सुनते हुए पाठ करें
ऑडियो चलाएँ और नीचे दिए स्तोत्र पाठ को पढ़ते हुए पाठ करें।
- ॐ अरुणाय नमः
- ॐ शरण्याय नमः
- ॐ करुणारससिन्धवे नमः
- ॐ असमानबलाय नमः
- ॐ आर्तरक्षकाय नमः
- ॐ आदित्याय नमः
- ॐ आदिभूताय नमः
- ॐ अखिलागमवेदिने नमः
- ॐ अच्युताय नमः
- ॐ अखिलज्ञाय नमः
- ॐ अनन्ताय नमः
- ॐ इनाय नमः
- ॐ विश्वरूपाय नमः
- ॐ इज्याय नमः
- ॐ इन्द्राय नमः
- ॐ भानवे नमः
- ॐ इन्दिरामन्दिराप्ताय नमः
- ॐ वन्दनीयाय नमः
- ॐ ईशाय नमः
- ॐ सुप्रसन्नाय नमः
- ॐ सुशीलाय नमः
- ॐ सुवर्चसे नमः
- ॐ वसुप्रदाय नमः
- ॐ वसवे नमः
- ॐ वासुदेवाय नमः
- ॐ उज्ज्वलाय नमः
- ॐ उग्ररूपाय नमः
- ॐ ऊर्ध्वगाय नमः
- ॐ विवस्वते नमः
- ॐ उद्यत्किरणजालाय नमः
- ॐ हृषीकेशाय नमः
- ॐ ऊर्जस्वलाय नमः
- ॐ वीराय नमः
- ॐ निर्जराय नमः
- ॐ जयाय नमः
- ॐ ऊरुद्वयाभावरूपयुक्तसारथये नमः
- ॐ ऋषिवन्द्याय नमः
- ॐ रुग्घन्त्रे नमः
- ॐ ऋक्षचक्रचराय नमः
- ॐ ऋजुस्वभावचित्ताय नमः
- ॐ नित्यस्तुत्याय नमः
- ॐ ऋकारमातृकावर्णरूपाय नमः
- ॐ उज्ज्वलतेजसे नमः
- ॐ ऋक्षाधिनाथमित्राय नमः
- ॐ पुष्कराक्षाय नमः
- ॐ लुप्तदन्ताय नमः
- ॐ शान्ताय नमः
- ॐ कान्तिदाय नमः
- ॐ घनाय नमः
- ॐ कनत्कनकभूषाय नमः
- ॐ खद्योताय नमः
- ॐ लूनिताखिलदैत्याय नमः
- ॐ सत्यानन्दस्वरूपिणे नमः
- ॐ अपवर्गप्रदाय नमः
- ॐ आर्तशरण्याय नमः
- ॐ एकाकिने नमः
- ॐ भगवते नमः
- ॐ सृष्टिस्थित्यन्तकारिणे नमः
- ॐ गुणात्मने नमः
- ॐ घृणिभृते नमः
- ॐ बृहते नमः
- ॐ ब्रह्मणे नमः
- ॐ ऐश्वर्यदाय नमः
- ॐ शर्वाय नमः
- ॐ हरिदश्वाय नमः
- ॐ शौरये नमः
- ॐ दशदिक्सम्प्रकाशाय नमः
- ॐ भक्तवश्याय नमः
- ॐ ओजस्कराय नमः
- ॐ जयिने नमः
- ॐ जगदानन्दहेतवे नमः
- ॐ जन्ममृत्युजराव्याधिवर्जिताय नमः
- ॐ उच्चस्थान समारूढरथस्थाय नमः
- ॐ असुरारये नमः
- ॐ कमनीयकराय नमः
- ॐ अब्जवल्लभाय नमः
- ॐ अन्तर्बहिः प्रकाशाय नमः
- ॐ अचिन्त्याय नमः
- ॐ आत्मरूपिणे नमः
- ॐ अच्युताय नमः
- ॐ अमरेशाय नमः
- ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः
- ॐ अहस्कराय नमः
- ॐ रवये नमः
- ॐ हरये नमः
- ॐ परमात्मने नमः
- ॐ तरुणाय नमः
- ॐ वरेण्याय नमः
- ॐ ग्रहाणांपतये नमः
- ॐ भास्कराय नमः
- ॐ आदिमध्यान्तरहिताय नमः
- ॐ सौख्यप्रदाय नमः
- ॐ सकलजगतांपतये नमः
- ॐ सूर्याय नमः
- ॐ कवये नमः
- ॐ नारायणाय नमः
- ॐ परेशाय नमः
- ॐ तेजोरूपाय नमः
- ॐ श्रीं हिरण्यगर्भाय नमः
- ॐ ह्रीं सम्पत्कराय नमः
- ॐ ऐं इष्टार्थदायनमः
- ॐ अनुप्रसन्नाय नमः
- ॐ श्रीमते नमः
- ॐ श्रेयसेनमः
- ॐ भक्तकोटिसौख्यप्रदायिने नमः
- ॐ निखिलागमवेद्याय नमः
- ॐ नित्यानन्दाय नमः
- ॐ सूर्याय नमः
|| इति सूर्य अष्टोत्तरशतनामावलिः संपूर्णं ||
अर्थ
श्री सूर्य अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान सूर्यदेव को समर्पित 108 पवित्र नामों का एक स्तोत्र है। हिंदू धर्म में, सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है, क्योंकि वे सभी जीवित प्राणियों को जीवन शक्ति, स्वास्थ्य, तेज और ज्ञान प्रदान करते हैं। इस नामावलि के माध्यम से सूर्यदेव की स्तुति की जाती है और उनके अनंत गुणों का बखान किया जाता है। यह स्तोत्र वैदिक काल से ही अस्तित्व में है और सूर्य उपासना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सूर्य को नवग्रहों में प्रमुख माना जाता है, और उनकी कृपा जीवन में सफलता, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लाती है।
इस नामावलि का पाठ केवल शब्दों की पुनरावृत्ति नहीं है, बल्कि यह भक्तों के लिए सूर्यदेव की दिव्य शक्ति और गुणों के साथ जुड़ने का एक उत्कृष्ट आध्यात्मिक साधन है। प्रत्येक नाम सूर्य के एक भिन्न आयाम, गुण या शक्ति का वर्णन करता है। इसे भक्तिपूर्वक जपने से मन शुद्ध होता है, नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं और सकारात्मक कंपन बढ़ते हैं। यह आंतरिक शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उत्थान का कारण बनता है। सूर्य की शक्ति अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करती है, जिससे भक्त सही मार्ग पर चल पाते हैं।
इस नामावलि में सूर्य को 'ॐ अरुणाय नमः' (लाल वर्ण वाले), 'ॐ शरण्यय नमः' (शरण देने वाले), 'ॐ करुणारससिंधवे नमः' (करुणा के सागर), 'ॐ असमानबलाय नमः' (अतुलनीय बलशाली), 'ॐ आर्तरक्षकय नमः' (दुखियों के रक्षक), 'ॐ आदित्याय नमः' (अदिति के पुत्र), 'ॐ विश्वस्वरूपाय नमः' (संपूर्ण विश्व जिनका रूप है), 'ॐ भानवे नमः' (प्रकाशमान), 'ॐ ईशाय नमः' (समस्त के स्वामी), 'ॐ सुप्रसन्नय नमः' (सदा प्रसन्न रहने वाले), 'ॐ वसुप्रदाय नमः' (धन प्रदान करने वाले) जैसे अनेक विशेषणों से स्तुति की जाती है। इनमें से प्रत्येक नाम सूर्य की अनंत शक्ति, दया, रक्षकत्व, ज्ञान और सृष्टिकर्ता के गुणों को उजागर करता है। ये नाम यह भी बताते हैं कि सूर्य केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि परब्रह्म का स्वरूप हैं। वे समस्त विश्व को जीवन, रक्षा और पोषण प्रदान करने वाली परम शक्ति हैं, यह नामावलि स्पष्ट करती है।
लाभ (Benefits):
- स्वास्थ्य और दीर्घायु: सूर्य की ऊर्जा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। सूर्य की उपासना से त्वचा संबंधी रोग, नेत्र संबंधी समस्याएं और अन्य शारीरिक कष्ट कम होते हैं, ऐसा माना जाता है।
- ज्ञान और बुद्धि: सूर्य ज्ञान और बुद्धि के अधिष्ठाता हैं। इस नामावलि का पाठ करने से ज्ञान में वृद्धि होती है, एकाग्रता बढ़ती है और सही निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है। छात्रों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है।
- समृद्धि और सफलता: सूर्य के आशीर्वाद से जीवन में समृद्धि, धन और सफलता प्राप्त होती है। बाधाएं दूर होती हैं और सभी कार्यों में विजय मिलती है, जिससे आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है।
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश: सूर्य का तेज नकारात्मक शक्तियों, बुरी शक्तियों के प्रभाव को दूर करता है और सकारात्मक वातावरण बनाता है। घर में शांति और सद्भाव का वास होता है।
- आत्मविश्वास और साहस: सूर्य आत्मविश्वास, साहस और नेतृत्व के प्रतीक हैं। इस स्तोत्र का पाठ मन में साहस भरता है, आत्मविश्वास को बढ़ाता है और चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री सूर्य अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
श्री सूर्य अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ कब करना चाहिए?
इस नामावलि के पाठ से क्या प्रमुख लाभ प्राप्त होते हैं?
श्री सूर्य अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना उत्तम है?
श्री सूर्य अष्टोत्तर शतनामावलि का मूल स्रोत क्या है?
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