न्यंकावरातिभयशंकाकुले धृतदृगंकायतिः प्रणमतां
शंकाकलंकयुतपंकायताश्मशितटंकायितस्वचरिता ।
त्वं कालदेशपदशंकातिपातिपतिसंकाश वैभवयुता
शं काममातरनिशं कामनीयमिह संकाशयाशु कृपया ॥1॥
आचांतरंगदलिमोचांतरंगरुचिवाचां तरंगगतिभिः
काचाटनाय कटुवाचाटभावयुतनीचाटनं न कलये ।
वाचामगोचरसदाचारसूरिजनताचातुरीविवृतये
प्राचां गतिं कुशलवाचां जगज्जननि याचामि देवि भवतीं ॥2॥
चेटीकृतामरवधूटीकराग्रधृतपेटीपुटार्घ्यसुमनो-
वीटीदलक्रमुकपाटीरपंकनवशाटीकृतांगरचना ।
खेटीकमानशतकोटीकराब्जजजटाटीरवंदितपदा
या टीकतेऽब्जवनमाटीकतां हृदयवाटीमतीव कमला ॥3॥
स्वांतांतरालकृतकांतागमांतशतशांतांतराघनिकराः
शांतार्थकांतवकृतांता भजंति हृदि दांता दुरंततपसा ।
यां तानतापभवतांतातिभीतजगतां तापनोदनपटुं
मां तारयत्वशुभकांतारतोऽद्य हरिकांताकटाक्षलहरी ॥4॥
यां भावुका मनसि संभावयंति भवसंभावनापहृतये
त्वं भासि लक्ष्मि सततं भाव्ययद्भवनसंभावनादिविधये ।
जंभारिसंपदुपलंभादिकारणमहं भाव्यमंघ्रियुगलं
संभावये श्रुतिषु संभाषितं वचसि संभाष्य तस्य तव च ॥5॥
दूरावधूतमधुधारागिरोच्चकुचभारानतांगलतिका-
सारांगलिप्तघनसारार्द्रकुंकुमरसा राजहंसगमना ।
वैराकरस्मरविकारापसंसरणवाराशिमग्रमनसः
श्रीराविरस्तु धुरि ताराय मे गुरुभिरारधिता भगवती ॥6॥
श्रीवासधूपकनदावासदीपरुचिरावासभूपरिसरा
श्रीवासदेशलसदावापकाशरदभावाभकेशनिकरा ।
श्रीवासुदेवरमणी वामदेवविधिदेवाधिपावनपरा
श्रीवासवस्तुनरदेवाहतस्तुतिसभावा मुदेऽस्तु सुतरां ॥7॥
भाषादिदेवकुलयोषामणिस्तवनघोषांचितस्वसविधा
दोषाकुले जगति पोषाकुला सपदि शेषाहि शायिदयिता ।
दोषालयस्य मम दोषानपोह्य गतदोषाभिनंद्यमहिमा
शेषाशनाहिरिपुशेषादिसंपद विशेषां ददातु विभवान् ॥8॥
इति श्रीकमलाष्टकं संपूर्णं ।
अर्थ
श्री कमलाष्टकं स्तोत्र भगवती महालक्ष्मी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और भक्तिमय स्तोत्र है। 'कमला' का अर्थ है कमल पर विराजमान या कमल के समान सुंदर। यह अष्टक आठ श्लोकों से बना है, जिनमें से प्रत्येक देवी के विभिन्न गुणों, महिमा और करुणा का वर्णन करता है। भगवान विष्णु की पत्नी, लक्ष्मी देवी, धन, समृद्धि, सौंदर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस स्तोत्र का भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें शुभ संपदा, शांति और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
कमलाष्टकं केवल भौतिक धन के लिए की गई प्रार्थना नहीं है, बल्कि आंतरिक शुद्धि, आध्यात्मिक ज्ञान और मन की शांति के लिए भी एक प्रार्थना है। देवी के दिव्य रूप का ध्यान करके, भक्त अपनी इच्छाओं को शुद्ध करते हैं और मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। यह स्तोत्र भवबंधनों से मुक्ति प्रदान करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरता है। ऐसा माना जाता है कि देवी का प्रत्येक नाम और प्रत्येक गुण भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करता है।
आइए प्रत्येक श्लोक के गहरे अर्थ को देखें:
- **पहला श्लोक:** भय और संदेह से पीड़ित भक्तों पर करुणा बरसाने वाली देवी कमला। काल और देश से परे वैभव वाली वह माता मुझ पर कृपा करें। वह भक्तों के मन से भय और चिंताओं को दूर कर शांति प्रदान करती हैं।
- **दूसरा श्लोक:** जिनकी वाणी में मधुरता और मन में पवित्रता होती है, वे ही आपकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। वाणी, मन और कर्म में शुद्धि प्रदान करें। यद्यपि आप वाणी से अगोचर हैं, फिर भी शुद्ध मन से आपकी आराधना करने वालों पर आप प्रसन्न होती हैं।
- **तीसरा श्लोक:** सभी देवता आपके चरणों की पुष्पों से पूजा करते हैं। आप अपने भक्तों के हृदय में कमलवन की तरह निवास करती हैं, हे कमला माता, मेरे हृदय में भी निवास करें। आपकी करुणा सभी देवताओं द्वारा पूजित है।
- **चौथा श्लोक:** तपस्या और भक्ति से आपकी आराधना करने वाले योगियों के मन में आप नित्य निवास करती हैं। आपकी दृष्टि पड़ने से मेरा मन भी शांति प्राप्त करे। लौकिक दुखों से मुक्ति के लिए योगी आपका ध्यान करते हैं।
- **पांचवां श्लोक:** भक्त भवबंधनों को दूर करने के लिए मन में आपका ध्यान करते हैं। वेद भी आपकी महिमा का वर्णन करते हैं। ज्ञानीजन आपको स्मरण करके मोक्ष प्राप्त करते हैं।
- **छठा श्लोक:** आपकी सुंदरता और करुणा-दृष्टि का वर्णन कवि भी नहीं कर सकते। सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाली श्री महालक्ष्मी, आपकी करुणा हम पर बनी रहे। आपका दिव्य रूप सभी दुखों को दूर कर समृद्धि प्रदान करता है।
- **सातवां श्लोक:** आप श्रीवास (भगवान विष्णु) के हृदय में स्थिर रूप से निवास करने वाली कमला माता हैं। सभी देवताओं द्वारा स्तुति की जाती हैं और सभी लोकों को पवित्र करती हैं। आपकी उपस्थिति सृष्टि में शुद्धता और संतुलन लाती है।
- **आठवां श्लोक:** आपकी कीर्ति सभी लोकों में गूँज रही है। आप मेरे पापों का नाश करें और शुभ संपदा प्रदान करें। हे जगन्माता, मुझे धन, शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करें।
इस स्तोत्र का पाठ करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में समृद्धि, शांति और संतोष प्राप्त होता है। यह केवल भौतिक लाभों के लिए ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग है।
लाभ (Benefits):
- सभी दरिद्रता का नाश: श्री कमलाष्टकं का पाठ करने से आर्थिक कठिनाइयाँ और गरीबी दूर होती है, जिससे धन-संपदा की प्राप्ति होती है।
- मानसिक शांति और भय मुक्ति: देवी के स्मरण से मन का भय और चिंताएँ दूर होती हैं, जिससे आंतरिक शांति और सुकून मिलता है।
- सद्गुण और पवित्रता: वाणी, मन और कर्मों में शुद्धि आती है, जिससे सद्गुणों का विकास होता है और व्यक्ति पवित्र बनता है।
- मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति: यह भवबंधनों से मुक्ति दिलाता है और आध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष के मार्ग को सुगम बनाता है।
- सभी मनोकामनाओं की पूर्ति: भक्तों की सभी शुभ इच्छाओं को पूरा करता है और जीवन में सौभाग्य तथा समृद्धि लाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री कमलाष्टकं क्या है?
श्री कमलाष्टकं स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री कमलाष्टकं के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
श्री कमलाष्टकं स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
श्री कमलाष्टकं स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री कमलाष्टकं स्तोत्र का मूल या स्रोत क्या है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
