श्री गणेशाय नमः ।
अस्य श्रीमहालक्ष्मीकवचमंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः गायत्री छंदः
महालक्ष्मीर्देवता महालक्ष्मीप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।
इंद्र उवाच । समस्तकवचानां तु तेजस्वि कवचोत्तमं ।
आत्मरक्षणमारोग्यं सत्यं त्वं ब्रूहि गीष्पते ॥1॥
श्रीगुरुरुवाच । महालक्ष्म्यास्तु कवचं प्रवक्ष्यामि समासतः ।
चतुर्दशसु लोकेषु रहस्यं ब्रह्मणोदितं ॥2॥
ब्रह्मोवाच । शिरो मे विष्णुपत्नी च ललाटममृतोद्भवा ।
चक्षुषी सुविशालाक्षी श्रवणे सागरांबुजा ॥3॥
घ्राणं पातु वरारोहा जिह्वामाम्नायरूपिणी ।
मुखं पातु महालक्ष्मीः कंठं वैकुंठवासिनी ॥4॥
स्कंधौ मे जानकी पातु भुजौ भार्गवनंदिनी ।
बाहू द्वौ द्रविणी पातु करौ हरिवरांगना ॥5॥
वक्षः पातु च श्रीर्देवी हृदयं हरिसुंदरी ।
कुक्षिं च वैष्णवी पातु नाभिं भुवनमातृका ॥6॥
कटिं च पातु वाराही सक्थिनी देवदेवता ।
ऊरू नारायणी पातु जानुनी चंद्रसोदरी ॥7॥
इंदिरा पातु जंघे मे पादौ भक्तनमस्कृता ।
नखान् तेजस्विनी पातु सर्वांगं करुणामयी ॥8॥
ब्रह्मणा लोकरक्षार्थं निर्मितं कवचं श्रियः ।
ये पठंति महात्मानस्ते च धन्या जगत्त्रये ॥9॥
कवचेनावृतांगनां जनानां जयदा सदा ।
मातेव सर्वसुखदा भव त्वममरेश्वरी ॥10॥
भूयः सिद्धिमवाप्नोति पूर्वोक्तं ब्रह्मणा स्वयं ।
लक्ष्मीर्हरिप्रिया पद्मा एतन्नामत्रयं स्मरन् ॥11॥
नामत्रयमिदं जप्त्वा स याति परमां श्रियं ।
यः पठेत्स च धर्मात्मा सर्वान्कामानवाप्नुयात् ॥12॥
॥इति श्रीब्रह्मपुराणे इंद्रोपदिष्टं महालक्ष्मीकवचं संपूर्णं ॥
अर्थ
श्री महालक्ष्मी कवचम् देवी महालक्ष्मी की दिव्य कृपा प्राप्त करने के लिए, भक्तों को सभी संकटों से मुक्ति दिलाने और ऐश्वर्य, स्वास्थ्य तथा शांति प्रदान करने हेतु ब्रह्माजी द्वारा इंद्रदेव को उपदेशित एक अत्यंत पवित्र रक्षा कवच है। जब देवताओं के राजा इंद्र ने गुरु से पूछा कि सभी कवचों में सबसे शक्तिशाली, आत्म-रक्षा, स्वास्थ्य और धन प्रदान करने वाला श्रेष्ठ कवच कौन सा है, तो श्री गुरु ने ब्रह्माजी द्वारा कथित इस महालक्ष्मी कवच की महिमा का वर्णन किया। यह चौदह लोकों में गुप्त और सर्वोत्तम कवच माना जाता है।
ब्रह्माजी ने स्वयं इस कवच के प्रत्येक भाग में बताया है कि महालक्ष्मी के विभिन्न स्वरूप भक्त के शरीर के अंगों की किस प्रकार रक्षा करते हैं। भगवान विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी हमारे सिर की रक्षा करें, अमृत से जन्मी देवी हमारे ललाट की रक्षा करें, विशाल नेत्रों वाली देवी हमारी आँखों की और सागर से जन्मी देवी हमारे कानों की रक्षा करें। वरारोहा रूप में हमारी घ्राणेन्द्रिय की, वेद स्वरूपिणी के रूप में हमारी जिह्वा की, महालक्ष्मी हमारे मुख की और वैकुंठवासिनी देवी हमारे कंठ की रक्षा करें।
जानकी रूप में हमारे कंधों की, भार्गव नंदिनी के रूप में हमारी भुजाओं की, द्रविणी (धन प्रदान करने वाली) के रूप में हमारे हाथों की और हरिवरांगना के रूप में हमारी हथेलियों की महालक्ष्मी देवी रक्षा करें। श्री देवी हमारे वक्षस्थल की, हरिसुंदरी हमारे हृदय की, वैष्णवी हमारे कुक्षि की और भुवनमातृका हमारी नाभि की रक्षा करें। वाराही हमारे कटि प्रदेश की, देवदेवता हमारी जांघों की, नारायणी हमारे ऊरुओं की और चंद्र की बहन हमारे घुटनों की रक्षा करें। इंदिरा रूप में हमारी जंघाओं की और भक्तों द्वारा पूजित देवी हमारे चरणों की रक्षा करें। तेजस्विनी हमारे नाखूनों की और करुणामयी देवी हमारे संपूर्ण शरीर की सर्वांगीण रक्षा करें।
यह कवच ब्रह्माजी ने लोक कल्याण और रक्षा के लिए रचा है। इसका पाठ करने वाले इस संसार में अत्यंत धन्य हो जाते हैं। इस कवच को धारण करने वाले को सदा विजय, सुख और शांति प्राप्त होती है। अमरेश्वरी महालक्ष्मी उन्हें माता के समान रक्षा करती हैं। ब्रह्माजी के कथनानुसार, इस कवच का जप करने वाले सभी सिद्धियों को प्राप्त करते हैं। 'लक्ष्मी, हरिप्रिया, पद्मा' इन तीन नामों का जप करने वाले को परम श्रेयस प्राप्त होता है। जो कोई भी इस महालक्ष्मी कवच का पाठ करता है, वह धार्मिक, भक्तिशील होता है और अपनी सभी मनोकामनाओं को प्राप्त करता है। यह कवच दरिद्रता को दूर कर स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करता है।
लाभ (Benefits):
- पूर्ण सुरक्षा: इस कवच का पाठ करने से महालक्ष्मी देवी भक्त के शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा करती हैं, जिससे सभी दोषों और बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है।
- धन और समृद्धि: दरिद्रता का नाश होता है और जीवन में अनंत धन, ऐश्वर्य तथा समृद्धि स्थापित होती है। महालक्ष्मी स्वयं धन-धान्य की अधिष्ठात्री देवी हैं।
- स्वास्थ्य और दीर्घायु: कवच का पाठ उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है और रोगों तथा कष्टों से मुक्ति दिलाकर दीर्घायु प्रदान करता है।
- विजय और सफलता: जीवन के सभी क्षेत्रों में विजय और सफलता प्राप्त करने में सहायता करता है। बाधाएँ दूर होती हैं और कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है।
- मानसिक शांति और संतोष: कवच के प्रभाव से मानसिक शांति, स्थिरता और आंतरिक संतोष बढ़ता है, जीवन में सकारात्मकता भर जाती है।
- सभी सिद्धियों की प्राप्ति: 'लक्ष्मी, हरिप्रिया, पद्मा' इन तीन नामों के जप के साथ कवच का पाठ करने से सभी आध्यात्मिक और भौतिक सिद्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री महालक्ष्मी कवचम् क्या है?
श्री महालक्ष्मी कवचम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री महालक्ष्मी कवचम् के पाठ से क्या प्रमुख लाभ मिलते हैं?
श्री महालक्ष्मी कवचम् का पाठ कौन कर सकता है?
इस कवच का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री महालक्ष्मी कवचम् का उद्गम क्या है?
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