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श्री शिव पंचाक्षर नक्षत्रमाला स्तोत्रं

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श्री शिव पंचाक्षर नक्षत्रमाला स्तोत्रं

श्रीमदात्मने गुणैकसिंधवे नमः शिवाय
धामलेशधूतकोकबंधवे नमः शिवाय |
नामशेषितानमद्भवांधवे नमः शिवाय
पामरेतरप्रधानबंधवे नमः शिवाय || 1 ||

कालभीतविप्रबालपाल ते नमः शिवाय
शूलभिन्नदुष्टदक्षफाल ते नमः शिवाय |
मूलकारणाय कालकाल ते नमः शिवाय
पालयाधुना दयालवाल ते नमः शिवाय || 2 ||

इष्टवस्तुमुख्यदानहेतवे नमः शिवाय
दुष्टदैत्यवंशधूमकेतवे नमः शिवाय |
सृष्टिरक्षणाय धर्मसेतवे नमः शिवाय
अष्टमूर्तये वृषेंद्रकेतवे नमः शिवाय || 3 ||

आपदद्रिभेदटंकहस्त ते नमः शिवाय
पापहारिदिव्यसिंधुमस्त ते नमः शिवाय |
पापदारिणे लसन्नमस्त ते नमः शिवाय
शापदोषखंडनप्रशस्त ते नमः शिवाय || 4 ||

व्योमकेश दिव्यभव्यरूप ते नमः शिवाय
हेममेदिनीधरेंद्रचाप ते नमः शिवाय |
नाममात्रदग्धसर्वपाप ते नमः शिवाय
कामनैकतानहृद्दुराप ते नमः शिवाय || 5 ||

ब्रह्ममस्तकावलीनिबद्ध ते नमः शिवाय
जिह्मगेंद्रकुंडलप्रसिद्ध ते नमः शिवाय |
ब्रह्मणे प्रणीतवेदपद्धते नमः शिवाय
जिह्मकालदेहदत्तपद्धते नमः शिवाय || 6 ||

कामनाशनाय शुद्धकर्मणे नमः शिवाय
सामगानजायमानशर्मणे नमः शिवाय |
हेमकांतिचाकचक्यवर्मणे नमः शिवाय
सामजासुरांगलब्धचर्मणे नमः शिवाय || 7 ||

जन्ममृत्युघोरदुःखहारिणे नमः शिवाय
चिन्मयैकरूपदेहधारिणे नमः शिवाय |
मन्मनोरथावपूर्तिकारिणे नमः शिवाय
सन्मनोगताय कामवैरिणे नमः शिवाय || 8 ||

यक्षराजबंधवे दयालवे नमः शिवाय
दक्षपाणिशोभिकांचनालवे नमः शिवाय |
पक्षिराजवाहहृच्छयालवे नमः शिवाय
अक्षिफालवेदपूततालवे नमः शिवाय || 9 ||

दक्षहस्तनिष्ठजातवेदसे नमः शिवाय
अक्षरात्मने नमद्बिडौजसे नमः शिवाय |
दीक्षितप्रकाशितात्मतेजसे नमः शिवाय
उक्षराजवाह ते सतां गते नमः शिवाय || 10 ||

राजताचलेंद्रसानुवासिने नमः शिवाय
राजमाननित्यमंदहासिने नमः शिवाय |
राजकोरकावतंसभासिने नमः शिवाय
राजराजमित्रताप्रकाशिने नमः शिवाय || 11 ||

दीनमानवालिकामधेनवे नमः शिवाय
सूनबाणदाहकृत्कृशानवे नमः शिवाय |
स्वानुरागभक्तरत्नसानवे नमः शिवाय
दानवांधकारचंडभानवे नमः शिवाय || 12 ||

सर्वमंगळाकुचाग्रशायिने नमः शिवाय
सर्वदेवतागणातिशायिने नमः शिवाय |
पूर्वदेवनाशसंविधायिने नमः शिवाय
सर्वमन्मनोजभंगदायिने नमः शिवाय || 13 ||

स्तोकभक्तितोऽपि भक्तपोषिणे नमः शिवाय
माकरंदसारवर्षिभाषिणे नमः शिवाय |
एकबिल्वदानतोऽपि तोषिणे नमः शिवाय
नैकजन्मपापजालशोषिणे नमः शिवाय || 14 ||

सर्वजीवरक्षणैकशीलिने नमः शिवाय
पार्वतीप्रियाय भक्तपालिने नमः शिवाय |
दुर्विदग्धदैत्यसैन्यदारिणे नमः शिवाय
शर्वरीशधारिणे कपालिने नमः शिवाय || 15 ||

पाहि मामुमामनोज्ञ देह ते नमः शिवाय
देहि मे वरं सिताद्रिगेह ते नमः शिवाय |
मोहितर्षिकामिनीसमूह ते नमः शिवाय
स्वेहितप्रसन्न कामदोह ते नमः शिवाय || 16 ||

मंगळप्रदाय गोतुरंग ते नमः शिवाय
गंगया तरंगितोत्तमांग ते नमः शिवाय |
संगरप्रवृत्तवैरिभंग ते नमः शिवाय
अंगजारये करेकुरंग ते नमः शिवाय || 17 ||

ईहितक्षणप्रदानहेतवे नमः शिवाय
आहिताग्निपालकोक्षकेतवे नमः शिवाय |
देहकांतिधूतरौप्यधातवे नमः शिवाय
गेहदुःखपुंजधूमकेतवे नमः शिवाय || 18 ||

त्र्यक्ष दीनसत्कृपाकटाक्ष ते नमः शिवाय
दक्षसप्ततंतुनाशदक्ष ते नमः शिवाय |
ऋक्षराजभानुपावकाक्ष ते नमः शिवाय
रक्ष मां प्रपन्नमात्ररक्ष ते नमः शिवाय || 19 ||

न्यंकुपाणये शिवंकराय ते नमः शिवाय
संकटाब्धितीर्णकिंकराय ते नमः शिवाय |
पंकभीषिताभयंकराय ते नमः शिवाय
पंकजासनाय शंकराय ते नमः शिवाय || 20 ||

कर्मपाशनाश नीलकंठ ते नमः शिवाय
शर्मदाय नर्यभस्मकंठ ते नमः शिवाय |
निर्ममर्षिसेवितोपकंठ ते नमः शिवाय
कुर्महे नतीर्नमद्विकुंठ ते नमः शिवाय || 21 ||

विष्टपाधिपाय नम्रविष्णवे नमः शिवाय
शिष्टविप्रहृद्गुहाचरिष्णवे नमः शिवाय |
इष्टवस्तुनित्यतुष्टजिष्णवे नमः शिवाय
कष्टनाशनाय लोकजिष्णवे नमः शिवाय || 22 ||

अप्रमेयदिव्यसुप्रभाव ते नमः शिवाय
सत्प्रपन्नरक्षणस्वभाव ते नमः शिवाय |
स्वप्रकाश निस्तुलानुभाव ते नमः शिवाय
विप्रडिंभदर्शितार्द्रभाव ते नमः शिवाय || 23 ||

सेवकाय मे मृड प्रसीद ते नमः शिवाय
भावलभ्यतावकप्रसाद ते नमः शिवाय |
पावकाक्ष देवपूज्यपाद ते नमः शिवाय
तवकांघ्रिभक्तदत्तमोद ते नमः शिवाय || 24 ||

भुक्तिमुक्तिदिव्यभोगदायिने नमः शिवाय
शक्तिकल्पितप्रपंचभागिने नमः शिवाय |
भक्तसंकटापहारयोगिने नमः शिवाय
युक्तसन्मनःसरोजयोगिने नमः शिवाय || 25 ||

अंतकांतकाय पापहारिणे नमः शिवाय
शंतमाय दंतिचर्मधारिणे नमः शिवाय |
संतताश्रितव्यथाविदारिणे नमः शिवाय
जंतुजातनित्यसौख्यकारिणे नमः शिवाय || 26 ||

शूलिने नमो नमः कपालिने नमः शिवाय
पालिने विरिंचिमुंडमालिने नमः शिवाय |
लीलिने विशेषरुंडमालिने नमः शिवाय
शीलिने नमः प्रपुण्यशालिने नमः शिवाय || 27 ||

शिवपंचाक्षरमुद्रां चतुष्पदोल्लासपद्यमणि घटितां |
नक्षत्रमालिकामिह दधदुपकंठं नरो भवेत्सोमः || 28 ||

इति श्रीमच्छंकराचार्य कृतं श्री शिव पंचाक्षरनक्षत्रमाला स्तोत्रं ||

अर्थ

“श्री शिव पंचाक्षर नक्षत्रमाला स्तोत्रं” आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत दिव्य स्तोत्र है, जो पंचाक्षर मंत्र “नमः शिवाय” की महिमा का नक्षत्रों की माला के समान क्रमबद्ध वर्णन करता है। प्रत्येक श्लोक शिव के एक विशेष गुण, रूप, लीला, शक्ति या रक्षात्मक स्वरूप का उल्लेख करते हुए “नमः शिवाय” के साथ समाप्त होता है। इस प्रकार, संपूर्ण स्तोत्र एक दिव्य माला के समान, शिव के नामस्मरण को भक्त के हृदय में निरंतर स्थापित करता है।

स्तोत्र के आरंभ में, शिव को गुणों का सागर, लोकों को प्रकाश देने वाले, पाप के अंधकार को दूर करने वाले और अज्ञान के तिमिर का नाश करने वाले के रूप में वर्णित किया गया है। भयभीत बालक और वृद्धों के रक्षक, दुष्ट दक्ष के अहंकार को भस्म करने वाले, काल के भी काल, दया के सागर – इन विशेषणों से शिव के सर्व-रक्षकत्व की महिमा की गई है। अगले श्लोकों में, शिव को धर्म का संरक्षक, अष्टमूर्ति स्वरूप, पापों को नष्ट करने वाले दिव्य सिंधुमूर्ति, और शापों को दूर करने वाले के रूप में बताया गया है। उन्हें व्योमकेश (आकाश-केश वाले), पापों को भस्म करने वाले, वैदिक पद्धतियों के प्रतिपादक, कामदेव को नष्ट करने वाले, शुद्ध कर्मों के कर्ता, चिन्मय स्वरूप और योगियों के ईश्वर के रूप में विस्तृत किया गया है।

स्तोत्र आगे बढ़ते हुए, भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले शिव के अनुग्रह, पापों को जलाने वाले दिव्य ज्योति स्वरूप, और यक्ष, देव, ऋषि, मनुष्य, पशु, पक्षी – समस्त जीवों के रक्षक के रूप में शिव के समग्र वैभव का प्रतिपादन करता है। शिव आपदाओं को भेदने वाले, पापों को हरने वाले और शाप-दोषों का खंडन करने वाले हैं। यह स्तोत्र बताता है कि उनके नाम मात्र के स्मरण से ही सभी पाप भस्म हो जाते हैं और वे केवल उन्हीं शुद्ध हृदय वालों को प्राप्त होते हैं जो केवल उन्हीं की कामना करते हैं।

अंतिम श्लोकों में, शिव के अनंत दयालु गुण, सत्सेवकों की रक्षा, कष्टों का निवारण, पापों का क्षय, जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति, भक्तों के संकटों का हरण, और भक्ति के प्रतिफल के रूप में भोग एवं मोक्ष प्रदान करने की शक्ति – इन सभी का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस स्तोत्र का पाठ पंचाक्षर मंत्र को हृदय में तारों जैसी रोशनी की तरह स्थापित करता है। यह भक्त को शिव की शरण में पूर्णतः समर्पित करता है और शिव की परम कृपा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है।

लाभ (Benefits):

  • पाप क्षय और दोष निवारण: इस स्तोत्र के नियमित पाठ से संचित पापों का नाश होता है और सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है।
  • कष्ट नाशन और भय मुक्ति: शिव को आपदाओं का निवारण करने वाला माना जाता है, अतः स्तोत्र पाठ से जीवन के कष्ट, बाधाएं दूर होती हैं और भय से मुक्ति मिलती है।
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा: रोगों से मुक्ति, शत्रुओं से रक्षा और मानसिक शांति प्राप्त होती है, तथा शिव का रक्षा कवच सदैव बना रहता है।
  • धन और समृद्धि: भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करने वाले शिव के अनुग्रह से धन, सुख, समृद्धि और परिवार में शांति बनी रहती है।
  • मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति: पंचाक्षर मंत्र की महिमा का गुणगान करने वाला यह स्तोत्र शिव के सामीप्य को प्रदान करता है और अंततः मोक्ष के मार्ग को सुगम बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री शिव पंचाक्षर नक्षत्रमाला स्तोत्रं क्या है?
यह आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक स्तोत्र है, जो पंचाक्षर मंत्र 'नमः शिवाय' की महिमा को शिव के विभिन्न रूपों और गुणों के साथ नक्षत्रों की माला की तरह वर्णित करता है। प्रत्येक श्लोक 'नमः शिवाय' के साथ समाप्त होता है।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर में या घर के पूजा कक्ष में किया जा सकता है। सोमवार, प्रदोष काल और शिवरात्रि के दौरान इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
श्री शिव पंचाक्षर नक्षत्रमाला स्तोत्रं के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से पापों का क्षय, कष्टों का निवारण, भय से मुक्ति, स्वास्थ्य लाभ, धन की प्राप्ति और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह शिव की पूर्ण कृपा प्रदान करता है।
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
कोई भी व्यक्ति, लिंग या आयु का भेद किए बिना, जो शिव में श्रद्धा रखता है, इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है। विशेष रूप से शिव की कृपा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति चाहने वालों के लिए यह उपयुक्त है।
इस स्तोत्र का कितनी बार पाठ करना चाहिए?
कम से कम एक बार पूर्ण पाठ करना उत्तम है। यदि समय हो तो 3, 5, 11 या 108 बार भी पाठ किया जा सकता है। नियमित रूप से भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करना महत्वपूर्ण है।
इस स्तोत्र का मूल या रचयिता कौन हैं?
इस पवित्र स्तोत्र की रचना अद्वैत सिद्धांत के प्रतिपादक श्री आदि शंकराचार्य ने की है। यह शिव के पंचाक्षर मंत्र की महिमा को गौरवान्वित करने वाली एक सुंदर कृति है।

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