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श्री शिव नवरत्न स्तवः

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स्तोत्रशिव
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श्री शिव नवरत्न स्तवः

बृहस्पतिरुवाच |
नमो हराय देवाय महामाया त्रिशूलिने |
तापसाय महेशाय तत्त्वज्ञानप्रदायिने || 1 ||

नमो मौंजाय शुद्धाय नमः कारुण्यमूर्तये |
नमो देवाधिदेवाय नमो वेदांतदायिने || 2 ||

नमः पराय रुद्राय सुपाराय नमो नमः |
विश्वमूर्ते महेशाय विश्वाधाराय ते नमः || 3 ||

नमो भक्तभवच्छेदकारणायाऽमलात्मने |
कालकालाय कालाय कालातीताय ते नमः || 4 ||

जितेंद्रियाय नित्याय जितक्रोधाय ते नमः |
नमः पाषंडभंगाय नमः पापहराय ते || 5 ||

नमः पर्वतराजेंद्रकन्यकापतये नमः |
योगानंदाय योगाय योगिनां पतये नमः || 6 ||

प्राणायामपराणां तु प्राणरक्षाय ते नमः |
मूलाधारे प्रविष्टाय मूलदीपात्मने नमः || 7 ||

नाभिकंदे प्रविष्टाय नमो हृद्देशवर्तिने |
सच्चिदानंदपूर्णाय नमः साक्षात्परात्मने || 8 ||

नमः शिवायाद्भुतविक्रमाय ते
नमः शिवायाद्भुतविग्रहाय ते |
नमः शिवायाखिलनायकाय ते
नमः शिवायामृतहेतवे नमः || 9 ||

सूत उवाच |
य इदं पठते नित्यं स्तोत्रं भक्त्या सुसंयुतः |
तस्य मुक्तिः करस्था स्याच्छंकरप्रियकारणात् || 10 ||

विद्यार्थी लभते विद्यां विवाहार्थी गृही भवेत् |
वैराग्यकामो लभते वैराग्यं भवतारकं || 11 ||

तस्माद्दिने दिने यूयमिदं स्तोत्रं समाहिताः |
पठंतु भवनाशार्थमिदं वो भवनाशनं || 12 ||

इति श्रीस्कांदे महापुराणे सूतसंहितायां बृहस्पतिकृत शिव नवरत्न स्तवः ||

अर्थ

“श्री शिव नवरत्न स्तवः” देवगुरु बृहस्पति द्वारा रचित एक अद्वितीय और अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र में, भगवान शिव के नौ महिमामयी गुणों को नवरत्नों के समान स्तुति की जाती है। स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक शिव के तत्त्वस्वरूप, उनके योगिक स्वरूप, उनके विश्वनायकत्व और भक्तों की रक्षा करने की उनकी शक्ति को स्पष्ट रूप से प्रतिपादित करता है। यह स्तोत्र भगवान शिव की अनंत महिमा का गुणगान करता है और भक्तों को आंतरिक शांति तथा आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करने में सहायक है।

स्तोत्र के प्रारंभ में, शिव को महामाया का छेदन करने वाले त्रिशूलधारी, तपस्याओं के प्रभु और तत्त्वज्ञान प्रदान करने वाले के रूप में वर्णित किया गया है। उन्हें केवल बाहरी रूप से ही नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता के प्रतीक, करुणा के सागर और वेदांत का सार देने वाले देवाधिदेव के रूप में वंदन किया जाता है। शिव रुद्र के रूप में समस्त जगत में व्याप्त हैं, जो सृष्टि, स्थिति और लय के आधारभूत परमेश्वर के रूप में स्तुति किए जाते हैं। उनकी महिमा काल से परे है; वे काल के कारणकर्ता और कालातीत भी हैं।

यह स्तोत्र शिव को भक्तों के भवबंधनों को काटने वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, क्रोध का नाश करने वाले, पापों का हरण करने वाले और अज्ञान को दूर करने वाली शुद्धिकरण शक्ति के रूप में चित्रित करता है। ये सभी गुण नवरत्नों के समान प्रकाशमान हैं। शिव हिमपर्वत पुत्री पार्वती के पति, योगानंद के मूलमूर्ति और समस्त योगियों के नायक हैं। उनकी उपस्थिति मूलाधार चक्र से हृदय तक प्रवाहित होती है, जो सच्चिदानंद परमात्मा स्वरूप में स्थित होने का तत्त्व इस स्तोत्र द्वारा बताया गया है।

अद्भुत पराक्रमों वाले, अमृत स्वरूप और समस्त जगत के नायक शिव की स्तुति करते हुए स्तोत्र समाप्त होता है। फलश्रुति में, देवगुरु बृहस्पति कहते हैं— जो व्यक्ति इस नवरत्न स्तव का नित्य भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करता है, उसे मोक्ष हस्तगत ही है। विद्यार्थियों को उत्तम विद्या, विवाह के इच्छुक व्यक्तियों को सौभाग्यशाली दांपत्य, और वैराग्य चाहने वालों को विच्छेदात्मक ज्ञान प्राप्त होता है। यह संसार के बंधनों को तोड़कर भक्त की रक्षा करने वाला अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है।

लाभ (Benefits):

  • मोक्ष की प्राप्ति: इस स्तोत्र के निरंतर पाठ से भक्त मोक्ष के मार्ग को प्राप्त करते हैं और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाते हैं।
  • पाप निवारण और मानसिक शांति: शिव के करुणामयी स्वरूप की स्तुति करने से पापों का क्षय होता है, मन शांत होता है और आंतरिक सुख प्राप्त होता है।
  • विद्या और वैवाहिक सौभाग्य: विद्यार्थियों को एकाग्रता और ज्ञान की वृद्धि होती है। विवाह के इच्छुक व्यक्तियों को उत्तम जीवनसाथी प्राप्त होता है और सुखी दांपत्य जीवन मिलता है।
  • भवबंधनों से मुक्ति: भौतिक इच्छाओं और संसार के बंधनों से मुक्ति पाने में यह स्तोत्र सहायता करता है, वैराग्य की भावना को बढ़ाता है।
  • आध्यात्मिक जागृति: योगियों और आध्यात्मिक साधकों को योगानंद का अनुभव करने और आंतरिक रूप से शुद्ध होने में, अंततः शिव साक्षात्कार की ओर बढ़ने में यह स्तोत्र मार्गदर्शन करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री शिव नवरत्न स्तवः क्या है?
श्री शिव नवरत्न स्तवः देवगुरु बृहस्पति द्वारा रचित एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसमें भगवान शिव के नौ अमूल्य गुणों को नवरत्नों के समान स्तुति की जाती है। यह शिव के तत्त्वस्वरूप, उनके योगिक स्वरूप और विश्वनायकत्व का वर्णन करता है।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन और भक्ति के साथ करना चाहिए। शिव मंदिर में या घर के पूजा कक्ष में शिव की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर पाठ करना उत्तम माना जाता है।
श्री शिव नवरत्न स्तव के पाठ से क्या प्रमुख लाभ मिलते हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से मोक्ष की प्राप्ति, पापों का नाश, मानसिक शांति, विद्या लाभ, उत्तम वैवाहिक सौभाग्य और भवबंधनों से मुक्ति मिलती है। यह आध्यात्मिक जागृति और शिव साक्षात्कार की दिशा में मार्गदर्शन करता है।
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
भगवान शिव में श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति, लिंग या आयु के भेद के बिना इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है। विशेष रूप से मोक्ष, ज्ञान, शांति, विद्या या वैवाहिक सुख की इच्छा रखने वालों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
फलश्रुति के अनुसार, इस स्तोत्र का प्रतिदिन कम से कम एक बार पूर्ण भक्ति के साथ पाठ करना अत्यंत लाभकारी है। यदि संभव हो, तो 11 या 108 बार जप करने से अधिक शुभ फल प्राप्त होते हैं।
श्री शिव नवरत्न स्तव का मूल या रचयिता कौन हैं?
श्री शिव नवरत्न स्तव की रचना देवताओं के गुरु, महर्षि बृहस्पति ने की है। यह शिव की महिमा का गुणगान करने वाले प्राचीन और पवित्र स्तोत्रों में से एक है।

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