- ॐ हिरण्यवर्णायै नमः
- ॐ हिरण्यै नमः
- ॐ सुवर्णरजतस्रजायै नमः
- ॐ चंद्रायै नमः
- ॐ हिरण्यय्यै नमः
- ॐ लक्ष्मे नमः
- ॐ अनपगामिन्यै नमः
- ॐ अश्वपूर्वायै नमः
- ॐ रधमध्यायै नमः
- ॐ हस्तिनाधप्रबोधिन्यै नमः
- ॐ श्रियै नमः
- ॐ देव्यै नमः
- ॐ हिरण्यप्राकारायै नमः
- ॐ आर्द्रायै नमः
- ॐ ज्वलंत्यै नमः
- ॐ तृप्तायै नमः
- ॐ तर्पयन्यै नमः
- ॐ पद्मेस्थितायै नमः
- ॐ पद्मवर्णायै नमः
- ॐ प्रभासायै नमः
- ॐ यशसाज्वलंत्यै नमः
- ॐ देवजुष्टायै नमः
- ॐ उदारायै नमः
- ॐ पद्मनेम्यै नमः
- ॐ आदित्यवर्णायै नमः
- ॐ बिल्वनिलयायै नमः
- ॐ कीर्तिप्रदायै नमः
- ॐ बुद्धिप्रदायै नमः
- ॐ गंधद्वारायै नमः
- ॐ दुराधर्षायै नमः
- ॐ नित्यपुष्टायै नमः
- ॐ करीषिण्यै नमः
- ॐ सर्वभूतानामीश्वर्यै नमः
- ॐ मनसआकूत्यै नमः
- ॐ वाचस्सत्यायै नमः
- ॐ कर्दममात्रे नमः
- ॐ पद्ममालिन्यै नमः
- ॐ चिक्लीतमात्रे नमः
- ॐ पुष्करिण्यै नमः
- ॐ नित्यायै नमः
- ॐ पुष्टै नमः
- ॐ सुवर्णायै नमः
- ॐ हेममालिन्यै नमः
- ॐ सूर्यायै नमः
- ॐ यः करण्यै नमः
- ॐ यष्टै नमः
- ॐ पिंगळायै नमः
- ॐ चंद्रायै नमः
- ॐ सर्वसंप्रत्पदायै नमः
- ॐ पद्मप्रियायै नमः
- ॐ पद्मिन्यै नमः
- ॐ पद्महस्तायै नमः
- ॐ पद्मालयायै नमः
- ॐ पद्मदळायताक्ष्ये नमः
- ॐ विश्व प्रियायै नमः
- ॐ विष्णुमनोनुकूलायै नमः
- ॐ महादेव्यै नमः
- ॐ विष्णुपत्यै नमः
- ॐ पद्मालयायै नमः
- ॐ पद्मकरायै नमः
- ॐ प्रसन्नवदनायै नमः
- ॐ सौभाग्यदायै नमः
- ॐ भाग्यदायै नमः
- ॐ अभयप्रदायै नमः
- ॐ नानाविधमणिगणभूषितायै नमः
- ॐ भक्ताभीष्टफलप्रदायै नमः
- ॐ विश्वरूपदर्शिन्यै नमः
- ॐ हरिहर ब्रह्मदिसेवितायै नमः
- ॐ पार्श्वेपंकजशंखयै नमः
- ॐ पद्मनिधिभिर्युक्तायै नमः
- ॐ धवळतरांशुकयै नमः
- ॐ गंधमाल्यशोभायै नमः
- ॐ हरिवल्लभायै नमः
- ॐ क्षीरसमुद्रराजतनयायै नमः
- ॐ श्रीरंगधामेश्वर्यै नमः
- ॐ दासीभूतसमस्तदेववनितायै नमः
- ॐ लोकैकदीपांकुरायै नमः
- ॐ श्रीमन्मंदकटाक्षलब्धायै नमः
- ॐ विभवत् ब्रह्मेंद्रगंगाधरायै नमः
- ॐ त्रैलोक्यकुटुंबिन्यै नमः
- ॐ सरसिजायै नमः
- ॐ मुकुंदप्रियायै नमः
- ॐ कमलायै नमः
- ॐ श्री विष्णुहृत्कमलवासिन्यै नमः
- ॐ विश्व मात्रे नमः
- ॐ कमलकोमल अदेगर्भगौर्यै नमः
- ॐ नमतांशरण्यायै नमः
- ॐ विष्णुवक्षस्थलस्थितायै नमः
- ॐ गरुडवाहनायै नमः
- ॐ शेषशायिन्यै नमः
- ॐ अप्रमेयवैभवायै नमः
- ॐ लोकैकेश्वर्यै नमः
- ॐ लोकनथदयितायै नमः
- ॐ दांतायै नमः
- ॐ रमायै नमः
- ॐ मंगळदेवतायै नमः
- ॐ आकारत्रयसंपन्नायै नमः
- ॐ अरविंदनिवासिन्यै नमः
- ॐ अशेषजगदीशित्र्यै नमः
- ॐ वरदवल्लभायै नमः
- ॐ भगवत्यै नमः
- ॐ श्री देव्यै नमः
- ॐ नित्यानपायिन्यै नमः
- ॐ विरव्यायै नमः
- ॐ देवदेवदिव्यमहिष्यै नमः
- ॐ अखिलजगन्मात्रे नमः
- ॐ अस्मनात्रे नमः
- ॐ श्री महालक्ष्मीण्ये नमः
|| इति श्री सूक्त अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री सूक्त अष्टोत्तर शतनामावलिः, धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी महालक्ष्मी को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। ये नाम श्री सूक्त से लिए गए हैं, जो वेदों के सबसे शक्तिशाली और पूजनीय स्तोत्रों में से एक है। श्री सूक्त ऋग्वेद के खिल भाग से संबंधित है और इसे देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम माना जाता है। इस नामावलि का पाठ भक्तों को देवी की कृपा प्राप्त करने, धन, ज्ञान, यश और आंतरिक शांति प्राप्त करने में सहायता करता है।
इस नामावलि का प्रत्येक नाम देवी के एक विशिष्ट पहलू, गुण या महिमा को प्रकट करता है। उदाहरण के लिए, 'ॐ हिरण्यवर्णायै नमः' का अर्थ है 'स्वर्ण के समान वर्ण वाली देवी को नमस्कार', जो देवी के तेजस्वी और धनवान स्वरूप को दर्शाता है। 'ॐ सुवर्णरजतस्रजायै नमः' का अर्थ है 'सोने और चांदी की माला धारण करने वाली देवी को नमस्कार', जो उनके ऐश्वर्य को उजागर करता है। 'ॐ पद्मेस्थितायै नमः' का अर्थ है 'कमल पर विराजमान देवी को नमस्कार', जो शुद्धता और सौंदर्य का प्रतीक है। 'ॐ बुद्धिप्रदायै नमः' का अर्थ है 'बुद्धि प्रदान करने वाली देवी को नमस्कार', यह दर्शाता है कि देवी केवल भौतिक धन ही नहीं, बल्कि ज्ञान भी प्रदान करती हैं। 'ॐ सर्वभूतानामीश्वर्यै नमः' का अर्थ है 'सभी प्राणियों की स्वामिनी को नमस्कार', जो उनकी सार्वभौमिकता और सर्वोच्च शक्ति को दर्शाता है।
यह नामावलि केवल नामों की एक सूची नहीं है, बल्कि यह देवी के दिव्य गुणों का ध्यान करने का एक शक्तिशाली साधन है। प्रत्येक नाम का उच्चारण करते समय, भक्त देवी के उस विशिष्ट रूप या गुण का अपने मन में ध्यान करते हैं, जिससे उनका मन शुद्ध होता है और वे देवी के साथ गहरा संबंध स्थापित कर पाते हैं। इस अष्टोत्तर का नियमित पाठ मन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सकारात्मकता भरता है। देवी की सुंदरता, ऐश्वर्य, ज्ञान, करुणा और शक्ति का स्मरण भक्तों को आध्यात्मिक उत्थान प्रदान करता है।
श्री सूक्त अष्टोत्तर शतनामावलिः का पाठ भक्तों के जीवन में समग्र विकास लाता है। यह केवल वित्तीय समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, संबंधों, आध्यात्मिक प्रगति और आंतरिक शांति भी प्रदान करता है। शास्त्रों के अनुसार, देवी लक्ष्मी के इन 108 नामों का भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करने से उनका सीधा आशीर्वाद प्राप्त होता है।
लाभ (Benefits):
- आर्थिक समृद्धि: इस नामावलि का निरंतर पाठ वित्तीय कठिनाइयों को दूर कर धन और ऐश्वर्य को आकर्षित करने में सहायक होता है।
- ज्ञान और बुद्धि: 'बुद्धिप्रदायै नमः' नाम के अनुरूप, यह भक्तों को सही निर्णय लेने और ज्ञान में वृद्धि के लिए बुद्धिमत्ता प्रदान करता है।
- यश और सम्मान: 'कीर्तिप्रदायै नमः' नाम के माध्यम से, देवी भक्तों को समाज में उच्च स्थान, सम्मान और ख्याति प्रदान करती हैं।
- स्वास्थ्य और कल्याण: देवी की कृपा से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, जिससे जीवन में सुख और शांति प्राप्त होती है।
- नकारात्मक शक्तियों का निवारण: देवी की दिव्य शक्ति आसपास की नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर कर एक सकारात्मक और शुभ वातावरण बनाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री सूक्त अष्टोत्तर शतनामावलिः क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री सूक्त अष्टोत्तर शतनामावलिः के पाठ के क्या लाभ हैं?
कौन इस नामावलि का पाठ कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री सूक्त का मूल क्या है?
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