श्री

श्रीकमलांबिका स्तवः

संपादन: अद्यतन
स्तोत्रलक्ष्मी देवी
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कमलालयतटशोभितविमलालयविलसत्
     कमलापति-कमलासन-कमलार्चितविभवं ।
कमलांघ्रिक-कमलानन-कमलांबिक-विलसत्
     कमलाभिधमहमांतरकमले मम कलये ॥1॥

यजनपर-मनुजवर-शिववदनजार्चितां
     भजनपर-सनकमुख-मुनिहृदयसंस्थितां ।
अजजनक-हयवदन-हरिहयसुपूजितां
     भज हृदय रविजलज गुरुवरदशांकरीं ॥2॥

ईशानकोणे कमलालयस्य श्रीत्यागराजस्य तु वायुकोणे ।
ईशानदृष्टिः कमलांबिकायाः या भाति सा श्रीरमृता सतां हि ॥3॥

मदंबिका हृत्कमलांतरस्था चिदंबिका श्रीकमलालयस्था ।
अनंतसौख्यं कमलासनस्था तनोतु देवी कमलांबिका मे ॥4॥

अनिंधनं समेधिते निरंतरं हृदंतरे
     चिदाशुशुक्षणौ महाविमोहरात्रिनाशके ।
अवाच्यवैभवे परे विचित्रमाविकासिते
     जुहोम्यहं धरादिमं शिवांततत्त्वमंबिके ॥5॥

अक्षरत्रयरूपिणीमखिलाक्षवृत्तिविनाशिनीं
     ऋक्षराजसुभाविताममृताक्षरांघ्रियुगां भजे ।
अक्षरासनसंस्थितामजशिक्षकेभमुखप्रियां
     चिक्षुरादिविनाशिनीं वरलक्षणां कमलांबिकां ॥6॥

मकारवर्जं तव वामनेत्रबिंद्वाढ्यमाद्ये कमलेति नाम ।
श्रीकामरजाख्यवरार्णरूपं भजंति साध्याः स्वकबोधसिद्धये ॥7॥सान्याः?
स्वरेश चंद्राह्वयशीतबीजत्रयाढ्यमाधे कमलेति नाम ।
मकारवर्जं तव मूलविद्यां विद्योतयत्येव गुरुस्वरूपे ॥8॥

शांतस्वरूपा विमलप्रकाशा त्वमात्मरूपा च गुहांतरस्था ।
मातश्चिदानंदतनुर्विभासि त्वमंबिकेऽनंतसुखप्रदात्रि ॥9॥

अनंतसूत्रग्रथिता सुवर्णमालातिमाधुर्यवचस्सुमाढ्या ।
गुरुस्वरूपा कमलांबिका या तदंघ्रिपद्मं समलंकरोतु ॥

॥इति श्रीमच्चिदानंदनाथाख्य सद्गुरुपादाब्जामृतपायिना
अनंतानंदनाथेन रचितः श्रीकमलांबिकास्तवः संपूर्णः ॥

अर्थ

श्री कमलांबिका स्तवम् दक्षिण भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक, तिरुवारूर में विराजमान श्री कमलांबिका देवी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। यह स्तोत्र श्रीविद्या परंपरा में अत्यधिक महत्व रखता है, देवी को सभी शक्तियों के स्रोत, ज्ञान के प्रतीक और परम शांति की देवी के रूप में महिमामंडित करता है। यह भक्तों के हृदय में अज्ञान के अंधकार को दूर कर, ज्ञान की ज्योति प्रज्वलित करने वाली उनकी कृपा की प्रार्थना करता है।

यह स्तोत्र केवल देवी के बाहरी स्वरूप का वर्णन नहीं करता, बल्कि उनके आंतरिक स्वरूप, ब्रह्मांड के सृजन और लय में उनकी भूमिका, तथा भक्त के हृदय में उनकी उपस्थिति को भी विस्तार से समझाता है। कमलांबिका देवी हृदय कमल में निवास करती हैं, अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान की अग्नि प्रज्वलित करती हैं, जो चिदशक्ति का प्रतीक है। वे परम चैतन्य स्वरूपिणी हैं और भक्तों के लिए मोक्ष के मार्ग को सुगम बनाती हैं। इस स्तोत्र का पाठ मन को शुद्ध करता है और आंतरिक प्रकाश को बढ़ाता है।

प्रत्येक श्लोक कमलांबिका देवी की विभिन्न महिमाओं और स्वरूपों का वर्णन करता है। पहला श्लोक तिरुवारूर के कमलालय में सुशोभित, ब्रह्मा, विष्णु और लक्ष्मी द्वारा पूजित कमलांबिका देवी के मेरे हृदय कमल में सदैव निवास करने की प्रार्थना करता है। उनके कमल सदृश चरण और कमलवदन सौंदर्य और करुणा का प्रतीक हैं। दूसरा श्लोक सनकादि महर्षियों, ब्रह्मा, विष्णु और हयग्रीव द्वारा पूजित, शंकर की पत्नी कमलांबिका को हृदय कमल में भजने के महत्व को बताता है। तीसरा श्लोक तिरुवारूर के कमलालय के ईशान कोण में, श्री त्यागराज स्वामी के वायु कोण में प्रकाशित होने वाली कमलांबिका की दृष्टि सभी जीवों के लिए अमृत स्वरूप है, वे साक्षात् श्री देवी का ही स्वरूप हैं।

चौथा श्लोक मेरे हृदय कमल में स्थित, चिदंबर महातत्व के समान प्रकाशित, सृष्टि कमल पर आसीन कमलांबिका देवी से अनंत सुख और मोक्ष प्रदान करने की प्रार्थना करता है। पांचवां श्लोक हृदय की यज्ञ वेदी में अज्ञान की रात्रि का नाश करने वाली, निरंतर प्रज्वलित ज्ञान अग्नि स्वरूपा अंबिका को, अपनी भक्ति को आहुति के रूप में अर्पित करने की बात कहता है। उनकी महिमा अप्रमेय है। स्तोत्र के आगे के भाग त्रयक्षर स्वरूपिणी (ॐ), इंद्रिय बंधनों का नाश करने वाली, ज्ञान और आनंद प्रदान करने वाली देवी की स्तुति करते हैं। चंद्रमा स्वरूपिणी मूलमंत्र के माध्यम से गुरु रूप में परम ज्ञान प्रदान करने वाली उनकी वाणी का सौंदर्य ज्ञान रत्नों से जड़ी मणिमाला के समान है। शांत स्वरूपिणी, शुद्ध प्रकाशमयी, निरंतर सुख प्रदान करने वाली उनके चरण कमल सदैव हमारे हृदय में स्थित रहें, ऐसी यह स्तोत्र प्रार्थना करता है।

लाभ (Benefits):

  • आध्यात्मिक उन्नति: इस स्तोत्र का नियमित पाठ भक्तों के हृदय कमल को विकसित कर आत्मज्ञान को प्रेरित करता है और आंतरिक चेतना को जागृत करता है।
  • ज्ञान वृद्धि: कमलांबिका देवी ज्ञान की देवी हैं, अतः इस स्तोत्र का पाठ करने से अज्ञान दूर होता है और मन को स्पष्टता, विवेक तथा शुद्ध ज्ञान प्राप्त होता है।
  • शांति और संतुष्टि: मानसिक उलझनों, चिंताओं और भय को समाप्त कर भक्तों को आंतरिक शांति, संतुष्टि और स्थिरता प्रदान करता है।
  • समृद्धि और सौभाग्य: देवी की कृपा से लौकिक और आध्यात्मिक समृद्धि, सौभाग्य तथा सभी मनोकामनाओं की सिद्धि प्राप्त होती है।
  • मोक्ष प्राप्ति: यह केवल भौतिक लाभों के लिए ही नहीं, बल्कि बंधनों से मुक्ति प्रदान कर परम पद प्राप्त करने और जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त करने में सहायता करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री कमलांबिका स्तवम् क्या है?
श्री कमलांबिका स्तवम् तिरुवारूर की कमलांबिका देवी को समर्पित एक शक्तिशाली भक्ति स्तोत्र है। यह देवी की महिमा, स्वरूप और उनकी कृपा का गुणगान करता है।
श्री कमलांबिका स्तवम् का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह या शाम, स्नान के बाद शुद्ध मन से किया जा सकता है। देवी के सामने दीपक जलाकर, ध्यानपूर्वक पाठ करना अधिक फलदायी होता है।
इस स्तोत्र के पाठ से क्या प्रमुख लाभ प्राप्त होते हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान में वृद्धि, मानसिक शांति, समृद्धि और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
श्री कमलांबिका स्तवम् का पाठ कौन कर सकता है?
कमलांबिका देवी में श्रद्धा रखने वाले, आध्यात्मिक प्रगति और आंतरिक शांति की इच्छा रखने वाले कोई भी भक्त इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। श्रीविद्या साधकों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है।
श्री कमलांबिका स्तवम् का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन कम से कम एक बार या अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार 11, 21, या 108 बार किया जा सकता है। निरंतर पाठ से श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त होते हैं।
श्री कमलांबिका स्तवम् का उद्गम या पृष्ठभूमि क्या है?
श्री कमलांबिका स्तवम् श्रीविद्या परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे तिरुवारूर की कमलांबिका देवी को समर्पित किया गया है। यह देवी की महिमा और उनकी दिव्य शक्ति का वर्णन करता है।

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