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श्री महालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावली

संपादन: अद्यतन
लक्ष्मी देवी
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  ॥ श्रियै नमः ॥

             अशेषजगदीशित्रि अकिंचन मनोहरे ।
             अकारादिक्षकारांत नामभिः पूजयाम्यहं ॥

             सर्वमंगलमांगल्ये सर्वाभीष्टफलप्रदे ।
             त्वयैवप्रेरितो देवि अर्चनां करवाण्यहं ॥

             सर्व मंगलसंस्कारसंभृतां परमां शुभां ।
             हरिद्राचूर्ण संपन्नां अर्चनां स्वीकुरु स्वयं ॥

ॐ अकारलक्ष्म्यै नमः । ॐ अच्युतलक्ष्म्यै नमः । ॐ अन्नलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ अनंतलक्ष्म्यै नमः । ॐ अनुग्रहलक्ष्म्यै नमः । ॐ अमरलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ अमृतलक्ष्म्यै नमः । ॐ अमोघलक्ष्म्यै नमः । ॐ अष्टलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ अक्षरलक्ष्म्यै नमः । ॐ आत्मलक्ष्म्यै नमः । ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ आनंदलक्ष्म्यै नमः । ॐ आर्द्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ आरोग्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ इच्छालक्ष्म्यै नमः । ॐ इभलक्ष्म्यै नमः । ॐ इंदुलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ इष्टलक्ष्म्यै नमः । ॐ ईडितलक्ष्म्यै नमः । ॐ उकारलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ उत्तमलक्ष्म्यै नमः । ॐ उद्यानलक्ष्म्यै नमः । ॐ उद्योगलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ उमालक्ष्म्यै नमः । ॐ ऊर्जालक्ष्म्यै नमः । ॐ ऋद्धिलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ एकांतलक्ष्म्यै नमः । ॐ ऐश्वर्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ ओंकारलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ औदार्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ औषधिलक्ष्म्यै नमः । ॐ कनकलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ कलालक्ष्म्यै नमः । ॐ कांतालक्ष्म्यै नमः । ॐ कांतिलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ कीर्तिलक्ष्म्यै नमः । ॐ कुटुंबलक्ष्म्यै नमः । ॐ कोशलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ कौतुकलक्ष्म्यै नमः । ॐ ख्यातिलक्ष्म्यै नमः । ॐ गजलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ गानलक्ष्म्यै नमः । ॐ गुणलक्ष्म्यै नमः । ॐ गृहलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ गोलक्ष्म्यै नमः । ॐ गोत्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ गोदालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ गोपलक्ष्म्यै नमः । ॐ गोविंदलक्ष्म्यै नमः । ॐ चंपकलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ छंदोलक्ष्म्यै नमः । ॐ जनकलक्ष्म्यै नमः । ॐ जयलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ जीवलक्ष्म्यै नमः । ॐ तारकलक्ष्म्यै नमः । ॐ तीर्थलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ तेजोलक्ष्म्यै नमः । ॐ दयालक्ष्म्यै नमः । ॐ दिव्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ दीपलक्ष्म्यै नमः । ॐ दुर्गालक्ष्म्यै नमः । ॐ द्वारलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ धनलक्ष्म्यै नमः । ॐ धर्मलक्ष्म्यै नमः । ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ धीरलक्ष्म्यै नमः । ॐ धृतिलक्ष्म्यै नमः । ॐ धैर्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ ध्वजलक्ष्म्यै नमः । ॐ नागलक्ष्म्यै नमः । ॐ नादलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ नाट्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ नित्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ पद्मलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ पूर्णलक्ष्म्यै नमः । ॐ प्रजालक्ष्म्यै नमः । ॐ प्रणवलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ प्रसन्नलक्ष्म्यै नमः । ॐ प्रसादलक्ष्म्यै नमः । ॐ प्रीतिलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ भद्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ भवनलक्ष्म्यै नमः । ॐ भव्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ भाग्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ भुवनलक्ष्म्यै नमः । ॐ भूतिलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ भूरिलक्ष्म्यै नमः । ॐ भूषणलक्ष्म्यै नमः । ॐ भोग्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ मकारलक्ष्म्यै नमः । ॐ मंत्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।
ॐ मान्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ मेधालक्ष्म्यै नमः । ॐ मोहनलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ मोक्षलक्ष्म्यै नमः । ॐ यंत्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ यज्ञलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ यागलक्ष्म्यै नमः । ॐ योगलक्ष्म्यै नमः । ॐ योगक्षेमलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ रंगलक्ष्म्यै नमः । ॐ रक्षालक्ष्म्यै नमः । ॐ राजलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ लावण्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ लीलालक्ष्म्यै नमः । ॐ वरलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ वरदलक्ष्म्यै नमः । ॐ वराहलक्ष्म्यै नमः । ॐ वसंतलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ वसुलक्ष्म्यै नमः । ॐ वारलक्ष्म्यै नमः । ॐ वाहनलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ वित्तलक्ष्म्यै नमः । ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः । ॐ वीरलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ वेदलक्ष्म्यै नमः । ॐ वेत्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ व्योमलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ शांतलक्ष्म्यै नमः । ॐ शुभलक्ष्म्यै नमः । ॐ शुभ्रलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ सत्यलक्ष्म्यै नमः । ॐ संतानलक्ष्म्यै नमः । ॐ सिद्धलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ सिद्धिलक्ष्म्यै नमः । ॐ सूत्रलक्ष्म्यै नमः । ॐ सौम्यलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ हेमाब्जलक्ष्म्यै नमः । ॐ हृदयलक्ष्म्यै नमः । ॐ क्षेत्रलक्ष्म्यै नमः ।
ॐ ज्ञानलक्ष्म्यै नमः । ॐ अकिंचिनाश्रयायै नमः ।

      ॐ दृष्टादृष्टफलप्रदायै नमः । सर्वाभीष्टफलप्रदायै नमः ।

      ॥ इति श्रीमहालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावलिः संपूर्णा ॥

अर्थ

श्री महालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावली एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है जो परम् पूजनीय देवी महालक्ष्मी की महिमा का गुणगान अक्षरों की माला के माध्यम से करता है। यह 'अ' से 'क्ष' तक के प्रत्येक अक्षर में देवी के विभिन्न स्वरूपों, गुणों और शक्तियों का वर्णन करता है। यह नामावली भक्तों को धन, स्वास्थ्य, ज्ञान और समस्त सौभाग्य प्रदान करने में सक्षम है, जिससे जीवन में समृद्धि और शांति आती है।

स्तोत्र के प्रारंभ में, समस्त जगत की स्वामिनी, मन को मोहित करने वाली और 'अ' से 'क्ष' तक के अक्षरों में प्रकट होने वाली श्री महालक्ष्मी देवी को प्रणाम किया जाता है। भक्त प्रार्थना करता है, "हे देवी! आप ही सभी मंगलकारी शक्तियों का स्रोत हैं, आप ही भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं। आपकी प्रेरणा से ही मैं यह अर्चना (पूजा) कर रहा हूँ। यह पवित्र और शुभ हल्दी चूर्ण (हरिद्राचूर्ण) से युक्त अर्चना आप स्वयं स्वीकार करें।" यह देवी की सर्वशक्तिमत्ता और भक्त के पूर्ण समर्पण को दर्शाता है, जहाँ पूजा का हर कार्य देवी की इच्छा से प्रेरित माना जाता है।

इस अक्षरमालिका नामावली में, श्री महालक्ष्मी देवी के अनेक रूपों का वर्णन अक्षरों के क्रम में किया गया है। 'अ' से 'क्ष' तक, उन्हें अनंतलक्ष्मी (अनंत समृद्धि), अमृतलक्ष्मी (अमरत्व), आरोग्यलक्ष्मी (उत्तम स्वास्थ्य), इष्टलक्ष्मी (इच्छित फल देने वाली), उमालक्ष्मी (पार्वती स्वरूपिणी), ऋद्धिलक्ष्मी (समृद्धि), ऐश्वर्यलक्ष्मी (ऐश्वर्य और वैभव), ओंकारलक्ष्मी (ओंकार स्वरूपिणी, सृष्टि की मूल ध्वनि), कनकलक्ष्मी (स्वर्ण), कीर्तिलक्ष्मी (यश), गृहलक्ष्मी (पारिवारिक सुख), धनलक्ष्मी (धन-संपत्ति), पद्मलक्ष्मी (कमल जैसी सुंदरता और पवित्रता), भाग्यलक्ष्मी (सौभाग्य), महालक्ष्मी (सर्वोच्च देवी), योगलक्ष्मी (योग और शांति), विजयलक्ष्मी (विजय), शांतलक्ष्मी (शांति), सौम्यलक्ष्मी (सौम्यता), हेमाब्जलक्ष्मी (स्वर्ण कमल जैसी) और ज्ञानलक्ष्मी (ज्ञान) के रूप में संबोधित किया गया है। प्रत्येक नाम देवी की एक विशिष्ट शक्ति, गुण या अनुग्रह को प्रकट करता है – चाहे वह धन प्राप्ति हो, स्वास्थ्य हो, ज्ञान हो या पारिवारिक सुख हो।

यह नामावली केवल अक्षरों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि देवी ही समस्त सृष्टि की मूलभूत शक्ति हैं। जिस प्रकार अक्षर ध्वनि और सृष्टि के प्रतीक हैं, उसी प्रकार महालक्ष्मी इस संपूर्ण ब्रह्मांड की सृष्टि, स्थिति और संहार की कारण हैं। स्तोत्र के अंत में पुनः देवी को प्रणाम किया जाता है, जो दृश्य और अदृश्य दोनों प्रकार के फल प्रदान करती हैं और सभी अभीष्ट इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं। वे भक्तों के जीवन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

"श्री महालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावली" 'अ' से 'क्ष' तक प्रत्येक अक्षर में महालक्ष्मी देवी की अनंत महिमा का गान करती है। इस स्तोत्र का भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करने से दरिद्रता दूर होती है और धन, धान्य, स्वास्थ्य, ज्ञान, शांति, ऐश्वर्य तथा समस्त सौभाग्य प्राप्त होते हैं। देवी का प्रत्येक नाम उनकी दिव्य शक्ति को दर्शाता है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है, जिससे जीवन में समग्र कल्याण सुनिश्चित होता है।

लाभ (Benefits):

  • समस्त सौभाग्य की प्राप्ति: इस नामावली के नियमित पाठ से महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे धन, धान्य, संपत्ति, स्वास्थ्य, संतान, कीर्ति आदि समस्त सौभाग्य प्राप्त होते हैं। यह जीवन में संपूर्ण समृद्धि लाता है।
  • दरिद्रता का निवारण: आर्थिक संकटों से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्तोत्र एक आशा की किरण है। देवी की कृपा से दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है, जिससे स्थिरता और सुरक्षा मिलती है।
  • उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति: "आरोग्यलक्ष्मी" के स्मरण से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, मन को शांति, स्थिरता और संतोष मिलता है, जिससे दैनिक जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।
  • ज्ञान और विजय की प्राप्ति: "ज्ञानलक्ष्मी" और "विजयलक्ष्मी" स्वरूपों का स्मरण करने से शिक्षा और व्यावसायिक क्षेत्रों में सफलता, ज्ञान में वृद्धि और सभी कार्यों में विजय प्राप्त होती है। यह बुद्धि और कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
  • पारिवारिक सुख और समृद्धि: "गृहलक्ष्मी" की आराधना परिवार में सामंजस्य, खुशी और समृद्धि लाती है, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम को बढ़ावा देती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री महालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावली क्या है?
श्री महालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावली देवी महालक्ष्मी के विभिन्न दिव्य नामों को 'अ' से 'क्ष' तक के अक्षरों के माध्यम से स्तुति करने वाला एक पवित्र स्तोत्र है। यह देवी के प्रत्येक रूप की शक्ति और गुणों का वर्णन करता है।
इस नामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस नामावली का पाठ प्रतिदिन सुबह या शाम को, विशेष रूप से शुक्रवार को, स्नान करके शुद्ध होकर, देवी के चित्र या प्रतिमा के सामने भक्ति और श्रद्धा से करना चाहिए। देवी को हल्दी, कुमकुम और पुष्प अर्पित कर पाठ करना उत्तम माना जाता है।
श्री महालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावली के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस नामावली के पाठ से धन, धान्य, स्वास्थ्य, ज्ञान और समस्त सौभाग्य प्राप्त होते हैं। यह दरिद्रता को दूर करता है, मानसिक शांति प्रदान करता है और परिवार में समृद्धि लाता है।
इस नामावली का पाठ कौन कर सकता है?
महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला कोई भी भक्त, बिना किसी लिंग भेद के, शुद्ध मन से इस नामावली का पाठ कर सकता है। विशेष रूप से आर्थिक समस्याओं, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों या मानसिक अशांति से जूझ रहे लोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।
इस नामावली का कितनी बार पाठ करना चाहिए?
सामान्यतः, इस नामावली का पाठ प्रतिदिन कम से कम एक बार करना चाहिए। विशेष अवसरों पर या अधिक लाभ की इच्छा रखने वाले भक्त इसे 11, 21 या 108 बार भी पाठ कर सकते हैं।
इस नामावली का मूल क्या है?
श्री महालक्ष्मी अक्षरमालिका नामावली हिंदू धर्म के प्राचीन स्तोत्र साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह महालक्ष्मी की महिमा का गुणगान करने वाले वैदिक और पौराणिक ग्रंथों से प्रेरित है।

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