🔱 ध्यानं
सिंदूररागवपुषीं रक्तांबरविभूषितां ।
त्रिनेत्रां रक्तवदनां रक्तजिह्वां भयानकां ॥
अष्टभुजां चतुर्वक्त्रां रक्तचक्रगदाधरां ।
खड्गं कपालं पद्मं च रक्तशंखं वहंतिनीं ॥
सिंहगर्वविहारस्थां गरुडोलूकसंयुतां ।
लोहितां रक्तलक्ष्मीं तां ध्यानयेत्तंत्रनायिकां ॥
💫 भावार्थं
श्री रक्तांबरा लोहिता लक्ष्मी देवि सिंधूरवर्णंतो प्रकाशिस्तू, ऎर्रनि वस्त्रालु धरिंचि त्रिनेत्रुरालै उंटारु। आमॆ मुखं, नेत्रालु, जिह्वा अन्नी रक्तवर्णंतो ज्वलिस्तुन्नायि।
अष्टभुज समेत चतुर्मुखरूपिणि, आमॆ चेतुल्लो चक्रं, गद, खड्गं, कपालं, पद्मं, शंखं मॊदलैन आयुधालु प्रकाशिस्तायि।
आमॆ सिंहंपै विहरिस्तू, गरुडुडु मरियु उल्लू (आलूक)तो कूडि उंटारु। तंत्र साधनललो लोहिता लक्ष्मी देवि महाशक्ति स्वरूपिणिगा आराधिंचबडुतुंदि।
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🔮 श्री रक्तांबरा लोहिता लक्ष्मी नामावळि
1। ॐ रक्तलक्ष्म्यै नमः
2। ॐ रक्तांबरायै नमः
3। ॐ लोहितायै नमः
4। ॐ चंडिकारूपिण्यै नमः
5। ॐ त्रिनेत्रायै नमः
6। ॐ रक्तज्वालायै नमः
7। ॐ रक्तदंष्ट्रायै नमः
8। ॐ रक्तचंद्रशेखरायै नमः
9। ॐ रक्तमालिनीवेशायै नमः
10। ॐ रक्तवज्रायुधायै नमः
11। ॐ रक्तसिंहासिन्यै नमः
12। ॐ रक्तपीठनिवासिन्यै नमः
13। ॐ रक्तचक्रप्रवर्तिन्यै नमः
14। ॐ रक्तत्रिशूलधारिण्यै नमः
15। ॐ रक्तसिद्धिप्रदायिन्यै नमः
16। ॐ रक्तयोगिन्युपास्यायै नमः
17। ॐ रक्तरक्ताभूषणायै नमः
18। ॐ रक्तगंधार्चितायै नमः
19। ॐ रक्तमंडलशोभायै नमः
20। ॐ रक्तदेहायै नमः
21। ॐ रक्तप्रभायै नमः
22। ॐ रक्तार्चनसंतुष्टायै नमः
23। ॐ रक्तार्घ्यप्रियायै नमः
24। ॐ रक्तकपालमालिन्यै नमः
25। ॐ रक्ततत्त्वस्वरूपिण्यै नमः
26। ॐ रक्तचामुंडिकायै नमः
27। ॐ रक्तभैरवसंगिन्यै नमः
28। ॐ रक्तरक्तनेत्रायै नमः
29। ॐ रक्तलोलविलासिन्यै नमः
30। ॐ रक्तयोगफलप्रदायै नमः
31। ॐ रक्तमहाशक्त्यै नमः
32। ॐ रक्तस्मेराननायै नमः
33। ॐ रक्तनूपुरविभूषितायै नमः
34। ॐ रक्तरत्नमालिन्यै नमः
35। ॐ रक्तवेदगम्यायै नमः
36। ॐ रक्तक्रीडापरायायै नमः
37। ॐ रक्तवाणीसमन्वितायै नमः
38। ॐ रक्तत्रैलोक्यमोहिन्यै नमः
39। ॐ रक्तविघ्ननाशिन्यै नमः
40। ॐ रक्तशक्तिप्रदायिन्यै नमः
41। ॐ रक्तकल्पप्रसूत्यै नमः
42। ॐ रक्तबीजविनाशिन्यै नमः
43। ॐ रक्तयंत्राधिष्ठात्र्यै नमः
44। ॐ रक्तभोगविभाविन्यै नमः
45। ॐ रक्तमंत्रस्वरूपिण्यै नमः
46। ॐ रक्तध्यानप्रियायै नमः
47। ॐ रक्तरसप्रदायिन्यै नमः
48। ॐ रक्तदृष्टिप्रहारिण्यै नमः
49। ॐ रक्तशिवप्रियायै नमः
50। ॐ रक्तनारायणवल्लभायै नमः
51। ॐ रक्तवेदविदुष्यै नमः
52। ॐ रक्तशक्तियुक्तायै नमः
53। ॐ रक्तचारिण्यै नमः
54। ॐ रक्तारुणलोचनायै नमः
55। ॐ रक्तकांतिसमुद्रायै नमः
56। ॐ रक्तसारस्वत्यै नमः
57। ॐ रक्तकामप्रदायिन्यै नमः
58। ॐ रक्तविघ्नहरायै नमः
59। ॐ रक्तदेवतारूपिण्यै नमः
60। ॐ रक्तब्रह्मविद्यायै नमः
61। ॐ रक्तजिह्वायै नमः
62। ॐ रक्तवल्लभायै नमः
63। ॐ रक्तकेशविलासिन्यै नमः
64। ॐ रक्तमूर्तिधारिण्यै नमः
65। ॐ रक्तदर्पणविग्रहायै नमः
66। ॐ रक्तरत्नविभूषितायै नमः
67। ॐ रक्तवीर्यसमुद्भवायै नमः
68। ॐ रक्तभावप्रदायिन्यै नमः
69। ॐ रक्तसौंदर्यमोहिन्यै नमः
70। ॐ रक्तभक्त्यर्पणायै नमः
71। ॐ रक्तचक्रस्थायै नमः
72। ॐ रक्तबीजरूपिण्यै नमः
73। ॐ रक्तत्रिपुरनाशिन्यै नमः
74। ॐ रक्तमहानादिन्यै नमः
75। ॐ रक्तशिवशक्त्यै नमः
76। ॐ रक्तहंसवाहिन्यै नमः
77। ॐ रक्तनारायणरूपिण्यै नमः
78। ॐ रक्तमहायोगिन्यै नमः
79। ॐ रक्तत्रिकूटवसिन्यै नमः
80। ॐ रक्तप्रेमप्रदायिन्यै नमः
81। ॐ रक्तपूर्णमहाशक्त्यै नमः
82। ॐ रक्तमंत्रप्रकाशिन्यै नमः
83। ॐ रक्तविद्येश्वर्यै नमः
84। ॐ रक्तत्रैलोक्यजनन्यै नमः
85। ॐ रक्तभूतप्रेतनाशिन्यै नमः
86। ॐ रक्तानंददायिन्यै नमः
87। ॐ रक्तारुणघनायै नमः
88। ॐ रक्तलक्ष्मीस्वरूपिण्यै नमः
89। ॐ रक्तसिद्धिविनोदिन्यै नमः
90। ॐ रक्तदर्शितमार्गायै नमः
91। ॐ रक्ततत्त्वविलासिन्यै नमः
92। ॐ रक्तदुर्गाप्रियायै नमः
93। ॐ रक्तज्योतिप्रदायिन्यै नमः
94। ॐ रक्तशांतिस्वरूपिण्यै नमः
95। ॐ रक्तदयामूर्त्यै नमः
96। ॐ रक्तकपालधारिण्यै नमः
97। ॐ रक्तकुंडलशोभिन्यै नमः
98। ॐ रक्तस्नानसंतुष्टायै नमः
99। ॐ रक्तपुरश्चर्याराध्यायै नमः
100। ॐ रक्तशक्तिसिद्धिप्रदायिन्यै नमः
101। ॐ रक्तयज्ञप्रियायै नमः
102। ॐ रक्तगुणाधिष्ठात्र्यै नमः
103। ॐ रक्तचेतनारूपिण्यै नमः
104। ॐ रक्तबंधविनाशिन्यै नमः
105। ॐ रक्तोर्जस्विन्यै नमः
106। ॐ रक्तार्चनरूपिण्यै नमः
107। ॐ रक्तपीठनिलयायै नमः
108। ॐ रक्तांबरा लोहिता लक्ष्म्यै नमः
इति श्री रक्तांबरा लोहिता लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावळिः संपूर्णा ॥
ॐ भगवती रक्तांबरायै लोहिता लक्ष्म्यै नमः ।
ॐ रक्तवर्णायै लोहितायै नमः ।
ॐ श्रीं ह्रीं रक्तांबरायै महालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं रक्तबीजांकुरायै नमः ।
अर्थ
श्री रक्तांबरा लोहिता लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलि, देवी महालक्ष्मी के उग्र तांत्रिक स्वरूप को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। यह स्तोत्र प्राचीन तंत्रशास्त्र का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो देवी की रक्तवर्णी ऊर्जा, शक्ति, सुरक्षा और समृद्धि का आह्वान करता है। यह भक्तों को भय, दरिद्रता और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाकर जीवन में सभी प्रकार के सौभाग्य प्रदान करता है।
लोहिता लक्ष्मी केवल भौतिक धन की ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक मुक्ति की भी प्रतीक हैं। उनका रक्तवर्ण शक्ति, पराक्रम और दिव्य ऊर्जा का सूचक है, जो सभी प्रकार के भय, कर्मबंधनों और दुर्भाग्य को जलाकर भस्म कर देता है। इस नामावलि का पाठ असाधारण साहस, ऐश्वर्य, दुष्ट शक्तियों से सुरक्षा और साधना में सफलता प्रदान करता है। वे ऐसी शक्ति हैं जो कर्मिक बाधाओं को दूर करती हैं और भक्तों को विजय तथा पूर्णता का आशीर्वाद देती हैं।
ध्यान श्लोक देवी के भव्य और शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन करता है। वे सिंदूर के समान लाल रंग के शरीर वाली, रक्तवर्ण के वस्त्रों से सुशोभित, त्रिनेत्रा हैं। उनका मुख, नेत्र और जिह्वा सभी रक्तवर्ण के हैं, जो उन्हें भयंकर रूप प्रदान करते हैं। आठ भुजाओं और चार मुखों वाली यह देवी अपने हाथों में चक्र, गदा, खड्ग, कपाल, पद्म और रक्तवर्ण का शंख धारण करती हैं। वे सिंह पर विहार करती हैं और गरुड़ तथा उल्लू के साथ रहती हैं। यह स्वरूप देवी की सर्वशक्तिमत्ता और सुरक्षात्मक गुणों को दर्शाता है, जो असुर शक्तियों का नाश कर भक्तों की रक्षा करने में सक्षम है।
रक्तांबरा लोहिता लक्ष्मी महाशक्ति के सबसे शक्तिशाली रूपों में से एक हैं, जो अपने भक्तों को समग्र विजय और पूर्णता प्रदान करती हैं। इस नामावलि का भक्तिपूर्वक पाठ करने से, भक्त देवी की दिव्य शक्ति का आह्वान कर सकते हैं, जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर कर सकते हैं और इहलोक तथा परलोक में सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं। यह केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि देवी की पूर्ण कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।
लाभ (Benefits):- असाधारण साहस और आत्मविश्वास: देवी का उग्र स्वरूप भक्तों के मन से भय को दूर करता है और किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए आवश्यक साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है।
- आर्थिक समृद्धि और धन: लोहिता लक्ष्मी ऐश्वर्य की देवी हैं, जो आर्थिक कठिनाइयों को दूर करती हैं और धन, समृद्धि तथा स्थिरता प्रदान करती हैं।
- शत्रु भय निवारण और सुरक्षा: शत्रुओं से उत्पन्न होने वाले भय और बाधाओं को दूर कर, भक्तों को चौतरफा सुरक्षा प्रदान करती हैं, बुरी शक्तियों से रक्षा करती हैं।
- आध्यात्मिक प्रगति और सिद्धि: तांत्रिक साधनाओं में सफलता प्रदान करती हैं और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने में सहायता करती हैं, आंतरिक शांति और ज्ञान प्रदान करती हैं।
- नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी नज़र से मुक्ति: बुरी शक्तियों, बुरी नज़र और भूत-प्रेत बाधाओं से रक्षा करती हैं, जिससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मक वातावरण बनता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री रक्तांबरा लोहिता लक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलि क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री रक्तांबरा लोहिता लक्ष्मी नामावलि के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस नामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस नामावलि का मूल या स्रोत क्या है?
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