाहरण के लिए, 'ॐ रावणस्तुति संप्रिप्तायै नमः' और 'ॐ सीताचारित्रतोषिन्यै नमः' रावण की स्तुति से प्रसन्न होने वाली और सीता देवी के चरित्र से संतुष्ट होने वाली देवी का वर्णन करते हैं। 'ॐ रावणाधर्म कुपितयै नमः' नाम रावण के अधर्म से क्रोधित होने वाली देवी को इंगित करता है। यह दर्शाता है कि कैसे देवी धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए सक्रिय रहती हैं। 'ॐ कांचीपुर निवासिन्यै नमः', 'ॐ एकाम्रेश समाशक्तायै नमः' और 'ॐ श्रृंगशैल समाक्रांत निजशक्ति परम्परायै नमः' जैसे नाम देवी के पवित्र शक्तिपीठों जैसे कांची, एकाम्रेश्वर और श्रृंगशैल का उल्लेख करते हैं, जो भक्तों को उन स्थानों की महिमा की याद दिलाते हैं।
इस अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है, बल्कि देवी के साथ एक गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने का माध्यम है। प्रत्येक नाम का पाठ करते समय, भक्त देवी के उस दिव्य गुण को अपने भीतर आमंत्रित करते हैं, जिससे उनका मन शुद्ध होता है, शरीर पवित्र होता है और आत्मा उच्च स्थिति को प्राप्त करती है। यह स्तोत्र भक्तों को दिव्य शक्ति को आकर्षित करने, आंतरिक शांति प्राप्त करने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए साहस भरने में मदद करता है। यह भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने और मोक्ष प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है।
लाभ (Benefits):
- आध्यात्मिक उत्थान: इस नामावलि का नियमित पाठ मन को शुद्ध करता है, आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाता है और देवी के साथ गहरा संबंध स्थापित करता है।
- संकट निवारण: देवी के 108 नामों का जाप करने से जीवन में आने वाली बाधाएं, कठिनाइयाँ और नकारात्मक ऊर्जाएँ दूर होती हैं, और सकारात्मकता का संचार होता है।
- स्वास्थ्य और समृद्धि: देवी की कृपा से उत्तम स्वास्थ्य, धन और समृद्धि प्राप्त होती है। शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है।
- रक्षा और साहस: देवी अपने भक्तों को सभी प्रकार के खतरों से बचाती हैं और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक साहस और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं।
- शांति और संतोष: देवी के नामों का जाप करने से मन में शांति, संतोष और आनंद का वास होता है, आंतरिक कलह शांत होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री अष्टादश शक्तिपीठ अष्टोत्तर शतनामावलिः क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री अष्टादश शक्तिपीठ अष्टोत्तर शतनामावलिः के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस नामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस नामावलि का मूल या पृष्ठभूमि क्या है?
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