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श्री विद्यालक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावळिः

संपादन: अद्यतन
अष्टोत्तरलक्ष्मी देवी
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1।    ॐ ऐं ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः
2।    ॐ ऐं ॐ वाग्देव्यै नमः
3।    ॐ ऐं ॐ परदेव्यै नमः
4।    ॐ ऐं ॐ निरवद्यायै नमः
5।    ॐ ऐं ॐ पुस्तकहस्तायै नमः
6।    ॐ ऐं ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः
7।    ॐ ऐं ॐ श्रीविद्यायै नमः
8।    ॐ ऐं ॐ विद्यारूपायै नमः
9।    ॐ ऐं ॐ शास्त्रनिरूपिण्यै नमः
10।    ॐ ऐं ॐ त्रिकालज्णानायै नमः
11।    ॐ ऐं ॐ सरस्वत्यै नमः
12।    ॐ ऐं ॐ महाविद्यायै नमः
13।    ॐ ऐं ॐ वाणिश्रियै नमः
14।    ॐ ऐं ॐ यशस्विन्यै नमः
15।    ॐ ऐं ॐ विजयायै नमः
16।    ॐ ऐं ॐ अक्षरायै नमः
17।    ॐ ऐं ॐ वर्णायै नमः
18।    ॐ ऐं ॐ पराविद्यायै नमः
19।    ॐ ऐं ॐ कवितायै नमः
20।    ॐ ऐं ॐ नित्यबुद्धायै नमः
21।    ॐ ऐं ॐ निर्विकल्पायै नमः
22।    ॐ ऐं ॐ निगमातीतायै नमः
23।    ॐ ऐं ॐ निर्गुणरूपायै नमः
24।    ॐ ऐं ॐ निष्कलरूपायै नमः
25।    ॐ ऐं ॐ निर्मलायै नमः
26।    ॐ ऐं ॐ निर्मलरूपायै नमः
27।    ॐ ऐं ॐ निराकारायै नमः
28।    ॐ ऐं ॐ निर्विकारायै नमः
29।    ॐ ऐं ॐ नित्यशुद्धायै नमः
30।    ॐ ऐं ॐ बुद्ध्यै नमः
31।    ॐ ऐं ॐ मुक्त्यै नमः
32।    ॐ ऐं ॐ नित्यायै नमः
33।    ॐ ऐं ॐ निरहंकारायै नमः
34।    ॐ ऐं ॐ निरातंकायै नमः
35।    ॐ ऐं ॐ निष्कळंकायै नमः
36।    ॐ ऐं ॐ निष्कारिण्यै नमः
37।    ॐ ऐं ॐ निखिलकारणायै नमः
38।    ॐ ऐं ॐ निरीश्वरायै नमः
39।    ॐ ऐं ॐ नित्यज्ञानायै नमः
40।    ॐ ऐं ॐ निखिलांडेश्वर्यै नमः
41।    ॐ ऐं ॐ निखिलवेद्यायै नमः
42।    ॐ ऐं ॐ गुणदेव्यै नमः
43।    ॐ ऐं ॐ सुगुणदेव्यै नमः
44।    ॐ ऐं ॐ सर्वसाक्षिण्यै नमः
45।    ॐ ऐं ॐ सच्चिदानंदायै नमः
46।    ॐ ऐं ॐ सज्जनपूजितायै नमः
47।    ॐ ऐं ॐ सकलदेव्यै नमः
48।    ॐ ऐं ॐ मोहिन्यै नमः
49।    ॐ ऐं ॐ मोहवर्जितायै नमः
50।    ॐ ऐं ॐ मोहनाशिन्यै नमः
51।    ॐ ऐं ॐ शोकायै नमः
52।    ॐ ऐं ॐ शोकनाशिन्यै नमः
53।    ॐ ऐं ॐ कालायै नमः
54।    ॐ ऐं ॐ कालातीतायै नमः
55।    ॐ ऐं ॐ कालप्रतीतायै नमः
56।    ॐ ऐं ॐ अखिलायै नमः
57।    ॐ ऐं ॐ अखिलनिदानायै नमः
58।    ॐ ऐं ॐ अजरामरायै नमः
59।    ॐ ऐं ॐ अजहितकारिण्यै नमः
60।    ॐ ऐं ॐ त्रिगुणायै नमः
61।    ॐ ऐं ॐ त्रिमूर्त्यै नमः
62।    ॐ ऐं ॐ भेदविहीनायै नमः
63।    ॐ ऐं ॐ भेदकारणायै नमः
64।    ॐ ऐं ॐ शब्दायै नमः
65।    ॐ ऐं ॐ शब्दभांडारायै नमः
66।    ॐ ऐं ॐ शब्दकारिण्यै नमः
67।    ॐ ऐं ॐ स्पर्शायै नमः
68।    ॐ ऐं ॐ स्पर्शविहीनायै नमः
69।    ॐ ऐं ॐ रूपायै नमः
70।    ॐ ऐं ॐ रूपविहीनायै नमः
71।    ॐ ऐं ॐ रूपकारणायै नमः
72।    ॐ ऐं ॐ रसगंधिन्यै नमः
73।    ॐ ऐं ॐ रसविहीनायै नमः
74।    ॐ ऐं ॐ सर्वव्यापिन्यै नमः
75।    ॐ ऐं ॐ मायारूपिण्यै नमः
76।    ॐ ऐं ॐ प्रणवलक्ष्म्यै नमः
77।    ॐ ऐं ॐ मात्रे नमः
78।    ॐ ऐं ॐ मातृस्वरूपिण्यै नमः
79।    ॐ ऐं ॐ ह्रींकार्यै नमः
80।    ॐ ऐं ॐ ओंकार्यै नमः
81।    ॐ ऐं ॐ शब्दशरीरायै नमः
82।    ॐ ऐं ॐ भाषायै नमः
83।    ॐ ऐं ॐ भाषारूपायै नमः
84।    ॐ ऐं ॐ गायत्र्यै नमः
85।    ॐ ऐं ॐ विश्वायै नमः
86।    ॐ ऐं ॐ विश्वरूपायै नमः
87।    ॐ ऐं ॐ तैजसे नमः
88।    ॐ ऐं ॐ प्राज्ञायै नमः
89।    ॐ ऐं ॐ सर्वशक्त्यै नमः
90।    ॐ ऐं ॐ विद्याविद्यायै नमः
91।    ॐ ऐं ॐ विदुषायै NAMः
92।    ॐ ऐं ॐ मुनिगणार्चितायै नमः
93।    ॐ ऐं ॐ ध्यानायै नमः
94।    ॐ ऐं ॐ हंसवाहिन्यै नमः
95।    ॐ ऐं ॐ हसितवदनायै नमः
96।    ॐ ऐं ॐ मंदस्मितायै नमः
97।    ॐ ऐं ॐ अंबुजवासिन्यै नमः
98।    ॐ ऐं ॐ मयूरायै नमः
99।    ॐ ऐं ॐ पद्महस्तायै नमः
100।    ॐ ऐं ॐ गुरुजनवंदितायै नमः
101।    ॐ ऐं ॐ सुहासिन्यै नमः
102।    ॐ ऐं ॐ मंगळायै नमः
103।    ॐ ऐं ॐ वीणापुस्तकधारिण्यै नमः

इदि श्री विद्यालक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं

अर्थ

श्री विद्यालक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलिः ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि की देवी श्री विद्यालक्ष्मी को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। यह नामावलि केवल देवी के विभिन्न गुणों का वर्णन नहीं करती, बल्कि प्रत्येक नाम के माध्यम से उनकी दिव्य शक्ति और प्रभाव का आह्वान करती है। 'विद्या' का अर्थ ज्ञान है और 'लक्ष्मी' का अर्थ समृद्धि है। इस प्रकार, विद्यालक्ष्मी ज्ञान से प्राप्त होने वाली समृद्धि, विवेक से प्राप्त होने वाले धन और चेतना से मिलने वाले ऐश्वर्य का प्रतीक हैं। यह अष्टोत्तर देवी के शुद्ध ज्ञान स्वरूप, वाणी की देवी, परम शक्ति और किसी भी दोष से रहित निर्दोष स्वरूप को उजागर करता है।

इस नामावलि में प्रत्येक नाम श्री विद्यालक्ष्मी के अनंत गुणों और शक्तियों को प्रकट करता है। उदाहरण के लिए, 'पुस्तकहस्तायै नमः' नाम ज्ञान के स्रोत का प्रतिनिधित्व करने वाली पुस्तक धारण करने वाली देवी के रूप का वर्णन करता है, जबकि 'ज्ञानमुद्रायै नमः' ज्ञान प्रदर्शित करने वाली मुद्रा धारण करने वाली देवी को इंगित करता है। 'त्रिकालज्ञान्यायै नमः' नाम भूत, वर्तमान और भविष्य को जानने वाली देवी के सर्वज्ञत्व का बखान करता है। वह सरस्वती की तरह वाक् शक्ति, शिक्षा और कलाओं की अधिष्ठात्री देवी हैं, और लक्ष्मी की तरह समृद्धि और सफलता प्रदान करने वाली देवी हैं। यह नामावलि ज्ञान और ऐश्वर्य दोनों के संगम की पूजा का एक शक्तिशाली तरीका है।

विद्यालक्ष्मी की पूजा करने से अज्ञान का अंधकार दूर होता है और मन में ज्ञान का प्रकाश उत्पन्न होता है। यह केवल शैक्षिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन के सत्य को जानने की अंतर्दृष्टि भी प्रदान करता है। इस नामावलि का पाठ एकाग्रता, स्मरण शक्ति और बुद्धि को बढ़ाता है। विशेष रूप से छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और रचनात्मक क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए यह अत्यंत फलदायी है। यह वाणी की स्पष्टता, संचार कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। देवी के इन 108 नामों का जाप करने से मन में शांति और स्थिरता आती है, जिससे किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करना संभव होता है।

लाभ (Benefits):

  • ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि: इस नामावलि का नियमित पाठ छात्रों को अच्छे अंक प्राप्त करने, शोधकर्ताओं को नए आविष्कार करने और सभी को गहन ज्ञान प्राप्त करने में मदद करता है। यह मन की एकाग्रता को बढ़ाता है और समझने की शक्ति में सुधार करता है।
  • स्मरण शक्ति और स्पष्टता: विद्यालक्ष्मी की आराधना स्मरण शक्ति को तीव्र करती है और विषयों को आसानी से याद रखने में मदद करती है। यह मानसिक स्पष्टता प्रदान करती है और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाती है।
  • वाक् शक्ति और संचार कौशल: 'वाग्देवी' स्वरूपिणी विद्यालक्ष्मी के नामों का जाप करने से वाणी में स्पष्टता, प्रभावशाली संचार कौशल और आत्मविश्वास बढ़ता है। सार्वजनिक वक्ताओं, शिक्षकों और लेखकों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है।
  • अज्ञान का निवारण: यह नामावलि अज्ञान के अंधकार को दूर करती है और सत्य को जानने की क्षमता प्रदान करती है। यह भ्रमों को दूर कर जीवन पथ पर सही दिशा प्रदान करती है।
  • समग्र सफलता और समृद्धि: ज्ञान से प्राप्त विवेक जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता और समृद्धि लाता है। विद्यालक्ष्मी के आशीर्वाद से शैक्षणिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव देखे जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री विद्यालक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलिः क्या है?
यह ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि की देवी श्री विद्यालक्ष्मी के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। प्रत्येक नाम देवी के विभिन्न गुणों और शक्तियों का वर्णन करता है।
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन से पाठ करना उत्तम है। देवी की तस्वीर के सामने दीपक जलाकर, धूप अर्पित कर भक्तिपूर्वक पाठ कर सकते हैं।
श्री विद्यालक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलि के पाठ से क्या प्रमुख लाभ होते हैं?
ज्ञान, बुद्धि, स्मरण शक्ति, एकाग्रता और वाक् शक्ति बढ़ती है। अज्ञान दूर होता है और रचनात्मकता तथा शैक्षणिक सफलता प्राप्त होती है।
इस नामावलि का पाठ किसे करना चाहिए?
छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, लेखकों, कलाकारों और उत्तम ज्ञान तथा वाक् शक्ति की इच्छा रखने वाले सभी लोग इसका पाठ कर सकते हैं। यह मानसिक स्पष्टता और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
दिन में एक बार पूरा पाठ करना सामान्य अभ्यास है। विशेष फलों के लिए 11, 21, या 108 बार पाठ कर सकते हैं। महत्वपूर्ण बात भक्ति और एकाग्रता है।
इस नामावलि का उद्गम या पृष्ठभूमि क्या है?
यह हिंदू धर्म के प्राचीन स्तोत्रों में से एक है, जो देवी की उपासना को समर्पित है। शक्ति परंपरा में, विद्या और लक्ष्मी के संयुक्त रूप की पूजा की प्रथा का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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