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श्री वैभवलक्ष्मी अर्चना अथवा महालक्ष्मीस्तवं

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स्तोत्रलक्ष्मी देवी
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श्रीपार्वति सरस्वति महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
विष्णुप्रिये महामाये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
कमले विमले देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
कारुण्यनिलये देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
दारिद्र्यदुःखशमनि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
श्रीदेवि नित्यकल्याणि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
समुद्रतनये देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
राजलक्ष्मि राज्यलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
वीरलक्ष्मि विश्वलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
मूकहंत्रि मंत्ररूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 10
महिषासुरसंहर्त्रि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
मधुकैटभविद्रावे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
वैकुंठहृदयावासे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
पक्षींद्रवाहने देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
धान्यरूपे धान्यलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
स्वर्णरूपे स्वर्णलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
वित्तरूपे वित्तलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
हरिप्रिये वेदरूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
फलरूपे फलधात्रि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 20
निस्तुले निर्मले नित्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
रत्नरूपे रत्नलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
क्षीररूपे क्षीरधात्रि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
वेदरूपे नादरूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
प्राणरूपे प्राणमूर्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
प्रणवानंदमहसे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
ब्रह्मरूपे ब्रह्मधात्रि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
जातवेदस्वरूपिण्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
आधारशल्कनिलये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सुषुम्नासुषिरांतस्थे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 30
योगानंदप्रदायिन्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सौंदर्यरूपिणि देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सिद्धलक्ष्मि सिद्धरूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सर्वसंतोषसद्रूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
तुष्टिदे पुष्टिदे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
राजराजार्चितपदे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सर्वस्वरूपे दिव्यांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
चारित्र्यदिव्यशुद्धांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
वेदगुह्ये शुभे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
धर्मार्थकामरूपिण्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 40
मोक्षसाम्राज्यनिलये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सर्वगम्ये सर्वरूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
मोहिनि मोहरूपिण्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
पंचभूतांतरालस्थे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
नारायणप्रियतमे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
कारणि कार्यरूपिण्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
अनंततल्पशयने महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
लोकैकजननि वंद्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
शंभुरूपे शंभुमुद्रे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
ब्रह्मरूपे ब्रह्ममुद्रे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 50
विष्णुरूपे विष्णुमाये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
आज्ञाचक्राब्जनिलये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
फकार रेफ शक्त्याभे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
हृदयांबुजदीपांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
विष्णुग्रंथि विशालांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
आधारमूलनिलये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
ब्रह्मग्रंथि प्रकाशांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
कुंडलीशयनानंदि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
जीवात्मारूपिणि मातः महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
स्थूलसूक्ष्मप्रकाशस्थे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 60
ब्रह्मांडभांडजननि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
अश्वत्थवृक्षसंतुष्टे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
कारुण्यपूर्णे श्रीदेवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
मूर्तित्रयस्वरोपिण्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
भानुमंडलमध्यस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सूर्यप्रकाशरूपिण्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
चंद्रमंडलमध्यस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
वह्निमंडलमध्यस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
पीतांबरधरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
दिव्याभरणशोभाँगे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 70
ब्रह्मणाऽऽराधिते देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
नारसिंहिकृपासिंधो महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
वरदे मंगलमान्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
पद्माटविनिलयने महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
व्यासादि दिव्यांगसंपूज्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
जयलक्ष्मि सिद्धलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
राजमुद्रे विष्णुमुद्रे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सर्वार्थसाधकि नित्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
हनुमद्शक्तिसंतुष्टे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
महति गीतनादस्थे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 80
रतिरूपे रम्यरूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
कामांगि काम्यजननि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सुधापूर्णे सुधारूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
इंद्रवंद्ये देवलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
अष्टैश्वर्यस्वरूपिण्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
धर्मराजस्वरूपिण्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
रक्षोवरपुरिलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
रत्नाकरप्रभारम्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
मरुत्पुरमहानंदे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
कुबेरलक्ष्मि मातंगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 90
ईशानलक्ष्मि सर्वेशि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
ब्रह्मपीठे महापीठे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
मायापीठस्थिते देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
श्रीचक्रवासिनि कन्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
अष्टभैरवसंपूज्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
असिथांगपुरीनाथे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सिद्धलक्ष्मि महाविद्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
बुद्धींद्रियादिनिलये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
रोगदारिद्र्यशमनि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
मृत्युसंतापनाशिन्यै महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 100
पतिप्रिये पतिव्रते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
चतुर्भुजे कोमलांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
भक्ष्यरूपे भुक्तिधात्रि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सदाऽऽनंदमये देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
भक्तिप्रिये भक्तिगम्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
स्तोत्रप्रिये रमे रामे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
रामनामप्रिये देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
गंगाप्रिये शुद्धरूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
विश्वभर्त्रि विश्वमूर्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
कृष्णप्रिये कृष्णरूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 110
गीतारूपे रागमूर्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सावित्रि भूतसावित्रि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
गायत्रि ब्रह्मगायत्रि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
ब्राह्मि सरस्वति देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
शुकपालिनि शुद्धांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
वीणाधरस्तोत्रगम्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
आज्ञाकारि प्राज्ञवंद्ये महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
वेदांगवनसारांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
नादांतरासभूयिष्ठे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
दिव्यशक्ति महाशक्ति महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 120
नृत्तप्रिये नृत्तलक्ष्मि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
चतुष्षष्ठिकलारूपे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
सर्वमंगलसंपूर्णे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
दिव्यगंधांगरागांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
मुक्तिदे मुक्तिदेहस्थे महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ।
यज्ञसारार्थशुद्धांगि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते । 126

इति वैभवलक्ष्मी अर्चना समाप्ता ।

अर्थ

श्री वैभवलक्ष्मी अर्चना महालक्ष्मीस्तवं एक अत्यंत शक्तिशाली और भक्तिपूर्ण स्तोत्र है, जिसका पाठ धन, समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उत्थान के लिए महालक्ष्मी की स्तुति करने हेतु किया जाता है। यह केवल नामों का एक समूह नहीं है, बल्कि देवी के विभिन्न भव्य रूपों और गुणों का आह्वान करने वाली एक दिव्य प्रार्थना है। इस स्तव का पाठ करने से भक्त अपने जीवन की दरिद्रता, रोगों, कलह और सभी प्रकार की प्रतिकूलताओं से मुक्ति पाते हैं तथा दैवीय वैभव और अनुग्रह प्राप्त करते हैं, यह हिंदू धर्म में एक दृढ़ विश्वास है।

इस स्तव का गहरा आध्यात्मिक महत्व देवी लक्ष्मी को केवल धन की देवी के रूप में ही नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की पालनकर्ता और सभी शुभता के स्रोत के रूप में देखने में निहित है। स्तोत्र की शुरुआत में श्री पार्वती, सरस्वती और महालक्ष्मी की एक साथ स्तुति करके, शक्ति की त्रिमूर्तियों - इच्छाशक्ति (पार्वती), ज्ञानशक्ति (सरस्वती) और क्रियाशक्ति (महालक्ष्मी) की एकता पर जोर दिया गया है। यह दर्शाता है कि देवी पूरे ब्रह्मांड की रचना, स्थिति और संहार का कारण हैं। यह स्तव उद्घोष करता है कि सभी ऐश्वर्य, ज्ञान, साहस और मोक्ष के फल प्रदान करने वाली वही हैं।

स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक महालक्ष्मी के विविध नामों और गुणों का वर्णन करता है। 'विष्णुप्रिये महामाये', 'कमले विमले', 'कारुण्यनिलये' जैसे संबोधन देवी के दिव्य प्रेम, पवित्रता और अपार करुणा को प्रकट करते हैं। 'दारिद्र्यदुःखशमनि' भक्तों की गरीबी और दुखों को दूर करने की उनकी शक्ति पर जोर देता है। 'समुद्रतनये' उनके जन्म की पृष्ठभूमि को याद दिलाता है, जबकि 'राजलक्ष्मी राज्यलक्ष्मी' और 'वीरलक्ष्मी विश्वलक्ष्मी' जैसे नाम शाही वैभव, साम्राज्य की समृद्धि, शौर्य और सार्वभौमिक कल्याण प्रदान करने की उनकी क्षमता को इंगित करते हैं।

जैसे-जैसे स्तव आगे बढ़ता है, देवी को 'मूकहन्त्री मंत्ररूपे' (अज्ञान का नाश करने वाली, मंत्र का रूप), 'महिषासुरसंहर्त्री' (महिषासुर का संहार करने वाली), 'मधुकैटभविद्रावे' (मधु-कैटभ का नाश करने वाली) के रूप में स्तुति की जाती है। यह उनकी शक्ति और संहारक गुणों को दर्शाता है। 'शंखचक्रगदाहस्ते', 'वैकुंठहृदयावासे', 'पक्षींद्रवाहने' जैसे वर्णन विष्णु के साथ उनके अविनाशी संबंध और उनकी दिव्य शक्ति को स्पष्ट करते हैं। विशेष रूप से 'धान्यरूपे धान्यलक्ष्मी', 'स्वर्णरूपे स्वर्णलक्ष्मी', 'वित्तरूपे वित्तलक्ष्मी' जैसे नाम लक्ष्मी के वैभव स्वरूपों को उजागर करते हैं। ये दर्शाते हैं कि देवी भक्तों को अनाज, सोना और धन के रूप में आशीर्वाद देती हैं। इन नामों के माध्यम से यह पता चलता है कि देवी जीवन के हर पहलू में अपनी उपस्थिति रखती हैं।

लाभ (Benefits):

  • आर्थिक समृद्धि: इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से दरिद्रता दूर होती है और धन प्राप्ति तथा आर्थिक स्थिरता आती है।
  • स्वास्थ्य और शांति: रोग और मानसिक दुख दूर होते हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • पारिवारिक सौख्य: घर में कलह कम होता है, सामंजस्य और खुशी का माहौल बनता है, जिससे परिवार में सुख बढ़ता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: देवी के विभिन्न रूपों का ध्यान करने से आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति बढ़ती है, मोक्ष का मार्ग सुगम होता है।
  • समस्त शुभ फल: जीवन के हर क्षेत्र में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं, कार्यों में सफलता और समग्र वैभव की प्राप्ति होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री वैभवलक्ष्मी अर्चना महालक्ष्मीस्तवं क्या है?
यह धन, समृद्धि और सभी शुभताओं के लिए महालक्ष्मी की स्तुति करने वाला एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। यह देवी के विभिन्न वैभवशाली रूपों का नामरूप में आह्वान करके पूजा करने की एक विधि है।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ शुक्रवार को, लक्ष्मी पूजा के दिनों में, दीपावली पर या प्रतिदिन स्वच्छ मन से, दीपक और फूलों के साथ पूजा स्थल पर किया जा सकता है। भक्ति के साथ पाठ करना महत्वपूर्ण है।
श्री वैभवलक्ष्मी अर्चना के पाठ से क्या लाभ मिलते हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से आर्थिक समृद्धि, स्वास्थ्य में सुधार, परिवार में शांति, दरिद्रता का निवारण और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह सभी कष्टों को दूर करके सुख प्रदान करता है।
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
धन, खुशी, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शांति की इच्छा रखने वाला कोई भी भक्त लिंग या आयु के भेद के बिना इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है। विशेष रूप से आर्थिक समस्याओं वाले व्यक्तियों के लिए यह उत्तम है।
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
आमतौर पर प्रतिदिन एक या तीन बार पाठ करना सामान्य है। विशेष अवसरों पर, 11, 21, 108 बार पाठ करना अधिक फलदायी माना जाता है।
इस स्तोत्र का उद्गम या पृष्ठभूमि क्या है?
यह स्तोत्र हिंदू धर्मग्रंथों का हिस्सा है और महालक्ष्मी के वैभव का वर्णन करने वाली प्राचीन परंपरा से आया है। यह विशेष रूप से वैभवा लक्ष्मी पूजा के भाग के रूप में लोकप्रिय है।

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