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श्री शारदा दशकं

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स्तोत्र
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श्री शारदा दशकं

करवाणि वाणि किं वा
जगति प्रचयाय धर्ममार्गस्य |
कथयाशु तत्करोम्यह-
-महर्निशं तत्र मा कृथा विशयं || 1 ||

गणनां विधाय मत्कृत-
-पापानां किं धृताक्षमालिकया |
तांताद्याप्यसमाप्ते-
-र्निश्चलतां पाणिपंकजे धत्से || 2 ||

विविधाशया मदीयं
निकटं दूराज्जनाः समायांति |
तेषां तस्याः कथमिव
पूरणमहमंब सत्वरं कुर्यां || 3 ||

गतिजितमरालगर्वां
मतिदानधुरंधरां प्रणम्रेभ्यः |
यतिनाथसेवितपदा-
-मतिभक्त्या नौमि शारदां सदयां || 4 ||

जगदंबां नगतनुजा-
-धवसहजां जातरूपतनुवल्लीं |
नीलेंदीवरनयनां
बालेंदुकचां नमामि विधिजायां || 5 ||

भारो भारति न स्या-
-द्वसुधायास्तद्वदंब कुरु शीघ्रं |
नास्तिकतानास्तिकता-
-करणात्कारुण्यदुग्धवाराशे || 6 ||

निकटे वसंतमनिशं
पक्षिणमपि पालयामि करतोऽहं |
किमु भक्तियुक्तलोका-
-निति बोधार्थं करे शुकं धत्से || 7 ||

शृंगाद्रिस्थितजनता-
-मनेकरोगैरुपद्रुतां वाणि |
विनिवार्य सकलरोगान्
पालय करुणार्द्रदृष्टिपातेन || 8 ||

मद्विरहादतिभीतान्
मदेकशरणानतीव दुःखार्तान् |
मयि यदि करुणा तव भो
पालय शृंगाद्रिवासिनो लोकान् || 9 ||

सदनमहेतुकृपाया
रदनविनिर्धूतकुंदगर्वालिं |
मदनरिपुसहोत्थां
सरसिजभवभामिनीं हृदा कलये || 10 ||

इति श्रीसच्चिदानंदशिवाभिनवनृसिंहभारतीस्वामिभिः विरचितं श्री शारदा दशकं ||

अर्थ

श्री शारदा दशकं श्रृंगेरी श्री शारदाम्बा की महिमा का गुणगान करने वाला एक अत्यंत भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। इसकी रचना श्रृंगेरी शारदा पीठ के 33वें जगद्गुरु, श्री सच्चिदानंद शिवाभिनव नृसिंह भारती स्वामीजी ने की है। यह दशकं दस श्लोकों का संग्रह है, जिसमें भक्त अपनी वाणी की शुद्धि, पापों के निवारण, लोक कल्याण और सभी कष्टों से मुक्ति के लिए माँ शारदा से प्रार्थना करते हैं। यह ज्ञान, वाणी और करुणा की देवी शारदाम्बा को समर्पित एक हृदयस्पर्शी नमन है।

इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक भक्त की गहरी भक्ति और माँ शारदा में अटूट विश्वास को दर्शाता है। भगवती की दिव्य शक्ति का आह्वान करते हुए, भक्त अपनी इंद्रियों, विशेष रूप से वाणी की शक्ति को धर्म के मार्ग पर लगाने की इच्छा व्यक्त करता है। इसमें केवल पापों की गणना करने, यानी केवल बाहरी अनुष्ठानों से अधिक, माँ की सेवा में अपने हाथों को स्थिर करके पापों को पूरी तरह से नष्ट करने के आंतरिक शुद्धिकरण के महत्व पर जोर दिया गया है। यह स्तोत्र यह भी बताता है कि माँ शारदा केवल ज्ञान की देवी नहीं हैं, बल्कि सभी प्राणियों के दुखों को दूर करने वाली करुणा स्वरूपिणी भी हैं।

इस दशकं में, भक्त प्रार्थना करता है कि उसकी वाणी हमेशा धर्म के मार्ग को प्रकाशित करे और सांसारिक इच्छाओं से मुक्त रहे (श्लोक 1)। वह अपनी जपामाला से पापों की गिनती करने के बजाय, माँ की सेवा में अपने हाथों को स्थिर करके पापों को पूरी तरह से नष्ट करने का अनुरोध करता है (श्लोक 2)। वह माँ शारदा से सहायता मांगता है ताकि वह उन लोगों की इच्छाओं को तुरंत पूरा कर सके जो उससे अपनी आशाओं के साथ आते हैं (श्लोक 3)। वह हंस के समान सुंदर गति वाली, यतियों द्वारा पूजित, करुणामयी शारदा देवी को भक्तिपूर्वक नमन करता है (श्लोक 4)। वह जगदम्बा, पार्वती की सहजा स्वरूपा, स्वर्णवर्णी, नीले कमल के समान नेत्रों वाली और चंद्रमा के समान केशों वाली सरस्वती देवी को प्रणाम करता है (श्लोक 5)। वह प्रार्थना करता है कि जब धर्म का पतन हो और नास्तिकता बढ़े, तब करुणा के सागर माँ, इस संसार की रक्षा करें और ज्ञान के प्रकाश को पुनः स्थापित करें (श्लोक 6)। हाथ में तोता धारण करना यह दर्शाता है कि "यदि मैं एक साधारण पक्षी की रक्षा करती हूँ, तो अपने भक्तों की कितनी अधिक रक्षा करूँगी" (श्लोक 7)। वह प्रार्थना करता है कि श्रृंगेरी क्षेत्र के लोग अनेक रोगों से पीड़ित हैं; माँ अपनी करुणा दृष्टि से उनके सभी कष्टों को दूर करें (श्लोक 8)। वह उन भक्तों की रक्षा के लिए प्रार्थना करता है जो भय और दुःख में कांपते हुए माँ से दूर हो गए हैं (श्लोक 9)। वह प्रार्थना करता है कि करुणा की सागर माँ, जिनके दांतों की चमक कुंद पुष्प को भी मात देती है, विष्णु पत्नी सरस्वती के रूप में, परम सौंदर्य के साथ, मेरे हृदय में नित्य निवास करें (श्लोक 10)।

कुल मिलाकर, यह श्री शारदा दशकं भक्त के पूर्ण समर्पण और माँ की अनंत करुणा को उजागर करता है। यह केवल एक स्तोत्र नहीं है, बल्कि भक्त की आंतरिक प्रार्थना है, जो माँ शारदा की दिव्य शक्ति और अनुग्रह से सिद्ध होती है, ऐसा विश्वास है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को ज्ञान, शांति, समृद्धि और सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है, ऐसी मान्यता है।

लाभ (Benefits):

  • वाणी की शुद्धि और ज्ञान में वृद्धि: माँ शारदा वाणी और ज्ञान की देवी हैं, इसलिए इस स्तोत्र का पाठ भक्तों को स्पष्ट वाणी और गहरी समझ प्रदान करता है।
  • पाप निवारण और मानसिक शांति: पापों से मुक्ति पाने और मन की शांति के लिए यह स्तोत्र अत्यंत प्रभावी माना जाता है। यह भक्त के आंतरिक शुद्धिकरण में सहायक है।
  • इच्छाओं की पूर्ति: माँ शारदा भक्तों की सभी नेक इच्छाओं और न्यायसंगत आकांक्षाओं को पूरा करने का आशीर्वाद देती हैं, जिससे जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
  • रोग निवारण और सुरक्षा: श्रृंगेरी के लोगों के रोगों को दूर करने की प्रार्थना के समान, यह स्तोत्र भक्तों को शारीरिक और मानसिक बीमारियों से मुक्ति दिलाता है और सभी विपत्तियों से रक्षा करता है।
  • समग्र कल्याण: धर्म की रक्षा, नास्तिकता के निवारण और लोक कल्याण के लिए प्रार्थना करने से, पाठ करने वाले के जीवन में समग्र शुभता आती है और आध्यात्मिक उन्नति में सहायता मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री शारदा दशकं क्या है?
श्री शारदा दशकं श्रृंगेरी की देवी शारदाम्बा की स्तुति में दस श्लोकों का एक भक्तिमय भजन है। इसकी रचना श्रृंगेरी शारदा पीठ के 33वें जगद्गुरु, श्री सच्चिदानंद शिवाभिनव नृसिंह भारती स्वामीजी ने की थी।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इसका पाठ प्रतिदिन, विशेषकर सुबह के समय, या सरस्वती पूजा, नवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर किया जा सकता है। ज्ञान, वाणी की स्पष्टता या दिव्य सुरक्षा प्राप्त करने के लिए इसे भक्ति और एकाग्रता के साथ पढ़ें।
श्री शारदा दशकं का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इस स्तोत्र का पाठ वाणी की शुद्धि प्रदान करता है, ज्ञान बढ़ाता है, पापों के निवारण में मदद करता है, नेक इच्छाओं को पूरा करता है, रोगों और भय से सुरक्षा प्रदान करता है, और समग्र कल्याण तथा आध्यात्मिक शांति लाता है।
श्री शारदा दशकं का पाठ कौन कर सकता है?
कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी उम्र, लिंग या पृष्ठभूमि कुछ भी हो, जो देवी शारदाम्बा में विश्वास रखता है और ज्ञान, बुद्धि तथा सुरक्षा के लिए उनके आशीर्वाद की कामना करता है, इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है।
इसका पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्य लाभों के लिए, इसे प्रतिदिन एक बार पढ़ना पर्याप्त है। विशिष्ट उद्देश्यों के लिए या आध्यात्मिक अभ्यासों के दौरान, कोई अपनी भक्ति और समय की उपलब्धता के आधार पर इसे 3, 11, 21, या 108 बार पढ़ सकता है।
श्री शारदा दशकं का उद्गम या स्रोत क्या है?
श्री शारदा दशकं की रचना जगद्गुरु श्री सच्चिदानंद शिवाभिनव नृसिंह भारती स्वामीजी ने की थी, जो श्रृंगेरी शारदा पीठ के सबसे पूज्य जगद्गुरुओं में से एक थे और अपनी गहरी भक्ति तथा साहित्यिक योगदानों के लिए जाने जाते हैं।

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