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श्री नंदिकेश्वर अष्टोत्तर शतनामावळि

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अष्टोत्तर108 नाम
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  1. ॐ श्री नंदिकेश्वराय नमः
  2. ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः
  3. ॐ शिवध्यानपरायणाय नमः
  4. ॐ तीक्ण् शृंगाय नमः
  5. ॐ वेद वेदाय नमः
  6. ॐ विरूपये नमः
  7. ॐ वृषभाय नमः
  8. ॐ तुंगशैलाय नमः
  9. ॐ देवदेवाय नमः
  10. ॐ शिवप्रियाय नमः
  11. ॐ विराजमानाय नमः
  12. ॐ नटनाय नमः
  13. ॐ अग्निरूपाय नमः
  14. ॐ धन प्रियाय नमः
  15. ॐ सितचामरधारिणे नमः
  16. ॐ वेदांगाय नमः
  17. ॐ कनकप्रियाय नमः
  18. ॐ कैलासवासिने नमः
  19. ॐ देवाय नमः
  20. ॐ स्थितपादाय नमः
  21. ॐ शृति प्रियाय नमः
  22. ॐ श्वेतोप्रवीतिने नमः
  23. ॐ नाट्यनंदकाय नमः
  24. ॐ किंकिणीधराय नमः
  25. ॐ मत्तशृंगिने नमः
  26. ॐ हाटकेशाय नमः
  27. ॐ हेमभूषणाय नमः
  28. ॐ विष्णुरूपिण्याय नमः
  29. ॐ पृथ्विरूपिणे नमः
  30. ॐ निधीशाय नमः
  31. ॐ शिववाहनाय नमः
  32. ॐ गुळप्रियाय नमः
  33. ॐ चारुहासाय नमः
  34. ॐ शृंगिणे नमः
  35. ॐ नवतृणप्रियाय नमः
  36. ॐ वेदसाराय नमः
  37. ॐ मंत्रसाराय नमः
  38. ॐ प्रत्यक्षाय नमः
  39. ॐ करुणाकराय नमः
  40. ॐ शीघ्राय नमः
  41. ॐ ललामकलिकाय नमः
  42. ॐ शिवयोगिने नमः
  43. ॐ जलाधिपाय नमः
  44. ॐ चारु रूपाय नमः
  45. ॐ वृषॆशाय नमः
  46. ॐ सोम सूर्याग्निलोचनाय नमः
  47. ॐ सुंदराय नमः
  48. ॐ सोमभूषाय नमः
  49. ॐ सुवक्त्राय नमः
  50. ॐ कलिनाशनाय नमः
  51. ॐ सुप्र काशाय नमः
  52. ॐ महावीर्याय नमः
  53. ॐ हंसाय नमः
  54. ॐ अग्निमयाय नमः
  55. ॐ प्रभवे नमः
  56. ॐ वरदाय नमः
  57. ॐ रुद्ररूपाय नमः
  58. ॐ मधुराय नमः
  59. ॐ कामिकप्रियाय नमः
  60. ॐ विशिष्ट्टा य नमः
  61. ॐ दिव्यरूपाय नमः
  62. ॐ उज्ज्वलिने नमः
  63. ॐ ज्वालानेत्राय नमः
  64. ॐ संपर्ताय नमः
  65. ॐ कालाय नमः
  66. ॐ केशवाय नमः
  67. ॐ सर्वदैवताय नमः
  68. ॐ श्वेतवर्णाय नमः
  69. ॐ शिवासीनाय नमः
  70. ॐ चिन्मयाय नमः
  71. ॐ शृंगपट्टाय नमः
  72. ॐ श्वेतचामर भूषाय नमः
  73. ॐ देवराजाय नमः
  74. ॐ प्रभानंदिने नमः
  75. ॐ वंदिताय नमः
  76. ॐ परमेश्वरार्चिताय नमः
  77. ॐ निरूपाय नमः
  78. ॐ निराकाराय नमः
  79. ॐ छिन्नधैत्याय नमः
  80. ॐ नासासूत्रिणे नमः
  81. ॐ आनंदेश्याय नमः
  82. ॐ तिततंडुलभक्षणाय नमः
  83. ॐ वारनंदिने नमः
  84. ॐ सरसाय नमः
  85. ॐ विमलाय नमः
  86. ॐ पट्टसूत्राय नमः
  87. ॐ कळाकंटाय नमः
  88. ॐ शैलादिने नमः
  89. ॐ शिलाधन सुनंधनाय नमः
  90. ॐ कारणाय नमः
  91. ॐ शृति भक्ताय नमः
  92. ॐ वीरकंटाधराय नमः
  93. ॐ धन्याय नमः
  94. ॐ विष्णु नंदिने नमः
  95. ॐ शिवज्वाला ग्राहिणे नमः
  96. ॐ भद्राय नमः
  97. ॐ अनघाय नमः
  98. ॐ वीराय नमः
  99. ॐ धृवाय नमः
  100. ॐ धात्रे नमः
  101. ॐ शाश्वताय नमः
  102. ॐ प्रदोषप्रिय रूपिणे नमः
  103. ॐ वृषाय नमः
  104. ॐ कुंडलदृते नमः
  105. ॐ भीमाय नमः
  106. ॐ सितवर्ण स्वरूपिने नमः
  107. ॐ सर्वात्मने नमः
  108. ॐ सर्वविख्याताय नमः

|| इति श्री नंदिकेश्वर अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||

अर्थ

श्री नंदिकेश्वर अष्टोत्तर शतनामावळि भगवान शिव के परम भक्त, उनके वाहन और प्रमुख गणाधिपति नंदीश्वर को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक स्तोत्र है। यह नामावली नंदीश्वर के विभिन्न रूपों, गुणों, कार्यों और भगवान शिव के साथ उनके अटूट संबंध का महिमामंडन करती है। शिव पुराण और अन्य आगम ग्रंथों में नंदी की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। शिव के प्रत्येक मंदिर में गर्भगृह के सामने नंदी की स्थापना यह दर्शाती है कि शिव दर्शन के लिए नंदी की अनुमति आवश्यक है, जो उनके महत्व को उजागर करता है। इस नामावली का पाठ करने से भक्त नंदीश्वर की कृपा प्राप्त करते हैं और शिव का आशीर्वाद भी पाते हैं।

यह अष्टोत्तर शतनामावली केवल नामों का पाठ नहीं, बल्कि नंदीश्वर के दिव्य गुणों का ध्यान करने का एक आध्यात्मिक मार्ग है। "ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः", "ॐ विष्णुरूपिणे नमः", "ॐ पृथ्वीरूपिणे नमः" जैसे नाम यह इंगित करते हैं कि नंदीश्वर ब्रह्मांड के सृजन, स्थिति और संहार के त्रिमूर्ति स्वरूप हैं और पृथ्वी के आधार भी हैं। "ॐ शिवध्यानपरायणाय नमः" उनकी शिव भक्ति की गहराई को दर्शाता है, जो भक्तों को भक्ति का मार्ग दिखाता है। चूंकि नंदी भगवान शिव के द्वारपाल हैं, ऐसा माना जाता है कि नंदी की पूजा किए बिना शिव तक पहुंचना संभव नहीं है। इस नामावली का प्रत्येक नाम नंदी के अनगिनत गुणों को प्रकट करता है।

नामावली नंदीश्वर के शारीरिक लक्षणों से लेकर उनकी आध्यात्मिक शक्ति तक सब कुछ समाहित करती है। "ॐ तीक्ष्ण शृंगाय नमः", "ॐ मत्तशृंगिने नमः" जैसे नाम उनकी शक्ति और गरिमा को दर्शाते हैं, जबकि "ॐ सितचामरधारिणे नमः", "ॐ हेमभूषणाय नमः", "ॐ किंकिणीधराय नमः" जैसे नाम उनके शाही अलंकरण का वर्णन करते हैं। "ॐ वेदवेदाय नमः", "ॐ वेदसाराय नमः", "ॐ मंत्रसाराय नमः" नाम यह बताते हैं कि वे ज्ञान और वेदों के सार को जानने वाले हैं। "ॐ नटनाय नमः", "ॐ नाट्यानंदकाय नमः" नाम इंगित करते हैं कि नंदी नृत्य और कलाओं के भी अधिपति हैं। "ॐ धनप्रियाय नमः", "ॐ निधीशाय नमः" नाम यह घोषणा करते हैं कि नंदीश्वर ऐश्वर्य और धन के स्वामी हैं, जो भक्तों को समृद्धि प्रदान करते हैं।

नंदीश्वर केवल शिव के वाहन नहीं हैं, बल्कि वे शिव के समान दिव्य शक्ति रखते हैं। "ॐ कैलासवासिने नमः" यह दर्शाता है कि वे भगवान शिव के साथ कैलाश में निवास करते हैं। "ॐ श्रुति प्रियाय नमः", "ॐ गुळप्रियाय नमः", "ॐ नवतृणप्रियाय नमः" जैसे नाम उनकी सरल पसंद और प्रकृति के साथ उनके संबंध को दर्शाते हैं। "ॐ प्रत्यक्षाय नमः" यह इंगित करता है कि वे भक्तों को प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद देने वाले हैं। इस नामावली का प्रत्येक नाम नंदी के अनंत वैभव की स्तुति करता है और भक्तों को मानसिक शांति, समृद्धि और शिवानुग्रह प्राप्त करने में सहायक है।

लाभ (Benefits):

  • शिवानुग्रह की प्राप्ति: नंदीश्वर शिव के प्रमुख गणाधिपति हैं, इसलिए नंदी की पूजा करने से शिव का सीधा आशीर्वाद प्राप्त होता है और शिव के सान्निध्य तक मार्ग सुगम होता है।
  • सुरक्षा और निर्भयता: नंदीश्वर शक्ति और पराक्रम के प्रतीक हैं, इसलिए इस नामावली का पाठ करने से भक्तों को सभी विपत्तियों से सुरक्षा मिलती है और भयमुक्त जीवन जीने की शक्ति प्राप्त होती है।
  • ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि: नंदी वेदों के सार को जानने वाले और ज्ञान के प्रतीक हैं, इसलिए इस स्तोत्र का पाठ अध्ययन और ज्ञानार्जन में सफलता दिलाता है तथा बुद्धि को बढ़ाता है।
  • स्वास्थ्य और धन की प्राप्ति: "धनप्रियाय", "निधीशाय" जैसे नाम नंदी को धन का स्वामी बताते हैं। इस नामावली का पाठ करने से उत्तम स्वास्थ्य, आर्थिक समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।
  • शांति और सकारात्मक ऊर्जा: नंदीश्वर के नामों का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री नंदिकेश्वर अष्टोत्तर शतनामावळि क्या है?
यह भगवान शिव के वाहन और प्रमुख गणाधिपति नंदीश्वर को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक स्तोत्र है। यह नामावली नंदी के विभिन्न दिव्य गुणों और रूपों की स्तुति करती है।
नंदिकेश्वर अष्टोत्तर शतनामावळि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद, विशेष रूप से सोमवार या प्रदोष काल में करना श्रेष्ठ होता है। शिव मंदिरों में नंदी के समक्ष बैठकर पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस नामावली का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इसके पाठ से शिवानुग्रह, सुरक्षा, ज्ञान में वृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, धन और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह सभी बाधाओं को दूर करके समृद्धि लाता है।
श्री नंदिकेश्वर अष्टोत्तर शतनामावळि का पाठ कौन कर सकता है?
शिव भक्त, नंदी की कृपा चाहने वाले, और सुरक्षा तथा समृद्धि की कामना करने वाले किसी भी जाति, लिंग या आयु के लोग इसका पाठ कर सकते हैं।
इस नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः 1, 3, 5, 11 या 108 बार पाठ किया जाता है। प्रतिदिन नियमित रूप से एक बार पाठ करना भी उत्तम फल देता है।
नंदिकेश्वर अष्टोत्तर शतनामावळि का मूल स्रोत क्या है?
यह नामावली शिव पुराण, आगम शास्त्र और अन्य प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों से प्रेरित है, जो नंदी के महत्व का वर्णन करते हैं।

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