1। ॐ श्रीं आदिलक्ष्म्यै नमः
2। ॐ श्रीं अकारायै नमः
3। ॐ श्रीं अव्ययायै नमः
4। ॐ श्रीं अच्युतायै नमः
5। ॐ श्रीं आनंदायै नमः
6। ॐ श्रीं अर्चितायै नमः
7। ॐ श्रीं अनुग्रहायै नमः
8। ॐ श्रीं अमृतायै नमः
9। ॐ श्रीं अनंतायै नमः
10। ॐ श्रीं इष्टप्राप्त्यै नमः
11। ॐ श्रीं ईश्वर्यै नमः
12। ॐ श्रीं कर्त्र्यै नमः
13। ॐ श्रीं कांतायै नमः
14। ॐ श्रीं कलायै नमः
15। ॐ श्रीं कल्याण्यै नमः
16। ॐ श्रीं कपर्दिन्यै नमः
17। ॐ श्रीं कमलायै नमः
18। ॐ श्रीं कांतिवर्धिन्यै नमः
19। ॐ श्रीं कुमार्यै नमः
20। ॐ श्रीं कामाक्ष्यै नमः
21। ॐ श्रीं कीर्तिलक्ष्म्यै नमः
22। ॐ श्रीं गंधिन्यै नमः
23। ॐ श्रीं गजारूढायै नमः
24। ॐ श्रीं गंभीरवदनायै नमः
25। ॐ श्रीं चक्रहासिन्यै नमः
26। ॐ श्रीं चक्रायै नमः
27। ॐ श्रीं ज्योतिलक्ष्म्यै नमः
28। ॐ श्रीं जयलक्ष्म्यै नमः
29। ॐ श्रीं ज्येष्ठायै नमः
30। ॐ श्रीीं जगज्जनन्यै नमः
31। ॐ श्रीं जागृतायै नमः
32। ॐ श्रीं त्रिगुणायै नमः
33। ॐ श्रीं त्र्यैलोक्यमोहिन्यै नमः
34। ॐ श्रीं त्र्यैलोक्यपूजितायै नमः
35। ॐ श्रीं नानारूपिण्यै नमः
36। ॐ श्रीं निखिलायै नमः
37। ॐ श्रीं नारायण्यै नमः
38। ॐ श्रीं पद्माक्ष्यै नमः
39। ॐ श्रीं परमायै नमः
40। ॐ श्रीं प्राणायै नमः
41। ॐ श्रीं प्रधानायै नमः
42। ॐ श्रीं प्राणशक्त्यै नमः
43। ॐ श्रीं ब्रह्माण्यै नमः
44। ॐ श्रीं भाग्यलक्ष्म्यै नमः
45। ॐ श्रीं भूदेव्यै नमः
46। ॐ श्रीं बहुरूपायै नमः
47। ॐ श्रीं भद्रकाल्यै नमः
48। ॐ श्रीं भीमायै नमः
49। ॐ श्रीं भैरव्यै नमः
50। ॐ श्रीं भोगलक्ष्म्यै नमः
51। ॐ श्रीं भूलक्ष्म्यै नमः
52। ॐ श्रीं महाश्रियै नमः
53। ॐ श्रीं माधव्यै नमः
54। ॐ श्रीं मात्रे नमः
55। ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
56। ॐ श्रीं महावीरायै नमः
57। ॐ श्रीं महाशक्त्यै नमः
58। ॐ श्रीं मालाश्रियै नमः
59। ॐ श्रीं राज्ञ्यै नमः
60। ॐ श्रीं रमायै नमः
61। ॐ श्रीं राज्यलक्ष्म्यै नमः
62। ॐ श्रीं रमणीयायै नमः
63। ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः
64। ॐ श्रीं लाक्षितायै नमः
65। ॐ श्रीं लेखिन्यै नमः
66। ॐ श्रीं विजयलक्ष्म्यै नमः
67। ॐ श्रीं विश्वरूपिण्यै नमः
68। ॐ श्रीं विश्वाश्रयायै नमः
69। ॐ श्रीं विशालाक्ष्यै नमः
70। ॐ श्रीं व्यापिन्यै नमः
71। ॐ श्रीं वेदिन्यै नमः
72। ॐ श्रीं वारिधये नमः
73। ॐ श्रीं व्याघ्र्यै नमः
74। ॐ श्रीं वाराह्यै नमः
75। ॐ श्रीं वैनायक्यै नमः
76। ॐ श्रीं वरारोहायै नमः
77। ॐ श्रीं वैशारद्यै नमः
78। ॐ श्रीं शुभायै नमः
79। ॐ श्रीं शाकंभर्यै नमः
80। ॐ श्रीं श्रीकांतायै नमः
81। ॐ श्रीं कालायै नमः
82। ॐ श्रीं शरण्यै नमः
83। ॐ श्रीं श्रुतये नमः
84। ॐ श्रीं स्वप्नदुर्गायै नमः
85। ॐ श्रीं सुर्यचंद्राग्निनेत्रत्रयायै नमः
86। ॐ श्रीं सिंहगायै नमः
87। ॐ श्रीं सर्वदीपिकायै नमः
88। ॐ श्रीं स्थिरायै नमः
89। ॐ श्रीं सर्वसंपत्तिरूपिण्यै नमः
90। ॐ श्रीं स्वामिन्यै नमः
91। ॐ श्रीं सितायै नमः
92। ॐ श्रीं सूक्ष्मायै नमः
93। ॐ श्रीं सर्वसंपन्नायै नमः
94। ॐ श्रीं हंसिन्यै नमः
95। ॐ श्रीं हर्षप्रदायै नमः
96। ॐ श्रीं हंसगायै नमः
97। ॐ श्रीं हरिसूतायै नमः
98। ॐ श्रीं हर्षप्राधान्यै नमः
99। ॐ श्रीं हरित्पतये नमः
100। ॐ श्रीं सर्वज्ञानायै नमः
101। ॐ श्रीं सर्वजनन्यै नमः
102। ॐ श्रीं मुखफलप्रदायै नमः
103। ॐ श्रीं महारूपायै नमः
104। ॐ श्रीं श्रीकर्यै नमः
105। ॐ श्रीं श्रेयसे नमः
106। ॐ श्रीं श्रीचक्रमध्यगायै नमः
107। ॐ श्रीं श्रीकारिण्यै नमः
108। ॐ श्रीं क्षमायै नमः
इति श्री आदिलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलिः संपूर्णं
अर्थ
श्री आदिलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलिः देवी आदिलक्ष्मी के 108 पवित्र नामों का एक दिव्य संग्रह है। आदिलक्ष्मी को सृष्टि की मूल शक्ति, सभी धन-संपत्ति का स्रोत, जीवन शक्ति और ब्रह्मांड का पालन करने वाली महादेवी के रूप में पूजा जाता है। यह नामावलि देवी के अनंत गुणों, उनकी दिव्य शक्तियों और भक्तों के प्रति उनकी असीम करुणा को उजागर करती है। प्रत्येक नाम देवी के एक विशिष्ट दिव्य स्वरूप, गुण या लीला को दर्शाता है, जिससे भक्तों को उन्हें गहराई से समझने में मदद मिलती है।
इस अष्टोत्तरशतनामावलि का पाठ केवल देवी के नाम का स्मरण नहीं है, बल्कि उनकी दिव्य शक्ति से जुड़ने का एक शक्तिशाली आध्यात्मिक साधन भी है। ऐसा माना जाता है कि इन नामों में निहित प्रत्येक अक्षर में बीज मंत्र की शक्ति होती है। आदिलक्ष्मी सभी प्रकार के धन, समृद्धि, सौभाग्य और आध्यात्मिक ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं, और इस नामावलि के माध्यम से उनकी पूजा करने से जीवन में संतुलन, शांति और समृद्धि आती है। यह हमारे मन को शुद्ध करता है, नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है और सकारात्मक कंपन को आकर्षित करता है।
इस नामावलि में प्रत्येक नाम आदिलक्ष्मी की संप्रभुता, उनके अनंत रूपों और उनकी पालन शक्ति का वर्णन करता है। 'ॐ श्रीं आदिलक्ष्म्यै नमः' जैसे पहले नाम से ही देवी के मूल स्वरूप की स्तुति की जाती है। वह अकार रूप में, अव्यय के रूप में, अच्युत के रूप में, आनंद स्वरूपिणी के रूप में, अमृत प्रदान करने वाली के रूप में, अनंत रूप में भक्तों की इच्छाओं को पूरा करने वाली के रूप में, और ईश्वरी के रूप में प्रकट होती हैं। इस प्रकार, प्रत्येक नाम देवी के दिव्य गुणों, उनके मातृत्व, उनकी सुरक्षात्मक शक्ति और धन प्रदान करने की उनकी क्षमता को स्पष्ट करता है। इन नामों का भक्तिपूर्वक जाप करने से भक्तों के हृदय में देवी के प्रति प्रेम बढ़ता है और वे उनकी कृपा के पात्र बनते हैं।
संक्षेप में, श्री आदिलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलिः केवल एक स्तोत्र नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक और लौकिक दोनों प्रकार की समृद्धि प्राप्त करने का एक पवित्र मार्ग है। ये नाम भक्तों के हृदय को शुद्ध करते हैं और देवी लक्ष्मी की प्रत्यक्ष कृपा को आकर्षित करते हैं। यह जीवन से गरीबी, भय और बीमारी को दूर करने में सहायता करता है। नियमित पाठ बाधाओं को दूर करता है, निरंतर समृद्धि लाता है और भक्त के जीवन को दिव्य कृपा से स्थिर करता है। यह भक्तों को आंतरिक शांति, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक प्रगति प्रदान करता है।
लाभ (Benefits):
- समृद्धि और धन: आदिलक्ष्मी सभी ऐश्वर्यों की देवी हैं, इसलिए इस नामावलि का नियमित पाठ आर्थिक स्थिरता, समृद्धि और नए अवसर लाता है।
- आध्यात्मिक विकास: देवी के नाम का स्मरण मन को शुद्ध करता है, आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ाता है और आंतरिक शांति प्रदान करता है।
- बाधाओं का निवारण: भक्तिपूर्वक इस नामावलि का पाठ करने से जीवन में आने वाली बाधाएं, नकारात्मक ऊर्जाएं और दुर्भाग्य दूर होते हैं।
- पारिवारिक कल्याण और सौभाग्य: यह घर में शांति, सद्भाव और खुशी लाता है, तथा परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य और कल्याण की रक्षा करता है।
- सुरक्षा और निर्भयता: आदिलक्ष्मी की सुरक्षात्मक शक्ति भक्तों को सभी प्रकार के खतरों और भयों से मुक्त करती है, और सुरक्षा की भावना प्रदान करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री आदिलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलिः क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री आदिलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलि का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
कौन इस नामावलि का पाठ कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री आदिलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावलि का उद्गम क्या है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
