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श्री पंचाक्षरी अष्टोत्तर शतनामावळिः

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अष्टोत्तर108 नामशिव
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  1. ॐ ओंकाररूपाय नमः
  2. ॐ ओंकारनिलयाय नमः
  3. ॐ ओंकारबीजाय नमः
  4. ॐ ओंकारसारसहंसकाय नमः
  5. ॐ ओंकारमयमध्याय नमः
  6. ॐ ओंकार मंत्रवाससे नमः
  7. ॐ ओंकारध्वरधक्षाय नमः
  8. ॐ ओंकार वेदोपनिषदे नमः
  9. ॐ ओंकारपरसौख्यरादाय नमः
  10. ॐ ओंकारमूर्तये नमः
  11. ॐ ओंकारवेद्याय नमः
  12. ॐ ओंकार भूषणाय नमः
  13. ॐ ओंकारवर्णभेदिने नमः
  14. ॐ ओंकारपदप्रियाय नमः
  15. ॐ ओंकारब्रह्ममयाय नमः
  16. ॐ ओंकारमध्यस्थाय नमः
  17. ॐ ओंकारनंदनाय नमः
  18. ॐ ओंकारभद्राय नमः
  19. ॐ ओंकारविषयाय नमः
  20. ॐ ओंकारहराय नमः
  21. ॐ ओंकारेशाय नमः
  22. ॐ ओंकारतांडवाय नमः
  23. ॐ ओंकारभूम्ये नमः
  24. ॐ ओंकारउदकाय नमः
  25. ॐ ओंकारवह्नये नमः
  26. ॐ ओंकारवायवे नमः
  27. ॐ ओंकारनभसे नमः
  28. ॐ ओंशिवाय नमः
  29. ॐ नकाररूपाय नमः
  30. ॐ नंदिविद्याय नमः
  31. ॐ नारसिंहगर्वहराय नमः
  32. ॐ नानाशास्त्र विशारदाय नमः
  33. ॐ नवीनाचलनायकाय नमः
  34. ॐ नवावरणाय नमः
  35. ॐ नवशक्ति नायकाय नमः
  36. ॐ नवयौव्वनाय नमः
  37. ॐ नवनीतप्रियाय नमः
  38. ॐ नंदिवाहनाय नमः
  39. ॐ नटराजाय नमः
  40. ॐ नष्टशोकाय नमः
  41. ॐ नर्मालापविशारदाय नमः
  42. ॐ नमदक्षाय नमः
  43. ॐ नयत्रधराय नमः
  44. ॐ नवाय नमः
  45. ॐ नवविधीप्रियाय नमः
  46. ॐ नवग्रहरूपिणे नमः
  47. ॐ नव्याव्ययभोजनाय नमः
  48. ॐ नगाधिशाय नमः
  49. ॐ मकाररूपाय नमः
  50. ॐ मंत्रजाय नमः
  51. ॐ महिताय नमः
  52. ॐ मधुरावासभूम्ये नमः
  53. ॐ मंदारकुसुमप्रियाय नमः
  54. ॐ मंददूराय नमः
  55. ॐ मन्मधनाशनाय नमः
  56. ॐ मंत्र विद्याय नमः
  57. ॐ मंत्रशास्त्रय नमः
  58. ॐ मलविमोचकाय नमः
  59. ॐ मनोन्मणिपतये नमः
  60. ॐ मंदाय नमः
  61. ॐ मलदूर्वशिरसे नमः
  62. ॐ महोत्सवाय नमः
  63. ॐ मंगळाकृतये नमः
  64. ॐ मंडलप्रियाय नमः
  65. ॐ महादेवाय नमः
  66. ॐ महानंदाय नमः
  67. ॐ महासत्वाय नमः
  68. ॐ महेशाय नमः
  69. ॐ शिकारूपाय नमः
  70. ॐ शिवाय नमः
  71. ॐ शिक्षितदानवाय नमः
  72. ॐ शितिकंटाय नमः
  73. ॐ शिवाकांताय नमः
  74. ॐ चिन्मारसुखावताराय नमः
  75. ॐ शिवात्मसुतचक्षुवे नमः
  76. ॐ शिपिविष्टाय नमः
  77. ॐ शीतपीताय नमः
  78. ॐ शिलिवाहनजन्मभुवे नमः
  79. ॐ शिशुपालविपक्षेंद्राय नमः
  80. ॐ शिरःकृतसुरापगाय नमः
  81. ॐ शिलीमुखीकृतविष्णवे नमः
  82. ॐ शिवकेतनाय नमः
  83. ॐ शिवालयाय नमः
  84. ॐ शिखामणये नमः
  85. ॐ वकाररूपाय नमः
  86. ॐ वरवेषधराय नमः
  87. ॐ वरभयहस्ताय नमः
  88. ॐ वासवार्चिताय नमः
  89. ॐ वचनशुद्धये नमः
  90. ॐ वागीश्वरार्चिताय नमः
  91. ॐ वर्णभेदिने नमः
  92. ॐ यकाररूपाय नमः
  93. ॐ यजुर्वेदार्चिताय नमः
  94. ॐ यजमानस्वरूपिणे नमः
  95. ॐ यमांतकाय नमः
  96. ॐ यक्षस्वरूपाय नमः
  97. ॐ यज्ञांगाय नमः
  98. ॐ याचकवेषधराय नमः
  99. ॐ यावत् भक्त हृदिस्तिताय नमः
  100. ॐ यस्यदयासिद्धये नमः
  101. ॐ यज्ञभोक्ते नमः
  102. ॐ यत् साधुसंगमप्रियाय नमः
  103. ॐ यत् कर्मफलदायकाय नमः
  104. ॐ यत् कात्यायनीपतये नमः
  105. ॐ यावन्नक्षिरनाकाणेय नमः
  106. ॐ यत् कर्मसाक्षिये नमः
  107. ॐ यागाधीश्वराय नमः
  108. ॐ सुंदरकुशांबिका समेत श्रीतेजनीश्वराय नमः

|| इति श्री पंचाक्षरी अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||

अर्थ

"श्री पंचाक्षरी अष्टोत्तर शतनामावली" भगवान शिव की स्तुति में 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। यह नामावली परमेश्वर के दिव्य गुणों, रूपों, शक्तियों और ब्रह्मांड के साथ उनके संबंध का वर्णन करती है। "ॐ नमः शिवाय" के पंचाक्षरी मंत्र के सार को समाहित करते हुए, यह स्तोत्र शिव भक्तों को गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। प्रत्येक नाम शिव के एक अद्वितीय पहलू को उजागर करता है, जिससे भक्तों को उनकी सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमानता को समझने में मदद मिलती है।

यह नामावली 'ॐ' कार से आरंभ होकर, शिव के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन करती है। 'ॐ' परब्रह्म का प्रणव स्वरूप है, जो सृष्टि, स्थिति और लय का मूल है। यह सभी मंत्रों का बीज और समस्त वेदों का सार है। ॐकार रूपाय, ॐकार निलयाय, ॐकार बीजाय, ॐकार वेदोपनिषदे, ॐकारमूर्तये - इस प्रकार ॐकार के विभिन्न आयामों को शिव पर आरोपित करके यह बताया गया है कि शिव ही परम सत्य हैं, समस्त ब्रह्मांड की मूलभूत शक्ति हैं। शिव ॐकार के भीतर निवास करते हैं, ॐकार ही उनका रूप है, ॐकार ही उनकी शक्ति है, ऐसा ये नाम उद्घोषित करते हैं।

इसके बाद, नामावली में 'न' कार से शुरू होने वाले नाम शामिल हैं, जो "नमः शिवाय" मंत्र के 'न' अक्षर के महत्व को दर्शाते हैं। नकार रूपाय, नन्दिविद्याय, नारसिंह गर्वहराय जैसे नाम शिव के वैभव, ज्ञान और अहंकार को नष्ट करने की शक्ति को उजागर करते हैं। शिव नंदी के माध्यम से ज्ञान प्रदान करने वाले हैं, नरसिंह के अहंकार को नियंत्रित करने वाले हैं, नाना शास्त्रों में विशारद हैं, नवशक्तियों के नायक हैं - ये नाम शिव की महिमा का गुणगान करते हैं। प्रत्येक नाम शिव की दिव्य लीला, गुणों और उनके भक्तों पर उनकी करुणा को दर्शाता है।

इस अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ केवल भगवान को नमस्कार करना ही नहीं, बल्कि शिव की शक्ति से जुड़ने का एक माध्यम है। प्रत्येक नाम का पाठ करते समय, भक्त शिव के गुणों का ध्यान करता है और उनकी दिव्य शक्ति को अपने भीतर आमंत्रित करता है। यह मन को शुद्ध करता है, नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है और आध्यात्मिक जागृति को बढ़ावा देता है। शिव के इन 108 नामों का निरंतर जाप करने से, भक्त परम शांति, आंतरिक शक्ति और अंततः मोक्ष प्राप्त करने का अधिकारी बनता है।

लाभ (Benefits):

  • आध्यात्मिक उन्नति: इस नामावली का निरंतर पाठ मन को शुद्ध करता है, आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ाता है और शिव के साथ गहरा संबंध स्थापित करने में मदद करता है।
  • मानसिक शांति और स्थिरता: शिव के पवित्र नामों का जाप करने से मन की चंचलता कम होती है और आंतरिक शांति व स्थिरता प्राप्त होती है, तनाव दूर होता है।
  • बाधाओं का निवारण: शिव की दिव्य शक्ति जीवन में आने वाली बाधाओं, कठिनाइयों और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने में सहायता करती है।
  • मनोकामना पूर्ति: भक्तिभाव से इस नामावली का पाठ करने से भक्तों की धर्मसम्मत मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में समृद्धि आती है।
  • रोग मुक्ति और स्वास्थ्य: शिव नामस्मरण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, रोगों से मुक्ति दिलाकर दीर्घायु प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री पंचाक्षरी अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
यह भगवान शिव के 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। इसमें "ॐ नमः शिवाय" के पंचाक्षरी मंत्र का सार समाहित है और यह शिव के विभिन्न गुणों, रूपों और शक्तियों का वर्णन करता है।
इस नामावली का पाठ कब करना चाहिए?
प्रत्येक सोमवार, शिवरात्रि, प्रदोष काल में या प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन से पाठ करना उत्तम माना जाता है। इसे किसी भी शुभ अवसर पर भी पढ़ा जा सकता है।
श्री पंचाक्षरी अष्टोत्तर शतनामावली के पाठ के क्या लाभ हैं?
इस नामावली का पाठ करने से आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, जीवन की बाधाओं का निवारण, मनोकामना पूर्ति और भगवान शिव का दिव्य अनुग्रह प्राप्त होता है।
कौन इस नामावली का पाठ कर सकता है?
भगवान शिव के भक्त, आध्यात्मिक शांति और उन्नति की इच्छा रखने वाले, या जीवन में सकारात्मक बदलाव चाहने वाला कोई भी व्यक्ति इस नामावली का पाठ कर सकता है।
इस नामावली का कितनी बार पाठ करना चाहिए?
सामान्यतः एक माला (108 बार) पाठ किया जाता है। भक्त अपनी इच्छा और समय के अनुसार प्रतिदिन एक या अधिक माला का पाठ कर सकते हैं।
इस नामावली की उत्पत्ति क्या है?
इस नामावली की उत्पत्ति पुराणों और आगम ग्रंथों में पाई जाती है। यह शिव की महिमा का बखान करने वाली प्राचीन वैदिक और तांत्रिक परंपराओं का हिस्सा है।

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