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श्री महालक्ष्मी स्तवनं

संपादन: अद्यतन
स्तोत्रलक्ष्मी देवी
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ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ।
कमले ! त्वां कमनीयां वंदे हरि-रामां ।
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

धात्री त्वमन्नपूर्णा भरणी त्वं जगतां । 
पातक-हरणीं मातः ! नौमि वरद-हस्तां ॥1॥
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

अंबुज-नयनां वंदे कंबु-गदादि-करां । 
वरुणालय-संभूतां करुणा-स्नेहभरां ॥2॥
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

पद्मालयां नतोऽहं पद्ममुखीं पद्मां । 
सद्मासि त्वं महसां त्वं विजयसेतमां ॥3॥
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

दह दारिद्र्-यं दुःखं हर जालं विपदां । 
अन्न-दायिनीं वंदे महतां पूज्य-पदां ॥4॥
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

वंदे वैभव-दात्रीं सुंदरता-प्रतिमां ।  
त्वामरविंदासीनां महेश्वरीं सौम्यां ॥5॥
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

दिव्य-विभूषण-भव्यां जननीमभिरामां ।  
नारायणीं वरेण्यां वंदे सिंधुसुतां ॥6॥
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

नौमि महालक्ष्मीं वै भुवनानां प्रिय-मां ।  
हिरण्मयीं श्रीरूपां कृपामयीं परमां ॥7॥
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

दोषं मार्जय मातः ! भक्तिः स्वीक्रियतां ।  
तुभ्यं नमस्स्तवोऽयं सौभाग्यं तनुतां ॥8॥
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

स्तवनं देव्या लक्ष्म्याः वहतु मुदं नितरां ।
मातृकृपा हृत-दैन्या रमयतु विश्वधरां ॥9॥
       ॐ लक्ष्मीं नौमि रमां ॥

इति श्रीहरेकृष्णमेहेर-प्रणीतं श्रीमहालक्ष्मी-स्तवनं संपूर्णं ।

अर्थ

श्री महालक्ष्मी स्तवनं, अखिल ब्रह्मांड की जननी, धन, सौंदर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी को समर्पित एक मधुर और शक्तिशाली स्तोत्र है। इसमें बार-बार आने वाला वाक्यांश 'ॐ लक्ष्मीं नौमि रमाम्' (मैं लक्ष्मी, हरि की प्रिया को नमन करता हूँ) दिव्य ऊर्जा, पवित्रता और शांति का आह्वान करता है। यह स्तोत्र देवी के दिव्य रूपों, उनकी करुणा, वैभव, धन, सौंदर्य और दरिद्रता निवारण की शक्ति की प्रशंसा करता है, जिससे भक्तों को जीवन में समृद्धि और आनंद प्राप्त होता है।

इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक देवी महालक्ष्मी के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और गुणों का वर्णन करता है। उन्हें जगत का भरण-पोषण करने वाली अन्नपूर्णा के रूप में, पापों को हरने वाली, वरदान देने वाली दयामयी माता के रूप में सराहा गया है। उन्हें कमल के समान नेत्रों वाली, शंख, गदा आदि धारण करने वाली, सागर से उत्पन्न हुई और करुणा एवं स्नेह से परिपूर्ण देवी के रूप में वंदित किया जाता है। भक्त उन्हें पद्मालय (कमल में निवास करने वाली), पद्ममुखी (कमल के समान मुख वाली) और तेजस्विनी के रूप में नमन करते हैं, जो अत्यंत विजयी हैं और समस्त ऐश्वर्य का निवास स्थान हैं।

स्तोत्र में भक्त देवी से अपने जीवन की दरिद्रता और दुखों को नष्ट करने, तथा सभी विपत्तियों के जाल को हरने की प्रार्थना करता है। उन्हें अन्न प्रदान करने वाली और महानुभावों द्वारा पूजे जाने वाले चरणों वाली देवी के रूप में वंदन किया जाता है। उन्हें वैभव प्रदान करने वाली, सौंदर्य की प्रतिमूर्ति, कमल पर आसीन, सौम्य और महेश्वरी के रूप में वर्णित किया गया है। देवी दिव्य आभूषणों से सुशोभित हैं और सभी प्राणियों की जननी हैं, जो अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाती हैं।

इस स्तवन का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्त देवी की कृपा के पात्र बनते हैं। यह न केवल भौतिक धन-संपदा प्रदान करता है, बल्कि मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, आनंद और आध्यात्मिक उन्नति भी देता है। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि देवी का यह स्तोत्र जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने और दिव्य सौभाग्य प्रदान करने की शक्ति रखता है।

लाभ (Benefits):

  • धन और समृद्धि: इस स्तवन का नियमित पाठ करने से माता महालक्ष्मी की कृपा से धन, धान्य और सभी प्रकार की भौतिक समृद्धि प्राप्त होती है।
  • दरिद्रता निवारण: स्तोत्र की शक्ति से जीवन की आर्थिक कठिनाइयाँ, दुख और दरिद्रता दूर होती है, जिससे सुखी जीवन की प्राप्ति होती है।
  • स्वास्थ्य और आनंद: देवी के आशीर्वाद से उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और निरंतर आनंद घर में बना रहता है।
  • विपत्तियों से रक्षा: महालक्ष्मी की कृपा से सभी प्रकार की विपत्तियों, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यह स्तवन केवल भौतिक लाभ ही नहीं, बल्कि भक्ति को बढ़ाकर आध्यात्मिक शांति और उन्नति को भी प्रेरित करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री महालक्ष्मी स्तवनं क्या है?
यह धन, सौभाग्य और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी को समर्पित एक पवित्र स्तोत्र है। यह स्तवन देवी के विभिन्न दिव्य गुणों और रूपों की प्रशंसा करता है।
इस स्तवन का पाठ कब करना चाहिए?
श्री महालक्ष्मी स्तवन का पाठ प्रतिदिन, विशेष रूप से शुक्रवार को, या किसी भी शुभ दिन पर देवी की पूजा करते समय किया जा सकता है।
श्री महालक्ष्मी स्तवन के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस स्तवन का पाठ करने से धन की प्राप्ति, दरिद्रता का निवारण, उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सभी प्रकार की विपत्तियों से रक्षा होती है।
इस स्तवन का पाठ कौन कर सकता है?
धन, समृद्धि, शांति और खुशी की कामना करने वाला कोई भी भक्त, बिना किसी लिंग या आयु भेद के, इस स्तवन का श्रद्धापूर्वक पाठ कर सकता है।
इस स्तवन का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तवन का पाठ कम से कम एक बार या 3, 5, 7, 11 आदि अपनी इच्छा और समय के अनुसार निश्चित संख्या में किया जा सकता है। नियमित पाठ अधिक फलदायी होता है।
श्री महालक्ष्मी स्तवन का मूल क्या है?
श्री महालक्ष्मी स्तवन विभिन्न पुराणों और स्तोत्र संग्रहों से संकलित है, जो देवी लक्ष्मी की महिमा का गुणगान करने वाला एक प्राचीन और शक्तिशाली स्तोत्र है।

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