गा

श्री गायत्री अष्टोत्तर शतनामावळिः

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अष्टोत्तर108 नाम
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  1. ॐ श्री गायत्रै नमः 
  2. ॐ जगन्मात्रे नमः
  3. ॐ परब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः
  4. ॐ परमार्थप्रदायै नमः
  5. ॐ जप्यायै नमः
  6. ॐ ब्रह्मतेजोविवर्थिन्यै नमः
  7. ॐ ब्रह्मास्त्ररूपिण्यै नमः
  8. ॐ भव्यायै नमः
  9. ॐ त्रिकालध्येयरूपिण्यै नमः
  10. ॐ त्रिमूर्तिरूपायै नमः
  11. ॐ सर्वज्ञायै नमः
  12. ॐ वेदमात्रे नमः
  13. ॐ मनोन्मन्यै नमः
  14. ॐ बालिकायै नमः
  15. ॐ तरुण्यै नमः
  16. ॐ वृद्धायै नमः
  17. ॐ सूर्यमंडलवासिन्यै नमः
  18. ॐ मंदेहदानवध्वंसकारिण्यै नमः
  19. ॐ सर्वकारणायै नमः
  20. ॐ हंसारूढायै नमः
  21. ॐ वृषारूढायै नमः
  22. ॐ गरुडारोहिण्यै नमः
  23. ॐ शुभायै नमः
  24. ॐ षट्कुक्षिण्यै नमः
  25. ॐ त्रिपादायै नमः
  26. ॐ शुद्धायै नमः
  27. ॐ पंचशीर्षायै नमः
  28. ॐ त्रिलोचनायै नमः
  29. ॐ त्रिवेदरूपायै नमः
  30. ॐ त्रिविधायै नमः
  31. ॐ त्रिवर्गफलदायिन्यै नमः
  32. ॐ दशहस्तायै नमः
  33. ॐ चंद्रवर्णायै नमः
  34. ॐ विश्वामित्रवरप्रदायै नमः
  35. ॐ दशायुधधरायै नमः
  36. ॐ नित्यायै नमः
  37. ॐ संतुष्टायै नमः
  38. ॐ ब्रह्मपूजितायै नमः
  39. ॐ आदिशक्त्यै नमः
  40. ॐ महाविद्यायै नमः
  41. ॐ सुषुम्नाभायै नमः
  42. ॐ सरस्वत्यै नमः
  43. ॐ चतुर्विंशत्यक्षराढ्यायै नमः
  44. ॐ सावित्र्यै नमः
  45.  सत्यवत्सलायै नमः
  46. ॐ संध्यायै नमः
  47. ॐ रात्र्यै नमः
  48. ॐ संध्यारात्रिप्रभाताख्यायै नमः
  49. ॐ सांख्यायनकुलोद्भवायै नमः
  50. ॐ सर्वेश्वर्यै नमः
  51. ॐ सर्वविद्यायै नमः
  52. ॐ सर्वमंत्र्याद्यै नमः
  53. ॐ अव्यायै नमः
  54. ॐ शुद्धवस्त्रायै नमः
  55. ॐ शुद्धविद्यायै नमः
  56. ॐ शुक्लमाल्यानुलेपनायै नमः
  57. ॐ सुरसिंधुसमायै नमः
  58. ॐ सौम्यायै नमः
  59. ॐ ब्रह्मलोकनिवासिन्यै नमः
  60. ॐ प्रणवप्रतिपाद्यार्थायै नमः
  61. ॐ प्रणतोद्धरणक्षमायै नमः
  62. ॐ जलांजलि सुसंतुष्टायै नमः
  63. ॐ जलगर्भायै नमः
  64. ॐ जलप्रियायै नमः
  65. ॐ स्वाहायै नमः
  66. ॐ स्वधायै नमः
  67. ॐ सुधासंस्थायै नमः
  68. ॐ श्रौषड्वौषटड्वषट्र्कियायै नमः
  69. ॐ सुरभ्यै नमः
  70. ॐ षोडशकलायै नमः
  71. ॐ मुनिबृंदनिषेवितायै नमः
  72. ॐ यज्ञप्रियायै नमः
  73. ॐ यज्ञमूर्त्यै नमः
  74. ॐ स्रुक्स्रुवाज्यस्वरूपिण्यै नमः
  75. ॐ अक्षमालाधरायै नमः
  76. ॐ अक्षमालासंस्थायै नमः
  77. ॐ अक्षराकृत्यै नमः
  78. ॐ मदुच्छंद ऋषिप्रीतायै नमः
  79. ॐ स्वच्छंदायै नमः
  80. ॐ छंदसांनिध्यै नमः
  81. ॐ अंगुळीपर्वसंस्थानायै नमः
  82. ॐ चतुर्विंशतिमुद्रिकायै नमः
  83. ॐ ब्रह्ममूर्त्यै नमः
  84. ॐ रुद्रशिखरायै नमः
  85. ॐ सहस्रपरमायै नमः
  86. ॐ अंबिकायै नमः
  87. ॐ विष्णुहृदयायै नमः
  88. ॐ अग्निमुख्यै नमः
  89. ॐ शतमध्यायै नमः
  90. ॐ शतावरायै नमः
  91. ॐ सहस्रदळपद्मस्थायै नमः
  92. ॐ हंसरूपायै नमः
  93. ॐ निरंजनायै नमः
  94. ॐ चराचरस्थायै नमः
  95. ॐ चतुरायै नमः
  96. ॐ सूर्यकोटिसमप्रभायै नमः
  97. ॐ पंचवर्णमुख्यै नमः
  98. ॐ धात्र्यै नमः
  99. ॐ चंद्रकोटिशुचिस्मितायै नमः
  100. ॐ महामायायै नमः
  101. ॐ विचित्रांग्यै नमः
  102. ॐ मायाबीजनिवासिन्यै नमः
  103. ॐ सर्वयंत्रात्मिकायै नमः
  104. ॐ सर्वतंत्रस्वरूपायै नमः
  105. ॐ जगद्धितायै नमः
  106. ॐ मर्यादापालिकायै नमः
  107. ॐ मान्यायै नमः
  108. ॐ महामंत्रफलप्रदायै नमः

|| इति श्री गायत्री अशोत्तर शतनामावळि समाप्तं ||
 

अर्थ

श्री गायत्री अष्टोत्तर शतनामावली गायत्री देवी के 108 पवित्र नामों का एक स्तोत्र है। यह नामावली वेदमाता गायत्री देवी के अनंत रूपों, असीम शक्तियों और दिव्य गुणों की स्तुति करती है। गायत्री मंत्र के समान ही शक्तिशाली यह नामावली, भक्तों को गायत्री देवी की निकटता का अनुभव कराने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रत्येक नाम देवी के एक विशिष्ट गुण, सिद्धि या रूप का प्रतिनिधित्व करता है, जो देवी की सर्वव्यापकता और सर्वोच्च स्थान को दर्शाता है।

गायत्री देवी सृष्टि, स्थिति और संहार की मूलभूत शक्ति हैं। वे त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) की शक्ति स्वरूपिणी हैं। इस नामावली का पाठ केवल स्तुति मात्र नहीं, बल्कि देवी के प्रत्येक पहलू का गहराई से ध्यान करने में सहायक होता है। गायत्री देवी ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं, और उनका स्मरण करने से बुद्धि, विवेक और आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि होती है। इस नामावली के माध्यम से देवी की आराधना करने से मन शुद्ध होता है, शरीर में शक्ति आती है और आत्मा को शांति मिलती है।

नामावली का प्रारंभ 'ॐ श्री गायत्र्यै नमः' से होता है, जिसमें देवी को प्रणाम किया जाता है। फिर 'ॐ जगन्मात्रे नमः' (समस्त जगत् की माता को नमस्कार), 'ॐ परब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः' (परब्रह्म के स्वरूप वाली को नमस्कार), 'ॐ वेदमात्रे नमः' (वेदों की माता को नमस्कार) जैसे नाम देवी के सर्वोच्च स्थान और उनके मूलभूत स्वरूप को उजागर करते हैं। 'ॐ त्रिकालध्येयरूपिण्यै नमः' का अर्थ है जो भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों में ध्यान करने योग्य हैं। 'ॐ सूर्यमंडलवासिन्यै नमः' अर्थात सूर्यमंडल में निवास करने वाली, जो जगत् को प्रकाश देने वाले सूर्य की शक्ति हैं। 'ॐ मंदेहदानवध्वंसकारिण्यै नमः' यह दर्शाता है कि देवी दुष्ट शक्तियों का संहार करके धर्म की रक्षा करती हैं।

'ॐ हंसारूढायै नमः, ॐ वृषारूढायै नमः, ॐ गरुडारोहिण्यै नमः' ये नाम देवी की ब्रह्मा, शिव और विष्णु रूपों में प्रकट होने की शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो उनके वाहनों पर आरूढ़ होकर लोक कल्याण करती हैं। 'ॐ षट्कुक्षिण्यै नमः, ॐ पंचशीर्षायै नमः, ॐ दशहस्तायै नमः' जैसे वर्णन देवी के विराट स्वरूप और उनकी असीम शक्ति का दर्शन कराते हैं। दस हाथों में विभिन्न आयुध धारण किए हुए, समस्त ज्ञान और शक्तियों के मूल के रूप में देवी प्रकट होती हैं। 'ॐ विश्वामित्रवरप्रदायै नमः' महर्षि विश्वामित्र को वरदान देकर अनुग्रहित करने वाली देवी के करुणामयी स्वभाव की याद दिलाता है। यह नामावली गायत्री देवी के सौंदर्य, शक्ति, ज्ञान और करुणा का संगम है।

इन 108 नामों का पाठ भक्तों को दिव्य अनुभव प्रदान करता है। प्रत्येक नाम का उच्चारण देवी की शक्ति के एक अंश का आह्वान करता है। यह मन की एकाग्रता को बढ़ाता है और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है। निरंतर पाठ से मन के विकार दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति प्रदान करता है और अंततः मोक्ष की ओर मार्गदर्शन करता है।

लाभ (Benefits):

  • आध्यात्मिक ज्ञान और विवेक में वृद्धि: इस नामावली के पाठ से गायत्री देवी की कृपा से बुद्धि शुद्ध होती है, ज्ञान और विवेक बढ़ता है, जिससे सत्य की समझ आती है।
  • समस्त दोषों का निवारण और सुरक्षा: निरंतर पाठ नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है, मन के भय और चिंताओं को दूर करता है, और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
  • मानसिक शांति और एकाग्रता: गायत्री देवी के नामों का जप करने से मन शांत होता है, एकाग्रता बढ़ती है और आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल वातावरण बनता है।
  • स्वास्थ्य और समृद्धि: देवी के आशीर्वाद से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
  • शिक्षा और ज्ञान की वृद्धि: विद्यार्थियों के लिए बेहतर एकाग्रता, स्मरण शक्ति और परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए यह नामावली अत्यंत लाभकारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री गायत्री अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
यह वेदमाता गायत्री देवी के 108 पवित्र नामों का एक स्तोत्र है। यह नामावली देवी के विभिन्न रूपों, शक्तियों और दिव्य गुणों की स्तुति करती है।
इसका पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध होकर, सूर्योदय के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। देवी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर, एकाग्रता से पाठ करें।
इसके पाठ के क्या लाभ हैं?
इसके पाठ से आध्यात्मिक ज्ञान, विवेक, मानसिक शांति, एकाग्रता और सभी दोषों से रक्षा प्राप्त होती है। यह स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए भी लाभकारी है।
इसका पाठ किसे करना चाहिए?
लिंग, आयु या जाति के भेद के बिना कोई भी इस नामावली का पाठ कर सकता है। विशेष रूप से ज्ञान, बुद्धि और आध्यात्मिक प्रगति की इच्छा रखने वालों को इसका पाठ करना चाहिए।
इसका पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः दिन में एक बार पूरी नामावली का पाठ करना उत्तम है। विशेष अवसरों पर या अधिक फल के लिए 11, 21, या 108 बार पाठ किया जा सकता है।
इसका उद्भव कहाँ से हुआ है?
श्री गायत्री अष्टोत्तर शतनामावली विभिन्न पुराणों और तंत्र ग्रंथों से चुने गए गायत्री देवी के दिव्य नामों का संग्रह है। इसका मूल वेदों की मूल देवी गायत्री की महिमा में निहित है।

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