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श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रं

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सहस्रनाम
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श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रं

श्रीगणेशाय नमः |
ध्यानं -
रक्तश्वेतहिरण्यनीलधवलैर्युक्तां त्रिनेत्रोज्ज्वलां
रक्तारक्तनवस्रजं मणिगणैर्युक्तां कुमारीमिमां |
गायत्री कमलासनां करतलव्यानद्धकुंडांबुजां
पद्माक्षीं च वरस्रजंच दधतीं हंसाधिरूढां भजे ||

ॐ तत्काररूपा तत्त्वज्ञा तत्पदार्थस्वरूपिणि |
तपस्स्व्याध्यायनिरता तपस्विजननन्नुता ||1||

तत्कीर्तिगुणसंपन्ना तथ्यवाक्च तपोनिधिः |
तत्त्वोपदेशसंबंधा तपोलोकनिवासिनी ||2||

तरुणादित्यसंकाशा तप्तकांचनभूषणा |
तमोपहारिणि तंत्री तारिणि ताररूपिणि ||3||

तलादिभुवनांतस्था तर्कशास्त्रविधायिनी |
तंत्रसारा तंत्रमाता तंत्रमार्गप्रदर्शिनी ||4||

तत्त्वा तंत्रविधानज्ञा तंत्रस्था तंत्रसाक्षिणि |
तदेकध्याननिरता तत्त्वज्ञानप्रबोधिनी ||5||

तन्नाममंत्रसुप्रीता तपस्विजनसेविता |
साकाररूपा सावित्री सर्वरूपा सनातनी ||6||

संसारदुःखशमनी सर्वयागफलप्रदा |
सकला सत्यसंकल्पा सत्या सत्यप्रदायिनी ||7||

संतोषजननी सारा सत्यलोकनिवासिनी |
समुद्रतनयाराध्या सामगानप्रिया सती ||8||

समानी सामदेवी च समस्तसुरसेविता |
सर्वसंपत्तिजननी सद्गुणा सकलेष्टदा ||9||

सनकादिमुनिध्येया समानाधिकवर्जिता |
साध्या सिद्धा सुधावासा सिद्धिस्साध्यप्रदायिनी ||10||

सद्युगाराध्यनिलया समुत्तीर्णा सदाशिवा |
सर्ववेदांतनिलया सर्वशास्त्रार्थगोचरा ||11||

सहस्रदलपद्मस्था सर्वज्ञा सर्वतोमुखी |
समया समयाचारा सदसद्ग्रंथिभेदिनी ||12||

सप्तकोटिमहामंत्रमाता सर्वप्रदायिनी |
सगुणा संभ्रमा साक्षी सर्वचैतन्यरूपिणी ||13||

सत्कीर्तिस्सात्विका साध्वी सच्चिदानंदरूपिणी |
संकल्परूपिणी संध्या सालग्रामनिवासिनी ||14||

सर्वोपाधिविनिर्मुक्ता सत्यज्ञानप्रबोधिनी |
विकाररूपा विप्रश्रीर्विप्राराधनतत्परा ||15||

विप्रप्रीर्विप्रकल्याणी विप्रवाक्यस्वरूपिणी |
विप्रमंदिरमध्यस्था विप्रवादविनोदिनी ||16||

विप्रोपाधिविनिर्भेत्री विप्रहत्याविमोचनी |
विप्रत्राता विप्रगोत्रा विप्रगोत्रविवर्धिनी ||17||

विप्रभोजनसंतुष्टा विष्णुरूपा विनोदिनी |
विष्णुमाया विष्णुवंद्या विष्णुगर्भा विचित्रिणी ||18||

वैष्णवी विष्णुभगिनी विष्णुमायाविलासिनी |
विकाररहिता विश्वविज्ञानघनरूपिणी ||19||

विबुधा विष्णुसंकल्पा विश्वामित्रप्रसादिनी |
विष्णुचैतन्यनिलया विष्णुस्वा विश्वसाक्षिणी ||20||

विवेकिनी वियद्रूपा विजया विश्वमोहिनी |
विद्याधरी विधानज्ञा वेदतत्त्वार्थरूपिणी ||21||

विरूपाक्षी विराड्रूपा विक्रमा विश्वमंगला |
विश्वंभरासमाराध्या विश्वभ्रमणकारिणी ||22||

विनायकी विनोदस्था वीरगोष्ठीविवर्धिनी |
विवाहरहिता विंध्या विंध्याचलनिवासिनी ||23||

विद्याविद्याकरी विद्या विद्याविद्याप्रबोधिनी |
विमला विभवा वेद्या विश्वस्था विविधोज्ज्वला ||24||

वीरमध्या वरारोहा वितंत्रा विश्वनायिका |
वीरहत्याप्रशमनी विनम्रजनपालिनी ||25||

वीरधीर्विविधाकारा विरोधिजननाशिनी |
तुकाररूपा तुर्यश्रीस्तुलसीवनवासिनी ||26||

तुरंगी तुरगारूढा तुलादानफलप्रदा |
तुलामाघस्नानतुष्टा तुष्टिपुष्टिप्रदायिनी ||27||

तुरंगमप्रसंतुष्टा तुलिता तुल्यमध्यगा |
तुंगोत्तुंगा तुंगकुचा तुहिनाचलसंस्थिता ||28||

तुंबुरादिस्तुतिप्रीता तुषारशिखरीश्वरी |
तुष्टा च तुष्टिजननी तुष्टलोकनिवासिनी ||29||

तुलाधारा तुलामध्या तुलस्था तुर्यरूपिणी |
तुरीयगुणगंभीरा तुर्यनादस्वरूपिणी ||30||

तुर्यविद्यालास्यतुष्टा तूर्यशास्त्रार्थवादिनी |
तुरीयशास्त्रतत्त्वज्ञा तूर्यनादविनोदिनी ||31||

तूर्यनादांतनिलया तूर्यानंदस्वरूपिणी |
तुरीयभक्तिजननी तुर्यमार्गप्रदर्शिनी ||32||

वकाररूपा वागीशी वरेण्या वरसंविधा |
वरा वरिष्ठा वैदेही वेदशास्त्रप्रदर्शिनी ||33||

विकल्पशमनी वाणी वांछितार्थफलप्रदा |
वयस्था च वयोमध्या वयोवस्थाविवर्जिता ||34||

वंदिनी वादिनी वर्या वाङ्मयी वीरवंदिता |
वानप्रस्थाश्रमस्था च वनदुर्गा वनालया ||35||

वनजाक्षी वनचरी वनिता विश्वमोहिनी |
वसिष्ठावामदेवादिवंद्या वंद्यस्वरूपिणी ||36||

वैद्या वैद्यचिकित्सा च वषट्कारी वसुंधरा |
वसुमाता वसुत्राता वसुजन्मविमोचनी ||37||

वसुप्रदा वासुदेवी वासुदेव मनोहरी |
वासवार्चितपादश्रीर्वासवारिविनाशिनी ||38||

वागीशी वाङ्मनस्थायी वशिनी वनवासभूः |
वामदेवी वरारोहा वाद्यघोषणतत्परा ||39||

वाचस्पतिसमाराध्या वेदमाता विनोदिनी |
रेकाररूपा रेवा च रेवातीरनिवासिनी ||40||

राजीवलोचना रामा रागिणिरतिवंदिता |
रमणीरामजप्ता च राज्यपा राजताद्रिगा ||41||

राकिणी रेवती रक्षा रुद्रजन्मा रजस्वला |
रेणुकारमणी रम्या रतिवृद्धा रता रतिः ||42||

रावणानंदसंधायी राजश्री राजशेखरी |
रणमद्या रथारूढा रविकोटिसमप्रभा ||43||

रविमंडलमध्यस्था रजनी रविलोचना |
रथांगपाणि रक्षोघ्नी रागिणी रावणार्चिता ||44||

रंभादिकन्यकाराध्या राज्यदा राज्यवर्धिनी |
रजताद्रीशसक्थिस्था रम्या राजीवलोचना ||45||

रम्यवाणी रमाराध्या राज्यधात्री रतोत्सवा |
रेवती च रतोत्साहा राजहृद्रोगहारिणी ||46||

रंगप्रवृद्धमधुरा रंगमंडपमध्यगा |
रंजिता राजजननी रम्या राकेंदुमध्यगा ||47||

राविणी रागिणी रंज्या राजराजेश्वरार्चिता |
राजन्वती राजनीती रजताचलवासिनी ||48||

राघवार्चितपादश्री राघवा राघवप्रिया |
रत्ननूपुरमध्याढ्या रत्नद्वीपनिवासिनी ||49||

रत्नप्राकारमध्यस्था रत्नमंडपमध्यगा |
रत्नाभिषेकसंतुष्टा रत्नांगी रत्नदायिनी ||50||

णिकाररूपिणी नित्या नित्यतृप्ता निरंजना |
निद्रात्ययविशेषज्ञा नीलजीमूतसन्निभा ||51||

नीवारशूकवत्तन्वी नित्यकल्याणरूपिणी |
नित्योत्सवा नित्यपूज्या नित्यानंदस्वरूपिणी ||52||

निर्विकल्पा निर्गुणस्था निश्चिंता निरुपद्रवा |
निस्संशया निरीहा च निर्लोभा नीलमूर्धजा ||53||

निखिलागममध्यस्था निखिलागमसंस्थिता |
नित्योपाधिविनिर्मुक्ता नित्यकर्मफलप्रदा ||54||

नीलग्रीवा निराहारा निरंजनवरप्रदा |
नवनीतप्रिया नारी नरकार्णवतारिणी ||55||

नारायणी निरीहा च निर्मला निर्गुणप्रिया |
निश्चिंता निगमाचारनिखिलागम च वेदिनी ||56||

निमेषानिमिषोत्पन्ना निमेषांडविधायिनी |
निवातदीपमध्यस्था निर्विघ्ना नीचनाशिनी ||57||

नीलवेणी नीलखंडा निर्विषा निष्कशोभिता |
नीलांशुकपरीधाना निंदघ्नी च निरीश्वरी ||58||

निश्वासोच्छ्वासमध्यस्था नित्ययानविलासिनी |
यंकाररूपा यंत्रेशी यंत्री यंत्रयशस्विनी ||59||

यंत्राराधनसंतुष्टा यजमानस्वरूपिणी |
योगिपूज्या यकारस्था यूपस्तंभनिवासिनी ||60||

यमघ्नी यमकल्पा च यशःकामा यतीश्वरी |
यमादीयोगनिरता यतिदुःखापहारिणी ||61||

यज्ञा यज्वा यजुर्गेया यज्ञेश्वरपतिव्रता |
यज्ञसूत्रप्रदा यष्ट्री यज्ञकर्मफलप्रदा ||62||

यवांकुरप्रिया यंत्री यवदघ्नी यवार्चिता |
यज्ञकर्ती यज्ञभोक्त्री यज्ञांगी यज्ञवाहिनी ||63||

यज्ञसाक्षी यज्ञमुखी यजुषी यज्ञरक्षिणी |
भकाररूपा भद्रेशी भद्रकल्याणदायिनी ||64||

भक्तप्रिया भक्तसखा भक्ताभीष्टस्वरूपिणी |
भगिनी भक्तसुलभा भक्तिदा भक्तवत्सला ||65||

भक्तचैतन्यनिलया भक्तबंधविमोचनी |
भक्तस्वरूपिणी भाग्या भक्तारोग्यप्रदायिनी ||66||

भक्तमाता भक्तगम्या भक्ताभीष्टप्रदायिनी |
भास्करी भैरवी भोग्या भवानी भयनाशिनी ||67||

भद्रात्मिका भद्रदायी भद्रकाली भयंकरी |
भगनिष्यंदिनी भूम्नी भवबंधविमोचनी ||68||

भीमा भवसखा भंगीभंगुरा भीमदर्शिनी |
भल्ली भल्लीधरा भीरुर्भेरुंडा भीमपापहा ||69||

भावज्ञा भोगदात्री च भवघ्नी भूतिभूषणा |
भूतिदा भूमिदात्री च भूपतित्वप्रदायिनी ||70||

भ्रामरी भ्रमरी भारी भवसागरतारिणी |
भंडासुरवधोत्साहा भाग्यदा भावमोदिनी ||71||

गोकाररूपा गोमाता गुरुपत्नी गुरुप्रिया |
गोरोचनप्रिया गौरी गोविंदगुणवर्धिनी ||72||

गोपालचेष्टासंतुष्टा गोवर्धनविवर्धिनी |
गोविंदरूपिणी गोप्त्री गोकुलानांविवर्धिनी ||73||

गीता गीतप्रिया गेया गोदा गोरूपधारिणी |
गोपी गोहत्यशमनी गुणिनी गुणिविग्रहा ||74||

गोविंदजननी गोष्ठा गोप्रदा गोकुलोत्सवा |
गोचरी गौतमी गंगा गोमुखी गुणवासिनी ||75||

गोपाली गोमया गुंभा गोष्ठी गोपुरवासिनी |
गरुडा गमनश्रेष्ठा गारुडा गरुडध्वजा ||76||

गंभीरा गंडकी गुंडा गरुडध्वजवल्लभा |
गगनस्था गयावासा गुणवृत्तिर्गुणोद्भवा ||77||

देकाररूपा देवेशी दृग्रूपा देवतार्चिता |
देवराजेश्वरार्धांगी दीनदैन्यविमोचनी ||78||

देकालपरिज्ञाना देशोपद्रवनाशिनी |
देवमाता देवमोहा देवदानवमोहिनी ||79||

देवेंद्रार्चितपादश्री देवदेवप्रसादिनी |
देशांतरी देशरूपा देवालयनिवासिनी ||80||

देशभ्रमणसंतुष्टा देशस्वास्थ्यप्रदायिनी |
देवयाना देवता च देवसैन्यप्रपालिनी ||81||

वकाररूपा वाग्देवी वेदमानसगोचरा |
वैकुंठदेशिका वेद्या वायुरूपा वरप्रदा ||82||

वक्रतुंडार्चितपदा वक्रतुंडप्रसादिनी |
वैचित्र्यरूपा वसुधा वसुस्थाना वसुप्रिया ||83||

वषट्कारस्वरूपा च वरारोहा वरासना |
वैदेही जननी वेद्या वैदेहीशोकनाशिनी ||84||

वेदमाता वेदकन्या वेदरूपा विनोदिनी |
वेदांतवादिनी चैव वेदांतनिलयप्रिया ||85||

वेदश्रवा वेदघोषा वेदगीता विनोदिनी |
वेदशास्त्रार्थतत्त्वज्ञा वेदमार्ग प्रदर्शिनी ||86||

वैदिकीकर्मफलदा वेदसागरवाडवा |
वेदवंद्या वेदगुह्या वेदाश्वरथवाहिनी ||87||

वेदचक्रा वेदवंद्या वेदांगी वेदवित्कविः |
सकाररूपा सामंता सामगान विचक्षणा ||88||

साम्राज्ञी नामरूपा च सदानंदप्रदायिनी |
सर्वदृक्सन्निविष्टा च सर्वसंप्रेषिणीसहा ||89||

सव्यापसव्यदा सव्यसध्रीची च सहायिनी |
सकला सागरा सारा सार्वभौमस्वरूपिणी ||90||

संतोषजननी सेव्या सर्वेशी सर्वरंजनी |
सरस्वती समाराद्या सामदा सिंधुसेविता ||91||

सम्मोहिनी सदामोहा सर्वमांगल्यदायिनी |
समस्तभुवनेशानी सर्वकामफलप्रदा ||92||

सर्वसिद्धिप्रदा साध्वी सर्वज्ञानप्रदायिनी |
सर्वदारिद्र्यशमनी सर्वदुःखविमोचनी ||93||

सर्वरोगप्रशमनी सर्वपापविमोचनी |
समदृष्टिस्समगुणा सर्वगोप्त्री सहायिनी ||94||

सामर्थ्यवाहिनि सांख्या सांद्रानंदपयोधरा |
संकीर्णमंदिरस्थाना साकेतकुलपालिनी ||95||

संहारिणी सुधारूपा साकेतपुरवासिनी |
संबोधिनी समस्तेशी सत्यज्ञानस्वरूपिणी ||96||

संपत्करी समानांगी सर्वभावसुसंस्थिता |
संध्यावंदनसुप्रीता सन्मार्गकुलपालिनी ||97||

संजीविनी सर्वमेधा सभ्या साधुसुपूजिता |
समिद्धा सामिघेनी च सामान्या सामवेदिनी ||98||

समुत्तीर्णा सदाचारा संहारा सर्वपावनी |
सर्पिणी सर्पमाता च समादानसुखप्रदा ||99||

सर्वरोगप्रशमनी सर्वज्ञत्वफलप्रदा |
संक्रमा समदा सिंधुः सर्गादिकरणक्षमा ||100||

संकटा संकटहरा सकुंकुमविलेपना |
सुमुखा सुमुखप्रीता समानाधिकवर्जिता ||101||

संस्तुता स्तुतिसुप्रीता सत्यवादी सदास्पदा |
धीकाररूपा धीमाता धीरा धीरप्रसादिनी ||102||

धीरोत्तमा धीरधीरा धीरस्था धीरशेखरा |
धृतिरूपा धनाढ्या च धनपा धनदायिनी ||103||

धीरूपा धीरवंद्या च धीप्रभा धीरमानसा |
धीगेया धीपदस्था च धीशाना धीप्रसादिनी ||104||

मकाररूपा मैत्रेया महामंगलदेवता |
मनोवैकल्यशमनी मलयाचलवासिनी ||105||

मलयध्वजराजश्रीर्मायामोहविभेदिनी |
महादेवी महारूपा महाभैरवपूजिता ||106||

मनुप्रीता मंत्रमूर्तिर्मंत्रवश्या महेश्वरी |
मत्तमातंगगमना मधुरा मेरुमंटपा ||107||

महागुप्ता महाभूता महाभयविनाशिनी |
महाशौर्या मंत्रिणी च महावैरिविनाशिनी ||108||

महालक्ष्मीर्महागौरी महिषासुरमर्दिनी |
मही च मंडलस्था च मधुरागमपूजिता ||109||

मेधा मेधाकरी मेध्या माधवी मधुमर्धिनी |
मंत्रा मंत्रमयी मान्या माया माधवमंत्रिणी ||110||

मायादूरा च मायावी मायाज्ञा मानदायिनी |
मायासंकल्पजननी मायामायविनोदिनी ||111||

माया प्रपंचशमनी मायासंहाररूपिणी |
मायामंत्रप्रसादा च मायाजनविमोहिनी ||112||

महापथा महाभोगा महविघ्नविनाशिनी |
महानुभावा मंत्राढ्या महमंगलदेवता ||113||

हिकाररूपा हृद्या च हितकार्यप्रवर्धिनी |
हेयोपाधिविनिर्मुक्ता हीनलोकविनाशिनी ||114||

ह्रींकारी ह्रीमती हृद्या ह्रीं देवी ह्रीं स्वभाविनी |
ह्रीं मंदिरा हितकरा हृष्टा च ह्रीं कुलोद्भवा ||115||

हितप्रज्ञा हितप्रीता हितकारुण्यवर्धिनी |
हितासिनी हितक्रोधा हितकर्मफलप्रदा ||116||

हिमा हैमवती हैम्नी हेमाचलनिवासिनी |
हिमागजा हितकरी हितकर्मस्वभाविनी ||117||

धीकाररूपा धिषणा धर्मरूपा धनेश्वरी |
धनुर्धरा धराधारा धर्मकर्मफलप्रदा ||118||

धर्माचारा धर्मसारा धर्ममध्यनिवासिनी |
धनुर्विद्या धनुर्वेदा धन्या धूर्तविनाशिनी ||119||

धनधान्या धेनुरूपा धनाढ्या धनदायिनी |
धनेशी धर्मनिरता धर्मराजप्रसादिनी ||120||

धर्मस्वरूपा धर्मेशी धर्माधर्मविचारिणी |
धर्मसूक्ष्मा धर्मगेहा धर्मिष्ठा धर्मगोचरा ||121||

योकाररूपा योगेशी योगस्था योगरूपिणी |
योग्या योगीशवरदा योगमार्गनिवासिनी ||122||

योगासनस्था योगेशी योगमायाविलासिनी |
योगिनी योगरक्ता च योगांगी योगविग्रहा ||123||

योगवासा योगभाग्या योगमार्गप्रदर्शिनी |
योकाररूपा योधाढ्यायोध्री योधसुतत्परा ||124||

योगिनी योगिनीसेव्या योगज्ञानप्रबोधिनी |
योगेश्वरप्राणानाथा योगीश्वरहृदिस्थिता ||125||

योगा योगक्षेमकर्त्री योगक्षेमविधायिनी |
योगराजेश्वराराध्या योगानंदस्वरूपिणी ||126||

नकाररूपा नादेशी नामपारायणप्रिया |
नवसिद्धिसमाराध्या नारायणमनोहरी ||127||

नारायणी नवाधारा नवब्रह्मार्चितांघ्रिका |
नगेंद्रतनयाराध्या नामरूपविवर्जिता ||128||

नरसिंहार्चितपदा नवबंधविमोचनी |
नवग्रहार्चितपदा नवमीपूजनप्रिया ||129||

नैमित्तिकार्थफलदा नंदितारिविनाशिनी |
नवपीठस्थिता नादा नवर्षिगणसेविता ||130||

नवसूत्राविधानज्ञा नैमिशारण्यवासिनी |
नवचंदनदिग्धांगी नवकुंकुमधारिणी ||131||

नववस्त्रपरीधाना नवरत्नविभूषणा |
नव्यभस्मविदग्धांगी नवचंद्रकलाधरा ||132||

प्रकाररूपा प्राणेशी प्राणसंरक्षणीपरा |
प्राणसंजीविनी प्राच्या प्राणिप्राणप्रबोधिनी ||133||

प्रज्ञा प्राज्ञा प्रभापुष्पा प्रतीची प्रभुदा प्रिया |
प्राचीना प्राणिचित्तस्था प्रभा प्रज्ञानरूपिणी ||134||

प्रभातकर्मसंतुष्टा प्राणायामपरायणा |
प्रायज्ञा प्रणवा प्राणा प्रवृत्तिः प्रकृतिः परा ||135||

प्रबंधा प्रथमा चैव प्रगा प्रारब्धनाशिनी |
प्रबोधनिरता प्रेक्ष्या प्रबंधा प्राणसाक्षिणी ||136||

प्रयागतीर्थनिलया प्रत्यक्षपरमेश्वरी |
प्रणवाद्यंतनिलया प्रणवादिः प्रजेश्वरी ||137||

चोकाररूपा चोरघ्नी चोरबाधाविनाशिनी |
चैतन्यचेतनस्था च चतुरा च चमत्कृतिः ||138||

चक्रवर्तिकुलाधारा चक्रिणी चक्रधारिणी |
चित्तचेया चिदानंदा चिद्रूपा चिद्विलासिनी ||139||

चिंताचित्तप्रशमनी चिंतितार्थफलप्रदा |
चांपेयी चंपकप्रीता चंडी चंडाट्टहासिनी ||140||

चंडेश्वरी चंडमाता चंडमुंडविनाशिनी |
चकोराक्षी चिरप्रीता चिकुरा चिकुरालका ||141||

चैतन्यरूपिणी चैत्री चेतना चित्तसाक्षिणी |
चित्रा चित्रविचित्रांगी चित्रगुप्तप्रसादिनी ||142||

चलना चक्रसंस्था च चांपेयी चलचित्रिणी |
चंद्रमंडलमध्यस्था चंद्रकोटिसुशीतला ||143||

चंद्रानुजसमाराध्या चंद्रा चंडमहोदरी |
चर्चितारिश्चंद्रमाता चंद्रकांता चलेश्वरी ||144||

चराचरनिवासी च चक्रपाणिसहोदरी |
दकाररूपा दत्तश्रीदारिद्र्यच्छेदकारिणी ||145||

दत्तात्रेयस्य वरदा दर्या च दीनवत्सला |
दक्षाराध्या दक्षकन्या दक्षयज्ञविनाशिनी ||146||

दक्षा दाक्षायणी दीक्षा दृष्टा दक्षवरप्रदा |
दक्षिणा दक्षिणाराध्या दक्षिणामूर्तिरूपिणी ||147||

दयावती दमस्वांता दनुजारिर्दयानिधिः |
दंतशोभनिभा देवी दमना दाडिमस्तना ||148||

दंडा च दमयत्री च दंडिनी दमनप्रिया |
दंडकारण्यनिलया दंडकारिविनाशिनी ||149||

दंष्ट्राकरालवदना दंडशोभा दरोदरी |
दरिद्रारिष्टशमनी दम्या दमनपूजिता ||150||

दानवार्चित पादश्रीर्द्रविणा द्राविणी दया |
दामोदरी दानवारिर्दामोदरसहोदरी ||151||

दात्री दानप्रिया दाम्नी दानश्रीर्द्विजवंदिता |
दंतिगा दंडिनी दूर्वा दधिदुग्धस्वरूपिणी ||152||

दाडिमीबीजसंदोहा दंतपंक्तिविराजिता |
दर्पणा दर्पणस्वच्छा द्रुममंडलवासिनी ||153||

दशावतारजननी दशदिग्दैवपूजिता |
दमा दशदिशा दृश्या दशदासी दयानिधिः ||154||

देशकालपरिज्ञाना देशकालविशोधिनी |
दशम्यादिकलाराध्या दशकालविरोधिनी |
दशम्यादिकलाराध्य दशग्रीवविरोधिनी ||155||

दशापराधशमनी दशवृत्तिफलप्रदा |
यात्काररूपिणी याज्ञी यादवी यादवार्चिता ||156||

ययातिपूजनप्रीता याज्ञिकी याजकप्रिया |
यजमाना यदुप्रीता यामपूजाफलप्रदा ||157||

यशस्विनी यमाराध्या यमकन्या यतीश्वरी |
यमादियोगसंतुष्टा योगींद्रहृदया यमा ||158||

यमोपाधिविनिर्मुक्ता यशस्यविधिसन्नुता |
यवीयसी युवप्रीता यात्रानंदा यतीश्वरी ||159||

योगप्रिया योगगम्या योगध्येया यथेच्छगा |
योगप्रिया यज्ञसेनी योगरूपा यथेष्टदा ||160 ||इति श्रीगायत्री दिव्यसहस्रनामस्तोत्रं संपूर्णं||

अर्थ

श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रं गायत्री देवी के हज़ार नामों का एक दिव्य स्तुतिगान है। यह स्तोत्र देवी के अनगिनत रूपों, शक्तियों और महिमाओं का गुणगान करता है। स्तोत्र का आरंभ "ध्यानम्" श्लोक से होता है, जिसमें देवी के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है – जो रक्त, श्वेत, हिरण्य, नील और धवल वर्णों से युक्त हैं, त्रिनेत्री हैं, विभिन्न आभूषणों से सुशोभित हैं, कमलासन पर विराजमान हैं और हंस पर आरूढ़ हैं। यह स्तोत्र केवल नामों का संग्रह नहीं, बल्कि देवी के संपूर्ण स्वरूप को समझने का एक गहन मार्ग है।

गायत्री देवी वेदों का सार हैं, समस्त ज्ञान का उद्गम हैं और परब्रह्म स्वरूपिणी हैं। यह सहस्रनाम देवी के ज्ञानमय स्वरूप, सृष्टि, स्थिति और लय की शक्ति, तथा भक्तों की संरक्षिका के गुणों को उजागर करता है। प्रत्येक नाम देवी के एक विशिष्ट गुण, कार्य या शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। यह देवी की सर्वव्यापकता को दर्शाता है, कि वे कैसे समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त हैं। "तत्काररूपा", "तत्त्वज्ञा", "तत्पदार्थस्वरूपिणी" जैसे नाम यह उद्घोषित करते हैं कि देवी परम सत्य से अभिन्न हैं और समस्त तत्त्वों का ज्ञान उन्हीं से प्रवाहित होता है।

यह स्तोत्र केवल देवी की महिमा का गान नहीं है, बल्कि इसमें मंत्रशास्त्रीय नियम, न्यास-आवाहन विधियाँ और पाठ के विधान भी सुझाए गए हैं। देवी के नाम उनके विभिन्न आयामों को प्रकट करते हैं – "सावित्री" (सृष्टि की शक्ति), "सरस्वती" (ज्ञान और वाणी की शक्ति), "लक्ष्मी" (समृद्धि और ऐश्वर्य), "दुर्गा" (रक्षण शक्ति) आदि। यह बताता है कि देवी कैसे भक्तों को पापों से मुक्ति, स्वास्थ्य, संतान, विजय और अंततः मोक्ष प्रदान करती हैं। "तपस्स्वाध्यायनिरता", "तपस्विजननन्नुता" जैसे नाम दर्शाते हैं कि देवी तपस्वियों द्वारा पूजित हैं और तपस्या का मूल स्रोत हैं।

श्री गायत्री सहस्रनाम भक्ति, ज्ञान और यज्ञफल प्रदान करने वाला एक मंत्रमय साधना मार्ग है। शुद्ध मन, गुरु के मार्गदर्शन और निरंतर पाठ से साधक आध्यात्मिक उन्नति, शारीरिक और मानसिक सुरक्षा तथा जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। यह गृहस्थों और संन्यासियों दोनों के लिए उपयुक्त है, और सही अनुष्ठानों, आंतरिक ध्यान तथा नियमित जप पर जोर देता है।

प्रयोजन (Benefits):

  • पाप मुक्ति: स्तोत्र के नियमित पाठ से पूर्वजन्म के और इस जन्म के पापों का नाश होता है, जिससे आत्मा शुद्ध होती है।
  • ज्ञान वृद्धि: गायत्री देवी ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं, अतः इस स्तोत्र का पाठ बुद्धि, विवेक और आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि करता है।
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा: देवी की कृपा से रोग दूर होते हैं और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है। साथ ही, सभी आपदाओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलती है।
  • समृद्धि और सफलता: गायत्री देवी के आशीर्वाद से जीवन में समृद्धि, संतान सुख और सभी कार्यों में विजय प्राप्त होती है।
  • मोक्ष प्राप्ति: अंततः, भक्ति और श्रद्धा से पाठ करने वाले साधकों के लिए आध्यात्मिक उत्थान और मोक्ष का मार्ग सुगम होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रं क्या है?
श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रं गायत्री देवी के हज़ार दिव्य नामों का एक स्तुतिगान है। यह देवी के विभिन्न रूपों, शक्तियों और गुणों का विस्तार से वर्णन करता है, भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप को समझने में मदद करता है।
श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन से करना उत्तम माना जाता है। गुरु के मार्गदर्शन में, सही उच्चारण और ध्यान के साथ पाठ करने से सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त होते हैं।
श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्र के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से पापों से मुक्ति, ज्ञान में वृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, सभी आपदाओं से रक्षा, समृद्धि और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। अंततः यह आध्यात्मिक उत्थान और मोक्ष के मार्ग को सुगम बनाता है।
श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
गृहस्थ और संन्यासी दोनों इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। किसी भी जाति, लिंग या आयु का व्यक्ति, शुद्ध भक्ति और श्रद्धा के साथ इसका पाठ कर सकता है।
श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः, प्रतिदिन एक बार पाठ करना शुभ माना जाता है। विशेष संकल्पों के लिए 11, 21, 108 बार या गुरु के निर्देशानुसार पाठ किया जा सकता है।
श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्र का उद्गम या स्रोत क्या है?
यह स्तोत्र हिंदू धर्म के पुराणों और आगम ग्रंथों में पाया जाता है। यह प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा रचित है और गायत्री देवी की महिमा का बखान करता है।

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