- ॐ शिवाय नमः
- ॐ महेश्वराय नमः
- ॐ शर्वाय नमः
- ॐ रुद्राय नमः
- ॐ विष्णवे नमः
- ॐ पितामहाय नमः
- ॐ सर्वभृते नमः
- ॐ दिव्यकैलास शिखरेंद्र निवासभुवे नमः
- ॐ अखंड बिल्वच्छदन प्रियाय नमः
- ॐ लूतार्ति मोचकाय नमः
- ॐ संसार वैद्याय नमः
- ॐ सर्वज्ञाय नमः
- ॐ परमात्माय नमः
- ॐ परात्पराय नमः
- ॐ काळेभांजव ध्वंसिने नमः
- ॐ सिताभ्र सलिलाप्लुताय नमः
- ॐ तेजोनिधये नमः
- ॐ जगद्योनये नमः
- ॐ दिव्यमंगळ विग्रहाय नमः
- ॐ अनेककोटि ब्रह्मांड पिंडीकरण पंडिताय नमः
- ॐ पंचब्रह्मतनवे नमः
- ॐ सर्वमंगळालंकृताकृतये नमः
- ॐ अनादि निधनाय नमः
- ॐ शंभवे नमः
- ॐ सच्चिदानंद रूपधृके नमः
- ॐ हिरण्यगर्भजनकाय नमः
- ॐ ज्ञान प्रसूनांबिकापतयेनमः
- ॐ मयूरार्ति प्रहर्ताय नमः
- ॐ राममोह निबर्हणायनमः
- ॐ वेदांत वेद्याय नमः
- ॐ कालात्माय नमः
- ॐ विचित्रबहु शक्तिमते नमः
- ॐ स्थिरधन्वाय नमः
- ॐ पशुपतये नमः
- ॐ सर्वतत्त्व प्रबोधकाय नमः
- ॐ शबराभयदाय नमः
- ॐ गौराय नमः
- ॐ शबरेक्षण पूजिताय नमः
- ॐ सुवर्णमुखरी तीरवासिने नमः
- ॐ विजयमुक्तिदाय नमः
- ॐ अगस्त्याय रमेशादि सुरोपास्यत्वदायकाय नमः
- ॐ वैदिकागम पीटस्थायनमः
- ॐ मणिजालार्चन प्रियाय नमः
- ॐ मणिकर्णाय नमः
- ॐ हरिब्रह्मादृष्टपाद शिराय नमः
- ॐ स्वभुवे नमः
- ॐ मृडाय नमः
- ॐ पंचाक्षराकाराय नमः
- ॐ दुर्गा हेमरुचि प्रदाय नमः
- ॐ अनंतकळ्याण गुणाय नमः
- ॐ नीलाकैवल्यकारणाय नमः
- ॐ लिंगोद्भवाय नमः
- ॐ विद्याराशये नमः
- ॐ विद्यापतये नमः
- ॐ अनामयाय नमः
- ॐ पंचाक्षराभिदेयाय नमः
- ॐ सुभगाशोक भंजनाय नमः
- ॐ चंद्रक्षय प्रहराय नमः
- ॐ अर्चमहापापाब्दि शोषकाय नमः
- ॐ आनंद तांडवकराय नमः
- ॐ सकलामरनायकाय नमः
- ॐ भर्गाय नमः
- ॐ दुर्गासमाराध्याय नमः
- ॐ शक्र प्रस्तुत वैभवायनमः
- ॐ नेताय नमः
- ॐ हरहरोद्धर्ताय नमः
- ॐ चक्रकिल्बिषमार्जकाय नमः
- ॐ स्कंद सर्वज्ञता हेतवे नमः
- ॐ पंचदाभिन्न मस्तकाय नमः
- ॐ लक्ष्मी विनुत वामांघ्रये नमः
- ॐ जपालाभक्ति गोचराय नमः
- ॐ मूकमृत्युंज यार्तिघ्नाय नमः
- ॐ वृद्ध ब्राह्मण वेषधृते नमः
- ॐ मायाशिव द्विजाकाराय नमः
- ॐ नारदामोद दायकाय नमः
- ॐ मार्कंडेय हृदंतस्थ महासंशय भेदकाय नमः
- ॐ सनत्कुमारकशुकपराशर सुपूजिताय नमः
- ॐ विज्ञात देवलोकोरुशक्तये नमः
- ॐ यक्षवपुर्धराय नमः
- ॐ सहस्रदेव संवंद्याय नमः
- ॐ भस्मोद्धूलितविग्रहाय नमः
- ॐ शुद्धविग्रहाय नमः
- ॐ नीलकंठ मलापनुदे नमः
- ॐ पद्मसेनक राजेंद्र कन्यायुगळ सेविताय नमः
- ॐ तुंगाय नमः
- ॐ उग्राय नमः
- ॐ रक्षित सारंगाय नमः
- ॐ भृत चक्रधर प्रभवेनमः
- ॐ धर्मासनाय नमः
- ॐ परगुणाभीप्सितार्थ प्रदायकाय नमः
- ॐ त्रयीमूर्तये नमः
- ॐ नित्याय नमः
- ॐ परशुहस्ताय नमः
- ॐ ब्रह्मपुरावासये नमः
- ॐ देवर्षि नगरासिकायनमः
- ॐ श्रीविष्णु नगरावासिने नमः
- ॐ अंधकासुरसूदनाय नमः
- ॐ गंगाधराय नमः
- ॐ श्रीमत्पांड्य पुरस्थिताय नमः
- ॐ भीमार्चिताय नमः
- ॐ पिताय नमः
- ॐ भर्ताय नमः
- ॐ भरद्वाज प्रपूजिताय नमः
- ॐ प्रसन्न काळहस्तीशाय नमः
- ॐ प्रभाद्योतित दिज्मुखाय नमः
- ॐ कुमारकाळहस्तीशायनमः
- ॐ गोविंदनय नार्चिताय नमः
- ॐ श्री काळहस्तीश्वराय नमः
|| इति श्री काळहस्तीश्वर अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री काळहस्तीश्वर अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान शिव के 108 पवित्र नामों का एक दिव्य संग्रह है। यह नामावलि आंध्र प्रदेश में स्थित श्रीकालहस्ती के वायु लिंग स्वरूप काळहस्तीश्वर की महिमा का गुणगान करती है। श्रीकालहस्ती पंचभूत स्थलों में से एक है और वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इस नामावलि का पाठ करने से भक्त भगवान शिव की दिव्य शक्ति से जुड़ सकते हैं और उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
इस अष्टोत्तर शतनामावलि का प्रत्येक नाम भगवान शिव के अनंत गुणों, शक्तियों और रूपों का वर्णन करता है। 'ॐ शिवाय नमः' मंगलकारी शिव को प्रणाम है, जबकि 'ॐ महेश्वराय नमः' महान ईश्वर को वंदन है। 'ॐ लूतार्ति मोचकाय नमः' और 'ॐ कालेभांजव ध्वंसिने नमः' जैसे नाम श्रीकालहस्ती के प्रसिद्ध किंवदंतियों की याद दिलाते हैं। मकड़ी (लूत), हाथी (काल) और सर्प (हस्ति) को शिव द्वारा मोक्ष प्रदान करने की कहानियाँ इस क्षेत्र के महत्व को उजागर करती हैं। 'ॐ मयूरार्ति प्रहर्ताय नमः' शिव की करुणा को दर्शाता है, जिन्होंने मोर के संकट को दूर किया। ये नाम इस बात के प्रमाण हैं कि भगवान अपने भक्तों के कष्टों को दूर करने वाले हैं।
'ॐ ज्ञान प्रसूनाम्बिकापतये नमः' नाम यह दर्शाता है कि शिव ज्ञान की देवी ज्ञान प्रसूनाम्बिका (पार्वती) के पति हैं, जो ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालता है। 'ॐ संसार वैद्य्याय नमः' का अर्थ है कि शिव संसार चक्र के रोगों के चिकित्सक हैं और मोक्ष प्रदान करने वाले हैं। 'ॐ सच्चिदानंद रूपधृके नमः' शिव के परम सत्य, चेतना और आनंद स्वरूप का वर्णन करता है। 'ॐ अखण्ड बिल्वच्छदन प्रियाय नमः' नाम बिल्व पत्रों को अर्पित करने के महत्व को बताता है, जो शिव को अत्यंत प्रिय है।
इस नामावलि का भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करने से मन शांत होता है, नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त करने में मदद मिलती है। यह केवल नामों का पाठ नहीं है, बल्कि शिव के दिव्य गुणों का ध्यान करने का एक तरीका है। शिव के नामों का स्मरण करने से भक्त दुखों से मुक्ति पाते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि तथा सफलता प्राप्त करते हैं।
लाभ (Benefits):
- मानसिक शांति और संतोष: शिव के नामों का पाठ करने से मन का तनाव कम होता है और आंतरिक शांति व संतोष प्राप्त होता है।
- कष्टों से मुक्ति: भगवान शिव कष्टों को हरने वाले हैं, और इस नामावलि के पाठ से जीवन में आने वाली बाधाएं और कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
- आध्यात्मिक उन्नति: शिव के दिव्य गुणों का ध्यान करने से आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मज्ञान में वृद्धि होती है।
- मनोकामना पूर्ति: भक्ति और श्रद्धा के साथ पाठ करने पर, भक्तों की सद्भावना से भरी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- सुरक्षा और स्वास्थ्य: यह नामावलि नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करती है और उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु का आशीर्वाद देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री काळहस्तीश्वर अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री काळहस्तीश्वर अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इस नामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस नामावलि का उद्गम या स्रोत क्या है?
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