सुनते हुए पाठ करें
ऑडियो चलाएँ और नीचे दिए स्तोत्र पाठ को पढ़ते हुए पाठ करें।
- ॐ भैरवाय नमः
- ॐ भूतनाथाय नमः
- ॐ भूतात्मने नमः
- ॐ क्षेत्रदाय नमः
- ॐ क्षेत्रपालाय नमः
- ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः
- ॐ क्षत्रियाय नमः
- ॐ विराजे नमः
- ॐ स्मशान वासिने नमः
- ॐ मांसाशिने नमः
- ॐ सर्पराजसे नमः
- ॐ स्मरांकृते नमः
- ॐ रक्तपाय नमः
- ॐ पानपाय नमः
- ॐ सिद्धिदाय नमः
- ॐ सिद्ध सेविताय नमः
- ॐ कंकाळाय नमः
- ॐ कालशमनाय नमः
- ॐ कळाय नमः
- ॐ काष्टाय नमः
- ॐ तनवे नमः
- ॐ कवये नमः
- ॐ त्रिनेत्रे नमः
- ॐ बहु नेत्रे नमः
- ॐ पिंगळ लोचनाय नमः
- ॐ शूलपाणये नमः
- ॐ खड्गपाणये नमः
- ॐ कंकाळिने नमः
- ॐ धूम्रलोचनाय नमः
- ॐ अभीरवे नमः
- ॐ नाधाय नमः
- ॐ भूतपाय नमः
- ॐ योगिनीपतये नमः
- ॐ धनदाय नमः
- ॐ धनहारिणे नमः
- ॐ धनवते नमः
- ॐ प्रीत भावनय नमः
- ॐ नागहाराय नमः
- ॐ व्योम केशाय नमः
- ॐ कपालभ्रुते नमः
- ॐ कपालाय नमः
- ॐ कमनीयाय नमः
- ॐ कलानिधये नमः
- ॐ त्रिलोचनाय नमः
- ॐ त्रिनेत तनयाय नमः
- ॐ डिंभाय नमः
- ॐ शांताय नमः
- ॐ शांतजनप्रियाय नमः
- ॐ वटुकाय नमः
- ॐ वटु वेषाय नमः
- ॐ घट्वाम्गवरधारकाय नमः
- ॐ भूताद्वक्षाय नमः
- ॐ पशुपतये नमः
- ॐ भिक्षुदाय नमः
- ॐ परिचारकाय नमः
- ॐ दूर्ताय नमः
- ॐ दिगंबराय नमः
- ॐ शूराय नमः
- ॐ हरिणाय नमः
- ॐ पांडुलोचनाय नमः
- ॐ प्रशांताय नमः
- ॐ शांतिदाय नमः
- ॐ सिद्धि दाय नमः
- ॐ शंकराय नमः
- ॐ प्रियबांधवाय नमः
- ॐ अष्ट मूर्तये नमः
- ॐ निधीशाय नमः
- ॐ ज्ञानचक्षुवे नमः
- ॐ तपोमयाय नमः
- ॐ अष्टाधाराय नमः
- ॐ षडाधराय नमः
- ॐ सत्सयुक्ताय नमः
- ॐ शिखीसखाय नमः
- ॐ भूधराय नमः
- ॐ भूधराधीशाय नमः
- ॐ भूत पतये नमः
- ॐ भूतरात्मजाय नमः
- ॐ कंकाळाधारिणे नमः
- ॐ मुंडिने नमः
- ॐ नागयज्ञोपवीतवते नमः
- ॐ ज्रुंभनोमोहन स्तंधाय नमः
- ॐ भीम रण क्षोभणाय नमः
- ॐ शुद्धनीलांजन प्रख्याय नमः
- ॐ दैत्यज्ञे नमः
- ॐ मुंडभूषिताय नमः
- ॐ बलिभुजे नमः
- ॐ भलांधिकाय नमः
- ॐ बालाय नमः
- ॐ अबालविक्रमाय नमः
- ॐ सर्वापत्तारणाय नमः
- ॐ दुर्गाय नमः
- ॐ दुष्ट भूतनिषेविताय नमः
- ॐ कामिने नमः
- ॐ कलानिधये नमः
- ॐ कांताय नमः
- ॐ कामिनीवशकृते नमः
- ॐ सर्वसिद्धि प्रदाय नमः
- ॐ वैश्याय नमः
- ॐ प्रभवे नमः
- ॐ विष्णवे नमः
- ॐ वैद्याय नाम
- ॐ मरणाय नमः
- ॐ क्षोभनाय नमः
- ॐ ज्रुंभनाय नमः
- ॐ भीम विक्रमः
- ॐ भीमाय नमः
- ॐ कालाय नमः
- ॐ कालभैरवाय नमः
|| इति श्री कालभैरव अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री कालभैरव अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान शिव के उग्र और शक्तिशाली रूप, श्री कालभैरव के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। अष्टोत्तर शतनामावलि किसी भी देवता का आह्वान करने, उनके विभिन्न गुणों, शक्तियों और लीलाओं का स्मरण करने का एक अनूठा माध्यम है। कालभैरव समय के नियंत्रक, सभी भयों को दूर करने वाले, दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले और भक्तों को सुरक्षा तथा समृद्धि प्रदान करने वाले देवता हैं। इस नामावलि का पाठ भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति और भौतिक सुख प्रदान करता है।
कालभैरव भगवान शिव के प्रमुख अवतारों में से एक हैं और वे क्षेत्रपाल के रूप में मंदिरों तथा पवित्र स्थलों की रक्षा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि प्रत्येक स्थान का एक भैरव रक्षक होता है। वे काल (समय) पर अधिकार रखते हैं, शुभ समय प्रदान करते हैं और अशुभ काल के प्रभावों को कम करते हैं। वे नकारात्मक शक्तियों, भूत-प्रेतों और बुरी कृत्यों से भक्तों की रक्षा करते हैं। उनका श्मशानवासी रूप जीवन और मृत्यु के चक्र पर उनके नियंत्रण को दर्शाता है, जो वैराग्य और नश्वरता का प्रतीक है।
इस अष्टोत्तर में आने वाले "ॐ भैरवाय नमः", "ॐ भूतनाथाय नमः" जैसे नाम यह दर्शाते हैं कि कालभैरव सभी भूतों के स्वामी और भय को दूर करने वाले हैं। "ॐ क्षेत्रपालाय नमः" यह इंगित करता है कि वे क्षेत्रों के रक्षक हैं। "ॐ श्मशानवासिने" और "ॐ मांसाशिनें" उनके उग्र स्वरूप और संसार की नश्वरता पर उनके प्रभुत्व को उजागर करते हैं। "ॐ सिद्धिदाय नमः" का अर्थ है कि वे भक्तों को सिद्धियां, यानी अलौकिक शक्तियां प्रदान करने वाले हैं। "ॐ कालशमनाय नमः" उनकी अदम्य शक्ति को व्यक्त करता है, जो काल, यानी मृत्यु को भी नियंत्रित करने में सक्षम है।
"ॐ त्रिनेत्रे नमः", "ॐ शूलपाणये नमः", "ॐ खड्गपाणये नमः" जैसे नाम उनके दिव्य अस्त्रों और तीन नेत्रों का वर्णन करते हैं, जो उनकी सर्वज्ञता और सुरक्षात्मक गुणों को दर्शाते हैं। "ॐ नागहाराय नमः" उनके गले में सर्पों की माला को संदर्भित करता है, जो उनकी योगिक शक्ति और कुंडलिनी जागरण का प्रतीक है। "ॐ धनदाय नमः" और "ॐ धनहारिणे नमः" जैसे नाम यह बताते हैं कि वे भक्तों को धन प्रदान करने वाले और अत्यधिक आसक्तियों को दूर करने वाले हैं। इस प्रकार, प्रत्येक नाम कालभैरव के अनंत गुणों और शक्तियों को प्रकट करता है, जो उनके भक्तों के लिए कल्याणकारी हैं।
लाभ (Benefits):
- भय निवारण और सुरक्षा: कालभैरव अष्टोत्तर शतनामावलि के नियमित पाठ से सभी प्रकार के भय, नकारात्मक शक्तियों और बुरी नज़र से पूर्ण सुरक्षा प्राप्त होती है।
- समृद्धि और आर्थिक स्थिरता: भगवान कालभैरव धन प्रदान करने वाले देवता हैं, अतः इस नामावलि का पाठ करने से आर्थिक परेशानियाँ दूर होती हैं और समृद्धि तथा स्थिरता आती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: इन पवित्र नामों के स्मरण से भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान, आंतरिक शांति और मोक्ष के मार्ग पर प्रगति प्राप्त होती है।
- बाधाओं का निवारण: जीवन में आने वाली चुनौतियों, बाधाओं और विघ्नों को दूर करने के लिए कालभैरव की कृपा अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
- स्वास्थ्य और दीर्घायु: कालभैरव काल के अधिपति हैं, इसलिए उनकी आराधना से उत्तम स्वास्थ्य, रोगों से मुक्ति और दीर्घायु प्राप्त होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री कालभैरव अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री कालभैरव अष्टोत्तर शतनामावलि के पाठ के क्या लाभ हैं?
इस नामावलि का पाठ किसे करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस नामावलि का मूल स्रोत क्या है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
